Tuesday, June 30, 2026
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आईआईटी में गर्ल्स के लिए होंगी 14 फीसदी सीट

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  • आईआईटी में बेटियों का एनरोलमेंट बढ़ाने के लिए जैब ने लिया निर्णय

  • बेटियों की सीट खाली रहने पर भी लड़कों को नहीं मिलेगा एडमिशन

कोटा। आईआईटीमें साल 2018 से बेटियों के लिए रिजर्वेशन लागू हो जाएगा। आईआईटी में गर्ल्स का एनरोलमेंट बढ़ाने के लिए इस साल ज्वॉइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) ने 14 प्रतिशत सीटें बेटियों के लिए रिजर्व रखने का निर्णय लिया है। बेटियों के लिए रिजर्व सुपरन्यूमेरी सीट्स पर केवल गर्ल्स का ही एडमिशन होगा।

इसके चलते अगले साल आईआईटी में कई सीटें खाली रह सकती हैं। उम्मीद थी कि आईआईटी इसमें संशोधन करते हुए गर्ल्स की खाली सीटों पर रैंक के आधार पर लड़कों को भी एडमिशन देगी, लेकिन जैब ने साफ कर दिया है कि इन सीटों के खाली रहने पर भी लड़कियों को ही दाखिला मिलेगा।

भले ही लड़कियों की रैंक पीछे हो, इसके बाद भी अगर वह क्वालीफाई कर रही हैं तो खाली सीटों पर लड़कों की जगह लड़कियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अगर जनरल कैटेगरी में छात्रा को जगह नहीं मिल रही है तो वह भी इस कोटे के तहत आईआईटी में एडमिशन ले सकती है।

अभी आईआईटी में केवल 8 से 9% बेटियां
11000 सीटों में से मात्र 8 से 9% सीटों पर ही गर्ल्स स्टूडेंट्स आईआईटी में एडमिशन लेती हैं
अभी तक आईआईटी में लड़कियों के लिए कोई कोटा नहीं है। ऐसे में रैंक के आधार पर ही एडमिशन मिलता है। रैंक में पिछड़ने के कारण लड़कियां एडमिशन के लिए एलिजिबल नहीं होती हैं।

वहीं कई लड़कियां एलिजिबल होने के बावजूद पसंदीदा कॉलेज नहीं मिलने के कारण एडमिशन नहीं लेती। अधिकांश स्टेट में एनआईटी होने के कारण लड़कियां आईआईटी छोड़कर एनआईटी में एडमिशन लेती हैं।

यह पहल की सीबीएसई ने
सीबीएसईभी आईआईटी में गर्ल्स एनरोलमेंट बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसके तहत ही सीबीएसई ने उड़ान प्रोजेक्ट किया है। इस साल ही उड़ान प्रोजेक्ट के माध्यम से करीब 135 लड़कियों ने आईआईटी में एडमिशन लिया है। उड़ान के तहत आईआईटी के पुराने पेपर ट्यूटोरियल छात्राओं को उपलब्ध करवाया जाता है।

आम बजट की तैयारी अगले हफ्ते से – वित्त मंत्रालय

  • बजट पर 14 सितंबर से विचार-विमर्श शुरू करेगा वित्त मंत्रालय
  • रेल बजट को आम बजट का हिस्सा बनाएगी मोदी सरकार
  • इस बार के आम बजट पर होगी “टीम इंडिया” की छाप
  • 3 साल के एफडी हो सकते हैं टैक्स फ्री
  • पंचवर्षीय योजनाओं का आम बजट में हो सकता है पटाक्षेप

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए पेश किए जाने वाले आम बजट की तैयारी वित्त मंत्रालय अगले हफ्ते शुरू करेगा। आपको बता दें कि देश में जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला आम बजट होगा।

