Sunday, July 5, 2026
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कृषि सुधारों को लेकर राजस्थान सरकार सख्त, बीमा कंपनियों पर कसी नकेल

सोशल मीडिया और एआई के जरिए किसानों तक पहुँचेगी जानकारी: कृषि आयुक्त

कोटा। राजस्थान के कृषि आयुक्त (एग्रीकल्चर कमिश्नर) नरेश गोयल ने मीडिया से बात करते हुए कृषि विभाग की नई प्राथमिकताओं और फसल बीमा नीतियों में किए गए क्रांतिकारी बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार राजस्थान को जैविक कृषि का मॉडल राज्य बनाने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब कृषि विभाग सूचनाओं के त्वरित प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेगा।

​कृषि आयुक्त ने बताया कि विभाग ने हर जिले के कृषि अधिकारी को अपना आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और जानकारियां किसानों तक तेजी से पहुँच सकें।

इसके साथ ही, प्रचार-प्रसार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने को कहा गया है। किसानों को जैविक उत्पादों की प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और सर्टिफिकेशन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। गोयल ने कहा कि जब किसानों को जैविक सर्टिफिकेट घर बैठे मिलने लगेगा, तब इस क्षेत्र में बहुत बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। इसके अलावा, ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किसानों को उचित स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा।

बीमा कंपनियों को सख्त चेतावनी
​फसल बीमा नीति में किए गए बड़े बदलावों को साझा करते हुए कृषि आयुक्त ने कहा कि नई नीति में प्रीमियम राशि में भारी कटौती की गई है। उन्होंने बीमा कंपनियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि साल 2018 से बकाया फसल बीमा की राशि किसानों को ब्याज सहित दिलाई जाएगी। नई बीमा पॉलिसी के तहत यदि कंपनियां समय पर सर्वे नहीं करती हैं, तो उन पर भारी पेनल्टी लगाई जाएगी। कई डिफॉल्टर कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई चल रही है। जो कंपनियां पुराने पेमेंट जमा नहीं कराएंगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई होगी। अब हर जिले में बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों का बैठना अनिवार्य कर दिया गया है।

​रासायनिक खाद पर नियंत्रण और ‘खेत बचाओ अभियान’
​नरेश गोयल ने कहा कि रासायनिक खादों को नियंत्रित करना अब बेहद जरूरी हो गया है। सरकारी अभियानों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से प्राकृतिक खेती के चिंतन का बीज बोया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जैविक पर हो रहे कृषि रिसर्च को क्यूवैज्ञानिक तथ्यों के साथ सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाएँ। अंत में, उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ की समीक्षा करते हुए सभी उपस्थित अधिकारियों और किसानों को जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया।

रासायनिक खेती की अंधी दौड़ से बढ़ा कैंसर का खतरा: कृषि आयुक्त गोयल

श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान केंद्र पर राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती सेमिनार

कोटा। कोटा के जाखोड़ा स्थित ‘श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र’ में शनिवार को एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। गोयल ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा आयोजित इस सेमिनार में राजस्थान कृषि विभाग के आला अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान कृषि विभाग के आयुक्त (एग्रीकल्चर कमिश्नर) नरेश गोयल ने की। निदेशक ताराचंद गोयल ने बताया कि सेमिनार का मुख्य उद्देश्य गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, यूरिया व रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाना और राजस्थान को जैविक कृषि के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करना रहा।

​अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि आयुक्त नरेश गोयल ने रासायनिक खेती के गंभीर दुष्परिणामों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यूरिया और रासायनिक कीटनाशकों की अंधी दौड़ के कारण आज हर घर में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं और शहरों में बड़े-बड़े कैंसर अस्पताल खोलने पड़ रहे हैं। हमने अधिक उत्पादन की चाह में बहुत कुछ खो दिया है। एग्रीकल्चर कमिश्नर गोयल ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि मिट्टी निर्जीव नहीं है, बल्कि उसमें भी जीवन है। धरती को माता मानने वाले देश में जहर डालना तुरंत बंद होना चाहिए।

