Tuesday, June 30, 2026
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आयकर विभाग ने नेता के 246 करोड़ बेनामी जमा का पता लगाया

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  • आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमने जांच में पाया कि एक व्यक्ति के खाते में 246 करोड़ रुपये जमा हुए।

  • यह पैसे बैंक के शाम को बंद होने के बाद जमा किए गए थे। 

चेन्नई। ब्लैक मनी के खिलाफ चल रहे अभियान में आयकर विभाग (तमिलनाडु) ने 246 करोड़ रुपये के बेनामी बैंक डिपॉजिट का पता लगाया है। यह बेनामी बैंक डिपॉजिट सिंगल ट्रांजैक्शन में किया गया है।

आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि यह डिपॉजिट नोटबंदी यानी 8 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच किया गया था और इसके तार एक जाने-माने नेता से जुड़े हैं। विभाग को शक है कि यह पैसा उस नेता का ही है।

विभाग ने जांच में यह भी पाया कि तमिलनाडु में कुल 240 करोड़ रुपये के डिपॉजिट का पता नहीं लगाया जा सका है। यह डिपॉजिट 441 खातों में किया गया है लेकिन अकाउंट होल्डर्स की जानकारी विभाग को नहीं मिल पाई है।

नोटबंदी की घोषणा होने के बाद संदिग्ध ट्रांजैक्शन करने वाले 27,739 बैंक खातों के मालिकों को वेरिफिकेशन के लिए नोटिस भेजा गया है।

आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमने जांच में पाया कि एक व्यक्ति के खाते में 246 करोड़ रुपये जमा हुए। यह पैसे बैंक के शाम को बंद होने के बाद जमा किए गए थे। नोटबंदी के दौरान जमा हुए पैसों का सबसे बड़ा अमाउंट था।’

आयकर विभाग नोटबंदी के बाद खातों की जांच कर रहा है। संदिग्ध खातों की जांच का यह दूसरा चरण है। एक अधिकारी ने बताया, ‘यह जांच आरबीआई द्वारा उपलब्ध कराई गए संदिग्ध जमा की जानकारी के बाद हो रही है।

हमने 27,739 खाताधारकों को नोटिस भेज उनके खाते में जमा रकम का सोर्स दिखाने को कहा है। हमें 18,220 खाताधारकों की तरफ से जवाब आया है। बाकी बचे खाताधारकों ने कई बार याद दिलाने पर भी नोटिस का जवाब नहीं दिया है।

धनिया ट्रेडर्स धैर्य न खोएं, देखें वीडियो

कोटा। धनिया के लगातार गिरते दामों से निराश ट्रेडर्स को फ़िलहाल थोड़ा धैर्य रखना होगा। बादामी धनिया भी इन दिनों 4000 रुपये क्विंटल  के आसपास आ गया है। जबकि पूर्व में अनुमान था धनिया 5000 से 5300 रुपये क्विंटल के आसपास रहेगा। दाम कम रहे तो इसका असर धनिया की बुवाई पर पड़ेगा।

कोटा मंडी में शुक्रवार को धनिया बादामी 3400 से 4000, ईगल 3800 से 4200 और रंगदार 4500 से 5500 रुपये किवंटल बोला गया।  धनिया के ट्रेंड को लेकर हमारे चैनल LEN DEN NEWS ने हाल ही में कमोडिटी एक्सपर्ट मुकेश भाटिया से बात की। तो आइये जाने क्या है उनकी राय। इसके लिए वीडियो देखिये –

स्मार्ट सिटी समिट कोटा, न मंत्री आये न मेयर

स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को मूर्तरूप देने के लिए दो दिवसीय स्मार्ट सिटी समिट होटल उम्मेद भवन पैलेस में शुरू हुई

कोटा। स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को मूर्तरूप देने एवं नवाचारों को साझा करने के लिए दो दिवसीय स्मार्ट सिटी समिट शुक्रवार को होटल उम्मेद भवन पैलेस में शुरू हुई। लेकिन एक भी मेयर समिट में नहीं आया। आयोजकों ने स्मार्ट सिटी के मेयरों के बीच संवाद करवाने की बात कही थी।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी तथा अध्यक्षता के लिए स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव मंजीतसिंह को आमंत्रित किया था, लेकिन वे भी नहीं आए, इस कारण समिट फीकी रही।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि अफगानिस्तान के राजदूत शाइदा मोहम्मद अब्दाली ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री की परिकल्पना स्मार्ट सिटी के रूप में शहरों का विकास हमें भी प्रेरणा देता है।

