रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा एवं अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए दंड प्रावधान बदले

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जन विश्वास (संशोधन उपबंध) अधिनियम, 2026 के तहत रेलवे अधिनियम में संशोधन

कोटा। भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित यात्रा वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जन विश्वास (संशोधन उपबंध) अधिनियम, 2026 के अंतर्गत रेलवे अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में संशोधन किए गए हैं। जोकि 19 जून 2026) से प्रभावी हो गया है।

इन संशोधनों के लागू होने के पश्चात कई उल्लंघनों पर जुर्माना एवं दंड की राशि में वृद्धि की गई है तथा कुछ मामलों में त्वरित दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

धारा 137 –बिना टिकट यात्रा
संशोधित प्रावधानों के तहत धारा 137 के अंतर्गत बिना टिकट यात्रा अथवा यात्रा का प्रयास करने वाले मामलों में देय न्यूनतम अतिरिक्त प्रभार ₹250 से बढ़ाकर ₹500 कर दिया गया है।

धारा 138 -अनियमित यात्रा
इसके अंतर्गत अनियमित यात्रा से संबंधित मामलों में भी न्यूनतम अतिरिक्त प्रभार ₹250 के स्थान पर ₹500 निर्धारित किया गया है। भुगतान से इंकार करने पर न्यायालयीन कार्रवाई की जा सकेगी।

धारा 142 – अन्य व्यक्ति के टिकट पर यात्रा
यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य यात्री के नाम पर जारी टिकट पर यात्रा करते हुए पाया जाता है तो टिकट जब्त किया जाएगा तथा टिकट के किराये के बराबर अतिरिक्त शुल्क, न्यूनतम 500 रुपये, देय होगा।

धारा 144 – अनधिकृत फेरी, विक्रय एवं भिक्षावृत्ति
रेलवे परिसर अथवा ट्रेन में बिना अनुमति सामान बेचने, फेरी लगाने अथवा भिक्षावृत्ति करने पर 2,000 रुपये का दंड लगाया जाएगा। भुगतान से इंकार करने पर न्यायालय द्वारा 5,000 रुपये तक जुर्माना अथवा कारावास का प्रावधान है।

धारा 145 – नशे की अवस्था में उपद्रव एवं अभद्र व्यवहार
रेल परिसर में नशे की हालत में यात्रियों को परेशान करने, अश्लील भाषा का प्रयोग करने या असुविधा उत्पन्न करने पर 1,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। बार-बार उपद्रव जारी रखने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना अथवा छह माह तक कारावास का प्रावधान है।

धारा 146 – रेलवे कर्मचारी के कार्य में बाधा
रेलवे सेवक के कार्य में बाधा डालने पर अब 2,500 रुपये तक जुर्माना अथवा तीन माह तक कारावास का प्रावधान किया गया है।

धारा 147 – अनधिकृत प्रवेश (Trespass)
यात्री क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश कर बाहर जाने से इंकार करने पर 500 रुपये का दंड लगाया जाएगा। भुगतान न करने पर न्यायालय द्वारा 5,000 रुपये तक जुर्माना अथवा तीन माह तक कारावास दिया जा सकता है।

धारा 155 – गंदगी फैलाना एवं रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना
कुछ उल्लंघनों के लिए जुर्माने को बढ़ाकर 2,000 रुपये तथा अन्य मामलों में 1,000 रुपये तक किया गया है। दंड का भुगतान न करने पर न्यायालय द्वारा 3,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा 159 – रेलवे परिसर में वाहन संबंधी उल्लंघन
रेलवे परिसर में गलत पार्किंग, एकतरफा यातायात नियमों का उल्लंघन अथवा रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अवहेलना करने पर 500 रुपये का दंड लगाया जाएगा।

धारा 162 – महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे/स्थान में अनधिकृत प्रवेश
महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे, बर्थ अथवा प्रतीक्षालय में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने वाले पुरुष यात्री पर 2,500 रुपये का दंड लगाया जाएगा। भुगतान न करने पर न्यायालय द्वारा 5,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा 165 – रेलवे में प्रतिबंधित/खतरनाक वस्तुएं लाना
रेलवे में आपत्तिजनक अथवा खतरनाक वस्तुएं लाने पर न्यूनतम 10,000 रुपये का दंड तथा क्षति की भरपाई का प्रावधान किया गया है।

धारा 166 – सार्वजनिक सूचनाओं को विकृत करना
पहली बार उल्लंघन करने पर 2,000 रुपये का दंड तथा पुनरावृत्ति की स्थिति में 5,000 रुपये तक जुर्माना अथवा कारावास का प्रावधान है।

धारा 167 – धूम्रपान करना (Smoking)
उल्लंघन की स्थिति में 2,000 रुपये का दंड का प्रावधान है। भुगतान से इंकार करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य यात्रियों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बिना टिकट एवं अनियमित यात्रा पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा रेलवे परिसरों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना है। लंबे समय से अपरिवर्तित दंड राशियों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया गया है।

कोटा मंडल ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे रेल यात्रा के दौरान रेलवे नियमों का पालन करें तथा सुरक्षित, स्वच्छ और अनुशासित यात्रा वातावरण बनाए रखने में सहयोग प्रदान करें। इन संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा रेलवे परिसरों में व्यवस्था एवं सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाना है।