Monday, June 22, 2026
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और कितना झूंठ बोलोगे डोनाल्ड ट्रंप, 38 बार बोल चुके ईरान से डील डन, मगर नहीं हुई

नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विभिन्न ऑडियंस के लिए अलग-अलग संदेश दे रहे हैं। उनका यह रणनीतिक तरीका पेट्रोलियम बाजार को स्थिर रखने के साथ-साथ ईरान पर निरंतर दबाव बनाए रखने का माध्यम है। इसे समझने की जरूरत है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मार्च महीने से लगातार ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने वाले समझौते की घोषणा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अब तक कम से कम 38 बार ऐसा दावा किया है, लेकिन हर बार कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद 23 मार्च को एयर फोर्स वन में ट्रंप ने कहा था, ‘मेजर पॉइंट्स ऑफ एग्रीमेंट हो चुके हैं।’ मगर ईरान ने तुरंत इन वार्ताओं से इनकार कर दिया। इसके बाद ट्रंप के बयान और आक्रामक होते गए।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को डील करने के लिए बेताब बताया और चेतावनी दी कि अगर डील नहीं हुई तो ईरान के पावर प्लांट्स को नष्ट कर दिया जाएगा। यह पैटर्न अप्रैल और मई में भी जारी रहा, जहां ट्रंप ने कई बार बहुत करीब या अगले एक-दो दिन में डील होने का दावा किया।

7 अप्रैल को ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा की और कहा कि दोनों पक्ष बहुत आगे बढ़ चुके हैं, बस दो हफ्ते में एग्रीमेंट फाइनल हो जाएगा। लेकिन कोई फाइनल डील नहीं हुई। 15-17 अप्रैल के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान सब कुछ मान चुका है और डील बहुत अच्छी लग रही है। 7 मई तक ट्रंप का कहना था कि डील किसी भी दिन हो सकती है।

जानकारों का मानना है कि ट्रंप अलग-अलग ऑडियंस को अलग मैसेज दे रहे हैं। पेट्रोलियम मार्केट को शांत रखने और ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

11 जून को ट्रंप ने प्लान्ड स्ट्राइक्स रद्द करने और ग्रेट सेटलमेंट की बात कही, यहां तक कि यूरोप में वीकेंड पर साइनिंग का दावा किया, जिसमें वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को गलत बताया और कहा कि कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है। अमेरिका की अत्यधिक मांगों और नई शर्तों का जिक्र किया गया।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मध्यस्थता कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर फाइनल एग्रीड टेक्स्ट पहुंचने की बात कही, लेकिन शुक्रवार तक कोई साइनिंग नहीं हुई। ट्रंप का लेटेस्ट दावा वीकेंड या सोमवार तक डील का था, जो 38वें या 39वें असफल भविष्यवाणी के रूप में गिना जा सकता है।

इस पूरे मामले में इंसाइडर ट्रेडिंग के संदेह भी उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के ऐलानों से पहले ऑयल और स्टॉक फ्यूचर्स में बड़े पैमाने पर शॉर्ट बेट्स लगाए गए, जिससे कुछ ट्रेडर्स को करोड़ों का फायदा हुआ।

Agricultural: भारत में जीरो एग्रीकल्चर ग्रोथ का खतरा, अर्थशास्त्रियों ने दी चेतावनी

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नई दिल्‍ली। Agricultural Growth:अल नीनो को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच 2026-27 में एग्रीकल्चर GDP या तो स्थिर रहेगी या थोड़ी कम हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि किसानों ने पहले ही ज्‍यादा पानी और ज्‍यादा कमाई वाली फसलों की जगह कम पानी की जरूरत वाली, लेकिन कम कमाई देने वाली फसलों (जैसे बाजरा, ज्वार और मूंग) की खेती करने की योजना बना ली है।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर और एग्रीकल्चरल कॉस्ट्स एंड प्राइसेस कमीशन के पूर्व चेयरमैन अशोक गुलाटी ने इसे लेकर चेतावनी दी है। उन्‍होंने कहा, ‘बारिश कब और कहां कितनी होती है, इस आधार पर एग्रीकल्चर-GDP ग्रोथ लगभग जीरो या नेगेटिव भी हो सकती है।’

गुलाटी ने कहा, ‘IMD ने मजबूत अल नीनो का अनुमान लगाया है। बारिश के ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) का 90% रहने की संभावना है। इसलिए खेती के लिए यह साल काफी बुरा रहने वाला है। जाहिर है, उन किसानों के लिए भी जिनकी ज्‍यादातर कमाई खेती से होती है।’

गुलाटी को चिंता है कि 2026 का साल सूखे जैसे हालात वाला हो सकता है। वह बोले, ‘इससे निश्चित रूप से किसानों की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा। पूरी अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था खपत का एक अहम ड्राइवर है। यह ज्‍यादातर कंज्यूमर गुड्स की बिक्री का 30-40% हिस्सा है।