स्मार्ट सिटी मिशन दक्षिण एशिया के देशों के लिए नया विजन है। उन्होंने अफगानिस्तान और भारत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में दोनों देश साझा काम करेंगे। कोटा निगम आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल ने स्मार्ट सिटी कोटा प्रोजेक्ट के बारे में बताया। उज्जैन नगर निगम के सीईओ अवधेश शर्मा ने ई-मैनेजमेंट पर जोर दिया।

तमिलनाडु के रामाकुंडम नगर निगम आयुक्त डॉ. डी.जॉन ने कहा कि उनका शहर इण्डस्ट्रियल सिटी है। स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी समिट का आयोजन नगर निगम, कोटा स्मार्ट सिटी लि. एवं ई टेक्नोमीडिया प्रा.लि. के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

स्मार्ट टेक्नोलॉजी के बारे में बताया
समिट में देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से स्मार्ट सिटी के क्षेत्र में कार्यरत कम्पनियों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी लगाकर आम नागरिकों को दिए जाने वाले स्मार्ट सोल्यूशन बताए गए। जल स्रोतों, पार्कों का जीर्णोद्धार, इलेक्ट्रोनिक विद्युत मीटर, ई-रिक्शा, ई-कचरा प्रबंधन, ई-निस्तारण के बारे में बताया।

GST विसंगति दूर करने, कारों पर सेस बढ़ाने पर होगा फैसला

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जीएसटी काउंसिल की 21वीं बैठक आज, इडली-डोसा घोल, कस्टर्ड पावडर समेत करीब 25 प्रोडक्ट पर घट सकते हैं टैक्स रेट

हैदराबाद। जीएसटी काउंसिल की 21वीं बैठक शनिवार को हैदराबाद में होगी। इसमें आम इस्तेमाल की वस्तुओं पर टैक्स की दरों को लेकर विसंगति दूर करने पर फैसला हो सकता है। लग्जरी और मिड साइज कारों पर सेस बढ़ाने पर भी फैसला संभव है।

अधिकारियों ने बताया कि बैठक में जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के आईटी से जुड़े मसलों पर भी चर्चा हो सकती है। हाल में ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने में कारोबारियों को काफी दिक्कतें पेश आई थीं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य हैं। काउंसिल की बैठक में इडली/डोसा के घोल, सूखी इमली, कस्टर्ड पावडर और रसोई गैस लाइटर समेत करीब 25 प्रोडक्ट्स पर जीएसटी की दर कम करने पर विचार हो सकता है।

अनब्रांडेड खाद्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। लेकिन ब्रांडेड और पैकेज्ड खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी की दर 5 फीसदी तय की गई है। लेकिन देखने में आया है कि कंपनियां जीएसटी से बचने के लिए अपने ब्रांड डि-रजिस्टर्ड करवा रही है।

इसलिए फिटमेंट कमेटी ने जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड ब्रांड तय करने के लिए कट ऑफ डेट 15 मई 2017 निर्धारित करने की सिफारिश की है। इसके बाद भले ही ब्रांड बाद में डि-रजिस्टर्ड हो जाएं, उन पर टैक्स लागू होगा।

मिड-साइज, लक्जरी कारों और एसयूवी पर सेस कितना बढ़ाया जाए और यह कब से लागू हो, यह भी इस बैठक में तय हा़े सकता है। काउंसिल ने 5 अगस्त की पिछली बैठक में इन गाड़ियों पर सेस 15 से बढ़ाकर 25 फीसदी करने को मंजूरी दी थी। सेस में बढ़ोतरी का अध्यादेश जारी हो चुका है।

अब काउंसिल को अंतिम फैसला करना है। एक जुलाई से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद यह काउंसिल की तीसरी बैठक होगी।

यूआईडीएआई चीफ एबी पांडे जीएसटीएन के अंतरिम चेयरमैन नियुक्तभारतीयविशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सीईओ एबी पांडे को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) का अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। जीएसटीएन के पहले चेयरमैन नवीन कुमार का कार्यकाल 29 अगस्त को पूरा हो गया था। पांडे को जीएसटीएन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। 

