Wednesday, June 24, 2026
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Mustard: पिछले सप्ताह बूंदी मंडी में सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी

नई दिल्ली। Mustard Price: सरसों के बड़े उत्पादक राज्यों के मुख्य थोक बाज़ारों में सरसों की सप्लाई कम होने लगी है, फिर भी व्यापारियों और तेल मिल मालिकों की तरफ़ से मज़बूत माँग बनी हुई है।

नतीजतन, 6-12 जून के हफ़्ते में सरसों की कीमतों में औसतन 100–200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई; खास तौर पर, राजस्थान के बूंदी बाज़ार में कीमतें 800 रुपये बढ़कर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गईं।

हफ़्ते के दौरान, दिल्ली में 42% कंडीशन वाली सरसों की कीमतों में 50 रुपये प्रति क्विंटल और जयपुर में 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई। दूसरे बाज़ारों में औसत क्वालिटी वाली सरसों की कीमतों में 100–200 रुपये की बढ़ोतरी हुई, हालाँकि गंगानगर में ऊँची कीमत में 250 रुपये की गिरावट आई। सभी बाज़ारों में सरसों की कीमतें अभी 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चल रही हैं।

सरसों के तेल (एक्सपेलर और कच्ची घानी) की कीमतों में भी 20–30 रुपये प्रति 10 किलो की बढ़ोतरी हुई। दिल्ली में एक्सपेलर ऑयल का दाम ₹30 बढ़कर 1,580 रुपये प्रति 10 किलो हो गया, जबकि चरखी दादरी में यह 1,585 रुपये प्रति 10 किलो पर पहुंच गया। इसी तरह, कच्ची घानी सरसों तेल का दाम मुरैना में 40 रुपये बढ़कर 1,610 रुपये प्रति 10 किलो और भरतपुर में 30 रुपये बढ़कर 1,600 रुपये प्रति 10 किलो हो गया।

सरसों की रोज़ाना की औसत आवक घटकर 5-6 लाख बैग (हर बैग में 50 kg) रह गई। 6 जून को 5 लाख बैग; 8 और 9 जून को 6 लाख बैग; 10 और 11 जून को 5.50 लाख बैग; और 12 जून को 5.25 लाख बैग आवक रही।मस्टर्ड ऑयल केक और DOC में कम ट्रेडिंग एक्टिविटी के कारण कीमतों पर कुछ दबाव देखा गया।

Coriander: धनिया की कीमतों में फिर से तेजी आने का अनुमान

नई दिल्ली। इस हफ़्ते धनिया की कीमतों में मिला-जुला ट्रेडिंग ट्रेंड देखने को मिला। हफ़्ते की शुरुआत में, कीमतें कम थीं; लेकिन, हफ़्ते के आखिर में, फ्यूचर्स और स्पॉट मार्केट दोनों में कीमतें तेज़ी से बढ़ने लगीं।

सूत्रों का कहना है कि हफ़्ते के आखिर में फ्यूचर्स की कीमतों में तेज़ी मिडिल ईस्ट के देशों में शांति लौटने की उम्मीद की वजह से आई। उम्मीद है कि विदेश में शांति से भारतीय धनिया का एक्सपोर्ट बढ़ेगा, जिससे कीमतें मज़बूत रहेंगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सीज़न में प्रोडक्शन में गिरावट के अलावा, बड़े प्रोडक्शन सेंटर्स पर बचा हुआ स्टॉक भी बहुत कम हो गया है। इसलिए, कुल उपलब्धता खपत की मांग से कम रहने की उम्मीद है। इस उम्मीद से, हाल ही में बाज़ारों में धनिया की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।

‘ईगल’ क्वालिटी का दाम 133 से 135 और ‘बादामी’ क्वालिटी का दाम 122 से 125 रहा, जो पहले कभी नहीं देखा गया। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि आने वाले समय में कीमतें और बढ़ेंगी। मौजूदा हालात को देखते हुए, अंदाज़ा है कि ‘ईगल’ धनिया का दाम 145 से 150 रुपये किलो के लेवल तक पहुंच सकता है।