किसानों की आय दोगुनी करने वाली समिति के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान में कर्नाटक एग्रीकल्चरल प्राइस कमीशन के चेयरमैन अशोक दलवाई ने कहा कि कोर मॉनसून जोन में अनुमानित 94% बारिश से सोयाबीन, अरहर, उड़द और कपास जैसी फसलों में नमी की भारी कमी (मॉइस्चर स्ट्रेस) हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘लंबे समय तक सूखा पड़ने से पैदावार और किसानों की कमाई सीधे तौर पर कम हो सकती है।’

वह बोले, ‘ईंधन की बढ़ती कीमतों से जमीन तैयार करने, मशीनों से खेती करने और डीजल से चलने वाले सिंचाई पंप सेट के ऑपरेशनल खर्च बढ़ रहे हैं।’

खुदरा महंगाई का बढ़ना तय
गुलाटी का मानना है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई का बढ़ना तय है। उन्होंने कहा, ‘दालों, तिलहन, कपास, मोटे अनाज और सब्जियों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ने की संभावना है और उनकी कीमतें बढ़ेंगी।’

उन्‍होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ेगी। कुल CPI महंगाई भी 5% से ऊपर चली जाएगी, जो अक्टूबर-नवंबर तक लगभग 6% तक पहुंच सकती है।’

  • खाद, कीटनाशकों और खेती में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों की बढ़ती लागत का भी किसानों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है।
  • खाद की कमी के बीच, किसान ग्रे मार्केट से ज्‍यादा कीमत पर खाद खरीद रहे हैं।
  • साथ ही, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावट आई है।
  • इससे ट्रैक्टरों में इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमत भी बढ़ गई है।
  • उन्हें जून-सितंबर मॉनसून सीजन के दूसरे हिस्से में नमी की कमी के कारण फसल पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।

खेती का रकबा घटा रहे किसान
पश्चिमी महाराष्ट्र के भंडगांव के किसान राहुल पवार ने नहर का पानी न मिलने के डर से गन्‍ने की खेती का रकबा 60% कम करने का फैसला किया है। उन्होंने कम पानी वाली कम समय में तैयार होने वाली फसलों, जैसे बाजरा और सब्जियों की खेती करने का फैसला किया है। पवार खेती के आधुनिक तरीकों और मार्केट रिसर्च से अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्‍स से कहा, ‘मैं गन्‍ने की खेती का रकबा कम कर रहा हूं। कारण है कि मेरे खेत सिंचाई के लिए नहर के पानी पर निर्भर हैं। कम बारिश के कारण जलाशय नहीं भरेंगे। इसलिए मुझे गन्‍ने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा।’

राजस्थान में किसान धान और सोयाबीन की खेती का रकबा कम करने की योजना बना रहे हैं। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजस्थान के रामपाल जाट ने कहा, ‘हालांकि, लोग अल-नीनो के बारे में जानते हैं। लेकिन, वे पहले की तरह घबराए हुए नहीं हैं, जब सिंचाई की सुविधा न के बराबर थी।’

NEET पेपर लीक पर राहुल गांधी के कोटा से शंखनाद का क्या है सियासी गणित, जानिए

कोटा। Rahul Gandhi politics on paper leak case: नीट पेपर लीक और देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ के मुद्दे पर सियासत का पारा सातवें आसमान पर है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस आंदोलन की कमान संभाल रहे हैं और इसकी शुरुआत आगामी 17 जून 2026 को राजस्थान के कोटा शहर से होने जा रही है।

राजनीति के जानकारों के बीच इस समय सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर इस देशव्यापी आंदोलन के शंखनाद के लिए कोटा को ही क्यों चुना गया? आइए समझते हैं राहुल गांधी के इस ‘कोटा’ दांव के पीछे का असली सियासी और सामाजिक गणित।

मिनी इंडिया कोटा
कोटा सिर्फ राजस्थान का एक शहर नहीं, बल्कि देश की ‘कोचिंग कैपिटल’ और एक ‘मिनी इंडिया’ है। यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और झारखंड समेत देश के कोने-कोने से आए करीब 2 से 3 लाख छात्र एक साथ रहकर नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

नीट पेपर लीक का सबसे गहरा और सीधा दर्द इन्हीं बच्चों ने झेला है। राहुल गांधी अगर दिल्ली में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते, तो वह सिर्फ एक राजनीतिक बयान होता। लेकिन कोटा में छात्रों के बीच खड़े होकर बोलना, सीधे देश के हर उस परिवार तक अपनी आवाज पहुंचाना है जिसका बच्चा डॉक्टर बनने का सपना लेकर घर से दूर रहता है।

सीधे निशाना
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए उस मिडिल क्लास के दिलों में जगह बनाना चाहती है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा का बड़ा समर्थक रहा है। बच्चों की कोचिंग, महंगे हॉस्टल और परीक्षा की बढ़ती लागत से यह मध्यम वर्ग पहले से ही आर्थिक दबाव में है। ऊपर से जब पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। राहुल गांधी इसी गुस्से को राजनीतिक जमीन में बदलना चाहते हैं।

