Monday, June 22, 2026
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क्या पीएम मोदी खत्म कर पाएंगे एलपीजी और तेल का खेल, जानिए क्या है योजना

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को चार यूरोपीय देशों की 5 दिन की यात्रा पर रवाना होंगे। इस दौरान वह कुछ घंटे के लिए खाड़ी देश यूएई में भी रुकेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ये एलपीजी और स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े हैं।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि मोदी के यूएई में तीन घंटे के स्टॉपओवर के दौरान एनर्जी सिक्योरिटी सबसे अहम मुद्दा होगा। ईरान युद्ध के कारण दुनिया में एनर्जी की सप्लाई टाइट हो गई है। भारत पर भी इसका असर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री ने हाल में लोगों से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील की थी।

यूएई भारत का अहम एनर्जी सप्लायर है। यह भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा बड़ा सोर्स होने के साथ-साथ एलपीजी और एलएनजी का दूसरा बड़ा सप्लायर है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बंद है।

इस कारण अप्रैल में खाड़ी देशों के उत्पादन में गिरावट आई है। अप्रैल में केवल यूएई के उत्पादन में तेजी आई। इसकी वजह यह है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को बाइपास करके गल्फ ऑफ ओमान में स्थित फुजैरा पोर्ट से तेल एक्सपोर्ट कर रहा है।

यूएई रोजाना 3.2 से 3.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है। हाल में वह ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर आ चुका है और अगले साल तक रोजाना 5 मिलियन बैरल तेल निकालने की तैयारी कर रहा है। यही वजह है कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए यूएई काफी अहम है।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि मोदी यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान के साथ आपसी रिश्तों, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। भारत की यूएई के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी है। 45 लाख से अधिक भारतीय इस खाड़ी देश में रहते हैं।

क्यों अहम हैं ये समझौते

  • मोदी 15 मई को चार यूरोपीय देशों की की यात्रा पर रवाना होंगे
  • इस दौरान वह करीब तीन घंटे के लिए खाड़ी देश यूएई में रुकेंगे
  • इस दौरान एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े दो समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे
  • ईरान युद्ध के कारण दुनिया में एनर्जी की सप्लाई टाइट हो गई है
  • यूएई रोजाना करीब 3.6 मिलियन बैरल तेल उत्पादन कर रहा है

ईरान युद्ध का असर
पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को ढाई महीने हो चुके हैं और फिलहाल इसके थमने की उम्मीद नहीं है। इसके कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की सप्लाई टाइट हुई है। दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते गुजरता है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत की इकॉनमी पर भी असर दिखने लगा है क्योंकि हमारा करीब 90 फीसदी तेल बाहर से आता है। ऐसे में यूएई के साथ समझौते भारत के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।

प्रसूताओं की मौत का मामला: स्पीकर बिरला के निर्देश पर हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी गठित

कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज एवं जेके लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मृत्यु के मामले में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय चिकित्सा विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

डॉ. रीता माहे की अध्यक्षता में गठित टीम में एम्स दिल्ली और एम्स जोधपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया गया है। यह टीम जल्द ही कोटा पहुंचकर मेडिकल कॉलेज एवं जेके लोन अस्पताल की व्यवस्थाओं का विस्तृत आंकलन करेगी।

मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उच्चस्तरीय समिति के गठन के निर्देश दिए थे। विशेषज्ञ टीम दोनों अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की कार्यप्रणाली, एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर), संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था तथा अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी।

साथ ही अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुरक्षित बनाने के लिए नई एसओपी भी तैयार करेगी।

Wholesale inflation: थोक महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर साढ़े तीन साल के स्तर पर

पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन

नई दिल्ली। Wholesale inflation rate: देश में थोक महंगाई ने अप्रैल 2026 में तेज रफ्तार पकड़ ली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI आधारित महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 8.3 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पहले मार्च 2026 में यह दर 3.88 फीसदी थी। करीब साढ़े तीन साल बाद थोक महंगाई का यह सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।

ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में अचानक आई तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और धातुओं की बढ़ती कीमतों का असर भी साफ दिखाई दिया।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में फ्यूल एंड पावर श्रेणी में महंगाई सबसे ज्यादा रही। इस श्रेणी की महंगाई दर मार्च के 1.05 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 24.71 फीसदी तक पहुंच गई। सिर्फ एक महीने में इस श्रेणी के सूचकांक में 18.22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 67.18 फीसदी पहुंच गई। इसमें सबसे ज्यादा तेजी कच्चे तेल में दर्ज की गई, जहां महंगाई दर 88.06 फीसदी रही।

ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल पर भी देखने को मिला। अप्रैल में पेट्रोल की महंगाई दर 32.40 फीसदी रही, जबकि हाई स्पीड डीजल यानी HSD की महंगाई 25.19 फीसदी दर्ज की गई।

घरेलू रसोई पर भी महंगाई का असर जारी है। अप्रैल में एलपीजी की महंगाई दर 10.92 फीसदी रही। ईंधन और बिजली से जुड़े फ्यूल एंड पावर इंडेक्स में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह इंडेक्स मार्च में 153.7 था, जो अप्रैल में बढ़कर 181.7 पहुंच गया। इससे साफ है कि ऊर्जा क्षेत्र में लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई अप्रैल महीने में बढ़कर 4.62 फीसदी पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.39 फीसदी थी। थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी का असर कई उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

सरकार के मुताबिक, 22 में से 21 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में महीने दर महीने कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और तैयार उत्पाद दोनों की लागत बढ़ी है।

महंगाई बढ़ने में बेसिक मेटल्स, केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी एवं उपकरणों का बड़ा योगदान रहा। टेक्सटाइल सेक्टर में महंगाई बढ़कर 7.30 फीसदी पहुंच गई। वहीं, केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स में यह 5.09 फीसदी रही। बेसिक मेटल्स की महंगाई दर 7 फीसदी दर्ज की गई।

देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में अप्रैल महीने के दौरान हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, कुल मिलाकर खाद्य महंगाई अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है।

थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के खाद्य इंडेक्स में अप्रैल में बढ़ोतरी देखने को मिली। यह मार्च के 1.85 फीसदी से बढ़कर 2.31 फीसदी पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में हल्का दबाव बना हुआ है।

फलों, दूध और मांसाहारी उत्पादों के दाम बढ़े
खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर अप्रैल में 1.98 फीसदी दर्ज की गई। इस दौरान कुछ प्रमुख चीजों जैसे फल, अंडा, मांस, मछली, दूध और सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी देखी गई। इन वस्तुओं की कीमतों में आए उछाल का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है।

कुछ खाद्य वस्तुएं अभी भी सस्ती
हालांकि, सभी खाद्य पदार्थों में महंगाई नहीं बढ़ी है। कुछ जरूरी चीजों की कीमतें अभी भी कम बनी हुई हैं। प्याज की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही और इसकी महंगाई दर -26.45 फीसदी रही। आलू की कीमतों में भी बड़ी कमी देखी गई, जहां महंगाई दर -30.04 फीसदी दर्ज की गई। इसके अलावा दालों की कीमतें भी दबाव में रहीं और उनकी महंगाई दर -4.03 फीसदी रही।

खाद्य तेलों का आयात पहली छमाही में 13 प्रतिशत बढ़कर 78 लाख टन के पार

मुम्बई। चालू मार्केटिंग सीजन की पहली छमाही में यानी नवम्बर 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान भारत में खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 78.15 लाख टन पर पहुंच गया जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के आयात 68.76 लाख टन से करीब 13 प्रतिशत अधिक रहा। इसी तरह समीक्षाधीन अवधि में खाद्य तेलों का आयात खर्च भी 73,000 करोड़ रुपए से लगभग 19 प्रतिशत उछलकर 87,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से ज्ञात होता है कि खाद्य तेलों पर आयात खर्च में हुई अधिक बढ़ोत्तरी का कारण वैश्विक बाजार भाव ऊंचा रहना तथा भारतीय मुद्रा (रुपया) की विनिमय दर में गिरावट आना माना जा रहा है।

एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में हाल के महीनों में खाद्य तेलों का भाव तेजी से बढ़ा है जिससे आयात खर्च में ज्यादा वृद्धि हुई है।

हालांकि खाद्य तेलों का सकल आयात मार्च के 11.73 लाख टन से बढ़कर अप्रैल में 13.07 लाख टन पर पहुंच गया लेकिन पाम तेल के आयात में कमी आई। इस अवधि में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात 6.73 लाख टन से 24.21 प्रतिशत घटकर 5.10 लाख टन तथा आरबीडी पामोलीन का आयात 13,498 टन से 88.62 प्रतिशत लुढ़ककर 1536 टन पर अटक गया।

भारतीय आयातकों द्वारा अप्रैल में सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल मंगाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके फलस्वरूप मार्च की तुलना में अप्रैल के दौरान सूरजमुखी तेल का आयात दोगुने से ज्यादा बढ़ गया जबकि सोयाबीन तेल के आयात में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई।

उदयपुर के पदाधिकारियों ने किया कोटा के सारस्वत समाज भवन निर्माण का अवलोकन

कोटा /उदयपुर। कोटा सारस्वत समाज के निर्माणाधीन भवन के अवलोकन, विकास, प्रगति एवं निर्माण की नवीनतम तकनीकी साझा व चर्चा के लिए कोटा के अध्यक्ष मुकेश सारस्वत के आमंत्रण पर सारस्वत समाज विकास समिति उदयपुर के अध्यक्ष महर्षि सारस्वत के निर्देशानुसार उदयपुर से सचिव विजय सारस्वत एवं संरक्षक संजय व्यास कोटा पहुंचे।

अवलोकन पूर्व कोटा अध्यक्ष मुकेश सारस्वत तथा महामंत्री कुलदीप सारस्वत ने पगड़ी व उपरना पहनाकर उनका स्वागत अभिनंदन किया। तत्पश्चात समाज भवन के अब तक तथा भविष्य मे होने वाले निर्माण व प्रगति की जानकारी दी।

उदयपुर के पदाधिकारियों ने कोटा के अध्यक्ष मुकेश सारस्वत व उनकी कार्यकारिणी को बेहतरीन निर्माण कार्य की सराहना करते हूए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। संजय व्यास ने कहा कि कोटा का यह भवन भविष्य में सारस्वत समाज की गरिमा, संस्कारों व सामाजिक एकता का भव्य प्रतीक बनेगा।

ज्ञातव्य रहे उदयपुर में भी चित्रकूट नगर स्थित सारस्वत समाज भवन के विस्तार का निर्माण कार्य चल रहा है। उसी सन्दर्भ में निर्माण की नवीनतम तकनीकी जानकारी के लिए कोटा के पदाधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व अधिकारी तरुणा व्यास, दिव्या सारस्वत, देवप्रकाश शर्मा आदि साथ रहे।

Sugar: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक

नई दिल्ली। sugar export ban: केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक जारी रहेगा। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ने यह कदम देश में दाम बढ़ने से रोकने यानी घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है।

भारत में इस बार गन्ने की पैदावार कमजोर पड़ गई है। जिन क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार अच्छी होती थी, उन जगहों पर फसल खराब होने से उत्पादन लगातार दूसरे साल घरेलू खपत से कम रहने का अनुमान है। सरकार ने पहले सोचा था कि गन्ने का उत्पादन मांग से अधिक होगा, इसलिए मिलों को 15.9 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी। लेकिन, अब हालात बदल गए हैं।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो प्रभाव से इस साल मानसून पर खतरा बना हुआ है। इससे अगले सीजन का उत्पादन भी अनुमान से कम रह सकता है। यही वजह है कि सरकार ने समय रहते निर्यात रोकने का फैसला लिया।

मिंट ने व्यापारियों के हवाले से कहा है कि मंजूर किए गए 15.9 लाख टन में से करीब 8 लाख टन के सौदे हो चुके थे। इनमें से 6 लाख टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। अब बचे हुए सौदों को पूरा करना व्यापारियों के लिए मुश्किल होगा।