शेल कंपनियों की राजनीतिक सांठगांठ पर सरकार की नजर

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  • वित्त मंत्रालय की फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट और इनकम टैक्स विभाग डायरेक्टरों से पूछताछ करेगा

  • सरकार यह पता करना चाहती है कि आखिर इन शेल कंपनियों को बनाने के पीछे किसका हाथ है

नई दिल्ली। शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और उनके बैंक खातों पर रोक लगाने के बाद अब सरकार यह पता करने जा रही है कि इन शेल कंपनियों का राजनीतिक नेताओं और बड़े कॉर्पारेट दिग्गजों से क्या लिंक है।

यानी, इनके पीछे राजनेताओं और बड़ी कंपनियों का तो हाथ नहीं, जिन्होंने अपनी ब्लैक मनी को खपाने के लिए इन शेल कंपनियों का निर्माण किया।

सरकार का यह शक इसलिए गहरा गया है कि जितनी शेल कंपनियां पकड़ी गई हैं, उनमें से 60 फीसदी कंपनियां तो सिर्फ कागज में हैं और उनका कोई ऑफिस तक नहीं है।

शेल कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन के समय ऑफिस का जो पता दिया है, उसमें तो किसी और कंपनी का ऑफिस है। इसके अलावा एक ही पते पर कई कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है और जांच में पता चला कि उस पते पर किसी कंपनी का ऑफिस नहीं है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, शेल कंपनियों के डायरेक्टरों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनको नोटिस भेजा जा रहा है।

अब वित्त मंत्रालय की फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट और इनकम टैक्स विभाग डायरेक्टरों से पूछताछ करेगा। सरकार यह पता करना चाहती है कि आखिर इन शेल कंपनियों को बनाने के पीछे किसका हाथ है।

कौन हैं वे लोग, जो शेल कंपनियों के इस खेल को अंजाम दे रहे हैं। इसमें राजनीतिक नेताओं और बड़े कॉर्पोरेट लोगों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती और उनके पति के खिलाफ ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा है।

इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने शेल कंपनियों के जरिये अपने ब्लैक मनी को वाइट में तब्दील किया और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया। इनकम टैक्स विभाग और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिश (एसएफआईओ) शेल कंपनियों पर कार्रवाई जारी रखेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, 10 लाख कंपनियां आईटी डिपार्टमेंट के राडार पर हैं जिन पर जांच जारी है। मिल रही जानकारी के मुताबिक 6 लाख ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने नियमों का पूरा पालन नहीं किया है।

सरकार का मानना है कि शेल कंपनियों के खत्म होने से टैक्स बेस में बढ़त होगी। सरकार शेल कंपनियों को लेकर और सख्त हो गई है। उधर शेल कंपनियों के डायरेक्टर्स अब किसी दूसरी कंपनी में डायरेक्टर नहीं बन पाएंगे।

कंपनी मामलों के मंत्रालय में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। इस मामले पर इंटरनैशनल टैक्स अडवाइजर टी पी ओस्तवाल का कहना है कि सबसे पहले तो शेल कंपनियों की परिभाषा तय होनी चाहिए।

रातोंरात कोई कंपनी क्या शेल कंपनी हो सकती है? फर्जीवाड़ा करनेवाली कंपनियों पर सख्ती होनी चाहिए। किसी कंपनी के शेल कंपनी साबित होने पर ही डायरेक्टर पर ऐक्शन होना चाहिए।

राज्य के पहले मेडिकल कॉलेज में मरीजों के पर्चे होंगे डिजिटल

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  •  झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में शनिवार को सांसद दुष्यंत सिंह करेंगे मेडकॉर्ड्स हेल्थकेअर का उद्घाटन

  • जिले के सभी रोगियों को मिलेगी निःशुल्क डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल सुविधा

कोटा। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में मरीजों के पर्चे एवं जांच रिपोर्टों का मेडकॉर्ड्स द्वारा डिजिटलीकरण किया जाएगा। शनिवार को झालावाड़-बारां क्षेत्र के सांसद दुष्यंत सिंह पूरे जिले के रोगियों की निःशुल्क मेडिकल हेल्थ प्रोफाइल बनाने के लिए जनहित में मेडकॉर्ड्स हेल्थकेअर सुविधा का उद्घाटन करेंगे।