छात्रों के बीच विश्वसनीयता
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि राहुल गांधी युवाओं के लिए एक विश्वसनीय आवाज बनकर उभरे हैं। इसके पीछे कोटा का एक पुराना इतिहास भी है। दिसंबर 2022 में अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने कोटा के कोचिंग छात्रों के साथ विशेष संवाद किया था। तब उन्होंने बच्चों के मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव को समझा था। अब दोबारा कोटा आकर वह छात्रों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि ‘मैं तब भी तुम्हारे साथ था, और आज तुम्हारी लड़ाई में भी साथ खड़ा हूं।’

राजस्थान की सियासत पर नजर
राजस्थान में इस समय भाजपा की सरकार है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस आंदोलन को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजस्थान की धरती से इस बड़े आंदोलन की शुरुआत करके कांग्रेस राज्य की भजनलाल सरकार को भी बैकफुट पर धकेलना चाहती है और युवाओं को अपनी ओर खींचना चाहती है।

राहुल गाँधी का पूरा सियासी रूटमैप
कोटा से युवाओं के इस गुस्से की चिंगारी को सुलगाने के बाद कांग्रेस इसे उन राज्यों में ले जाएगी जो छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं के बड़े गढ़ माने जाते हैं।

  • 10 जुलाई: प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) — जहां यूपीपीएससी और अन्य परीक्षाओं के छात्र अक्सर सड़कों पर होते हैं।
  • 11 जुलाई: पटना (बिहार) — जहां रेलवे और नीट परीक्षाओं को लेकर युवाओं का आक्रोश सबसे तीखा रहता है।
  • 14 जुलाई: नई दिल्ली — जहां मानसून सत्र के ठीक पहले संसद के मुहाने पर सरकार को घेरा जाएगा।

साफ है कि राहुल गांधी का ‘कोटा’ से आंदोलन शुरू करने का फैसला कोई सामान्य घटना नहीं है। यह युवाओं, उनके परिवारों और देश की शिक्षा व्यवस्था के बहाने केंद्र सरकार को सीधे उसके सबसे मजबूत गढ़ में घेरने की एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी है।

ईरान युद्ध के बीच तेल पर अमेरिका और चीन ने कर दिया बड़ा खेल, जानिए कैसे

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य तीन महीने से भी अधिक समय से बंद है। इसे आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

कई दशकों से तेल व्यापारी, एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स यह चेतावनी देते रहे हैं कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो ग्लोबल इकॉनमी तबाह हो जाएगी। इंडस्ट्री ने ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत $200 प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान लगाया था।

लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला है। कच्चे तेल की कीमत शुरुआत में जरूर उछली थी लेकिन पिछले कुछ समय से यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बनी हुई है। आखिर यह कैसे हुआ?

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद कच्चे तेल की कीमत में उबाल नहीं आने के कई कारण हैं। अमेरिका से रेकॉर्ड एक्सपोर्ट, वेनेजुएला से सप्लाई बढ़ने और चीन में मांग में अचानक अप्रत्याशित गिरावट ने पश्चिम एशिया से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली। युद्ध से पहले पश्चिम एशिया से रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल की सप्लाई होती थी।

साथ ही युद्ध से पहले चीन समेत कई देशों ने काफी तेल जमा किया था। मौके के नजाकत को देखते हुए अमेरिका और चीन समेत कई देशों ने अपने स्ट्रैटजिक रिजर्व से तेल रिलीज किया। इससे भी सप्लाई शॉक को कम करने में मदद मिली है।

एक अनुमान के मुताबिक 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 1 अरब बैरल कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है। एक थ्योरी यह भी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की दोहरी नाकेबंदी के बावजूद बड़ी मात्रा में कच्चा तेल बाहर निकल रहा है।

इससे ग्लोबल एनर्जी सिस्टम को इस ऐतिहासिक झटके को झेलने में मदद मिली है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से बताया गया है कि इन तथाकथित गुप्त प्रवाह वाले टैंकर पकड़े जाने से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद करके नाकेबंदी से बच रहे होंगे।

जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि मई के आखिरी दो हफ्तों में गुप्त प्रवाह रोजाना लगभग 2.1 मिलियन बैरल प्रति दिन था। नौसेना की नाकेबंदी और कमर्शियल ट्रैफिक में भारी गिरावट के बावजूद, कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी बड़ी मात्रा में जलडमरूमध्य से गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गुप्त प्रवाह से क्रूड संकट को कुछ हद तक टालने या कम करने में मदद मिली है। यह इन्वेंट्री में आई कमी को पूरी तरह रोकने के लिए काफी नहीं है, लेकिन यह स्थिति की गंभीरता को कुछ हद तक कम जरूर करता है।

कैसे हुई सप्लाई?
इन्वेस्टमेंट बैंक पाइपर सैंडलर के ग्लोबल एनर्जी इकनॉमिस्ट और स्ट्रैटेजिस्ट जान स्टुअर्ट का अनुमान है कि मई में होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 2.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाहर निकला।

इसमें से लगभग 2.1 मिलियन बैरल उन जहाजों पर लदा था जिन्होंने ईरानी संस्थाओं को टोल का भुगतान किया था। बाकी लगभग 900,000 बैरल घोस्ट ट्रांजिट हैं। यानी ऐसे जहाज जो अंधेरे में ट्रांसपोंडर बंद करके इस जलमार्ग से गुजरे।