देश में धनिया का प्रोडक्शन पिछले दो-तीन सालों से कम हो रहा है। अनुमान के मुताबिक, 2023 में देश में धनिया का प्रोडक्शन रिकॉर्ड 16 मिलियन (1.60 करोड़) बैग था, जो 2024 में घटकर 12 मिलियन (1.20 करोड़) बैग और 2025 में 11 मिलियन (1.10 करोड़) बैग रह गया। ट्रेड अनुमान के मुताबिक 2026 में यह और घटकर 9.5-9.7 मिलियन (95-97 लाख) बैग रह जाएगा।

मौजूदा सीज़न में, मध्य प्रदेश में प्रोडक्शन 4.3-4.4 मिलियन (43-44 लाख) बैग और गुजरात में 3.8-4.0 मिलियन (38-40 लाख) बैग होने का अनुमान है। इसके अलावा, राजस्थान में धनिया का प्रोडक्शन लगभग 1.2 से 1.3 मिलियन बैग यानी 1.2 से 1.3 करोड़ बैग होने का अनुमान है।

मंडियों में रोज़ाना की आवक कम होने लगी है क्योंकि कुल उपज का बड़ा हिस्सा पहले ही ट्रेडिंग सेंटर्स पर पहुँच चुका है। सूत्रों से पता चला है कि गुजरात से लगभग 80 परसेंट उपज पहले ही आ चुकी है। इसी तरह, मध्य प्रदेश से 65-70 परसेंट उपज मंडियों में पहुँच चुकी है। अनुमान है कि राजस्थान की 70-75 परसेंट धनिया की फसल भी मंडियों में आ चुकी है।

अभी, गुजरात के एक बड़े बाज़ार गोंडल में आवक घटकर 4,000-5,000 बैग रह गई है, जबकि राजस्थान के रामगंज बाज़ार में यह 2,000-2,500 बैग है। मध्य प्रदेश के गुना बाज़ार में आवक लगभग 4,000-5,000 बैग है, जबकि नीमच, अशोकनगर, मंदसौर और बीनागंज जैसे दूसरे बाज़ारों में अभी 500-700 बैग की आवक हो रही है। ‘ईगल’ क्वालिटी का धनिया 128 से 132 प्रति किलो और ‘बादामी’ क्वालिटी का धनिया 120 से 125 प्रति किलो पर बिक रहा है।

तेजी की सम्भावना
कुल उपलब्धता खपत की ज़रूरतों से कम होने की वजह से मार्केट का माहौल बुलिश बना हुआ है। यह ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा सीज़न में धनिया की कुल उपलब्धता – जिसमें नई उपज और कैरी-ओवर स्टॉक शामिल हैं – लगभग 12 से 12.5 मिलियन बैग होने का अनुमान है, जबकि लोकल डिमांड और एक्सपोर्ट के लिए कुल ज़रूरत 14 से 15 मिलियन बैग है। ट्रेड अनुमानों के मुताबिक, आने वाले दिनों में सामान की सप्लाई धीरे-धीरे कम होने से कीमत में 10 से 15 प्रति किलो की बढ़ोतरी हो सकती है।

निर्यात: स्पाइसेस बोर्ड के जारी डेटा के मुताबिक, साल 2025-26 में कुल धनिया एक्सपोर्ट 60,211 टन हुआ, जिससे 679.70 करोड़ का रेवेन्यू मिला; वहीं, 2024-25 में एक्सपोर्ट 60,323 टन हुआ और ₹633 करोड़ की कमाई हुई। साल 2023-24 में रिकॉर्ड 108,624 टन धनिया एक्सपोर्ट हुआ।

Chana Price: आयातकों की बिकवाली का दबाव बढ़ने से चना की कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली। Chana Weekly Report: चालू सप्ताह के दौरान चना बाजार में नरमी का रुख बना रहा। बढ़ी हुई बिकवाली और चना दाल एवं बेसन की कमजोर मांग के कारण दाल मिलों की खरीदारी लगभग ठप रही, जिससे चना की कीमतों पर लगातार दबाव देखने को मिला।

