Monday, June 29, 2026
Home Blog Page 5705

वर्ल्ड रैंकिंग में यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड टॉप पर

0

वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2018 में भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन फिर खराब, आईआईएससी की रैंकिंग टॉप संस्थान से घटकर 251-300 कैटिगरी में आ गई है। 

नई दिल्ली। मंगलवार को जारी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2018 में भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन फिर खराब रहा है। देश के सर्वोच्च रैंक पाने वाले संस्थान में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) शामिल है लेकिन इसकी रैंकिंग पिछले साल के 201-250 टॉप संस्थान से घटकर 251-300 कैटिगरी में आ गई है। आईआईएससी के परफॉर्मेंस में गिरावट का कारण इसके रिसर्च प्रभाव स्कोर और रिसर्च इनकम में गिरावट को बताया गया है।

इसी तरह से आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर जो सर्वश्रेष्ठ भारतीय संस्थान में थे की रैंकिंग 401-500 क्लब से 501-600 में आ गई है। आईआईटी बॉम्बे की रैंकिंग में कोई फर्क नहीं आया है और यह अभी 351-400 वाले क्लब शामिल है। इसी तरह से आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी रुड़की ने भी 501-600 वाले ब्रैकिट में अपनी पोजिशन बरकरार रखी है।

टाइम्स हायर एजुकेशन (टीएचई) ग्लोबल रैंकिंग्स के एडिटोरियल डायरेक्टर फिल बेटी ने कहा, ‘यह निराशाजनक है कि बढ़ती वैश्विक प्रतियोगिता के बीच टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में भारत का परफॉर्मेंस सही नहीं रहा है।’ भारत का परफॉर्मेंस चिंता का विषय इसलिए भी है कि चीन, हॉन्ग कॉन्ग और सिंगापुर की नामी यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्थान के पिछड़ने का कारण अंतरराष्ट्रीयकरण मोर्चे पर पीछे रहना है। उन्होंने कहा, ‘भारत में अध्ययन करने वाले विदेशी छात्रों की संख्याओं को सरकारी पॉलिसी में सख्ती से सीमित कर दिया गया है। इस पॉलिसी के कारण लॉन्ग टर्म फैकल्टी पोजिशन में विदेशी स्कॉलरों की नियुक्ति नहीं हो पाती है।’

टीएचई रैंकिंग में नंबर वन पोजिशन पर यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड है जिसके बाद कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का नंबर है। कैलिफॉर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी और स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी तीसरे नंबर पर है।

देश के 169 मैकडॉनल्ड्स स्टोर्स आज से बंद

0

‘टर्मिनेशन नोटिस पीरियड 5 सितंबर को खत्म हो गया, लिहाजा सीआरपीएल के पास मैकडॉनल्ड्स के सिस्टम और इसके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के इस्तेमाल का अधिकार नहीं रह गया है।

नई दिल्ली। मैकडॉनल्ड्स ने कहा है कि उसके ब्रैंड नेम और ट्रेडमार्क का उपयोग कनॉट प्लाजा रेस्ट्रॉन्ट्स लिमिटेड (CRPL) 6 सितंबर से नहीं कर सकेगी।

इसका मतलब यह हुआ कि देश के उत्तर और पूर्वी इलाकों में बुधवार से मैकडॉनल्ड्स के 169 स्टोर्स पर बंदी की तलवार लटक गई है। CPRL बोर्ड दिल्ली में चल रहे 55 में से 43 मैकडॉनल्ड्स रेस्तरां को 29 जून 2017 से ही बंद कर चुका है।

मैकडॉनल्ड्स इंडिया के एक प्रवक्ता ने ईमेल से भेजे गए जवाब में कहा, ‘टर्मिनेशन नोटिस पीरियड 5 सितंबर को खत्म हो गया। लिहाजा सीआरपीएल के पास मैकडॉनल्ड्स के सिस्टम और इसके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के इस्तेमाल का अधिकार नहीं रह गया है।

इसका अर्थ यह है कि उन्हें मैकडॉनल्ड्स के नाम, ट्रेडमार्क्स, डिजाइन, ब्रैंडिंग, ऑपरेशनल और मार्केटिंग प्रैक्टिस, नीतियों, फूड रेसिपी और स्पेसिफिकेशंस का इस्तेमाल बंद करना होगा। हम अपने लीगल और कॉन्ट्रैक्चुअल राइट्स के आधार पर कदम बढ़ा रहे हैं।’

मंगलवार को ही एक अन्य घटनाक्रम में नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने सीपीआरएल के एमडी विक्रम बख्शी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने फ्रेंचाइजी अग्रीमेंट रद्द करने के मैकडॉनल्ड्स के कदम को चुनौती दी थी। बख्शी ने कहा कि इस कदम का सीध और प्रतिकूल असर होगा।