​उन्होंने घोषणा की कि राजस्थान कृषि विभाग के इतिहास में यह पहला मौका है जब सभी वरिष्ठ अधिकारी एक जगह एकत्र होकर जैविक खेती पर संवाद कर रहे हैं। श्रीरामशान्ताय केंद्र के कार्यों को प्रमाणिक बताते हुए उन्होंने कहा कि विभाग जल्द ही इस संस्थान के साथ एक एमओयू साइन करेगा, ताकि यहाँ के सफल रिसर्च को खेतों तक पहुँचाया जा सके। साथ ही, जैविक उत्पादों के विपणन के लिए दुर्गापुरा के बाद अब जयपुर के पंत भवन में भी दुकानें आवंटित की जाएंगी।

​’गुणवत्ता’ पर ध्यान देने की आवश्यकता
​कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि देश ने अब तक खाद्यान्न की मात्रा (क्वांटिटी) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया था, लेकिन आज के समय की मांग गुणवत्ता (क्वालिटी) में सुधार करने की है। उन्होंने कहा कि जो एग्रो-केमिकल्स कभी दवाओं के रूप में शुरू हुए थे। आज अत्यधिक उपयोग के कारण जहर बन चुके हैं। संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए जैविक व प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है। इस दिशा में कोटा कृषि विश्वविद्यालय और गोयल ग्रामीण विकास संस्थान मिलकर संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।

​गौ-आधारित खेती का संकल्प
​गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के अध्यक्ष ताराचंद गोयल ने संस्थान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आहार में आए बदलाव और दूषित मिट्टी के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं। जैविक और प्राकृतिक कृषि अपनाने से रासायनिक खेती की तुलना में लागत में 30% तक की कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि जब गांव का किसान समृद्ध होगा, तभी भारत आत्मनिर्भर बनेगा। गांव में ही कृषि आधारित उद्योग-धंधे लगने से पलायन रुकेगा और समृद्धि आएगी। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि दूषित अन्न ही बीमारियों की जड़ है, जिसमें सुधार करके ही भारत को निरोगी बनाया जा सकता है। ​सेमिनार के दौरान उपस्थित कृषि अधिकारियों ने संस्थान के मॉडल फार्म का अवलोकन किया।

किसानों का जीवंत संवाद और अधिकारियों के महत्वपूर्ण सुझाव

  • कृषक संवाद सत्र में प्रगतिशील किसानों ने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित ‘सरल कम्पोस्ट विधि’, ‘गोमूत्र-चूने का फॉर्मूला’ और ‘सरल संजीवनी (ताजा गोबर पद्धति)’ के प्रयोग से बिना किसी रसायन के पहले वर्ष से ही बंपर उत्पादन मिल रहा है। इससे किसानों की लागत आधी रह गई है और उत्पादों के दाम भी अच्छे मिल रहे हैं।
  • विभिन्न खंडों से आए कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक और संयुक्त निदेशकों ने भी अपने विचार रखे। निरंजन राठौर (अतिरिक्त निदेशक, उदयपुर खंड) ने कृषि पर्यवेक्षकों व सहायक कृषि अधिकारियों को यहाँ प्रशिक्षण दिलाने की बात कही।
  • सुधीर वर्मा (संयुक्त निदेशक, उदयपुर खंड) ने संस्थान के पर्यावरण-मित्र फार्म डिजाइन की सराहना करते हुए इसे उदयपुर के कलस्टरों में लागू करने की इच्छा जताई।
  • टोंक खंड के संयुक्त निदेशक वीरेंद्र सिंह सोलंकी और जोधपुर खंड के संयुक्त निदेशक एसएन गढ़वाल ने भी इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी सुझाव साझा किए।

सेमिनार में राजस्थान कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक (विस्तार), मुख्यालय के समस्त संयुक्त निदेशक (रसायन/आदान/ATC) और कोटा व जयपुर खंड के सहायक निदेशकों सहित कुल 120 अधिकारियों ने सहभागिता की।

संस्थान के मुख्य प्रबंधक पवन टाक ने सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से माल्यार्पण व दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर गोयल प्रोटीन्स लिमिटेड, कोटा के निदेशक अजय गोयल ने पधारे हुए सभी वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्नदाताओं का आभार व्यक्त किया और धरती माता को जहर मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।

Kota Mandi: मिलर्स की लिवाली से कोटा मंडी में सरसों और चना तेज बिका

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को कमजोर उठाव से लहसुन 200 रुपये और मूंग 100 रुपये मंदा रहा। मिलर्स की लिवाली से सरसों और चना 50 रुपये तेज रहा। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब 30000 कट्टे और लहसुन की 9000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे

