कोटा। कोटा सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक सोमवार को प्रधान कार्यालय में बैंक अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में वर्ष 2026-27 के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई तथा मुख्यमंत्री विशेष एकमुश्त समझौता योजना 2026-27 को लागू करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही नौ नए सदस्यों को बैंक से जोड़ा गया और 12 किसानों को कुल 30.15 लाख रुपये के कृषि ऋण स्वीकृत किए गए। बैठक में सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार राजेश कुमार मीणा, बैंक उपाध्यक्ष भंवर सिंह हाड़ा, संचालक निहाल सिंह राठौड़, डॉ. प्राची दीक्षित, राधाकिशन मीणा, मुकेश मीणा, जगदीश प्रसाद मीणा, बाबूलाल बैरवा, मांगीलाल मेहरा तथा बैंक सचिव ऋतु सपरा सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में 11 फरवरी 2026 की पिछली बैठक की कार्यवाही तथा उसके बाद लिए गए अध्यक्षीय प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। शाखा इटावा के आठ एवं शाखा रामगंजमंडी के एक सदस्य सहित कुल नौ नए सदस्यों को स्वीकृति दी गई।
ऋण स्वीकृति के तहत सुल्तानपुर शाखा के एक किसान को 2 लाख रुपये, लाडपुरा शाखा के दो किसानों को 6.30 लाख रुपये, रामगंजमंडी शाखा के एक किसान को 6 लाख रुपये तथा इटावा शाखा के आठ किसानों को 15.85 लाख रुपये के ऋण मंजूर किए गए।
बैठक में मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। योजना के तहत 395 किसानों को राज्य सरकार द्वारा 10.25 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की गई।
किसानों से 4.62 करोड़ रुपये की नकद वसूली कर कुल 14.87 करोड़ रुपये की वसूली सुनिश्चित की गई। इस उपलब्धि पर बैंक अध्यक्ष ने बैंक प्रशासन, शाखा प्रबंधकों एवं फील्ड स्टाफ की सराहना करते हुए कोटा जोन के प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें बधाई दी।
संचालक मंडल ने राज्य सरकार द्वारा 30 जून 2026 तक लागू की गई मुख्यमंत्री विशेष एकमुश्त समझौता योजना 2026-27 का स्वागत किया तथा इस पहल के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओमबिरला और राजस्थान के सहकारिता मंत्री गोतम कुमार दक के प्रति आभार व्यक्त किया।
बैठक में बताया गया कि 31 मार्च 2026 की स्थिति में बैंक को 68.33 लाख रुपये का लाभ हुआ है तथा बैंक के एनपीए में 26.62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बैंक अध्यक्ष ने इसके लिए जिले के किसानों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
बैंक सचिव ऋतु सपरा ने कहा कि राज्य सरकार की 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना के अंतर्गत वितरित अवधिपार दीर्घकालीन कृषि ऋणों के निस्तारण का यह किसानों के लिए अंतिम अवसर है।
उन्होंने चेतावनी दी कि योजना का लाभ नहीं लेने वाले ऋणियों के विरुद्ध सहकारी अधिनियम एवं नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी तथा उन्हें भविष्य की अनुदान एवं राहत योजनाओं से वंचित रखा जा सकता है। ऐसे ऋणियों को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ की श्रेणी में चिह्नित कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