उन्होंने कहा, ‘इससे 10 हजार से ज्यादा भारतीयों, कंपनी, सप्लायर्स और सभी बिजनस असोसिएट्स को झटका लगेगा।’ उन्होंने इस बात पर कॉमेंट नहीं किया कि बुधवार से स्टोर्स बंद हो जाएंगे या नहीं। उन्होंने ईटी से कहा, ‘अभी तो मैं यह कह रहा हूं कि हम बुधवार को नैशनल कंपनी लॉ अपेलट ट्राइब्यूनल में जाएंगे।’

दरअसल, सीपीआरएल मैकडॉनल्ड्स और बख्शी की 50-50 पर्सेंट हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर है। यह उत्तर और पूर्वी भारत में स्टोर्स ऑपरेट करता है।

21 अगस्त को अमेरिकी बर्गर ऐंड फ्राइज चेन मैकडॉनल्ड्स ने सीपीआरएल के साथ अपना अग्रीमेंट रद्द कर दिया था और उससे कहा था कि वह 15 दिनों के अंदर मैकडॉनल्ड्स के सभी ब्रैंडिंग और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का इस्तेमाल बंद कर दे।

इस बीच डीएलएफ सहित मैकडॉनल्ड्स आउटलेट्स के बड़े स्टोर ओनर्स ने कहा कि उन्होंने सीपीआरएल को स्टोर्स खाली करने के नोटिस दिए हैं।

डीएलएफ के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘अगर इन स्टोर्स में ब्रैंड नेम का अब इस्तेमाल नहीं हो सकता तो निश्चित तौर पर हम नए किरायेदार लाने पर गौर करेंगे। ऐसी खास लोकेशनों में स्टोर्स को खाली नहीं रहने दिया जा सकता है।’

174 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ खुला सेंसेक्स

मुंबई। शेयर मार्केट को बुधवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही करार झटका लगा है। 30 शेयरों वाला बीएसई सूचकांक 174 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 31,635 के स्तर पर खुला है।

निफ्टी भी 60 अंकों की गिरावट के साथ 9,891 के स्तर पर खुला। इससे पहले मंगलवार को बीएसई सूचकांक 107.30 अंकों या 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 31,809.55 पर बंद हुआ था।

बुधवार को कारोबार में इस तेज गिरावट का बड़ा नुकसान सन फार्मा को हुआ है। कंपनी के शेयरों में 3 पर्सेंट की गिरावट आई है।

निजी सेक्टर के दिग्गज बैंक एचडीएफसी के शेयर भी 1 फीसदी गिरे हैं। इससे पहले रुपया भी 10 पैसे की गिरावट के साथ 64.18 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला।

RERA : 2% पेनल्टी के साथ 30 सितंबर तक करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

0

डवलपर को प्रोजेक्ट कॉस्ट की 2% पेनल्टी या रजिस्ट्रेशन फीस की 10 गुना राशि में से जो भी अधिक होगी, वह जमा करवानी होगी

कोटा | रियल एस्टेट रेग्यूलेरिटी अथॉरिटी (रेरा) में पुराने प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन करवाने की समय सीमा 30 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। इसकी अंतिम तिथि 31 अगस्त को ही खत्म हो गई थी।

अब डवलपर को प्रोजेक्ट कॉस्ट की 2% पेनल्टी या रजिस्ट्रेशन फीस की 10 गुना राशि में से जो भी अधिक होगी, वह जमा करवानी होगी।

रजिस्ट्रेशन के लिए अावेदन करने पर रजिस्ट्रेशन फीस प्रोजेक्ट कॉस्ट की 10 प्रतिशत पेनल्टी लागू की जाएगी। प्रदेश में एक मई से रेरा लागू हो चुका है। कोटा में अभी तक रेरा में 35 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।

अभी भी लगभग 10 प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन नहीं हो सके हैं। ज्ञातव्य है कि रेरा में रजिस्ट्रेशन नहीं होने से बिल्डर अभी तक ममनी कीमत वसूल रहे थे। कुछ बेक डेट में पजेशन लेटर पर साइन करा कर खरीदारों को गुमराह कर रहे हैं। 

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होने पर ही वाहन छोड़ेगी पुलिस

मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन विभाग पुलिस को वाहनों की चैकिंग करके उनका थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने के निर्देश दिए थे

कोटा। सड़क दुर्घटनाओं में जान-माल का नुकसान होने पर पीड़ित पक्ष को बीमा क्लेम मिल सके, इसके लिए अब चालकों को अपने वाहनों का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना ही पड़ेगा। पुलिस जब्तशुदा वाहनों काे अब तब तक नहीं छोड़ेगी, जब तक चालक वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं कराएंगे।

