Reliance AGM: रिलायंस लाएगी देश का सबसे बड़ा चार अरब डॉलर का आईपीओ

0
5

मुंबई। नई देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता रिलायंस जियो और समूह के डिजिटल व्यवसाय का संचालन करने वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपने प्रस्तावित आरं​भिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से करीब 4 अरब डॉलर जुटा सकती है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ देश में अभी तक का सबसे बड़ा और समूह के उपभोक्ता उत्पाद कारोबार का पहला सार्वजनिक निर्गम होगा। जियो ने 2016 में अपना कारोबार शुरू किया था और एक दशक बाद इसका आईपीओ आने जा रहा है।

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दायर आईपीओ मसौदे (डीआरएचपी) के अनुसार जियो के आईपीओ में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। इनका निर्गम मूल्य सेबी के नियमों के मुताबिक बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के जरिये तय किया जाएगा। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार यह निर्गम आईपीओ के बाद शेयर पूंजी का लगभग 2.9 फीसदी होगा, जिससे कंपनी का बाजार मूल्य 100 अरब डॉलर से ज्यादा हो जाएगा।

उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह मूल्यांकन नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की सूचीबद्धता से ज्यादा होगा। एनएसई ने 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ लाने के लिए बुधवार को सेबी के पास मसौदा जमा कराया था।

आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की 69वीं सालाना आम बैठक में कहा, ‘यह मेरे लिए, पूरे रिलायंस परिवार के लिए और इसके लाखों शेयरधारकों के लिए भावनात्मक क्षण है।’ उन्होंने जियो आईपीओ को इस वर्ष का सबसे महत्त्वपूर्ण मूल्य सृजन पड़ाव बताया।

अंबानी ने कहा, ‘मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि इससे रिलायंस के शेयरधारकों को बहुत फायदा होगा और दूसरों को निवेश का आकर्षक मौका मिलेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि आईपीओ की प्रक्रिया को उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत संभाल रहे हैं। ये जियो में वृद्धि और मूल्य सृजन के अगले चरण की अगुआई करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘जियो की प्रस्तावित सूचीबद्धता दुनिया को दिखाएगी कि भारत वैश्विक पैमाने, वैश्विक क्षमता और वैश्विक मूल्य की प्रौद्योगिकी कंपनियां बना सकता है। मैं आपको और सभी संभावित नए निवेशकों को विश्वास दिलाता हूं कि उज्ज्वल भविष्य जियो का इंतजार कर रहा है।’

आईपीओ में मेटा, गूगल, केकेआर, सिल्वर लेक और जनरल अटलांटिक सहित मौजूदा निवेशकों में से कोई अपना शेयर नहीं बेचेंगे। इन्होंने 2020 में 20 अरब डॉलर का निवेश किया था और जियो में उनकी संयुक्त हिस्सेदारी 30.89 फीसदी है। अलग-अलग देखें तो मेटा की 9.98 फीसदी और गूगल की 7.73 फीसदी हिस्सेदारी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 फीसदी हिस्सेदारी है।

डीआरएचपी के ब्योरे के अनुसार आईपीओ से मिलने वाले पैसों में से करीब 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग कंपनी द्वारा लिए गए कर्ज के भुगतान में किया जाएगा। जियो ने मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा कैपिटल को लीड बुक रनर नियुक्त किया है। इसके साथ ही लेनदेन के लिए लगभग एक दर्जन अन्य बैंकरों को भी नियुक्त किया है।

जियो ने 2016 में मुफ्त कॉल और सबसे कम लागत वाली डेटा सेवाएं शुरू कर भारत के दूरसंचार बाजार में क्रांति ला दी थी। इससे उसे तेजी से ग्राहक बनाने में मदद मिली।

सैटकॉम और नेटिव एआई
जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने सालाना आम बैठक (एजीएम) में कहा कि कंपनी देश में कनेक्टिविटी का विस्तार करने के लिए वैश्विक कंपनियों से क्षमता किराये पर लेने के अलावा, निम्न पृथ्वी कक्षा स्तर पर अपना स्वदेशी संचार उपग्रह स्थापित करेगी, जो इसके 52.4 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले स्थलीय नेटवर्क का पूरक होगा।

आकाश अंबानी ने कहा, ‘जियो ने जमीन पर भारत को जोड़ा है। अब, हमें आकाश से भारत को जोड़ना होगा। अभी भी बहुत से दूरस्थ गांव, द्वीप और सीमावर्ती चौकियां हैं जहां जियो नेटवर्क नहीं पहुंचा है। उनके लिए उपग्रह कनेक्टिविटी सेतु का काम करेगा। जियो भारत के लिए संप्रभु निम्न पृथ्वी कक्षा उपग्रह के विकास का आकलन कर रहा है।’

उन्होंने कहा कि जियो भारत में अपना ग्राउंड स्टेशन बुनियादी ढांचा भी बना रही है जो कंपनी के साथी उपग्रह समूहों के साथ-साथ अपने खुद के भविष्य के उपग्रहों को सपोर्ट करेगा, जिससे अंतरिक्ष से जमीन तक एक एंड-टु-एंड सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम तैयार होगा।

बीते एक दशक में जियो कनेक्टिविटी, क्लाउड सेवाओं, उद्यम समाधानों और एआई तक व्यापक डिजिटल प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हुई है। रिलायंस ने तेजी से जियो को अपनी एआई रणनीति के केंद्र में रखा है। अंबानी ने कहा कि कंपनी इस साल के अंत में अपने सभी ग्राहकों के लिए सीधे नेटवर्क में निर्मित एआई एजेंट पेश करेगी।

उन्होंने कहा, ‘हर दिन, जियो 20 अरब मिनट वॉयस का वहन करती है और हम दुनिया के सबसे बड़े वॉयस कैरियर में से एक हैं। हम सीधे जियो नेटवर्क के अंदर एआई विकसित कर रहे हैं। उसे डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी और न ही किसी नंबर को जोड़ने की दरकार होगा। यह प्रत्येक जियो ग्राहक के लिए हर भारतीय भाषा में उपलब्ध होगा।’

जियो की प्राथमिकताएं
अंबानी ने जियो के विस्तार के अगले चरण के लिए पांच रणनीतिक प्राथमिकताओं की रूपरेखा तैयार की है जिसमें 5जी नेटवर्क के विस्तार की शुरुआत हो गई है। इसका लक्ष्य 2030 तक इसके पूरे 52.4 करोड़ ग्राहक आधार को 5जी में लाना है। 31 मार्च, 2026 तक इसके पास 26.85 करोड़ 5जी ग्राहक थे। जियो का लक्ष्य जियोएयर फाइबर के माध्यम से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड का विस्तार करना भी है। 90 फीसदी से अधिक इन्स्टॉलेशन 24 घंटे के भीतर पूरे हो जाते हैं और प्रतिदिन 60 हजार तक होम ब्रॉडबैंड जुड़ रहे हैं।

कंपनी सेट-टॉप बॉक्स के माध्यम से वितरित क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा जियोपीसी के माध्यम से छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों को डिजिटलीकरण करने के अपने प्रयासों को जारी रखेगी और उपभोक्ता सेवाओं, नेटवर्क संचालन और ग्राहक सहायता में एआई के उपयोग का विस्तार करेगी।