गेहूं नया मिल लस्टर 2450 से 2500, गेहूं एवरेज टुकड़ी 2500 से 2600, बेस्ट टुकड़ी 2600 से 2700, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 6000, बाजरा 1800 से 2250, मक्का लाल 1700 से 1900, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ 2100 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3601, धान (1509) 3400 से 4475, धान (1847) 3200 से 4201, धान (1718-1885) 3800 से 4700, धान (पूसा-1) 3000 से 4300, धान (1401-1886) 3600से 4330, धान दागी 1500 से 3300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 6000 से 6700, सोयाबीन बेस्ट क्वालिटी 6700 से 6841, सरसो 7000 से 7651,अलसी 8000 से 8750, तिल्ली 7000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 7150, उड़द 4500 से 7000, चना देशी 5300 से 5650, चना मौसमी नया 5100 से 5450, चना पेप्सी 5100 से 5601, चना डंकी पुराना 4000 से 4600, चना काबुली 5500 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल।

लहसुन 5500 से 18500, ऊटी लहसुन 16000 से 20000, मैथी 5800 से 6600, धनिया बादामी 12500 से 14000, धनिया ईगल 14000 से 15000 धनिया रंगदार 15000 से 16500 रुपये प्रति क्विंटल।

    उड़े देश का आम नागरिक’ के विजन को मिल रही मजबूती: पीएम मोदी

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का किया उद्घाटन

    जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संशोधित उड़ान योजना का भी शुभारंभ किया।

    उल्लेखनीय है कि 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल 23 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है तथा इसकी प्रतिवर्ष यात्री क्षमता 20 लाख है। राजस्थान की समृद्ध विरासत से प्रेरित वास्तुकला से निर्मित यह टर्मिनल भवन अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित है। साथ ही, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और हरित भवन निर्माण पद्धतियों जैसी विशेषताओं के साथ सतत विकास टर्मिनल के डिजाइन के अभिन्न अंग हैं। नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन से बेहतर एयर कनेक्टिविटी के साथ ही पश्चिमी राजस्थान में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

    प्रधानमंत्री द्वारा ‘उड़े देश का आम नागरिक’ के विजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई संशोधित उड़ान योजना में रीजनल एयर कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के तहत 28 हजार 840 करोड़ रुपये के आवंटन से अगले 10 वर्षों में विमानन आधारित विकास को गति दी जाएगी। इससे देश भर में व्यापक और स्थायी कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी तथा भारतीय विमानन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

    100 हवाई अड्डों के विकास पर जोर
    उल्लेखनीय है कि संशोधित उड़ान योजना के तहत देश भर में विमानन अवसंरचना के विस्तार के लिए मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही, दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में पहुंच संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए योजना में 200 आधुनिक हेलीपैड का विकास भी प्रस्तावित है। इस योजना के तहत एयरलाइन कंपनियों को 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वायबिलिटी गैप फंडिंग सहायता जारी रखी जाएगी, जिससे क्षेत्रीय परिचालन की निरंतरता सुनिश्चित हो सकेगी।

    कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायड़ू, केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केन्द्रीय नागर विमानन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

    देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण

    -चूरू-सादुलपुर तथा चूरू-रतनगढ़ रेल दोहरीकरण परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित
    -राजस्थान को 1 लाख 5 हजार करोड़ से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की सौगात

    पचपदरा/जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को बालोतरा के पचपदरा में आयोजित कार्यक्रम में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण किया और जयपुर मेट्रो फेज-2 (प्रहलादपुरा से टोडी मोड) की आधारशिला रखी।

    प्रधानमंत्री ने राजस्थान को कुल 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान प्रदेश के लगभग 54 हजार युवाओं को अभिनंदन पत्र प्रदान किए गए।

    प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया जो देश और प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड तथा राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित यह 9 एमएमटीपीए क्षमता वाला ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 79 हजार 459 करोड़ के निवेश से स्थापित किया गया है। इस परियोजना ने 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल क्षमता के साथ रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एकीकृत किया है।

    पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
    राजस्थान के क्रूड तथा आयातित क्रूड के मिश्रण को प्रोसेस्ड करने के लिए यह रिफाइनरी अत्याधुनिक सुविधाओं से डिजाइन की गई है। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 बेहद उच्चस्तरीय है तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और संधारणीयता के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप है। यह रिफाइनरी कम कॉम्प्लेक्स भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने तथा औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क के विकास के लिए एक आधारभूत उद्योग के रूप में कार्य करेगा, जिससे डाउनस्ट्रीम उद्योगों एवं अनुषंगी क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

    जयपुर की जीवनरेखा बनेगा 41 किमी लम्बा मेट्रो कॉरिडोर
    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना फेज-2 का शिलान्यास किया। इसके अंतर्गत प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर सीतापुरा से लेकर वीकेआईए तक के औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्रों को जोड़ते हुए जयपुर की जीवनरेखा के रूप में कार्य करेगा। इस कॉरिडोर में कुल 36 स्टेशन होंगे और परियोजना की कुल लागत 13 हजार 37 करोड़ रुपये से अधिक है। इस परियोजना का क्रियान्वयन राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जो भारत सरकार और राजस्थान सरकार की 50ः50 साझेदारी वाली संयुक्त कंपनी है।

    यह फेज-2 कॉरिडोर सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआईए, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबाड़ी तथा विद्याधर नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इसमें एयरपोर्ट क्षेत्र में भूमिगत स्टेशन भी शामिल होगा। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन लिमिटेड ने परियोजना के फेज-2 के पहले पैकेज में 918.04 करोड़ से अधिक की लागत के कार्यों के लिए एलओए (स्वीकृति पत्र) जारी कर दिया है।

    नवचयनित युवाओं को मिले अभिनंदन पत्र
    इस अवसर पर लगभग 54 हजार पदों पर नवचयनित युवाओं को अभिनंदन पत्र दिए गए। इसमें प्रशासनिक सुधार विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शिक्षा विभाग के प्राध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक, ऊर्जा विभाग के तकनीशियन, ऑपरेटर एवं प्लांट अटेण्डेंट, गृह विभाग के जेल प्रहरी, पंचायतीराज विभाग के ग्राम विकास अधिकारी, परिवहन विभाग के बस कंडक्टर, उच्च शिक्षा विभाग के सहायक आचार्य, कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के समूह अनुदेशक, सर्वेयर, सहायक शिक्षुता सलाहकार, आयोजना विभाग के सहायक सांख्यिकी अधिकारी एवं अनुसंधान सहायक, कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी व कृषि अधिकारी तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के एनालिस्ट कम प्रोग्रामर शामिल हैं।

    उत्तर-पश्चिम राजस्थान की रेल कनेक्टिविटी हुई अधिक सुदृढ़
    प्रधानमंत्री ने लगभग 892 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चूरू-सादुलपुर (58 किमी) तथा चूरू-रतनगढ़ (46 किमी) रेल दोहरीकरण परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं के शुरू होने से चूरू जिले सहित उत्तर-पश्चिम राजस्थान की रेल संपर्क व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इन परियोजनाओं से रेल लाइन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे यात्री एवं मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध हो सकेगा। साथ ही, रेल यातायात पर दबाव कम होगा तथा ट्रेनों की समयपालन क्षमता में भी सुधार आएगा।

    9079 करोड़ की ऊर्जा परियोजनाओं का उद्घाटन
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर एसजेवीएन की एक हजार मेगावाट स्थापित क्षमता की बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना और एनएचपीसी की 300 मेगावाट के करणीसर सौर ऊर्जा संयंत्र (बीकानेर) का उद्घाटन किया। एनएचपीसी की परियोजना का निर्माण लगभग 1 हजार 677 करोड़ रुपये और एसजेवीएन की परियोजना का निर्माण 5 हजार 492 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए इन परियोजनाओं में स्वदेश निर्मित सोलर मॉड्यूल्स तथा स्वदेशी सोलर सेल्स का उपयोग किया गया है। इन परियोजनाओं से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने के साथ ही पर्यावरणीय स्थिरता तथा भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को बल मिलेगा।