‘भारत भाग्य विधाता’ फिल्म राजस्थान में भी टैक्स फ्री करने की मांग

जयपुर। बॉलीवुड फिल्म भारत भाग्य विधाता दिल्ली में टैक्स फ्री हो चुकी है। अब राजस्थान में भी टैक्स फ्री करने की मांग उठी है। यह फिल्म वर्ष 2008 में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के दौरान कामा हॉस्पिटल के कर्मचारियों की बहादुरी पर आधारित है।

लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया है। रनौत ने एक नर्स की भूमिका अदा की। फिल्म में बताया गया कि देश की सेवा के लिए केवल खाकी वर्दी में नहीं बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों का व्हाइट कोट पहनना भी गर्व की बात है।

शुक्रवार को फिल्म भारत भाग्य विधाता रिलीज हुई। जयपुर के ईपी सिनेमा में स्पेशल स्क्रीनिंग की गई। इस स्पेशल स्क्रीनिंग में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी फिल्म देखने पहुंचे।

साथ में डिप्टी सीएम दिया कुमारी, जयपुर सांसद मंजू शर्मा और प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान कंगना रनौत ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने का आग्रह किया।

इस बात की पुष्टि खुद कंगना रनौत ने मीडिया से बात करते समय की। रनौत ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने उनके आग्रह पर फिल्म को टैक्स फ्री करने का आश्वासन दिया। डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने भी कहा था कि वे भी मुख्यमंत्री से मिलकर इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की बात कहेंगी।

फिल्म भारत भाग्य विधाता की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान कई नर्सिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स को फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया गया था। सैकड़ों की संख्या में मेडिकल स्टूडेंट्स ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना के साथ बैठकर फिल्म देखी।

इंडियन नर्सिंग काउंसलिंग के वाइस प्रेसिडेंट और टीएनएआई राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जोगेंद्र शर्मा ने भी इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग की। डॉ. शर्मा ने कहा कि यह फिल्म सेवा को समर्पित है।

इस प्रेरणादायी फिल्म को टैक्स फ्री किया जाना चाहिए। स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान मरीजों की सेवा में अपना योगदान देने वाले नर्सेस को स्टेज पर बुलाकर टैग लगाकर सम्मानित किया गया।

असली हीरोज का सम्मान करना जरूरी: कंगना
फिल्म भारत भाग्य विधाता के रिलीज होने के साथ ही कंगना रनौत अपनी पूरी टीम के साथ देशभर के अलग-अलग शहरों में दौरा कर रही हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म में देश के असली हीरोज की स्टोरी दिखाई गई है। हेल्थ वर्क वे असली हीरो हैं जो मुश्किल वक्त में चुपचाप भारत को संभालकर रखते हैं। फिल्म के स्पेशल स्क्रीनिंग में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के शामिल होने पर लोकसभा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।

हुंडई न्यू जेन i20 प्रीमियम हैचबैक के फोटो लीक, जानिए ख़ास फीचर्स

नई दिल्ली। हुंडई मोटर इंडिया जल्द ही भारतीय बाजार में अपनी न्यू जेन i20 प्रीमियम हैचबैक लॉन्च करने वाली है। कंपनी इसका टीजर भी जारी कर चुकी है। हालांकि, अब इसके ग्लोबल डेब्यू से कुछ दिन पहले ही ऑफिशियल फोटो लीक हो गए हैं। जिनसे इस हैचबैक का प्रोडक्शन मॉडल सामने आया है।

इन तस्वीरों में इसके नए डिजाइन वाले बाहरी हिस्से, पूरी तरह से बदले हुए इंटीरियर और कई नए फीचर्स की डिटेल दिखती है जो इस अपडेटेड हैचबैक में मिलेंगे।

न्यू जेन i20 का एक्सटीरियरi20 का नया वर्जन स्टाइलिंग के मामले में अपने पुराने मॉडल से काफी अलग है। सामने की तरफ, हैचबैक में ज्यादा शार्प और फ्यूचरिस्टिक डिजाइन दिया गया है, जिसमें LED प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स के साथ जुड़ी पूरी चौड़ाई वाली लाइट बार खास है।

हेडलैम्प्स में खास Y-शेप की लाइटिंग सिग्नेचर है। हुंडई ने अभी डाइमेंशन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन नई i20 नए डिजाइन वाले बंपर और नए डुअल-टोन 17-इंच एलॉय व्हील्स की वजह से ज्यादा मजबूत और जमी हुई दिखती है।

साइड प्रोफाइल में एक फ्लैट रूफलाइन है जो पीछे के सीधे हिस्से की ओर जाती है। पीछे की तरफ, डिजाइन सामने जैसा ही है, जिसमें टेलगेट पर फैली हुई कनेक्टेड लाइटिंग है।