इन दिनों चालक जब्तशुदा वाहन का कोर्ट में जुर्माना राशि जमा कराकर रिलीज ऑर्डर तो ले लेते है, लेकिन पुलिस उन वाहन को रिलीज करने से पहले थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का प्रमाण पत्र मांग रही है।

मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन विभाग पुलिस को वाहनों की चैकिंग करके उनका थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने के निर्देश दिए थे और ऐसे वाहनों के इंश्योरेंस नहीं होने पर कार्रवाई के लिए कहा था।

आदेशों के बाद में पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला एसपी ट्रैफिक डीएसपी को पत्र लिखा था कि जब्तशुदा वाहन काे थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होने पर ही रिलीज किया जाए। आदेशों के अनुसार ट्रैफिक जिला पुलिस चैकिंग के दौरान वाहनों का इंश्योरेंस भी देखेगी।

अगर वाहन का इंश्योरेंस खत्म हो गया तो पुलिस उसको हिरासत में ले लेगी और तब तक वाहन को नहीं छोड़ेगी, जब तक चालक वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं कराएगी। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से समझाइश अभियान शुरू कर दिया है।

हैंगिंग ब्रिज बन गया टूरिस्ट स्पाॅट, अब जल्दी टोल लगाने की तैयारी

हैंगिंग ब्रिज पर लोगों ने बीच में ही वाहनों को रोककर यहां पर सेल्फी लेना शुरू कर दिया, हालात यह है कि वहां आइसक्रीम पार्लर तक लग गए। 

कोटा। हैंगिंग ब्रिज पर लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए एनएचएआई ने यहां पर शीघ्र ही टोल शुरू करने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दिया है।

इसका शीघ्र नोटिफिकेशन करने का आग्रह किया है। पहले तीन माह के लिए अस्थाई ठेका दिया जाएगा, इसके बाद यहां स्थायी टोल लागू कर दिया जाएगा।

हैंगिंग ब्रिज पर शहरवासियों का जमघट शुरू हो गया है। हालात यह है कि वहां आइसक्रीम पार्लर तक लग गए। लोगों ने बीच में ही वाहनों को रोककर यहां पर सेल्फी लेना शुरू कर दिया।

दुर्घटना की आशंका को देखते हुए एनएचएआई ने भीड़ हटाने के लिए पहले तो प्रयास किए, अब यहां टोल लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजा है।

एनएचएआई के आरओ एमके जैन ने बताया कि टोल प्लाजा ब्रिज के दोनों ओर बनाए जाएंगे। शहर में रहने वालों को भी टोल देना होगा। वैसे 20 किलोमीटर के क्षेत्र में आने-जाने वाले निजी वाहनों के लिए मंथली पास की व्यवस्था होगी।

कालेधन पर प्रहार, फ्रीज किए दो लाख कंपनियों के बैंक खाते

0

इन कंपनियों ने कंपनी लॉ के नियमों  का पालन नहीं किया है, इससे पहले भी सरकार ने करीब 1 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया।

नई दिल्ली। सरकार ने दो लाख से अधिक कंपनियों के बैंक खातों पर रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय ने दो लाख से अधिक कंपनियों के रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिए है। कंपनी रजिस्ट्रार के स्तर से यह बड़ा कदम उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन कंपनियों को रजिस्ट्रार की सूची से हटा दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने नियमों का पालन न करने पर यह बड़ी कार्रवाई की है। बताया गया कि इन कंपनियों ने कंपनी लॉ के नियमों  का पालन नहीं किया है। इससे पहले भी सरकार ने करीब 1 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया। इसके अलावा कई और कंपनियों पर सरकार की नजर है।

पीएम मोदी ने बीते दो जुलाई को नई दिल्ली में द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में जानकारी दी थी कि सरकार ने पता लगाया है कि 3 लाख से ज्यादा प्राइवेट कंपनियां ऐसी मिली हैं, जो नोटबंदी के बाद सवालों के घेरे में हैं। सरकार ऐसी कंपनियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

नोटबंदी में ऐक्टिव हो गए थे 80 लाख निष्क्रिय खाते

9 नंबर से 31 दिसंबर 2016 तक कुल 31,300 करोड़ रुपये पूर्व में निष्क्रिय पड़े खातों में जमा कराए गए

अहमदाबाद । नोटबंदी से पहले निष्क्रिय बैंक खातों की संख्या और उसके बाद सक्रिय हुए अकाउंट्स की जानकारी 12 सार्वजनिक बैंकों ने एक आरटीआई के जवाब में दी है। बैंकों की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक निष्क्रिय पड़े 80.14 लाख बैंक खाते नोटबंदी के बाद ऐक्टिव हो गए थे।