पिछले सप्ताह आई तेजी के बाद खरीदार ऊंचे भावों पर खरीदारी से बचते रहे, जबकि स्टॉकिस्टों की सक्रियता भी सीमित बनी रही। मांग में अपेक्षित सुधार नहीं होने से प्रमुख मंडियों में चना के भाव कमजोर बने रहे। हालांकि सप्ताहांत में कुछ पूछताछ बढ़ने से बाजार में हल्का सुधार देखने को मिला, जिससे गिरावट की रफ्तार थमी।

उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की आवक सामान्य से कम बनी हुई है, जिसके कारण बाजार में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल सीमित नजर आ रही है। कम आवक निचले स्तरों पर कीमतों को समर्थन प्रदान कर रही है और बाजार में संतुलन बनाए हुए है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की शुरुआत के बाद चना दाल और बेसन की मांग में धीरे-धीरे सुधार आ सकता है। यदि उपभोक्ता मांग बढ़ती है तो चना की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना रहेगी।

ऐसे में निकट अवधि में बाजार दबाव में रह सकता है, लेकिन मध्यम अवधि में चना बाजार की धारणा मजबूत बनी रहने के संकेत मिल रहे हैं। कमजोर मांग के चलते चालू सप्ताह में दिल्ली चना के भाव 75 रुपये प्रति क्विटल घट गए।

सप्ताहांत में मध्य प्रदेश लाइन चना के भाव 5,875 से 5,900 रुपये प्रति क्विटल तथा राजस्थान लाइन चना के भाव 5,950 से 5,960 रुपये प्रति क्विटल रह गए ।

आयातकों की बिकवाली का दबाव बढ़ने व लिवाली सुस्त बनी रहने से इस सप्ताह आयातित चना में 50 रुपए प्रति क्विटल की गिरावट दर्ज की गयी और इस गिरावट के साथ भाव मुंबई तंज़ानिया 5850 रुपए नवाशेवा ऑस्ट्रेलिया 6050 रुपए व मूंदड़ा 5925 रुपए प्रति क्विटल रह गयी।

दाल मिलर्स की लिवाली कमजोर पड़ने से इस सप्ताह राजस्थान चना की कीमतों में 100 से 200 रुपए प्रति क्विंटल का मंदा दर्ज किया गया और इस मंदे के साथ भाव सप्ताहांत में जोधपुर 4800 से 5550 रुपए जयपुर 5900 रुपए बीकानेर 5300 से 5500 रुपए किशनगढ़ 5400 से 5500 रुपए व कोटा 5200 से 5500 रुपए प्रति क्विंटल रह गयी।

स्टाकिस्टों की बिकवाली बढ़ने व दाल मिलर्स की मांग बढ़ने से चालू सप्ताह के दौरान महाराष्ट्र चना की कीमतों में 100 से 200 रुपए प्रति क्विटल की गिरावट दर्ज की गयी और इस गिरावट के साथ भाव सप्ताहांत में सोलापुर 5400 से 6200 रुपए लातूर 5850 से 6000 रुपए अकोला 6075 रुपए नागपुर 6050 से 6075 रुपए व अहमदनगर 5500 से 5700 रुपए प्रति क्विटल रह गयी।

ग्राहकी शांत बनी रहने से इस सप्ताह मध्य प्रदेश चना की कीमतों में 50 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट देखी गयी और इस गिरावट के साथ भाव सप्ताहांत में अशोकनगर 5700 से 5850 रुपए गंजबासोदा 5400 से 5700 रुपए सागर 5500 से 5700 रुपए कटनी 5900 से 5950 रुपए व इंदौर 6000 से 6100 रुपए प्रति क्विटल रह गयी।

चौतरफा गिरावट के असर व लिवाली कमजोर पड़ने से चालू सप्ताह के दौरान कानपुर चना की कीमतों में 50 रुपए प्रति क्विटल की गिरावट देखी गयी और इस गिरावट के साथ भाव सप्ताहंत में 5950 रुपए प्रति क्विटल रह गए। इसी प्रकार रायपुर चना भी इस साप्ताह 100 रुपए प्रति क्विटल की मंदी के साथ सप्ताहंत में भाव 6000 से 6100 रुपए प्रति क्विंटल रह गए।