न्यू जेन i20 का इंटीरियरनई i20 के इंटीरियर की बात करें तो केबिन के अंदर बदलाव और भी बड़े हैं। डैशबोर्ड को पूरी तरह से नया डिजाइन किया गया है और अब इसका लेआउट ज्यादा साफ-सुथरा है। केबिन में एक कर्व्ड डिस्प्ले है जिसमें डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दोनों हैं। हैचबैक में नया स्टीयरिंग व्हील डिजाइन भी है, जिसमें हुंडई की मोर्स कोड से प्रेरित ‘H’ पहचान है, जैसा कि नई वेन्यू और वरना में देखा गया है।

न्यू जेन i20 के फीचर्सनेक्स्ट जेन i20 के एक नए टीजर से इस बात का पता चला है कि हैचबैक में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और इंफोटेनमेंट सिस्टम को इंटीग्रेटेड करने वाला 12.3-इंच का बड़ा पैनल मिलेगा।

इसमें हुंडई ब्लूलिंक, वायरलेस फोन मिररिंग और रिवर्स कैमरे के लिए डिस्प्ले जैसे फीचर्स मिलेंगे। कंपनी ने क्लाइमेट कंट्रोल लेआउट में भी बदलाव किया है, जिसमें कंट्रोल को वर्टिकल सेंटर स्टैक में रखा गया है और दोनों तरफ एयर वेंट्स हैं।

डिजिटल इंटरफेस पर ज्यादा ध्यान देने के बावजूद, कंपनी ने इंफोटेनमेंट और गाड़ी के फंक्शन्स के लिए कई फिजिकल बटन रखे हैं, जिससे गाड़ी चलाते समय इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा।

इसमें वायरलेस चार्जिंग पैड, डुअल USB टाइप-C पोर्ट, ड्राइव मोड सेलेक्टर और लेदर-फिनिश वाला गियर लीवर भी दिख रहा है। केबिन के एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाने के लिए डुअल-टोन लेदर अपहोल्स्ट्री वाली सीटें और सेंटर कंसोल है जिसमें कपहोल्डर और स्टोरेज वाला आर्मरेस्ट है।

न्यू जेन i20 का इंजनइंटरनेशनल लेवल पर नई जनरेशन की i20 कम्फर्ट, लिमिटेड, X लाइन, प्लेटिनम और अल्टीमेट ट्रिम्स में उपलब्ध होगी। हुंडई ने अभी ग्लोबल मार्केट के लिए पावरट्रेन ऑप्शन का खुलासा नहीं किया है।

भारत की बात करें तो, नई जनरेशन की i20 में मौजूदा इंजन ऑप्शन ही जारी रहने की उम्मीद है। इनमें 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन और 1.0-लीटर टर्बो पेट्रोल मोटर शामिल हैं। ट्रांसमिशन के ऑप्शन में 6-स्पीड मैनुअल और 7-स्पीड DCT ऑटोमैटिक शामिल हो सकते हैं।

जोसा काउंसलिंग राउंड 1 का रिजल्ट जारी, टॉपरों को मिली IIT बॉम्बे की BTech CSE

नई दिल्ली। JoSAA counselling Round 1: आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी जैसे देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित जोसा काउंसलिंग 2026 के पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी हो गया है।

राउंड 1 में जिन उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था, वे josaa.nic.in पर जाकर चेक कर सकते हैं कि उन्हें किस इंजीनियरिंग कॉलेज में सीट अलॉट हुई है। अब चयनित अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग और दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

राउंड 1 में जेईई एडवांस्ड 2026 के टॉप रैंकर्स को आईआईटी बॉम्बे की बीटेक सीएसई ( BTech CSE ) की सीट मिली है। आमतौर पर जेईई एडवांस्ड की टॉप 60 रैंक पाने वालो को आईआईटी बॉम्बे की ड्रीम सीट बीटेक सीएसई अलॉट होती है। इस बार जोसा काउंसलिंग कुल छह राउंड में होगी जिसमें 5 सामान्य राउंड होंगे और एक एडिश्नल राउंड होगा।

सीट पाने वाले अभ्यर्थी 26 जून तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग कर सकेंगे। करीब दो लाख विद्यार्थियों ने 2 करोड़ 70 लाख 53 से ज्यादा चॉइस भरी दी। जोसा से 23 आईआईटी, आईआईईएसटी शिबपुर, 31 एनआईटी, 26 ट्रिपल आईटी और 56 जीएफटीआई सहित कुल 138 इंजीनियरिंग संस्थानों की 67000 से ज्यादा सीटों पर दाखिला हो रहै।

आगे का शेड्यूल

  • 26 जून, 2026 (17:00 तक): फीस भुगतान की अंतिम तिथि (राउंड 1)।
  • 29 जून, 2026 (13:00 तक): भुगतान के प्रयास करने वाले उम्मीदवारों के लिए फीस भुगतान संबंधी समस्याओं का समाधान।