आरटीआई के जवाब में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी के बाद 9 नंबर से 31 दिसंबर 2016 तक कुल 31,300 करोड़ रुपये पूर्व में निष्क्रिय पड़े खातों में जमा कराए गए। हालांकि इंडियन ओवरसीज बैंक ने निष्क्रिय खातों की संख्या की जानकारी देने से इनकार कर दिया है।

निष्क्रिय खातों में नोटबंदी के दौरान सबसे ज्यादा 4843.91 करोड़ रुपये की राशि पंजाब में जमा हुई है। भारतीय स्टेट बैंक और आईडीबीआई बैंक ने यह कहते हुए आरटीआई का जवाब देने से इनकार कर दिया कि डेटा बहुत बड़ा है। दोनों बैंकों ने कहा कि इतने लंबे डेटा को एकत्र करना मानव संसाधन और समय को व्यर्थ करने जैसा होगा।

आरटीआई आवेदन पर जिन बैंकों ने जानकारी दी है, उनमें सिंडिकेट बैंक, विजया बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इलाहाबाद बैंक, आंध्रा बैंक, पंजाब ऐंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नैशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के बाद सोना वर्ष के उच्चतम स्तर पर

कोरिया प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों को लेकर संकट की स्थिति जारी रहती है तो गोल्ड प्राइसेज में और तेजी आ सकती है और ये 1,360 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच सकते हैं

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के अपना सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण करने के बाद दुनिया भर में चिंता के माहौल के कारण गोल्ड प्राइसेज सोमवार को 200 रुपये चढ़कर 30,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के साथ वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। इसके साथ ही लोकल ज्वैलर्स की ओर से खरीदारी बढ़ने के कारण भी कीमतों में तेजी आई है।

इंडस्ट्रियल यूनिट्स और कॉइन मेकर्स से अधिक खरीदारी करने के कारण सिल्वर में भी तेजी आई और यह 200 रुपये बढ़कर 41,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

बुलियन ट्रेडर्स ने बताया कि विदेश में भी गोल्ड प्राइसेज में तेजी आई है। इसकी वजह उत्तर कोरिया का हाल का परमाणु परीक्षण है जिससे इनवेस्टर्स सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स में रकम लगा रहे हैं।

सिंगापुर में गोल्ड 0.71 पर्सेंट की तेजी के साथ 1,333.80 डॉलर प्रति आउंस पर रहा। दिल्ली में 99.9 और 99.5 पर्सेंट प्योरिटी वाला गोल्ड 200 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 30,600 रुपये और 30,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। पिछले दो सत्रों में गोल्ड में लगभग 350 रुपये की तेजी आई है।

सिल्वर के हाजिर दाम 200 रुपये चढ़कर 41,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर साप्ताहिक डिलीवरी वाली सिल्वर 540 रुपये बढ़कर 40,560 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही। हालांकि, सिल्वर कॉइन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया। इनकी कीमत खरीदारी के लिए 74,000 रुपये और बिक्री के लिए 75,000 रुपये प्रति 100 कॉइन रही।

एंजेल ब्रोकिंग के चीफ एनालिस्ट (नॉन-एग्री कमोडिटीज और करेंसीज), प्रथमेश माल्या ने बताया, ‘जुलाई से गोल्ड प्राइसेज में 10 पर्सेंट से अधिक की तेजी आई है। मौजूदा रैली का कारण उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण है जिससे पूरी दुनिया खतरा महसूस कर रही है।

अगर कोरिया प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों को लेकर संकट की स्थिति जारी रहती है तो गोल्ड प्राइसेज में और तेजी आ सकती है और ये 1,360 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच सकते हैं।’

उ. कोरिया के संकट से उबरा बाजार, बढ़त के साथ बंद

नई दिल्ली। सोमवार को नॉर्थ कोरिया संकट से वैश्विक बाजार में हलचल थी। मंगलवार को संकट कम होता दिखा। मंगलवार को सेंसेक्स 117 अंकों की बढ़त के साथ 31819 के स्तर पर बंद हुआ।

वहीं निफ्टी 39.35 अंकों की बढ़त के साथ 9952.20 पर बंद हुआ। कोल इंडिया, रिलायंस और टेक महिंद्रा के शेयर ऊपर ट्रेंड कर रहे थे।

बता दें कि इससे पहले सोमवार को उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के चलते समूचे एशिया के शेयर बाजारों में तेज गिरावट का दौर देखा गया था।

इसका ही असर भारत के मार्केट पर भी दिखा था। सोमवार को सेंसेक्स 189 अंकों की गिरावट के साथ 31702 पर और निफ्टी 70 अंकी की गिरावट के साथ 9903 पर बंद हुआ था।