चना दाल: ग्राहकी का अभाव बना रहने से चालू सप्ताह के दौरान चना दाल की कीमतों में 25 से 50 रुपए क्विटल का नरमी दर्ज की गयी और इस नरमी के साथ भाव सप्ताहांत में दिल्ली 6900 से 7200 रुपए भाटापरा 7100 से 7200 रुपए कटनी 7200 रुपए, गुलबर्गा 7100 से 7300 रुपए जलगांव 7150 से 7950 रुपए जयपुर 6700 रुपए व कानपुर 6700 से 6800 रुपए प्रति क्विटल रह गयी।

Kota Mandi: कमजोर उठाव से कोटा मंडी में सोयाबीन और सरसों मंदी रही

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को कमजोर उठाव से सोयाबीन 100 रुपये और सरसों 150 रुपये मंदी रही। आवक की कमी से लहसुन मिडियम 200 रुपये तेज रहा। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब 50 हजार कट्टे और लहसुन की 10000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं नया मिल लस्टर 2300 से 2375, गेहूं एवरेज टुकड़ी 2400 से 2475, बेस्ट टुकड़ी 2500 से 2575, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1700 से 1900, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ नया 2100 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3201 धान (1509) 3400 से 4200, धान (1847) 3200 से 4001, धान (1718-1885) 3800 से 4400, धान (पूसा-1) 3000 से 4100, धान (1401-1886) 3600 से 4150, धान दागी 1500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 6000 से 6950, सोयाबीन बेस्ट क्वालिटी 6850 से 7201, सरसो 7200 से 7600, अलसी 8000 से 8550, तिल्ली 7000 से 9500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 5000 से 7800, उड़द 4500 से 6800, चना 5200 से 555, चना मौसमी नया 5100 से 5550, चना पेप्सी 5100 से 5701, चना डंकी पुराना 4000 से 4600, चना काबुली 5500 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल।

लहसुन 4400 से 15500, ऊटी लहसुन 15000 से 16500, मैथी नयी 5800 से 6400, धनिया बादामी 11000 से 11500, धनिया ईगल 11500 से 12200, धनिया रंगदार 13000 से 14500 रुपये प्रति क्विंटल।

कौशल विकास शिविर में मेहंदी और नृत्य प्रतिभागियों ने दिखाया अपना हुनर

कोटा। राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड स्थानीय संघ कोटा दक्षिण के तत्वावधान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आवासन मंडल, केशवपुरा में संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं का दौर भी प्रारंभ हो गया है।

शनिवार को शिविर में मेहंदी एवं नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। यह जानकारी स्थानीय संघ सचिव प्रकाश जायसवाल ने एक प्रेस बयान में दी।

जायसवाल ने बताया कि मेहंदी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने आकर्षक एवं कलात्मक डिजाइनों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। प्रतियोगिता में योगिता ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि मनीषा यादव द्वितीय स्थान पर रहीं। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की कलात्मक अभिव्यक्ति, डिजाइन की सुंदरता एवं प्रस्तुति के आधार पर परिणाम घोषित किया।

इसी प्रकार आयोजित नृत्य प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में महक ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के बल पर प्रथम स्थान हासिल किया। जबकि आयुषी कुमारी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। प्रतिभागियों के उत्साह और आत्मविश्वास ने कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया।

जायसवाल ने बताया कि इस अवसर पर शिविर सह-संचालक गिरिराज जोशी एवं सपना अग्रवाल ने प्रशिक्षणार्थियों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन है तथा इससे उनके शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बच्चों से शिक्षा को प्राथमिकता देने तथा समाज में बाल श्रम उन्मूलन के लिए जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि शिविर में विभिन्न कौशल आधारित प्रशिक्षणों के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

जायसवाल ने बताया कि महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रोज़डी एवं अनंतपुरा एकैडमी अनंतपुरा में आयोजित शिविरों में भी आगामी दिनों में भी विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिससे प्रतिभागियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिल सके।