किन शर्तों पर निर्यात की मंजूरी
सरकार ने साफ किया है कि कच्ची और सफेद चीनी का निर्यात पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, जो चीनी पहले से निर्यात प्रक्रिया में है, उसे विशेष शर्तों पर भेजा जा सकेगा। अगर राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने से पहले लोडिंग शुरू हो चुकी थी। अगर शिपिंग बिल दाखिल हो चुका था और जहाज भारतीय पोर्ट पर लग चुका था। अगर चीनी कस्टम या कस्टोडियन को सौंपी जा चुकी थी।

दुनिया पर क्या असर होगा
इस प्रतिबंध से ग्लोबल लेवल पर सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों में तेजी आएगी। न्यूयॉर्क में चीनी के वायदा भाव 2% से अधिक बढ़ गए, जबकि लंदन में सफेद चीनी के दाम 3% उछल गए। इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत के प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों ब्राजील और थाईलैंड को मिलेगा। ये देश एशियाई और अफ्रीकी खरीदारों को अधिक चीनी भेज सकेंगे।

व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं
मुंबई के एक वैश्विक व्यापार घराने के डीलर ने बताया, “सरकार ने फरवरी में अतिरिक्त निर्यात कोटा दिया था, जिससे व्यापारियों ने कई सौदे कर लिए। अब इन ऑर्डरों को पूरा करना उनके लिए सिरदर्द बन गया है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रहेंगी, लेकिन अगर मानसून कमजोर रहा, तो सरकार को और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

Gold SilverToday: MCX पर सोना-चांदी औंधे मुंह गिरे, जानिए आज के भाव

नई दिल्ली। Gold Silver Price, May14, 2026 : सोने और चांदी की कीमतों में आज यानी गुरुवार 14 मई को गिरावट दर्ज की जा रही है। एक दिन पहले ही गोल्ड-सिल्वर के भाव में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी।

इसके बाद आज निवेशकों की मुनाफावसूली से कमोडिटी मार्केट में दबाव देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर करीब 15% किए जाने के बाद बुधवार को दोनों धातुओं में तेज उछाल आया था।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत 1.2% गिरकर ₹2,96,213 प्रति किलो पर आ गई है, जबकि सोना 0.7% टूटकर ₹1,61,027 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। बुधवार को सोना ₹162250 और चांदी ₹300500 पर बंद हुई थी। इस लिहाज से आज सोना 1223 रुपये सस्ता हुआ है। जबकि, चांदी के भाव में 4287 रुपये की गिरावट है।

ग्लोबल मार्केट में भी नरमी
ग्लोबल मार्केट में भी कीमती धातुओं में कमजोरी रही। निवेशकों की नजर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच चल रही अहम बैठकों पर बनी हुई है। साथ ही ईरान युद्ध से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। स्पॉट सिल्वर 0.9% गिरकर 87.18 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि स्पॉट गोल्ड लगभग स्थिर रहकर 4,688.43 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% कमजोर होकर 4,695 डॉलर पर आ गया।

क्यों गिर गए दाम
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार बुधवार की तेज तेजी के बाद निवेशक आज मुनाफावसूली कर रहे हैं। इससे कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। भारत सरकार ने हाल ही में सोना और चांदी के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसका मकसद बुलियन आयात कम करना, रुपये पर दबाव घटाना और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना है।

हालांकि, ग्लोबल लेवल पर सुरक्षित निवेश की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। अमेरिका में बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और ईरान संघर्ष के चलते निवेशक अभी भी सोना-चांदी में खरदारी कर रहे हैं।

Stock Market: सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी 23,500 के पार

नई दिल्ली। Stock Market, May 14, 2026: ग्लोबल बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों में मजबूत शुरुआत हुई। बाजार खुलते ही बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी 50 ने 23,500 का लेवल पार कर लिया।

शुरुआती बाजार में आईटी को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्स में खरीदारी देखने को मिली। इस बीच, निवेशकों की नजर अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम बैठक पर बनी हुई है।