    प्रधानमंत्री ने इस दौरान राजस्थान आरईजेड फेज-3 भाग-एच से विद्युत निकासी के लिए 1 हजार 910 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन एवं राजस्थान आरईजेड फेज-4 भाग-एफ की 530 सर्किट किमी लंबी विद्युत प्रसारण प्रणाली का शिलान्यास भी किया। जून 2027 तक पूरी होने वाली भाग-एफ की परियोजना के अंतर्गत 2 हजार 735 करोड़ रुपये की लागत से बाड़मेर-1 पूलिंग स्टेशन से सिरोही पूलिंग स्टेशन तथा फतेहगढ़-3 पूलिंग स्टेशन तक 530 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, बाड़मेर-1 पूलिंग स्टेशन पर 5,500 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता का सब-स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इन प्रसारण प्रणालियों से राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी सुगम बनेगी और प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति में सहायता मिलेगी।

    जोधपुर रिंग रोड (करवड़-डांगियावास) के फोर लेन का लोकार्पण
    प्रधानमंत्री ने लगभग 737 करोड़ रुपये की लागत से तैयार एनएच-125 ए जोधपुर रिंग रोड सेक्शन-2 (करवड़-डांगियावास) के 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई के फोर लेन कार्य का लोकार्पण किया। इससे जोधपुर के आसपास क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यातायात सुगम एवं सुरक्षित होगा।

    हथिनीकुंड बैराज से यमुना का जल आएगा राजस्थान
    इस अवसर पर हाल ही सम्पन्न हुए यमुना जल परियोजना के समझौते से संबंधित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इस परियोजना को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) किया गया है। इस समझौते से हरियाणा और राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग 3 दशक पुरानी समस्या का समाधान हुआ है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

    लगभग 34 हजार 102 करोड़ रुपये की इस परियोजना से राजस्थान की जल सुरक्षा सुदृढ़ होगी। हथिनीकुंड बैराज से 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइनों द्वारा चूरू, सीकर, झुंझुनूं सहित अन्य जल क्षेत्रों को पेयजल की दीर्घकालिक पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। वहीं, ऊपरी यमुना बेसिन की प्रमुख भंडारण परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सिंचाई सहित अन्य आवश्यकताओं को भी चरणबद्ध रूप से पूरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा सहित राज्य सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

    सूरत–छपरा एवं अहमदाबाद–दरभंगा ट्रेनें कोटा एवं सवाई माधोपुर होकर चलेंगी

    कोटा। उत्तर मध्य रेलवे के ललितपुर जंक्शन स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग कार्य के लिए लिए गए ट्रैफिक ब्लॉक के कारण गाड़ी संख्या 09065/09066 सूरत–छपरा जंक्शन–सूरत तथा 09465/09466 अहमदाबाद जंक्शन–दरभंगा जंक्शन–अहमदाबाद जंक्शन विशेष ट्रेनों का मार्ग अस्थायी रूप से परिवर्तित किया गया है। ये सभी गाड़ियाँ निर्धारित मार्ग के स्थान पर कोटा एवं सवाई माधोपुर होकर संचालित होंगी।

    वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि गाड़ी संख्या 09065 सूरत–छपरा जंक्शन विशेष 14 जुलाई को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान कर निर्धारित मार्ग के स्थान पर नागदा जंक्शन–कोटा–सवाई माधोपुर–बयाना–इदगाह आगरा जंक्शन–टूंडला जंक्शन–गोविंदपुरी–प्रयागराज जंक्शन होकर गंतव्य तक जाएगी। इस दौरान यह गाड़ी उज्जैन जंक्शन, सीहोर, संत हिरदाराम नगर, बीना जंक्शन एवं वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन स्टेशन पर नहीं रुकेगी।

    गाड़ी संख्या 09066 छपरा जंक्शन–सूरत विशेष 15 जुलाई को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान कर प्रयागराज जंक्शन–गोविंदपुरी–टूंडला जंक्शन–इदगाह आगरा जंक्शन–बयाना–सवाई माधोपुर–कोटा–नागदा जंक्शन होकर संचालित होगी। इस दौरान यह गाड़ी वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन, बीना जंक्शन, संत हिरदाराम नगर, सीहोर एवं उज्जैन जंक्शन स्टेशन पर नहीं रुकेगी।

