NEET पेपर लीक पर राहुल गांधी के कोटा से शंखनाद का क्या है सियासी गणित, जानिए

0
7

कोटा। Rahul Gandhi politics on paper leak case: नीट पेपर लीक और देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ के मुद्दे पर सियासत का पारा सातवें आसमान पर है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस आंदोलन की कमान संभाल रहे हैं और इसकी शुरुआत आगामी 17 जून 2026 को राजस्थान के कोटा शहर से होने जा रही है।

राजनीति के जानकारों के बीच इस समय सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर इस देशव्यापी आंदोलन के शंखनाद के लिए कोटा को ही क्यों चुना गया? आइए समझते हैं राहुल गांधी के इस ‘कोटा’ दांव के पीछे का असली सियासी और सामाजिक गणित।

मिनी इंडिया कोटा
कोटा सिर्फ राजस्थान का एक शहर नहीं, बल्कि देश की ‘कोचिंग कैपिटल’ और एक ‘मिनी इंडिया’ है। यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और झारखंड समेत देश के कोने-कोने से आए करीब 2 से 3 लाख छात्र एक साथ रहकर नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

नीट पेपर लीक का सबसे गहरा और सीधा दर्द इन्हीं बच्चों ने झेला है। राहुल गांधी अगर दिल्ली में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते, तो वह सिर्फ एक राजनीतिक बयान होता। लेकिन कोटा में छात्रों के बीच खड़े होकर बोलना, सीधे देश के हर उस परिवार तक अपनी आवाज पहुंचाना है जिसका बच्चा डॉक्टर बनने का सपना लेकर घर से दूर रहता है।

सीधे निशाना
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए उस मिडिल क्लास के दिलों में जगह बनाना चाहती है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा का बड़ा समर्थक रहा है। बच्चों की कोचिंग, महंगे हॉस्टल और परीक्षा की बढ़ती लागत से यह मध्यम वर्ग पहले से ही आर्थिक दबाव में है। ऊपर से जब पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। राहुल गांधी इसी गुस्से को राजनीतिक जमीन में बदलना चाहते हैं।

छात्रों के बीच विश्वसनीयता
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि राहुल गांधी युवाओं के लिए एक विश्वसनीय आवाज बनकर उभरे हैं। इसके पीछे कोटा का एक पुराना इतिहास भी है। दिसंबर 2022 में अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने कोटा के कोचिंग छात्रों के साथ विशेष संवाद किया था। तब उन्होंने बच्चों के मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव को समझा था। अब दोबारा कोटा आकर वह छात्रों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि ‘मैं तब भी तुम्हारे साथ था, और आज तुम्हारी लड़ाई में भी साथ खड़ा हूं।’

राजस्थान की सियासत पर नजर
राजस्थान में इस समय भाजपा की सरकार है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस आंदोलन को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजस्थान की धरती से इस बड़े आंदोलन की शुरुआत करके कांग्रेस राज्य की भजनलाल सरकार को भी बैकफुट पर धकेलना चाहती है और युवाओं को अपनी ओर खींचना चाहती है।

राहुल गाँधी का पूरा सियासी रूटमैप
कोटा से युवाओं के इस गुस्से की चिंगारी को सुलगाने के बाद कांग्रेस इसे उन राज्यों में ले जाएगी जो छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं के बड़े गढ़ माने जाते हैं।

  • 10 जुलाई: प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) — जहां यूपीपीएससी और अन्य परीक्षाओं के छात्र अक्सर सड़कों पर होते हैं।
  • 11 जुलाई: पटना (बिहार) — जहां रेलवे और नीट परीक्षाओं को लेकर युवाओं का आक्रोश सबसे तीखा रहता है।
  • 14 जुलाई: नई दिल्ली — जहां मानसून सत्र के ठीक पहले संसद के मुहाने पर सरकार को घेरा जाएगा।

साफ है कि राहुल गांधी का ‘कोटा’ से आंदोलन शुरू करने का फैसला कोई सामान्य घटना नहीं है। यह युवाओं, उनके परिवारों और देश की शिक्षा व्यवस्था के बहाने केंद्र सरकार को सीधे उसके सबसे मजबूत गढ़ में घेरने की एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी है।