Stock Market: सेंसेक्स 254 अंक उछल कर 77410 पर बंद, निफ्टी 24150 के पार

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नई दिल्ली। Stock Market Closed: अमेरिका और ईरान के बीच डील और कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से गुरुवार को शेयर बाजार में तेजी रही। अंतिम कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक यानी 0.33% तेजी के साथ 77,409.98 अंक पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 82.30 अंक यानी 0.34% ऊपर 24,168 अंक पर क्लोज हुआ। शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन तेजी आई है।

सेंसेक्स के 30 में से 20 शेयर तेजी के साथ बंद हुए। इंडिगो में सबसे ज्यादा 2.8 फीसदी तेजी रही। इसे अलावा ट्रेंट, एनटीपीसी, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और पावरग्रिड में उल्लेखनीय तेजी रही।

दूसरी ओर, इन्फोसिस में सबसे ज्यादा 2.64 फीसदी गिरावट आई। इसके अलावा टेक महिंद्रा, मारुति, टीसीएस, एचसीएल टेक, कोटक बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा में गिरावट रही।

रियल्टी, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में बढ़त के चलते गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

दोपहर 1 बजे के करीब Nifty50 37.65 अंक या 0.16 फीसदी की बढ़त के साथ 24,123.35 के स्तर पर था, जबकि Sensex 162.18 अंक या 0.21 फीसदी चढ़कर 77,317.80 पर पहुंच गया।

Nifty50 इंडेक्स में Infosys, Grasim Industries और UltraTech Cement सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो Nifty MidCap इंडेक्स में 0.21 फीसदी और Nifty SmallCap इंडेक्स में 0.55 फीसदी की तेजी देखने को मिली।सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty IT में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर Nifty PSU Bank, Nifty Metal और Nifty Consumer Durables ने बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को सपोर्ट दिया।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप रहा। हालांकि, फेड के ताजा अनुमानों से यह संकेत मिला है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया के अनुसार, नीति निर्माताओं के बीच मतभेद और इस वर्ष एक और संभावित दर वृद्धि की उम्मीद यह दर्शाती है कि फेड अब भी महंगाई को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दे रहा है, भले ही इससे आर्थिक विकास की गति कुछ धीमी पड़ जाए।

वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है असर
राजेश पलविया का कहना है कि फेड का रुख अपेक्षाकृत सख्त बना हुआ है, जिससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। इसका असर वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है। ऊंचे बॉन्ड यील्ड, मजबूत अमेरिकी डॉलर और उभरते बाजारों में समय-समय पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। हालांकि, फेड ने कोई अप्रत्याशित सख्ती नहीं दिखाई है, इसलिए बाजारों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।