    अहमदाबाद–दरभंगा ट्रेन: गाड़ी संख्या 09465 अहमदाबाद जंक्शन–दरभंगा जंक्शन विशेष 17 जुलाई को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान कर नागदा जंक्शन–कोटा–सवाई माधोपुर–बयाना–इदगाह आगरा जंक्शन–टूंडला जंक्शन–गोविंदपुरी–प्रयागराज जंक्शन होकर गंतव्य तक जाएगी। इस दौरान यह गाड़ी उज्जैन जंक्शन, गुना जंक्शन, बीना जंक्शन एवं वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन स्टेशन पर नहीं रुकेगी।

    गाड़ी संख्या 09466 दरभंगा जंक्शन–अहमदाबाद जंक्शन विशेष 18 जुलाई को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान कर प्रयागराज जंक्शन–गोविंदपुरी–टूंडला जंक्शन–इदगाह आगरा जंक्शन–बयाना–सवाई माधोपुर–कोटा–नागदा जंक्शन होकर संचालित होगी। इस दौरान यह गाड़ी वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन, बीना जंक्शन, गुना जंक्शन एवं उज्जैन जंक्शन स्टेशन पर नहीं रुकेगी।

    रेल प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि यात्रा से पूर्व अपनी ट्रेन के समय, मार्ग एवं परिचालन की जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in अथवा एनटीईएस (NTES) ऐप पर अवश्य प्राप्त कर लें।

    युद्ध के बीच भी देश में नहीं आने दिया ऊर्जा संकट: पीएम मोदी ने गिनाईं उपलब्धियां

    बालोतरा में 79,459 करोड़ रुपये की लागत की पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण

    जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान दौरे के दौरान जोधपुर के नए एयरपोर्ट टर्मिनल और करीब 79,459 करोड़ रुपये की लागत से विकसित पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण किया। इस परियोजना से प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। चलिए जानते हैं पीएम मोदी के भाषण की पांच बड़ी बातें।

    आज का दिन पूरे मरुधरा के लिए ऐतिहासिक रहा। यह दिन प्रदेश के लिए विकास की नई सौगातें लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राजस्थान दौरे के दौरान जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल और करीब 79,459 करोड़ रुपये की लागत से विकसित पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण किया।

    इसके साथ ही रिफाइनरी से जुड़े पेट्रोकेमिकल जोन के विकास की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। इस रिफाइनरी से निकलने वाले उप-उत्पादों (बाय-प्रोडक्ट्स) पर आधारित प्लास्टिक उद्योग स्थापित किए जाएंगे।

    बता दें कि नया एयरपोर्ट टर्मिनल ‘उड़ान’ परियोजना के तहत लगभग 480 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इससे मारवाड़ की समृद्ध विरासत और आधुनिक बुनियादी ढांचे के इस अनूठे संगम में देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

    पचपदरा रिफाइनरी से जुड़ी खास बातें
    करीब 79,459 करोड़ रुपये की लागत से विकसित पचपदरा रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है। इसके निर्माण के लिए 1.5 करोड़ घन मीटर मिट्टी की खुदाई की गई, जो लगभग 15 हजार ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूलों को भरने के बराबर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह खुदाई मिस्र के गीजा पिरामिड के निर्माण में हुई खुदाई से लगभग छह गुना अधिक है। चलिए यहां बता रहे हैं आज के कार्यक्रम से जुड़ी पीएम मोदी के भाषण की पांच बड़ी बातें।

    राजस्थान की धरती ने हमें स्वाभिमान की सीख दी
    पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजस्थान की धरती के कण-कण ने हमें स्वाभिमान की सीख दी है। यह रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बनेगी। आज का दिन इस बात का साक्षी है कि भाजपा की सरकारें केवल परियोजनाओं का शिलान्यास करके उन्हें अधूरा नहीं छोड़तीं, बल्कि उन्हें समय पर पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करती हैं। दो माह पहले यहां हुई दुर्घटना के बावजूद इतनी जल्दी परियोजना का कार्य पूरा होना बड़ी उपलब्धि है। नया भारत अपने संकल्पों से न पीछे हटता है और न ही अपनी विकास यात्रा की रफ्तार कम करता है। आज राजस्थान विकास के कई नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

    छोटे-छोटे क्षेत्रों को भी हवाई सेवाओं से जोड़ा जाएगा
    प्रधानमंत्री ने कहा कि जोधपुर का नया एयरपोर्ट टर्मिनल सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह टर्मिनल मारवाड़ के विकास को नई गति देगा। उन्होंने बताया कि आज जोधपुर से ही नई उड़ान योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत दूर-दराज के छोटे-छोटे क्षेत्रों को भी हवाई सेवाओं से जोड़ा जाएगा। साथ ही शेखावाटी क्षेत्र के जल संकट के समाधान के लिए भी व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज राजस्थान के 54 हजार युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए हैं।