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स में 338 अंक की तेजी के साथ 74,947.12 पर कारोबार शुरू हुआ। वहीं, एनएसई के निफ्टी 118 अंक उछलकर 23,530 पर खुला। शुरुआती सेशन के दौरान आईटी को एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स में तेजी देखने को मिली।

सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में अदाणी पोर्ट, ट्रेंट, एनटीपीसी, पावरग्रिड और ए​शियन पेंट्स रहे। वहीं टॉप लूजर्स में एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और टाइटन रहे।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

  • ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक पर दुनिया की नजर
    डॉनल्ड ट्रंप चीन पहुंच चुके हैं, जहां उनकी शी जिनपिंग के साथ अहम बैठक होनी है। बाजार को उम्मीद है कि इस बैठक से अमेरिका और चीन के रिश्तों को लेकर आगे का संकेत मिल सकता है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच रिश्तों का असर ग्लोबल बाजारों पर पड़ता है, इसलिए निवेशक इस बैठक के नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं।
  • एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
    गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 0.47 प्रतिशत चढ़ा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग लगभग 1 प्रतिशत मजबूत हुआ। हालांकि चीन का CSI 300 इंडेक्स करीब 0.52 प्रतिशत गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा।
  • अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों ने दिखाई ताकत
    अमेरिकी बाजारों में बुधवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। S&P 500 इंडेक्स करीब 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं डॉव जोंस इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

कम पैदावार के कारण बादामगिरी 900 रुपये किलो से ऊपर बिकने का अनुमान

नई दिल्ली। अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया में बादाम उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम होने के अनुमानों एवं डॉलर की मजबूती के चलते हाल ही में बादामगिरी के भावों में 40 से 50 रुपए प्रति किलो की तेजी दर्ज की जा चुकी है। अभी भी बाजार में धारणा तेजी की बनी हुई है। क्योंकि अप्रैल माह में बादाम का आयात भी कम हुआ है।

हाजिर में कमजोर मांग एवं कैलिफोर्निया में भाव बढ़ने के अलावा अप्रैल माह के दौरान आयातकों ने बादाम का आयात कम मात्रा में किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल-2026 में बादाम का आयात 1000 कंटेनर का किया गया है जबकि गत वर्ष अप्रैल-2025 में आयात 1454 कंटेनर का किया गया था। उल्लेखनीय है कि जनवरी- 2026 में बादाम का आयात 1234 कंटेनर, फरवरी 1310 कंटेनर एवं मार्च- 2026 में 1241 कंटेनर का आयात व्यापार हुआ है।

चालू माह के दौरान बादामगिरी में अच्छी तेजी दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल माह के अंत में दिल्ली बाजार में बादामगिरी का भाव 790 से 800 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा था जोकि वर्तमान में बढ़कर 850 से 860 रुपए प्रति किलो का हो गया है।

सूत्रों का मानना है कि वर्तमान निर्यात को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि जल्द ही भाव 900 रुपए के आसपास बन जाएगा। गत वर्ष इसी समयावधि में दिल्ली बाजार में बादामगिरी का भाव 810 से 820 रुपए का चल रहा था।

भागवत कथा का छठा दिन: गोपी-उद्धव संवाद से कॉमर्स कॉलेज ब्रजमय हो गया

शिक्षा का ढोंग नहीं, प्राचीन विदुषियों जैसा ज्ञान अपनाएं: श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर

कोटा। विज्ञान नगर स्थित कॉमर्स कॉलेज के प्रांगण में श्री मंगलमय चमत्कारी धाम हनुमान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धा, दर्शन और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कथा व्यास प्रख्यात संत श्री कृष्णचंद्र ठाकुर ने अपनी अमृतमयी वाणी से हज़ारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। बुधवार को नर्मदेश्वर महादेव के विवाह महोत्सव और व्यासपीठ से मेवाड़ की वीरता के बखान ने एक नया अध्याय जोड़ दिया।

​कथा के छठे दिन श्री कृष्णचंद्र ठाकुर ने दर्शन और अध्यात्म की गहरी व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा मूलतः एक ही है। जिसे विद्वान अपनी दृष्टि और भाव के अनुसार विभिन्न रूपों में भजते हैं।

