पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
नई दिल्ली। Wholesale inflation rate: देश में थोक महंगाई ने अप्रैल 2026 में तेज रफ्तार पकड़ ली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI आधारित महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 8.3 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पहले मार्च 2026 में यह दर 3.88 फीसदी थी। करीब साढ़े तीन साल बाद थोक महंगाई का यह सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में अचानक आई तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और धातुओं की बढ़ती कीमतों का असर भी साफ दिखाई दिया।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में फ्यूल एंड पावर श्रेणी में महंगाई सबसे ज्यादा रही। इस श्रेणी की महंगाई दर मार्च के 1.05 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 24.71 फीसदी तक पहुंच गई। सिर्फ एक महीने में इस श्रेणी के सूचकांक में 18.22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 67.18 फीसदी पहुंच गई। इसमें सबसे ज्यादा तेजी कच्चे तेल में दर्ज की गई, जहां महंगाई दर 88.06 फीसदी रही।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल पर भी देखने को मिला। अप्रैल में पेट्रोल की महंगाई दर 32.40 फीसदी रही, जबकि हाई स्पीड डीजल यानी HSD की महंगाई 25.19 फीसदी दर्ज की गई।
घरेलू रसोई पर भी महंगाई का असर जारी है। अप्रैल में एलपीजी की महंगाई दर 10.92 फीसदी रही। ईंधन और बिजली से जुड़े फ्यूल एंड पावर इंडेक्स में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह इंडेक्स मार्च में 153.7 था, जो अप्रैल में बढ़कर 181.7 पहुंच गया। इससे साफ है कि ऊर्जा क्षेत्र में लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई अप्रैल महीने में बढ़कर 4.62 फीसदी पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.39 फीसदी थी। थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी का असर कई उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
सरकार के मुताबिक, 22 में से 21 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में महीने दर महीने कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और तैयार उत्पाद दोनों की लागत बढ़ी है।
महंगाई बढ़ने में बेसिक मेटल्स, केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी एवं उपकरणों का बड़ा योगदान रहा। टेक्सटाइल सेक्टर में महंगाई बढ़कर 7.30 फीसदी पहुंच गई। वहीं, केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स में यह 5.09 फीसदी रही। बेसिक मेटल्स की महंगाई दर 7 फीसदी दर्ज की गई।
देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में अप्रैल महीने के दौरान हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, कुल मिलाकर खाद्य महंगाई अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है।
थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के खाद्य इंडेक्स में अप्रैल में बढ़ोतरी देखने को मिली। यह मार्च के 1.85 फीसदी से बढ़कर 2.31 फीसदी पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में हल्का दबाव बना हुआ है।
फलों, दूध और मांसाहारी उत्पादों के दाम बढ़े
खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर अप्रैल में 1.98 फीसदी दर्ज की गई। इस दौरान कुछ प्रमुख चीजों जैसे फल, अंडा, मांस, मछली, दूध और सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी देखी गई। इन वस्तुओं की कीमतों में आए उछाल का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
कुछ खाद्य वस्तुएं अभी भी सस्ती
हालांकि, सभी खाद्य पदार्थों में महंगाई नहीं बढ़ी है। कुछ जरूरी चीजों की कीमतें अभी भी कम बनी हुई हैं। प्याज की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही और इसकी महंगाई दर -26.45 फीसदी रही। आलू की कीमतों में भी बड़ी कमी देखी गई, जहां महंगाई दर -30.04 फीसदी दर्ज की गई। इसके अलावा दालों की कीमतें भी दबाव में रहीं और उनकी महंगाई दर -4.03 फीसदी रही।