जोसा काउंसिलिंग में सीट आवंटन के बाद विद्यार्थियों को ऑनलाइन रिपोर्टिंग में 10वीं, 12वीं की अंकतालिका, जेईई मेन/एडवांस्ड एडमिट कार्ड, कैटेगरी सर्टिफिकेट, कैंसिल चैक की फॉटोकॉपी, मेडिकल सर्टिफिकेट आदि स्कैन कर अपलोड करने होंगे। ईडब्ल्यूएस एवं ओबीसी के विद्यार्थियों को एक अप्रैल 2026 के बाद का कैटेगरी सर्टिफिकेट देना होगा।

बीटेक की कितनी सीटें
इस वर्ष देशभर के तकनीकी संस्थानों में कुल 4,470 नई सीटें जोड़ी गई हैं। सीट मैट्रिक्स के अनुसार 23 आईआईटी में कुल 18,951 सीटों पर प्रवेश होगा। 32 एनआईटी में 25,162 सीटें उपलब्ध हैं। 26 आईआईआईटी में 11,518 व जीएफटीआई में 11,692 सीटों पर दाखिला लिया जाएगा। चारों श्रेणियों के संस्थानों में कुल 67,323 सीटों पर प्रवेश की व्यवस्था की गई है।

JoSAA काउंसलिंग 2026 फीस डिटेल्स
JoSAA काउंसलिंग 2026 में हिस्सा लेने के लिए कोई रजिस्ट्रेशन फीस नहीं है। हालांकि जिन कैंडिडेट्स को सीट मिलती है, उन्हें अपनी मिली हुई सीट पक्की करने के लिए सीट स्वीकार करने की फीस देनी होगी। फीस की डिटेल्स नीचे देखें:

  • एससी, एसटी, दिव्यांग कैटेगरी: 15,000
  • बाकी सभी कैंडिडेट्स: 30,000

काउंसलिंग के आखिरी राउंड के बाद, जिन कैंडिडेट्स को NIT+ सिस्टम में सीटें मिली हैं, उन्हें आंशिक फीस भी देनी होगी। शुल्क का विवरण इस प्रकार है:

  • SC, ST, PwD श्रेणियां: 20,000 रु
  • अन्य सभी उम्मीदवार: 45,000 रु

जोसा काउंसलिंग राउंड पूरे होने के बाद, एडमिशन की कंफर्मेशन के लिए यह शुल्क देना अनिवार्य है। यह शुल्क डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, UPI, नेट बैंकिंग या ई-चालान के माध्यम से जमा किया जा सकता है।

जोसा काउंसलिंग 2026 का आगे का शेड्यूल राउंड

  • 30 जून, 2026 (17:00): सीट अलॉटमेंट रिजल्ट (राउंड 2)।
  • 30 जून से 3 जुलाई, 2026 (17:00 तक): ऑनलाइन रिपोर्टिंग (फीस भुगतान, दस्तावेज अपलोड, प्रश्नों के उत्तर)।
  • 1 जुलाई (10:00) से 3 जुलाई, 2026 (17:00 तक): सीट वापस लेने / सीट आवंटन प्रक्रिया से बाहर निकलने की शुरुआत।
  • 3 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस भुगतान की अंतिम तिथि (राउंड 2)।
  • 4 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस भुगतान संबंधी समस्याओं का समाधान (राउंड 2)।
  • 6 जुलाई, 2026 (17:00): थर्ड सीट अलॉटमेंट रिजल्ट (राउंड 3)।
  • 6 जुलाई से 8 जुलाई, 2026 (17:00 तक): ऑनलाइन रिपोर्टिंग (फीस भुगतान, दस्तावेज अपलोड )।
  • 7 जुलाई (10:00) से 8 जुलाई, 2026 (17:00 तक): सीट वापस लेने / एग्जिट प्रक्रिया की शुरुआत (राउंड 3)।
  • 8 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस भुगतान की अंतिम तिथि (राउंड 3)।
  • 9 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस समस्याओं का समाधान; निकासी और अन्य प्रश्नों का उत्तर देने का अंतिम दिन।
  • 10 जुलाई, 2026 (17:00): सीट आवंटन (राउंड 4)।
  • 10 जुलाई से 13 जुलाई, 2026 (17:00 तक): ऑनलाइन रिपोर्टिंग (फीस भुगतान, दस्तावेज़ अपलोड, प्रश्नों के उत्तर)।
  • 11 जुलाई (10:00) से 14 जुलाई, 2026 (17:00 तक): सीट वापस लेने / एग्जिट प्रक्रिया की शुरुआत (केवल IITs/IISc के लिए विड्रॉल/एग्जिट का यह अंतिम राउंड है)।
  • 13 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस भुगतान की अंतिम तिथि (Round 4)।
  • 14 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस समस्याओं का समाधान (Round 4)।
  • 15 जुलाई, 2026 (17:00 तक): निकासी और अन्य प्रश्नों का उत्तर देने का अंतिम दिन।

राउंड 5 (IITs/IISc के लिए अंतिम राउंड):