    युद्ध के बीच नहीं प्रभावित होने दी घरेलू गैस की कामतें
    पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया। लेकिन 21वीं सदी के नए भारत का संकल्प इस संकट पर भारी पड़ा। हमने हर स्तर पर सही और समयबद्ध फैसले लिए, संकट का सटीक आकलन किया और प्रभावी रणनीति तैयार की। उन्होंने कहा कि इन संवेदनशील निर्णयों का महत्व आने वाला इतिहास अवश्य दर्ज करेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। युद्ध और तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था। ऐसे समय में राजस्थान की धरती से मिली संघर्ष की प्रेरणा के साथ सरकार ने देश में ही एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया।

    उन्होंने बताया कि सिर्फ सात दिनों में 54 हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त एलपीजी का उत्पादन बढ़ाया गया। साथ ही एलपीजी पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए बड़ी संख्या में पीएनजी कनेक्शन दिए गए। लगभग 11 लाख नए पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि समय पर यह कदम नहीं उठाए जाते तो घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमत संकट के दौरान 2,000 रुपये तक पहुंच सकती थी, लेकिन सरकार ने प्रभावी प्रबंधन के जरिए इसकी कीमत करीब 950 रुपये के आसपास बनाए रखी।

    हमने किसानों को 300 रुपये में दी यूरिया
    पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के कारण खाद का गंभीर संकट पैदा हो गया था। एक बोरी यूरिया की कीमत 3,000 रुपये से भी ऊपर पहुंच गई थी। इसके बावजूद हमने देश के किसानों को यूरिया मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराया। इसके लिए सरकार ने खजाने से लाखों करोड़ रुपये की सब्सिडी दी। आयात के रास्ते भी बंद थे। दुनिया के कई देशों में डीजल- पेट्रोल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया। कई देशों में तो डीजल-पेट्रोल कोटे में मिलने लग गया। लेकिन भारत में एक दिन भी ऐसे हालात नहीं हुए। अफवाएं बहुत फैलाई गई।

    भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई
    पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई। जब ये संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ईंधन का आयात करता था। लेकिन संकट के समय भारत की रणनीति का जलवा दिख गया। दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए।

    Parliament: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से, हंगामेदार रहने के आसार

    नई दिल्ली। Monsoon Session of Parliament: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है।

    संसदीय परिपाटी के मुताबिक मानसून सत्र दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भी कराई जाएगी। करीब तीन सप्ताह के इस मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी।

    केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर लिखा, भारत सरकार की अनुशंसा पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 में संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की स्वीकृति दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।

    बीते दिनों मेडिकल की पढ़ाई से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा- NEET के पेपर लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का चढ़ावा चोरी विवाद जैसे कई मामले लगातार सुर्खियों में है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान हंगामा होने की आशंका है। इन मामलों के अलावा तृणमूल के दो फाड़ होने का मुद्दा भी चर्चा में है। नजरें स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं। कांग्रेस अंडमान की ग्रेट निकोबार परियोजना पर भी लगातार हमलावर है। ऐसे में हंगामे और नारेबाजी से सत्र की कार्यवाही बाधित हो सकती है।

    बजट सत्र में कितना कामकाज हुआ
    इससे पहले संसद का बजट सत्र विगत 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था। 28 जनवरी, 2026 को शुरू हुए संसद के बजट सत्र में कई अहम विधेयक पारित कराए गए थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के मुताबिक सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं। लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा कराई गई थी।

    खुशखबरी! केंद्र सरकार बफर स्टॉक के लिए 2125 रुपये क्विंटल खरीदेगी प्याज

    नई दिल्ली। Onion Procurement Price: केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक के लिए प्याज की सरकारी खरीद की रफ्तार बढ़ाने और किसानों को बेहतर दाम देने के लिए बड़ा फैसला किया है। सरकार ने प्याज का खरीद मूल्य 13% बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है।