वित्त मंत्रालय जल्द ही विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए समय सीमा जारी करेगा। फिलहाल अगला बजट फरवरी में पेश किया जाना तय है। यह मौजूदा सरकार का अंतिम पूर्ण आम बजट होगा क्योंकि साल 2019 में लोकसभा चुनाव होना है।

आजाद भारत के पहले कर सुधार कहे जाने वाले वस्तु एवं सेवा कर कानून (जीएसटी) को 1 जुलाई 2017 को लागू कर दिया गया था। वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में टैक्स का वर्गीकरण अलग था।

लेकिन अगले बजट में कई अप्रत्यक्ष करों के खत्म हो जाने के कारण बजट में बड़े बदलाव करने होंगे। एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि जीएसटी दरों के बारे में निर्णय केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल करेगी, ऐसे में 2018-19 के बजट में जीएसटी से संबंधित कोई टैक्स प्रस्ताव नहीं होगा।

बजट में सरकार की नई योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ केवल प्रत्यक्ष कर (व्यक्तिगत इनकम टैक्स और कार्पोरेट टैक्स) के मामले में बदलाव के प्रस्ताव होंगे। इसके अलावा सीमा शुल्क का प्रस्ताव होगा।

अधिकारी के मुताबिक जब से जीएसटी काउंसिल की ओर से जीएसटी दरें तय की गई हैं, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली करते हैं और उसमें अन्य राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं।

काउंसिल ने 9 सितंबर को हुई बैठक में रोजमर्रा के इस्तेमाल की करीब 40 वस्तुओं पर लगने वाली जीएसटी दर को कम किया है। वहीं शनिवार को जीएसटीआर-1 की आखिरी तारीख को भी बढ़ाकर 10 अक्टूबर कर दिया गया।

GST: टीडीएस, टीसीएस कटौती का रजिस्ट्रेशन 18 सितंबर से

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सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) कानून के मुताबिक, अधिसूचित इकाइयों को 2.5 लाख रुपये से ज्यादा की वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के लिए भुगतान पर एक फीसदी का टीडीएस संग्रह करना होगा।

नई दिल्ली। स्रोत पर कर (टीडीएस ), कर एकत्र (टीसीएस)और कटौती की मंजूरी देने के लिए इकाइयों का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू होगा।

हालांकि किस तारीख से स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) तथा स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) किया जाएगा, उसकी अधिसूचना बाद में जारी की जाएगी।

हैदराबाद में 21वीं बैठक के दौरान, जीएसटी परिषद ने टीडीएस तथा टीसीएस कटौती के योग्य व्यक्तियों के लिए पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू करने का फैसला किया है।

सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) कानून के मुताबिक, अधिसूचित इकाइयों को 2.5 लाख रुपये से ज्यादा की वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के लिए भुगतान पर एक फीसदी का टीडीएस संग्रह करना होगा।

साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों को जीएसटी के तहत आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने पर एक फीसदी टीसीएस का संग्रह करना होगा।

आधार से लिंक नहीं तो फरवरी 18 से सिम कार्ड डिऐक्टिवेट होगा

इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह एक साल के अंदर सौ करोड़ से ज्यादा वर्तमान और आगामी मोबाइल टेलिफोन उपभोक्ताओं की पहचान स्थापित करने की व्यवस्था करे।

नई दिल्ली। फरवरी 2018 तक सभी सिम कार्ड का आधार के साथ वेरिफाई होना जरूरी है। अगले साल फरवरी तक जो सिम कार्ड आधार के साथ वेरिफाई नहीं होंगे उन्हें डिऐक्टिवेट कर दिया जाएगा।

इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह एक साल के अंदर सौ करोड़ से ज्यादा वर्तमान और आगामी मोबाइल टेलिफोन उपभोक्ताओं की पहचान स्थापित करने की व्यवस्था करे। कोर्ट ने आदेश दिया था कि सत्यापन के लिए यूजर्स के सिम कार्ड को उनके आधार से लिंक कर दिया जाए।