  • 16 जुलाई, 2026 (17:00): सीट आवंटन (Round 5) – IITs/IISc के लिए सीट आवंटन का अंतिम राउंड।
  • 16 जुलाई से 20 जुलाई, 2026 (17:00 तक): ऑनलाइन रिपोर्टिंग (फीस भुगतान, दस्तावेज़ अपलोड, प्रश्नों के उत्तर)।
  • 20 जुलाई, 2026 (17:00 तक): फीस भुगतान की अंतिम तिथि (राउंड 5)।
  • 21 जुलाई, 2026 (17:00 तक): यदि कोई हो तो फीस समस्याओं का समाधान / प्रश्नों के उत्तर देने का अंतिम दिन। इस दिन IITs/IISc के लिए सीट आवंटन समाप्त हो जाएगा।

केवल NIT+ सिस्टम के लिए

  • 16 जुलाई से 20 जुलाई, 2026 (17:00 तक): सीट वापस लेने (राउंड 6) की शुरुआत।
  • 17 जुलाई से 21 जुलाई, 2026 (17:00 तक): विड्रॉल क्वेरी रिस्पॉन्स।
  • 22 जुलाई से 24 जुलाई, 2026 (17:00 तक): आंशिक प्रवेश शुल्क का ऑनलाइन भुगतान।

iPhone 18 Pro Max के कलर्स ऑनलाइन लीक, जानिए कौन-कौन से रंग के हैं

नई दिल्ली। इस साल के आखिर में लॉन्च होने वाले iPhone 18 Pro Max की पहली झलक सामने आ गई है। एक लीक में ऑनलाइन शेयर की गई नई तस्वीरों में यह फोन तीन कलर्स में दिख रहा है और वाकई में यह फोन काफी खूबसूरत लग रहा है।

अगर आप भी नए आईफोन मॉडल्स को खरीदने का प्लान कर रहे हैं और जानने चाहते हैं कि ऐप्पल इस बार कौन से कलर्स में नए मॉडल ला रहा है, तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। देखें आपको कौन सा कलर ऑप्शन पसंद आ रहा है।

टेक जर्नलिस्ट जॉन रेटिंगर (@Jon4Lakers) ने एक्स पर कई तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें कथित आईफोन 18 प्रो मैक्स को डार्क चेरी, लाइट ब्लू और ब्लैक फिनिश में दिखाया गया है। तस्वीरें अलग-अलग एंगल में फोन के डिजाइन और तीन कलर्स को दिखाती हैं।

लीक हुए कलर्स में से, डार्क चेरी सबसे दिलचस्प लग रहा है। कहा जा रहा है कि iPhone 18 Pro लाइनअप के लिए एक्सक्लूसिव होगा जैसे पिछली बार ऑरेंज कलर था। यानी ऐप्पल इसे इस साल के प्रो मॉडल के लिए सिग्नेचर फिनिश के रूप में पेश कर सकता है।

कथित iPhone 18 Pro Max का ब्लू कलर ऐप्पल के पिछले कुछ ब्लू प्रो मॉडल की तुलना में थोड़ा गहरा दिखाई देता है। इसके अलावा, ब्लैक फिनिश एक डुअल टोन डिजाइन का उपयोग करता है। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि रियर पैनल मैट है, जबकि कैमरा आईलैंड को डार्क किया गया है। लेटेस्ट लीक में सिल्वर वेरिएंट शामिल नहीं है जो पहले की डमी यूनिट तस्वीरों में दिखाई दिया था।

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स ने iPhone 18 Pro सीरीज को ऐप्पल के अपकमिंग A20 Pro बायोनिक चिप और एक नए C2 मॉडेम से जोड़ा है। ऐप्पल बैटरी कैपेसिटी को मोटे तौर पर मौजूदा मॉडल के तरह रखते हुए, प्रो मॉडल पर डायनेमिक आइलैंड को छोटा कर सकती है।

खबरें है कि ऐप्पल अपकमिंग आईफोन की कीमत को मौजूद सीरीज की प्राइसिंग की तरह ही रख सकता है। नए स्मार्टफोन के सितंबर में लॉन्च होने की उम्मीद है, साथ ही अफवाहें इस बात की ओर भी इशारा कर रही हैं कि ऐप्पल का पहला फोल्डेबल आईफोन उसी इवेंट में आ सकता है।

Retail Inflation: मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 16 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंची

नई दिल्ली। शुक्रवार को जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के आधिकारिक आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आम आदमी की जेब पर चौतरफा बोझ बढ़ रहा है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 16 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह चांदी और सोने के गहनों के साथ टमाटर एवं अदरक की कीमतों में तेल उछाल है। अगर खाद्य महंगाई के आंकड़े देखें, तो यह और भी डरावना है। खाद्य महंगाई बीते माह बढ़कर 4.78 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 4.20 फीसदी थी।

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह
महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ खाने-पीने की चीजों और व्यक्तिगत रखरखाव के खर्च का है। आंकड़ों के मुताबिक, व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और अन्य विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई में सालाना आधार पर 18.46 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट-होटल जैसी सेवाएं 5.75 फीसदी और पान-तंबाकू 4.83 फीसदी महंगे हुए हैं, जिसने आम आदमी का खर्च बढ़ा दिया है।