मेडकॉर्ड्स के सीईओ एवं युवा आईटी विशेषज्ञ श्रेयांस मेहता एवं निखिल बाहेती ने बताया कि एसआरजी चिकित्सालय में सुबह 11 बजे आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि सांसद दुष्यंत सिंह होंगे तथा अध्यक्षता जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष श्रीकृष्ण पाटीदार करेंगे।

विशिष्ट अतिथि संसदीय सचिव नरेंद्र नागर, भाजपा विधायक आर.सी.सुनारीवाल, विधायक के.एल.मीणा, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय जैन, जिला प्रमुख टीना भील, जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.आसेरी, एसआरजी अस्पताल के अधीक्षक डॉ.के.के.शर्मा होंगे। 

उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमओयू होने के बाद मेडकॉर्ड्स ने सभी विभागों में 100 से अधिक चिकित्सकों को मरीजों के पंजीयन, डिजिटल रिकॉर्ड को देखने तथा सुरक्षित रखने के बारे में प्रशिक्षण दिया।

अतिरिक्त प्रिंसीपल प्रथम डॉ.दीपक गुप्ता ने कहा कि गांवों के मरीजों के जांच रिकॉर्ड व पर्चे गुम हो जाते हैं, जिससे उन्हें दोबारा जांच करवानी पड़ती है। मेडकॉर्ड्स पर पंजीयन होने से उनके रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेंगे।

गांवों तक पहुंची डिजिटिल हेल्थकेअर
इससे पहले कोटा में भीमगंजमंडी, दादाबाडी डिस्पेंसरी व रामपुरा सेटेलाइट अस्पताल में इसे चालू करने से हजारों रोगियों को लाभ मिल रहा है।

गत 18 अगस्त को डिजीफेस्ट कोटा में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने मेडकॉर्ड्स हेल्थकेअर को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानते हुए इसे पूरे राज्य में लागू करने का भरोसा दिलाया था। इसमें ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के मरीजों के लिए अलग-अलग एप हैं, जो उस क्षेत्र में बीमारियों का सर्वे कर बनाए गए।

पर्सनल हैल्थ असिस्टेंट है मेडकॉर्ड्स
मेडकॉर्ड्स के सीइओ ने बताया कि डिजिटल होने के बाद हर रोगी की मेडिकल प्रोफाइल मोबाइल पर मिलेगी, जिसे वह देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सक को भेजकर इलाज ले सकते हैं। यह पर्सनल हैल्थ असिस्टेंट की तरह होगा। इसमें डाटा व जांच रिपोर्ट सिक्यूरिटी, एक्सेसिंग व शेअरिंग तीन ऐसे पहलू हैं, जिससे हर रोगी को निशुल्क लाभ होगा।

इसमें डाटा लेटेस्ट तकनीक एएएस-256 से सुरक्षित रहेगा। क्लाउड सर्विसेस से रिकॉर्ड जरूरत के समय 100 प्रतिशत उपलब्ध होगे। दुनिया के टॉप-10 स्टार्टअप में शामिल यह तकनीक मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।

रेजोनेन्स कोचिंग समूह पर आयकर छापे की करवाई जारी

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कोटा। आयकर विभाग की इंवेस्टीगेशन विंग  ने गुरुवार को कोटा के रेजोनेन्स कोचिंग समूह के देश भर में फैले संस्थानों पर आयकर सर्वे की कार्रवाई शुरू की थी, जो  शुक्रवार को भी जारी रही । कार्रवाई शुक्रवार को भी जारी है। कोटा में कोचिंग समूह के 12 संस्थानों पर एक साथ कार्रवाई चल रही है।

आयकर विभाग के 250 से ज्यादा कर्मचारी इस कार्रवाई में जुटे हैं। कोचिंग समूह के साथ ही उससे जुड़े सीए, ज्वैलर्स और आर्किटेक्ट के ठिकानों पर भी आयकर कर्मी दस्तावेज तलाशने में जुटे हैं।

आयकर विभाग उदयपुर की अन्वेषण विंग की ओर से शहर के एक नामी कोचिंग समूह के देशभर में फैले संस्थानों पर गुरुवार को एक साथ सर्वे व छापेमारी की कार्रवाई शुरू की।