तत्कालीन सीजेआई जे. एस. खेहर और जस्टिस एन. वी रमन की पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के बयान के बाद यह आदेश दिया था।

अटॉर्नी जनरल ने बयान में कहा था कि मोबाइल उपभोक्ताओं की पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था की जाएगी और नए मोबाइल उपभोक्ताओं को आधार आधारित ई-केवाईसी फॉर्म भरने होंगे, ताकि सही पहचान सुनिश्चित हो सके।

कोर्ट ने कहा था, ‘यह दलील दी जाती है कि एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी और जांच की प्रक्रिया एक साल में पूरी कर ली जाएगी । हम संतुष्ट हैं कि रिट याचिका में किए गए आग्रह पर समुचित ध्यान दिया जाएगा।’

पीठ ने उम्मीद जताई थी कि प्रक्रिया निकट भविष्य में पूरी हो जाएगी और अधिकतम एक साल पूरा होने से पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक महीने बाद ही टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने आधार कार्ड के बगैर सिम कार्ड देने पर रोक लगा दी थी।

ट्राई की तरफ से जारी गाइडलाइन में कहा गया था कि मोबाइल सिम कार्ड, ब्रॉडबैंड और फिक्स लाइन फोन के लिए आधार कार्ड अनिवार्य होगा। देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की बात पर पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया खेहर ने कहा था कि मोबाइल सिम कार्ड रखने वालों की पहचान बेहद जरूरी है।

ऐसा न होने पर यह धोखाधड़ी से रुपये निकालने के काम में इस्तेमाल हो सकता है। सरकार को जल्द ही पहचान करने की प्रक्रिया करनी चाहिए, वहीं केंद्र की ओर से कहा गया था कि इस मामले में उसे हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते का वक्त दिया था।

रोजमर्रा के इस्तेमाल की 40 वस्तुओं पर GST में कमी

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नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 21वीं बैठक में रोजमर्रा इस्तेमाल की 40 चीजों पर जीएसटी रेट कम करने का फैसला किया है।

इसके अलावा छोटी कारों पर जीएसटी दरों को लेकर जीएसटी काउंसिल ने कोई बदलाव नहीं किया है। इस फैसले से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की बात कही जा रही है।

 रबड़ बैंड, झाड़ू, सूखी इमली, रेनकोट, कस्टर्ड पाउडर और अगरबत्ती सहित 40 दैनिक उपभोग की चीजों पर जीएसटी दरें कम करने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा जीएसटी काउंसिल ने छोटी कार खरीदने वालों को भी राहत दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया छोटी कारों के सेस में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जबकि पहले माना जा रहा था इन कारों पर लगने वाले सेस में इजाफा हो सकता है।

जेटली ने कहा कि पेट्रोल और डीजल से चलने वाली छोटी कारें जीएसटी लागू होने के बाद तीन फीसद सस्ती हुई हैं और इन्हें लेकर अभी कोई बदलाव नहीं होगा।

हालांकि जीएसटी काउंसिल ने तय किया है कि मिड साइज कारों के सेस में 2 पर्सेंट का इजाफा होगा। वहीं बड़ी कारों पर सेस 5 पर्सेंट बढ़ाया गया है। इसके अलावा एसयूवी पर 7 पर्सेंट सेस बढ़ाया गया है, जबकि 13 सीटर वीइकल पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

देखें, किन-किन चीजों पर जीएसटी रेट में मिली राह

GST पोर्टल की खामियां भुगत रहे कारोबारी, देखिए वीडियो

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कोटा। जीएसटी लागू हुए 71 दिन से अधिक हो चुके हैं। फिर भी आये दिन जीएसटी पोर्टल पर तकनीकी खामियों का खामियाजा कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। तकनीकी खामियों को दुरुस्त नहीं किया गया। रिटर्न भरने के समय तो पोर्टल काम करना बंद कर देता है। पहले जीएसटीआर 3B और हाल ही में जीएसटीआर -1 के समय डीलर अंतिम तिथि तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। सरकार अपनी नाकामियां छुपाने के लिए अंतिम तारीख बढ़ा देती है।

