ईरान युद्ध के बीच तेल पर अमेरिका और चीन ने कर दिया बड़ा खेल, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य तीन महीने से भी अधिक समय से बंद है। इसे आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

कई दशकों से तेल व्यापारी, एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स यह चेतावनी देते रहे हैं कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो ग्लोबल इकॉनमी तबाह हो जाएगी। इंडस्ट्री ने ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत $200 प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान लगाया था।

लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला है। कच्चे तेल की कीमत शुरुआत में जरूर उछली थी लेकिन पिछले कुछ समय से यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बनी हुई है। आखिर यह कैसे हुआ?

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद कच्चे तेल की कीमत में उबाल नहीं आने के कई कारण हैं। अमेरिका से रेकॉर्ड एक्सपोर्ट, वेनेजुएला से सप्लाई बढ़ने और चीन में मांग में अचानक अप्रत्याशित गिरावट ने पश्चिम एशिया से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली। युद्ध से पहले पश्चिम एशिया से रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल की सप्लाई होती थी।

साथ ही युद्ध से पहले चीन समेत कई देशों ने काफी तेल जमा किया था। मौके के नजाकत को देखते हुए अमेरिका और चीन समेत कई देशों ने अपने स्ट्रैटजिक रिजर्व से तेल रिलीज किया। इससे भी सप्लाई शॉक को कम करने में मदद मिली है।

एक अनुमान के मुताबिक 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 1 अरब बैरल कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है। एक थ्योरी यह भी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की दोहरी नाकेबंदी के बावजूद बड़ी मात्रा में कच्चा तेल बाहर निकल रहा है।

इससे ग्लोबल एनर्जी सिस्टम को इस ऐतिहासिक झटके को झेलने में मदद मिली है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से बताया गया है कि इन तथाकथित गुप्त प्रवाह वाले टैंकर पकड़े जाने से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद करके नाकेबंदी से बच रहे होंगे।

जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि मई के आखिरी दो हफ्तों में गुप्त प्रवाह रोजाना लगभग 2.1 मिलियन बैरल प्रति दिन था। नौसेना की नाकेबंदी और कमर्शियल ट्रैफिक में भारी गिरावट के बावजूद, कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी बड़ी मात्रा में जलडमरूमध्य से गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गुप्त प्रवाह से क्रूड संकट को कुछ हद तक टालने या कम करने में मदद मिली है। यह इन्वेंट्री में आई कमी को पूरी तरह रोकने के लिए काफी नहीं है, लेकिन यह स्थिति की गंभीरता को कुछ हद तक कम जरूर करता है।

कैसे हुई सप्लाई?
इन्वेस्टमेंट बैंक पाइपर सैंडलर के ग्लोबल एनर्जी इकनॉमिस्ट और स्ट्रैटेजिस्ट जान स्टुअर्ट का अनुमान है कि मई में होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 2.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाहर निकला।

इसमें से लगभग 2.1 मिलियन बैरल उन जहाजों पर लदा था जिन्होंने ईरानी संस्थाओं को टोल का भुगतान किया था। बाकी लगभग 900,000 बैरल घोस्ट ट्रांजिट हैं। यानी ऐसे जहाज जो अंधेरे में ट्रांसपोंडर बंद करके इस जलमार्ग से गुजरे।