इन चीजों ने बढ़ाया संकट

  • चांदी के गहने : यहां महंगाई का विस्फोट हुआ है और कीमतें एक साल पहले की तुलना में 155.23 फीसदी महंगी हो चुकी हैं।
  • टमाटर : रसोई के राजा टमाटर के दाम 48.43 फीसदी चढ़ चुके हैं।
  • सोने, हीरे और प्लेटिनम के आभूषण : इनकी महंगाई दर भी 40.93 फीसदी पहुंच गई है।
  • अदरक : चाय का स्वाद कड़वा करते हुए यह 32.49 फीसदी महंगा।
  • किशमिश-मुनक्का : सूखे मेवे भी 21.97 फीसदी महंगे बिक रहे हैं।

यहां राहत
बढ़ती महंगाई के बीच आलू (-23.71%), हरी मटर (-11.47), मोटर कार एवं जीप (-7.19%), जीरा (-4.59%) और मोटर साइकिल-स्कूटर (-3.56%) की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट आई है।

इन राज्यों में सर्वाधिक महंगाई दर

राज्य महंगाई दर 
तेलंगाना6.15%
तमिलनाडु5.11%
आंध्र प्रदेश4.90%
कर्नाटक4.59%
ओडिशा4.54%
उत्तर प्रदेश3.97%
पंजाब3.34%
हरियाणा3.09%
हिमाचल प्रदेश3.05%
दिल्ली2.50%

शहरों से ज्यादा गांवों में बढ़ी महंगाई
बीते माह ग्रामीण महंगाई 4.25 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि शहरों में यह 3.53 फीसदी दर्ज की गई। खाद्य महंगाई के मामले में भी गांवों का आंकड़ा 4.85 फीसदी है, जबकि शहरों में 4.66 फीसदी। ग्रामीण महंगाई बढ़ने से कपड़े, जूते, बाइक, मोबाइल और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी कम हेागी, जिससे कंपनियों की बिक्री-मुनाफे पर चोट पहुंचेगी।

Jeera: इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक

नई दिल्ली। Jeera Production in China: वर्तमान में जीरे के भाव न्यूनतम स्तर पर चल रहे हैं। इन भावों पर हाल-फिलहाल अधिक मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में बाजार 3/5 रुपए मन्दा-तेजी के बीच बने रहेंगे। हालांकि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक सीमित रह गई है। मगर लोकल एवं निर्यात व्यापार कम होने के कारण भाव दबे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि मिडिल ईस्ट देशों में युद्ध के चलते विगत कुछ समय से जीरे का निर्यात प्रभावित हो रहा है। अभी हाल-फिलहाल निर्यात मांग बढ़ने की कोई संभावना भी नहीं है। क्योंकि चालू माह के अंत तक चीन में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी और इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 5/10 प्रतिशत अधिक होने के समाचार मिल रहे हैं। जबकि जुलाई माह में टर्की एवं सीरिया में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी। जिस कारण से भारतीय जीरे का निर्यात कम ही रहेगा।

चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहा। हालांकि राजस्थान में उत्पादन गत वर्ष की तुलना में अधिक रहा लेकिन गुजरात में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम होने के समाचार मिल रहे है।

गत वर्ष गुजरात में जीरे का उत्पादन 44/45 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष घटकर 32/34 लाख बोरी का रह गया। जबकि राजस्थान में इस वर्ष उत्पादन 57/58 लाख बोरी होने के व्यापारिक अनुमान लगाए गए हैं गत वर्ष राजस्थान में उत्पादन 51/52 लाख बोरी का माना गया है।

आवक : वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक समान्य स्तर पर आ गई है। गुजरात की प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 10/11 हजार बोरी की हो रही है जबकि राजकोट एवं गोंडल में आवक 800/1000 बोरी की चल रही है।

राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 2500/3000 बोरी एवं नागौर में 1500/2000 बोरी की चल रही है। जोधपुर में आवक 1200/1500 बोरी की रह गई है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में कुल उत्पादन का लगभग 75/80 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है जबकि राजस्थान में 50/60 प्रतिशत माल मंडियों में आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में अभी तक लगभग 28/30 लाख बोरी जीरे की आवक हो चुकी है। जबकि राजस्थान की मंडियों में 20/22 लाख बोरी जीरा आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

तेजी-मंदी:  जीरे की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है क्योंकि एक ओर जहां मंडियों में आवक घट गई है। वही दूसरी तरफ आगामी दिनों में लोकल मांग में सुधार होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। छिटपुट मात्रा में निर्यात भी जारी रहेगा। वर्तमान में उत्पादन केन्द्रों की मंडियों पर जीरे के भाव 175/200 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। इन भावों में अभी 3/5 रुपए प्रति किलो का मन्दा-तेजी चलता रहेगा। लेकिन अगस्त-सितम्बर माह में भाव बढ़ने की संभावना है।

निर्यात : वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान एक ओर जहां मात्रात्मक रूप में जीरे का निर्यात 14 प्रतिशत घटा है वहीं निर्यात भाव कम मिलने के कारण निर्यात से प्राप्त आय में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान जीरे का निर्यात 196800 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान जीरा का निर्यात 229881 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही थी।