यह मानना है टैक्स एडवोकेट राजकुमार विजय का। आइये जाने क्या- क्या दिक्क्तों का सामना करदाताओं को करना पड़ रहा है। यह जानने के लिए हमें यह वीडियो जरूर देखना चाहिए। हो सकता है आपकी पीड़ा भी इसी में छुपी हो।
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तनावमुक्त कोचिंग के लिए पढ़ाई के साथ कल्चरल एक्टिविटी भी हों

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छात्र-छात्राएं यदि व्यक्तिगत या शैक्षणिक परेशानी के कारण अशांति, निराशा, अकेलापन, घुटन या अवसाद महसूस करते हों तो अपनी प्रॉब्लम कोचिंग संस्थान के काउंसलर से मिलकर साझा करें

कोटा। शिक्षा नगरी में देश के सभी राज्यों से कोचिंग के लिए आने वाले विद्यार्थियों में मानसिक तनाव बढना चिंता का विषय है, इसे कम करने के लिए शनिवार को राज्य बाल सरंक्षण आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित ‘ बस अब और नहीं’ जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखकर रवाना किया।

रैली में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति एवं चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने भाग लिया। आयोग अध्यक्ष चतुर्वेदी ने कहा कि सभी के प्रयासों से कोचिंग संस्थानों में शिक्षा का माहौल तनावमुक्त बनाया जाए।

उन्होंने कोचिंग संस्थानो एवं स्कूलों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे संस्थानों में ऐसे अवेयरनेस रैली, स्पोटर्स, डिबेट, म्यूजिक, ड्राइंग व कल्चरल एक्टिविटी नियतिम रूप से आयोजित करें ताकि प्रतिस्पर्धा के वातावरण में कोचिंग विद्यार्थियों का मानसिक तनाव कम हो सके।

छात्र-छात्राएं यदि व्यक्तिगत या शैक्षणिक परेशानी के कारण अशांति, निराशा, अकेलापन, घुटन या अवसाद महसूस करते हों तो अपनी प्रॉब्लम कोचिंग संस्थान के काउंसलर से मिलकर साझा करें। रैली में विभिन्न शैक्षणिक व स्वयंसेवी संस्थाओं के 2 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने हाथों में प्रेरक तख्तियां लेकर जागरूकता के लिए पैदल मार्च किया।

इस मौके पर डॉ. एम.एल. अग्रवाल, जिला बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष हरीश गुरूबक्षाणी, उपनिदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग राकेश वर्मा, जिला बाल सरंक्षण इकाई के दिनेश शर्मा सहित विभिन्न प्रतिनिधि मौजूद रहे।

जनता का हर कार्य स्मार्टनेस तरीके से पूरा करें

दो दिवसीय स्मार्ट सिटी वर्कशॉप में नवाचारों पर हुआ मंथन

स्मार्ट सिटी में शामिल अधिकारियों ने दिए जनसेवाओं से जुडे़ प्रोजेक्ट के प्रजेंटेशन

कोटा। दो दिवसीय स्मार्ट सिटी समिट में राज्यों से चयनित शहरों के अधिकारियों व कंपनी प्रतिनिधियों के बीच शहरों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर मंथन हुआ। जिला कलक्टर रोहित गुप्ता ने कहा कि शहर को किसी एक पक्ष के स्मार्ट होने से नहीं बल्कि नागरिकों, संगठनों व संस्थाओं के कार्यों में स्मार्टनेस लाने से ही स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल सकता है।