बारां में रक्तदान शिविर आज

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अंतर्गत विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा 696 आर कोटा-बारां, ब्लड बैंक राजमल मीणा जिला चिकित्सालय बारां एवं रक्त कोष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 14 जून को बारां में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिक्षा सहकारी सभा के अध्यक्ष प्रकाश जायसवाल ने बताया कि रक्तदान महादान है और यह किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन प्रदान करने का माध्यम बनता है।

श्रीमद भागवत कथा मानव को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर ले जाती है

कोटा। विज्ञान नगर स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का सात दिवसीय आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो गया। अंतिम दिन आचार्य ऋतुराज गौतम ने द्वारिका लीलाएं, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, श्रीशुकदेव पूजन एवं पूर्णाहुति प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत मानव जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्काम मित्रता का संदेश देते हुए बताया कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से ईश्वर की कृपा सहज प्राप्त होती है।

कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भक्ति रस का आनंद लिया। मुख्य यजमान भगवानदास माहेश्वरी एवं रमेश माहेश्वरी ने बताया कि कथा श्रवण के लिए अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा पश्चिमांचल के उपसभापति एवं माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला, राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी सभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश चन्द अजमेरा, नंदकिशोर काल्या, कृष्ण गोपाल जाखेटिया, प्रमोद भण्डारी, ओमप्रकाश गट्टानी सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। समापन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्णाहुति एवं हवन के साथ कथा का विधिवत समापन हुआ।

Memu Train: कोटा–उज्जैन के बीच पहली बार सीधी मेमू सेवा का शुभारंभ कल से

कोटा। Memu Train: कोटा मंडल के रेल इतिहास में 15 जून एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज होने जा रहा है। इस दिन पहली बार कोटा से उज्जैन तक सीधी मेमू रेल सेवा का संचालन प्रारंभ होगा। गाड़ी संख्या 61624/61623 कोटा–चौमहला मेमू सेवा के उज्जैन तक विस्तार के उपलक्ष्य में चौमहला एवं विक्रमगढ़ आलोट रेलवे स्टेशनों पर उद्घाटन समारोह आयोजित किए जाएंगे।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि प्रथम उद्घाटन कार्यक्रम प्रातः चौमहला रेलवे स्टेशन पर आयोजित होगा। इस अवसर पर झालावाड़-बारां के सांसद दुष्यंत सिंह तथा राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं झालरापाटन विधायक श्रीमती वसुंधरा राजे दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सेवा का शुभारंभ करेंगे।

उन्होंने बताया कि दूसरा उद्घाटन समारोह विक्रमगढ़ आलोट रेलवे स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया हरी झंडी दिखाकर सेवा विस्तार का शुभारंभ करेंगे।

नई समय-सारिणी के अनुसार गाड़ी संख्या 61624 कोटा से प्रातः 5:40 बजे प्रस्थान कर रामगंज मंडी (07:05 बजे), भवानी मंडी (07:33 बजे), शामगढ़ (08:05 बजे), चौमहला (08:38 बजे), विक्रमगढ़ आलोट (09:13 बजे) एवं नागदा (10:30 बजे) होते हुए दोपहर 12:00 बजे उज्जैन पहुंचेगी।

वापसी में गाड़ी संख्या 61623 उज्जैन से दोपहर 12:30 बजे रवाना होकर नागदा (14:10 बजे), चौमहला (15:25 बजे), शामगढ़ (15:53 बजे), भवानी मंडी (16:28 बजे) एवं रामगंज मंडी (16:58 बजे) होते हुए सायं 19:05 बजे कोटा पहुंचेगी।

श्री जैन ने बताया कि आगामी सिंहस्थ महापर्व को दृष्टिगत रखते हुए उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह सेवा विस्तार किया गया है। इससे कोटा मंडल के यात्रियों को धार्मिक, शैक्षणिक एवं व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर उज्जैन तक बिना ट्रेन बदले सीधी यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी।

साथ ही विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों, किसानों एवं आम नागरिकों को आवागमन में विशेष सुविधा प्राप्त होगी तथा नागदा जंक्शन पर बीना तथा मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख गंतव्यों के लिए बेहतर रेल संपर्क भी प्राप्त होगा।