आयकर विभाग के 250 से ज्यादा कर्मियों ने देशभर में ने कोचिंग समूह के संस्थानों एवं उससे जुड़े ज्वैलर्स, सीए एवं आर्किटेक्ट के यहां भी जांच में जुटे है। गुरुवार सुबह 5 बजे शुरू हुई आयकर सर्वे की कार्रवाई शुक्रवार को भी जारी रही।

आयकर विभाग की एक दर्जन टीमों ने सबसे पहले टीम कोचिंग समूह के निदेशक के तलवंडी स्थित आवास पर पहुंची और दरवाजा खटखटाया और गेट खोलते ही आयकर अधिकारी इनकम टैक्स रेड की बात कहते हुए घर में दाखिल हुए और कार्रवाई की।

झालावाड़ रोड स्थित कॉरपोरेट ऑफिस, जवाहर नगर स्थित संस्था भवन पर कार्रवाई शुरू की। आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कोटा शहर में कोचिंग समूह के करीब एक दर्जन संस्थानों पर कार्रवाई की जा रही है।

वहीं एक प्रोपर्टी व्यवसायी के चार-पांच ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा रही है। शहर में हो रही आयकर सर्वे की कार्रवाई में 250 से अधिक आयकर अधिकारी, इंस्पेक्टर लगे हुए हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस भी तैनात की गई। अधिकारी दस्तावेजों की पड़ताल में जुटे हुए हैं।
 

सेबी का पर्ल ग्रुप पर 2423 करोड़ का जुर्माना

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने गुरुवार को जुर्माने का ताजा आदेश जारी किया। नियामक ने यह भारी-भरकम पेनाल्टी सेबी के धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम नियम के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर लगाई है।

नई दिल्ली। बाजार नियामक सेबी ने गैरकानूनी तरीके से फंड जुटाने की वजह से पीएसीएल लिमिटेड (पर्ल) व इसके चार डायरेक्टरों पर 2,423 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। यह राशि डेढ़ महीने के भीतर जमा करानी होगी। कंपनी के इन निदेशकों में तारोलचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रत भट्टाचार्य शामिल हैं।

पर्ल ने अवैध स्कीमों के जरिये जनता से 49,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जुटाई थी। सेबी ने तीन साल पहले ही यह रकम सूद समेत निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति इस राशि की वापसी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने गुरुवार को जुर्माने का ताजा आदेश जारी किया। नियामक ने यह भारी-भरकम पेनाल्टी सेबी के धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम नियम के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर लगाई है।

अपने 47 पेज के आदेश में सेबी ने कहा है कि पीएसीएल लिमिटेड और इसके चारों डायरेक्टर जुर्माने की राशि 45 दिनों के भीतर जमा करा दें। सेबी के मुताबिक पीएसीएल से अभी तक कुछ सौ करोड़ की राशि एकत्र करने में ही सफलता मिल पाई है।

ऐसे में पर्ल और उसके डायरेक्टरों द्वारा अवैध तरीके से कमाए गए मुनाफे पर ज्यादा बड़ा जुर्माना लगाने की जरूरत है। हालांकि, निवेशकों के हित को सर्वोपरि रखते हुए नियामक ने अवैध रूप से अर्जित लाभ के बराबर ही पेनाल्टी लगाने का फैसला किया है।

सेबी ने कहा कि ताजा मामले में उल्लंघन कितना भयावह है इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि 15 साल की अवधि में पर्ल ने 49 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए। जबकि इस राशि पर एक साल में ही 2,423 करोड़ रुपये का मोटा मुनाफा कमाया।

नियामक ने 307 फर्मों से पाबंदी हटाई
सेबी ने कर चोरी के लिए शेयर बाजार का दुरुपयोग करने के चलते जांच के दायरे में आई 307 कंपनियों पर लगी पाबंदी हटा ली है। हालांकि नियामक ने कहा है कि बाकी 96 कंपनियों के खिलाफ अपनी कार्यवाही जारी रखेगा, क्योंकि उन्होंने कई बार नियम-कानूनों का उल्लंघन किया है।