जनता से जुड़ी हर सेवा समयबद्ध एवं पारदर्शी हों। वे कोटा में ‘रिक्रिएटिंग कोटा’ कैम्पेन से शहर के सार्वजनिकं, ऐतिहासिक स्मारकों व पर्यटक स्थलों तथा आवासीय क्षेत्रों में स्वच्छता से परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक अंशुमान भौमिया ने कहा कि ट्रेफिक मैनेजमेंट स्मार्ट सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। कंट्रोल कमांड सेन्टर से यातायात संचालन पर नजर रहती है। ट्रेफिक नियम तोड़ने वालों को घर बैठे चालान भेजना आसान हो गया है। जल्द ही ऑनलाइन एफआईआर एवं अपराधियों के डाटाबेस ऑनलाइन किये जाएंगे।

10 किमी तक ‘टूरिस्ट वॉक-वे’ बनेगा
नगर निगम आयुक्त डॉ.विक्रम जिन्दल ने कहा कि शहर में बहुमंजिला पार्किंग, नालों, सरकारी भवनों की छतों पर सोलर पैनल का प्लान बनाया गया है।

शहर में ऐतिहासिक स्थलों से 10 किमी का वॉक-वे, वाटर एडवेंचर एक्टिविटी, निगम सम्पत्तियों की जीओ ट्रेकिंग, वाहनों पर जीपीएस सिस्टम, रोड किनारे ग्रीन वॉल जैसे काम पूरे कर स्मार्टनेस लाने का प्रयास रहेगा।

स्मार्ट सिटी अम्ब्रेला एप से जनता को 18 सेवाओं, मेडकॉर्ड्स से डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल, कोटा इंडिया रीड्स से ई-बुक, स्मार्ट डस्टबिन, बैरल गार्डन आदि के बारे में बताया।

उदयपुर व दुर्ग आयुक्त ने बताए सफाई के नवाचार
उदयपुर नगर निगम के सीईओ सिद्धार्थ सिहाग ने ई-रिक्शा, नो व्हीकल जोन, सोलर पार्क, स्मार्ट क्लासरूम, नदी संरक्षण, हेरिटेज ईमारतों के रखरखाव व कचरा निस्तारण आदि की जानकारी दी।

छत्तीसगढ से दुर्ग नगरनिगम के सीईओ एस.के.सुन्दरानी ने बताया कि जीरो वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम जनता, सरकारी संस्थाओं व व्यापारिक संगठनों सभी के लिए उपयोगी है। घर के कचरे का घर में निस्तारण हो। दुर्ग में मछली मार्केट का कचरा बतख पालक स्वयंसेवी संस्थाओं को देकर उन्हें 26 तालाबों से रोजगार दिया जा रहा है।

स्मार्ट तरीके से अमल करना होगा
आईसीआईसीआई बैंक के रीजनल मैनेजर अमित लोहिया ने सुझाव दिया कि सभी सेवाएं जनता को पोर्टल से दी जाएं। ई-गवर्नेंस, स्मार्ट परिवहन सेवा, स्मार्ट सीवरेज, सभी के लिए बैंकिंग व अन्य सेवाएं डीबीटी से उपलब्ध कराई जाए। कॉमन सिटी पेमेन्ट सिस्टम के लिए स्मार्ट कार्ड जारी किए जा सकते हैं।

पासपोर्ट सेवा केन्द्र के गोलक कुमार सिमली ने पासपोर्ट सेवा में ई-सॉल्यूशन की जानकारी दी। इंडस टेलीकॉम टॉवर के राजस्थान क्षेत्र के सीईओ दिनेश अरोड़ा ने सुझाव दिया कि जनता को वाई-फाई सुविधा, डिजीटल तकनीक, पर्यावरण सेवा, स्मार्ट पुलिस एवं ई-गवर्नेंस के लाभ देने से स्मार्ट सिटी की परिकल्पना साकार हो सकती है। महापौर महेश विजय ने कहा कि सरकारी दफ्तरों से जनता खुश होकर वापस लौटे तभी स्मार्ट सिटी का सपना सच होगा।