पर्यटकों को लुभाएगा ‘हाड़ोती पर्यटन विशेषांक’: अशोक माहेश्वरी

होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान कोटा डिवीजन एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयास

कोटा। ‘हाड़ोती पर्यटन विशेषांक’ का विमोचन शनिवार को होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान, कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी, पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विकास पांडे, सहायक निदेशक संदीप श्रीवास्तव एवं स्मारिका समन्वयक ऋषभ भार्गव द्वारा किया गया।

इस अवसर पर अशोक माहेश्वरी ने बताया कि आगामी पर्यटन सीजन में 6 से 8 सितंबर तक आयोजित होने वाले राजस्थान टेंट डीलर्स महाअधिवेशन तथा 17, 18 एवं 19 सितंबर को जयपुर में आयोजित होने वाले राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट में इस विशेषांक के माध्यम से हाड़ोती क्षेत्र के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राजस्थान टेंट डीलर्स महाअधिवेशन में देशभर से 15,000 से अधिक टेंट एवं अन्य व्यवसायी भाग लेंगे, जबकि राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट में देशभर के हजारों टूर ऑपरेटर, ट्रेवल एजेंट एवं होटल व्यवसायी शामिल होंगे। इन सभी को हाड़ोती पर्यटन विशेषांक की प्रतियां भेंट की जाएंगी।

साथ ही हाड़ोती क्षेत्र के सभी होटलों में इसे उपलब्ध कराया जाएगा तथा पर्यटन सीजन में आने वाले पर्यटकों को भी इसका वितरण किया जाएगा, ताकि उन्हें हाड़ोती के पर्यटन स्थलों, भौगोलिक विशेषताओं, खान-पान एवं सांस्कृतिक विरासत की विस्तृत जानकारी प्राप्त हो सके।

माहेश्वरी ने बताया कि विशेषांक में हाड़ोती क्षेत्र के प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। इसमें चंबल रिवर फ्रंट, गड़रिया महादेव, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व सहित क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों का उल्लेख किया गया है। साथ ही हाड़ोती के प्रमुख उत्पादों एवं उनकी विशेषताओं की जानकारी भी दी गई है।

पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विकास पांडे एवं सहायक निदेशक संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान में हाड़ोती पर्यटन को नई गति मिल रही है। चंबल सफारी में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नावों की संख्या में भी विस्तार किया गया है।

वहीं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सफारी के प्रति पर्यटकों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है तथा भ्रमण करने वाले लगभग 90 प्रतिशत पर्यटकों को टाइगर की साइटिंग एवं गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि चंबल रिवर फ्रंट जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर साप्ताहिक फूड एक्सपो का आयोजन किया जाना चाहिए, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध खाद्य उत्पादकों एवं व्यंजन विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जुलाई से प्रारंभ होने वाले पर्यटन सीजन में हाड़ोती आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही कोटा महोत्सव, कोटा-हाड़ोती ट्रेवल मार्ट एवं दशहरा मेले का राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, जिससे देशभर के पर्यटक इन आयोजनों में सहभागिता कर सकें।

स्मारिका समन्वयक ऋषभ भार्गव ने बताया कि विशेषांक में हाड़ोती की वन्यजीव संपदा, चंबल नदी एवं मुकुंदरा सफारी, चंबल रिवर फ्रंट, मगरमच्छ एवं घड़ियाल संरक्षण क्षेत्र तथा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का विस्तृत परिचय दिया गया है। इसके अतिरिक्त ‘हाड़ोती विरासत यात्रा’ के अंतर्गत गढ़ पैलेस, संग्रहालयों, प्राचीन स्थापत्य कला एवं ऐतिहासिक धरोहरों का समग्र विवरण भी शामिल किया गया है।

विशेषांक में हाड़ोती धार्मिक परिपथ के अंतर्गत प्रमुख मंदिरों, तीर्थस्थलों एवं आस्था केंद्रों की जानकारी के साथ क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक मेले, पर्व एवं सांस्कृतिक उत्सवों का भी उल्लेख किया गया है।