    इससे पहले यह दाम 1875 रुपये प्रति क्विंटल था। चालू सीजन में सरकार द्वारा खरीद कीमतों में की गई यह पांचवीं बढ़ोतरी है। यह संशोधित कीमत 4 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो गई है।

    मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत प्याज की सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त रही है, जिसे तेज करने के लिए सरकार को बार-बार दाम बदलने पड़े हैं। 1 जून से शुरू हुई खरीद प्रक्रिया के बाद से सरकार साल 2026 के बफर स्टॉक के लिए अब तक केवल 2000 टन प्याज ही खरीद सकी है।

    सीजन की शुरुआत: 12.70 रुपये प्रति किलो

    • 22 मई: 15.80 रुपये प्रति किलो
    • 13 जून: 16.50 रुपये प्रति किलो
    • 20 जून: 17.30 रुपये प्रति किलो
    • इसके बाद: 18.75 रुपये प्रति किलो
    • 4 जुलाई से (नया दाम): 21.25 रुपये प्रति किलो (2125 रुपये प्रति क्विंटल)

    बाजार में प्याज की स्थिति

    धीमी सरकारी खरीद के बावजूद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का कहना है कि देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, साल 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल (307.67 लाख टन) के लगभग बराबर ही है।

    महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों में प्याज का पर्याप्त स्टॉक है। देश की थोक मंडियों में रोजाना 50,000 टन से ज्यादा प्याज आ रहा है। महाराष्ट्र की मंडियों में औसत थोक भाव 18 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा है।

    वर्तमान में पूरे भारत में प्याज की औसत खुदरा कीमत 31 रुपये प्रति किलो है। मंत्रालय के मुताबिक अच्छी क्वालिटी का प्याज अभी स्टोरेज में रखा है, जो आने वाले कम सप्लाई वाले महीनों में बाजार में उतारा जाएगा।

    चांदी रिकॉर्ड हाई से 2 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती; क्या अभी और गिरेंगे भाव, जानिए

    नई दिल्ली। चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी के बाद अब उतनी ही बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी 2026 में चांदी की कीमत अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी।

    उस समय चांदी का भाव प्रति किलो 4,40,000 रुपये तक चला गया था। इसके बाद चांदी में ऐसी गिरावट आई कि अभी तक संभल नहीं पाई है। अपने पीक से चांदी इस समय प्रति किलो 2 लाख रुपये से ज्यादा गिर गई है। यानी इसमें 45 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

    एमसीएक्स पर शुक्रवार को चांदी का भाव प्रति किलो 2,37,499 रुपये पर बंद हुआ। ऐसे में चांदी का भाव अपने ऑल टाइम हाई के मुकाबले 2,02,501 रुपये नीचे आ गया है। यानी चांदी में 46 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि पिछले कुछ समय से इसमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन कीमतों में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।

    क्यों आई चांदी में गिरावट

    1. चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं है, बल्कि इसका 50% से 60% उपयोग उद्योगों (सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स) में होता है। 3-4 गुना दाम बढ़ने के बाद उद्योगों ने इसके विकल्प तलाशने शुरू कर दिए, जिससे मांग प्रभावित हुई।
    2. चांदी ने 2025 से 2026 की शुरुआत के बीच करीब 350% की अभूतपूर्व तेजी दिखाई थी। इतनी बड़ी रैली के बाद सट्टेबाजी को रोकने के लिए एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन बढ़ाए गए, जिससे निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की।
    3. अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड्स का रुख किया। जब डॉलर मजबूत होता है, तो कमोडिटीज पर दबाव बनता है।
    4. चीन और अमेरिका के फंड हाउसेज का जो शॉर्ट-टर्म (सट्टेबाजी वाला) पैसा चांदी में लगा था, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते ही वह तेजी से बाहर निकल गया।
    5. सोने को दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का सहारा मिलता है, जिससे वह सुरक्षित रहता है। चांदी के साथ ऐसा नहीं है।​

    अभी और गिरावट की आशंका
    कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक चांदी में अभी और गिरावट आ सकती है। फिलहाल एकमुश्त बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए। जुलाई के महीने में महंगाई की चिंताओं और ऊंची ब्याज दरों के कारण चांदी पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से अगस्त का महीना चांदी के लिए बहुत अच्छा रहता है, इसलिए जुलाई में गिरावट आने पर लंबी अवधि के लिए निवेश शुरू किया जा सकता है।