स्मार्ट सेवाओं के लिए मिले अवार्ड
समिट में अमृतसिटी पुरस्कार दुर्ग नगर परिषद आयुक्त सुदेष कुमार सुन्दरानी को, तेलांगना के रामागुंडम नगर परिषद आयुक्त डॉ. डी.जॉन सेमसन, स्मार्ट सिटी अवार्ड राजनांदगांव के नगर परिषद सीईओ अश्वनी देवांगन, उज्जैन नगर निगम के सीईओ अवधेश शर्मा, पासपोर्ट सेवा केन्द्र के मुख्य तकनीकी अधिकारी गोलक कुमार सिमली, उदयपुर नगर परिषद आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग, कोटा नगरनिगम आयुक्त डॉ. विक्रम जिन्दल, जयपुर विकास प्राधिकरण के स्मार्ट सिटी नोडल अधिकारी देवेश गुप्ता, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट अवार्ड पुणे महानगर परिवहन सेवा के सीएमडी तुकाराम मुंधे, पर्यावरण के क्षेत्र में अच्छी पहल के लिए नेचरटेक कम्पनी के प्रबंध निदेशक विपुल देसाई, स्मार्ट कनेक्टिविटी अवार्ड के लिए इंडस टावर के सीईओ दिनेश अरोडा, स्मार्ट कचरा प्रबंधन अवार्ड टेक्नो मार्केट के जीएम अमित शाह, स्मार्ट सोल्यूशन अवार्ड नमस्तेजी कम्पनी को दिया।

गांवों से डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल बनाने की शुरुआत

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  • डिजिटल इंडिया के तहत राज्य में सबसे पहले झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में हुआ एमओयू

  • 17 सितंबर को मुख्यमंत्री पूरे जिले के लिए करेंगी उद्घाटन

  • पहले चरण में 4 कस्बों से होगा डिजिटलीकरण

कोटा/झालावाड़। राज्य में सबसे पहले झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में मरीजों के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने मेडकॉर्ड्स के साथ एमओयू किया। एसआरजी चिकित्सालय में एक समारोह में मुख्य अतिथि सांसद दुष्यंत सिंह ने कहा कि हमारे लिए जीवन में स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं।

इसलिए मेडकॉर्ड्स द्वारा प्रत्येक नागरिक की हेल्थ प्रोफाइल बनाना बहुत उपयोगी रहेगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस स्टूडेंट्स से कहा कि वे भी ऐसे नवाचार से जुडे़ं जिससे आम जनता को राहत मिले।

मुख्यमंत्री  वसुंधरा राजे आगामी 17 सितंबर को पूरे जिले के लिए इस डिजिटलीकरण सुविधा का उद्घाटन करेगी। पहले चरण में भवानीमंडी, सुनेल, अकलेरा एवं खानपुर से इसे प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री की मंशा है कि 2018 तक पूरे राज्य के नागरिकों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल बनाने की दिशा में तेजी से काम हो। सांसद ने कहा कि मेडकॉर्ड्स हेल्थकेयर जैसी डिजिटल सुविधा से झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में नए आयाम स्थापित होंगे क्योंकि जिला अस्पताल होने से यहां गांवों से मरीज ज्यादा आते हैं।

जन-अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष श्रीकृष्ण पाटीदार ने कहा कि जिले में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जाएगा। हमें गर्व है कि आज जिन दो युवाओं ने इस सुविधा के लिए सबसे पहले झालावाड़ मेडिकल कॉलेज को चुना, उनका नाम पूरे देश में हो रहा है।

विशिष्ट अतिथि संसदीय सचिव नरेंद्र नागर, भाजपा विधायक आर.सी.सुनारीवाल, विधायक के.एल.मीणा एवं भाजपा जिलाध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि जिले में मेडिकल सुविधाओं को डिजिटल करने से आम जनता को बहुत मदद मिलेगी।