वहीं कोटा के पारंपरिक व्यंजनों, स्थानीय मिठाइयों, प्रसिद्ध खान-पान स्थलों तथा कोटा डोरिया साड़ी, कोटा स्टोन, हस्तशिल्प एवं अन्य स्थानीय उत्पादों से संबंधित उपयोग उपलब्ध कराई गई है ।

और कितना झूंठ बोलोगे डोनाल्ड ट्रंप, 38 बार बोल चुके ईरान से डील डन, मगर नहीं हुई

नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विभिन्न ऑडियंस के लिए अलग-अलग संदेश दे रहे हैं। उनका यह रणनीतिक तरीका पेट्रोलियम बाजार को स्थिर रखने के साथ-साथ ईरान पर निरंतर दबाव बनाए रखने का माध्यम है। इसे समझने की जरूरत है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मार्च महीने से लगातार ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने वाले समझौते की घोषणा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अब तक कम से कम 38 बार ऐसा दावा किया है, लेकिन हर बार कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद 23 मार्च को एयर फोर्स वन में ट्रंप ने कहा था, ‘मेजर पॉइंट्स ऑफ एग्रीमेंट हो चुके हैं।’ मगर ईरान ने तुरंत इन वार्ताओं से इनकार कर दिया। इसके बाद ट्रंप के बयान और आक्रामक होते गए।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को डील करने के लिए बेताब बताया और चेतावनी दी कि अगर डील नहीं हुई तो ईरान के पावर प्लांट्स को नष्ट कर दिया जाएगा। यह पैटर्न अप्रैल और मई में भी जारी रहा, जहां ट्रंप ने कई बार बहुत करीब या अगले एक-दो दिन में डील होने का दावा किया।

7 अप्रैल को ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा की और कहा कि दोनों पक्ष बहुत आगे बढ़ चुके हैं, बस दो हफ्ते में एग्रीमेंट फाइनल हो जाएगा। लेकिन कोई फाइनल डील नहीं हुई। 15-17 अप्रैल के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान सब कुछ मान चुका है और डील बहुत अच्छी लग रही है। 7 मई तक ट्रंप का कहना था कि डील किसी भी दिन हो सकती है।

जानकारों का मानना है कि ट्रंप अलग-अलग ऑडियंस को अलग मैसेज दे रहे हैं। पेट्रोलियम मार्केट को शांत रखने और ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

11 जून को ट्रंप ने प्लान्ड स्ट्राइक्स रद्द करने और ग्रेट सेटलमेंट की बात कही, यहां तक कि यूरोप में वीकेंड पर साइनिंग का दावा किया, जिसमें वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को गलत बताया और कहा कि कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है। अमेरिका की अत्यधिक मांगों और नई शर्तों का जिक्र किया गया।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मध्यस्थता कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर फाइनल एग्रीड टेक्स्ट पहुंचने की बात कही, लेकिन शुक्रवार तक कोई साइनिंग नहीं हुई। ट्रंप का लेटेस्ट दावा वीकेंड या सोमवार तक डील का था, जो 38वें या 39वें असफल भविष्यवाणी के रूप में गिना जा सकता है।

इस पूरे मामले में इंसाइडर ट्रेडिंग के संदेह भी उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के ऐलानों से पहले ऑयल और स्टॉक फ्यूचर्स में बड़े पैमाने पर शॉर्ट बेट्स लगाए गए, जिससे कुछ ट्रेडर्स को करोड़ों का फायदा हुआ।

Agricultural: भारत में जीरो एग्रीकल्चर ग्रोथ का खतरा, अर्थशास्त्रियों ने दी चेतावनी

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नई दिल्‍ली। Agricultural Growth:अल नीनो को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच 2026-27 में एग्रीकल्चर GDP या तो स्थिर रहेगी या थोड़ी कम हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि किसानों ने पहले ही ज्‍यादा पानी और ज्‍यादा कमाई वाली फसलों की जगह कम पानी की जरूरत वाली, लेकिन कम कमाई देने वाली फसलों (जैसे बाजरा, ज्वार और मूंग) की खेती करने की योजना बना ली है।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर और एग्रीकल्चरल कॉस्ट्स एंड प्राइसेस कमीशन के पूर्व चेयरमैन अशोक गुलाटी ने इसे लेकर चेतावनी दी है। उन्‍होंने कहा, ‘बारिश कब और कहां कितनी होती है, इस आधार पर एग्रीकल्चर-GDP ग्रोथ लगभग जीरो या नेगेटिव भी हो सकती है।’