उपनिषदों के ‘एक: विप्र बहुधा वदंति’ सूत्र की व्याख्या करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ईश्वर सर्वव्यापक है। कबीर दास जी के प्रसिद्ध पद ‘सब घट में मेरा साइयां’ का संदर्भ देते हुए महाराज श्री ने बताया कि ईश्वर निर्गुण भी है और भक्तों के प्रेम के वशीभूत होकर सगुण साकार रूप में अवतार भी धारण करता है।

उन्होंने सनातन धर्म के प्रतीकों पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक सनातनी को अपनी पहचान पर गर्व होना चाहिए और उनके माथे पर तिलक व सिर पर शिखा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।

गोपी-उद्धव संवाद भक्ति का चरमोत्कर्ष

कथा के सबसे मार्मिक प्रसंगों में ‘गोपी-उद्धव संवाद’ का सजीव चित्रण किया गया। महाराज श्री ने बताया कि कृष्ण के वियोग में गोपियां ऐसी अवस्था में पहुँच गई थीं जहाँ जड़ और चेतन का भेद मिट गया था। इस दौरान जब पंडाल में ‘मेरी लगी श्याम से प्रीत दुनिया क्या जाने..’ और ‘गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है..’ जैसे भजनों की गूँज हु, तो श्रद्धालु स्वयं को रोक नहीं पाए और झूमने लगे। वातावरण पूरी तरह ब्रजमय हो गया और ऐसा प्रतीत होने लगा मानो कोटा का यह प्रांगण साक्षात गोकुल बन गया हो।

नारी शक्ति और आधुनिक शिक्षा पर प्रहार

शिक्षा के केंद्र कोटा में व्यास पीठ से महाराज श्री ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा पद्धति केवल ‘ढोंग’ बनकर रह गई है, जबकि प्राचीन भारत का ज्ञान तंत्र अत्यंत समृद्ध था। उन्होंने मैत्रेयी, मदालसा और अरुंधति जैसी विदुषी महिलाओं का उदाहरण देते हुए सिद्ध किया कि प्राचीन भारत में नारी आज की तुलना में कहीं अधिक शिक्षित और शास्त्रार्थ में निपुण थी। उन्होंने आह्वान किया कि हमें पुन: उन्हीं संस्कारों की ओर लौटने की आवश्यकता है जहाँ नारी को शक्ति और ज्ञान का सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।

​शिव-पार्वती विवाह और रुक्मणी मंगल


​कथा के साथ-साथ ‘नर्मदेश्वर शिवलिंग प्रतिष्ठा समारोह’ के अंतर्गत बुधवार को गोधूलि बेला में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह महोत्सव अत्यंत भव्यता से संपन्न हुआ। ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के बीच वैदिक रीति-रिवाजों से कन्यादान और पाणिग्रहण संस्कार की रस्म निभाई गई। इसी क्रम में श्री कृष्ण और रुक्मणी विवाह की मनोरम झांकी सजाई गई। जहाँ वरमाला के दृश्य ने सभी का मन मोह लिया।

​मेवाड़ की वीरता और राजस्थान को नमन

श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर ने राजस्थान की धरा को वीरों और धर्मात्माओं की भूमि बताया। उन्होंने विशेष रूप से मेवाड़ और महाराणा प्रताप के शौर्य का स्मरण करते हुए कहा कि जिस भूमि पर मीरा ने भक्ति की पराकाष्ठा छुई और प्रताप ने राष्ट्र की अस्मिता के लिए घास की रोटियां खाना स्वीकार किया। उस भूमि को प्रणाम करना गौरव की बात है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कथा के अंतिम दिन पूर्णाहुति में अवश्य शामिल हों, क्योंकि अंतिम दिन का श्रवण पूरे सात दिनों की कथा का फल प्रदान करता है।

ये रहे उपस्थित
​इस भक्तिमय आयोजन में मेवाड़ राजपरिवार से श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह, पूर्व मंत्री श्रीचंद्र कृपलानी सहित कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति के महंत अशोक तिवारी ने सभी भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि गुरुवार को कथा की पूर्णाहुति होगी।