सेबी ने दो अलग-अलग आदेशों में कहा है कि 307 कंपनियों की जांच में उसके नियमों के उल्लंघन का कोई सुबूत नहीं मिला है। नियामक ने सबसे पहले 19 दिसंबर, 2014 को अंतरिम आदेश के जारी 152 कंपनियों के कारोबार पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 11 अगस्त, 2015 को उसने कुछ कंपनियों के खिलाफ पाबंदी का अंतिरिम आदेश जारी किया था।

भारत-सिंगापुर का द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब डॉलर होने की संभावना

भारत के सिंगापुर को निर्यात में 23% की वृद्धि आई है जबकि कुल निर्यात केवल 4% बढ़ा है

सिंगापुर। हालिया वर्षों में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि के चलते भारत और सिंगापुर के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2019-20 तक 25 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है।

निर्यातकों के भारतीय संगठन फियो के प्रमुख गणेश कुमार गुप्ता ने कल यह बात यहां कही। उन्होंने कहा, हम 2019-20 तक सिंगापुर के साथ व्यापार को बढ़ाकर आसानी से 25 अरब डॉलर कर सकते हैं। वर्तमान में यह 17 अरब डॉलर है।

गुप्ता ने यह बात यहां चार दिन के सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय भारतीय प्रर्दशनी के उद्घाटन के मौके पर कही। पिछले वित्त वर्ष में भारत के सिंगापुर को निर्यात में 23% की वृद्धि आई है जबकि कुल निर्यात केवल 4% बढ़ा है। भारत के कुल व्यापार में सिंगापुर के साथ व्यापार की हिस्सेदारी मात्र 2.52% है।

उन्होंने कहा कि फियो छोटे एवं मझाोले स्तर के विनिर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं  के साथ अपनी भागीदारी बढ़ाएगा। इस तरह की प्रदर्शनी सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए एक बहुत बढ़िया मंच हैं जहां वे सिंगापुर में मांग वाले ग्राहकों को अपने सामान को प्रदर्शित कर सकते हैं।

कंपोजिशन में 16 अगस्त तक केवल 10 लाख पंजीकरण

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मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन्होंने 16 अगस्त तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए अगले साल ही मौका मिल सकता है।

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत  छोटे कारोबारियों को राहत देने के कर अनुपालन और स्थिर कर की दर योजना को जल्द ही दोबारा लाई जा सकती है। 16 अगस्त को खत्म हुई कंपोजिशन स्कीम को केवल 10 लाख करदाताओं द्वारा ही अपनाया गया था।

ऐसे में जीएसटी परिषद शनिवार को हैदराबाद में होने वाली बैठक में इस योजना को दोबारा शुरू करने पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा हुआ छोटे कारोबारियों को इस योजना का लाभ उठाने का एक और मौका मिल सकता है।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘छोटे कारोबारियों द्वारा पंजीकरण में समस्या का सामना करने की शिकायत मिली थी। कुछ कारोबारी कंपोजिशन स्कीम की जरूरतों के अनुरूप अपने कारोबारी मॉडल का मूल्यांकन करने के लिए थोड़ा समय चाहते थे।

ऐसे में हम चाहते हैं कि उन्हें इस योजना को अपनाने के लिए एक मौका और दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। यह योजना विस्तारित अवधि के अंत में जोर पकड़ी और 16 अगस्त तक 9,80,000 इकाइयाों ने पंजीकरण कराया, जबकि पहले की समय सीमा 21 जुलाई तक महज 1 लाख करोबारियों ने ही पंजीकरण कराया था।

दूसरे शब्दों में कहें तो कुल जीएसटी करदाताओं में से करीब 11 फीसदी ने कंपोजिशन स्कीम को अपनाया है। 75 लाख रुपये सालाना कारोबार वाली इकाइयां इस योजना के लिए आवेदन कर सकती हैं, जिसके तहत अगर इकाइ व्यापार से जुड़ी है 1 फीसदी, विनिर्माण पर 2 फीसदी और रेस्टोरेंट कारोबार पर 5 फीसदी कर देना पड़ता है।

मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन्होंने 16 अगस्त तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए अगले साल ही मौका मिल सकता है। लेकिन जीएसटी परिषद अगर मंजूरी देती है तो पंजीकरण नहीं कराने वालों को स्थिर दर योजना अपनाने का एक और मौका जल्द ही मिल सकता है।