समारोह में जिला प्रमुख श्रीमती टीना भील, जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.आसेरी, एसआरजी अस्पताल के अधीक्षक डॉ.के.के.शर्मा एवं अतिरिक्त प्रिंसीपल प्रथम डॉ.दीपक गुप्ता सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर्स, गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

गांव और गरीब के इलाज को प्राथमिकता
इससे पहले सीएमएचओ डॉ.साजिद खान के साथ मेडकॉर्ड्स के सीईओ श्रेयांस मेहता ने एमओयू किया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले हमने डिजिटल हेल्थकेअर के लिए ग्रामीण क्षेत्र को चुना ताकि गरीब मरीजों को समय पर सस्ता व सही इलाज मिल सके।  एसआरजी हॉस्पीटल के डॉक्टर्स ने बताया कि ग्रामीण मरीजों से जांच रिपोर्ट व पर्चे गुम हो जाते हैं, जिससे उन्हें दोबारा जांचें करवानी पड़ती है।

चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (Chief Technology Officer) निखिल बाहेती ने बताया कि मेडकॉर्ड्स पर पंजीयन होने के बाद प्रत्येक नागरिक के पिछले एवं वर्तमान हेल्थ रिकॉर्ड गोपनीय एवं सुरक्षित रहेगा, जिसे वे मोबाइल से कहीं भी उपयोग कर सकेंगे। गांवों तक मोबाइल होने से हर नागरिक को इसका लाभ मिलेगा।

GSTR-1 फाइलिंग की अगली डेडलाइन 10 अक्टूबर, पेनल्टी नहीं

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जीएसटी काउंसिल के सदस्यों ने माना है कि जीएसटीएन में तकनीकी खामी एक गंभीर मसला है

नई दिल्ली । जीएसटी काउंसिल की बैठक में GSTR-1 की डेडलाइन को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। अब अगली डेडलाइन 10 अक्टूबर होगी। जीएसटी काउंसिल के सदस्यों ने माना है कि जीएसटीएन में तकनीकी खामी एक गंभीर मसला है और इस पर सदस्यों ने विस्तार से चर्चा की है।

जीएसटीएन की देखरेख के लिए 5 सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया गया है। वहीं जीएसटी पोर्टल के काम न करने के कारण लगने वाली इंटरेस्ट पेनल्टी को भी हटा लिया गया है। वहीं काउंसिल की बैठक में लग्जरी कार और एसयूवी कारों पर बढ़ाए गए सेस को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया।

क्या है जीएसटीआर-1: दरअसल जीएसटीआर-1 आउटवर्ड सप्लाई की डिटेल देने के लिए बनाया गया है। यानी जुलाई के महीने में आपने जितनी भी सेल की है या सामान (वस्तुओं) का एक्सपोर्ट किया है उस सब की डिटेल आपको इसमें देनी होगी।

जीएसटीआर-1 में क्या क्या जानकारियां देनी होंगी:

  • इंट्रा स्टेट सेल की जानकारी (उसी राज्य या शहर के भीतर की गई बिक्री का ब्यौरा)
  • इंटरस्टेट सेल (एक स्टेट से दूसरी स्टेटे में की गई सेल या बिक्री का ब्यौरा)

कुल एक्सपोर्ट का ब्यौरा

  • अगर आपने ई-कॉमर्स ऑपरेटर के जरिए कोई सेल की है, उसकी भी जानकारी देनी होगी
  • अगर आपने टैक्स स्लैब में निल/ जीरो रेटेड या एग्जेम्पेटेड आइटम की सेल की है तो उसका ब्यौरा भी देना होगा
  • यानी आपको इसमें बिल बाई बिल ब्यौरा देना होगा
  • GSTR-1 फाइल नहीं करते हैं तो क्या होगा: वहीं अगर आप जीएसटीआर-1 फाइल नहीं करते हैं तो आपको प्रतिदिन के हिसाब से 200 रुपए का जुर्माना देना पड़ सकता है।