गुलाटी ने कहा, ‘IMD ने मजबूत अल नीनो का अनुमान लगाया है। बारिश के ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) का 90% रहने की संभावना है। इसलिए खेती के लिए यह साल काफी बुरा रहने वाला है। जाहिर है, उन किसानों के लिए भी जिनकी ज्‍यादातर कमाई खेती से होती है।’

गुलाटी को चिंता है कि 2026 का साल सूखे जैसे हालात वाला हो सकता है। वह बोले, ‘इससे निश्चित रूप से किसानों की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा। पूरी अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था खपत का एक अहम ड्राइवर है। यह ज्‍यादातर कंज्यूमर गुड्स की बिक्री का 30-40% हिस्सा है।

किसानों की आय दोगुनी करने वाली समिति के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान में कर्नाटक एग्रीकल्चरल प्राइस कमीशन के चेयरमैन अशोक दलवाई ने कहा कि कोर मॉनसून जोन में अनुमानित 94% बारिश से सोयाबीन, अरहर, उड़द और कपास जैसी फसलों में नमी की भारी कमी (मॉइस्चर स्ट्रेस) हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘लंबे समय तक सूखा पड़ने से पैदावार और किसानों की कमाई सीधे तौर पर कम हो सकती है।’

वह बोले, ‘ईंधन की बढ़ती कीमतों से जमीन तैयार करने, मशीनों से खेती करने और डीजल से चलने वाले सिंचाई पंप सेट के ऑपरेशनल खर्च बढ़ रहे हैं।’

खुदरा महंगाई का बढ़ना तय
गुलाटी का मानना है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई का बढ़ना तय है। उन्होंने कहा, ‘दालों, तिलहन, कपास, मोटे अनाज और सब्जियों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ने की संभावना है और उनकी कीमतें बढ़ेंगी।’

उन्‍होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ेगी। कुल CPI महंगाई भी 5% से ऊपर चली जाएगी, जो अक्टूबर-नवंबर तक लगभग 6% तक पहुंच सकती है।’

  • खाद, कीटनाशकों और खेती में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों की बढ़ती लागत का भी किसानों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है।
  • खाद की कमी के बीच, किसान ग्रे मार्केट से ज्‍यादा कीमत पर खाद खरीद रहे हैं।
  • साथ ही, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावट आई है।
  • इससे ट्रैक्टरों में इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमत भी बढ़ गई है।
  • उन्हें जून-सितंबर मॉनसून सीजन के दूसरे हिस्से में नमी की कमी के कारण फसल पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।

खेती का रकबा घटा रहे किसान
पश्चिमी महाराष्ट्र के भंडगांव के किसान राहुल पवार ने नहर का पानी न मिलने के डर से गन्‍ने की खेती का रकबा 60% कम करने का फैसला किया है। उन्होंने कम पानी वाली कम समय में तैयार होने वाली फसलों, जैसे बाजरा और सब्जियों की खेती करने का फैसला किया है। पवार खेती के आधुनिक तरीकों और मार्केट रिसर्च से अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्‍स से कहा, ‘मैं गन्‍ने की खेती का रकबा कम कर रहा हूं। कारण है कि मेरे खेत सिंचाई के लिए नहर के पानी पर निर्भर हैं। कम बारिश के कारण जलाशय नहीं भरेंगे। इसलिए मुझे गन्‍ने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा।’

राजस्थान में किसान धान और सोयाबीन की खेती का रकबा कम करने की योजना बना रहे हैं। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजस्थान के रामपाल जाट ने कहा, ‘हालांकि, लोग अल-नीनो के बारे में जानते हैं। लेकिन, वे पहले की तरह घबराए हुए नहीं हैं, जब सिंचाई की सुविधा न के बराबर थी।’