Monday, July 6, 2026
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सभी को समान वेतन का नियम लागू, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

नई दिल्ली। देश के सभी लोगों को एकसमान वेतन देने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने वेतन संहिता 2019 को अधिसूचित कर दिया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने के बाद देश के करीब 50 करोड़ लोगों को फायदा होगा।

श्रम कानूनों में सुधार के उद्देश्य से लाई गई वेतन संहिता 2019 को लोकसभा ने 30 जुलाई और राज्यसभा ने 2 अगस्त को पारित कर दिया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति ने इसे 8 अगस्त 2019 को अपनी मंजूरी दे दी थी। इसके बाद ही इसके लागू होने के लिए सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार किया जा रहा था। अब सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

इस वेतन संहिता को सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा एवं कल्याण और औद्योगिक संबंध पर आधारित चार संहिताओं से तैयार किया गया है। यह चारों संहिताएं 44 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेंगी। यह विधेयक मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 , बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 की जगह लेगा।

इस वेतन संहिता के लागू होने के बाद नियोक्ता, श्रमिक संगठनों एवं राज्य सरकारों की त्रिपक्षीय समिति का गठन किया जाएगा जो श्रमिकों के लिए वेतन की नई दरें तय करेगी। त्रिपक्षीय व्यवस्था में जो भी वेतन तय होगा, उसको अधिसूचित कर दिया जाएगा। वेतन संहिता लागू होने से देश के करीब 50 करोड़ श्रमिकों को इसका फायदा मिलेगा। यह संहिता सभी कर्मचारियों और कामगारों के लिए वेतन के समयबद्ध भुगतान के साथ ही न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करती है।

कृषि मजदूर, पेंटर, रेस्टोरेंट और ढाबों पर काम करने वाले लोग, चौकीदार आदि असंगठित क्षेत्र के कामगार जो अभी तक न्यूनतम वेतन की सीमा से बाहर थे, उन्हें न्यूनतम वेतन कानून बनने के बाद कानूनी सुरक्षा हासिल होगी। विधेयक में सुनिश्चित किया गया है कि मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अगले महीने की 7 तारीख तक वेतन मिलेगा, वहीं जो लोग साप्ताहिक आधार पर काम कर रहे हैं उन्हें हफ्ते के आखिरी दिन और दैनिक कामगारों को उसी दिन पारिश्रमिक मिलना सुनिश्चित होगा।

नियोक्ताओं पर लगेगा जुर्माना
इस विधेयक में न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देने पर नियोक्ताओं पर जुर्माने का भी प्रावधान है। यदि कोई नियोक्ता तय मजदूरी से कम का भुगतान करता है तो उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। यदि वह पांच साल के दौरान दोबारा ऐसा करता है तो उसे 3 माह तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

जिनके लिए हमेशा याद किए जाएंगे अरुण जेटली

नई दिल्ली। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अरुण जेटली की पहचान एक विद्वान, वाकपटु और आर्थिक, कानूनी व राजनीतिक मुद्दों की गहराई तक समझ रखने वाले नेता की रही। छात्र राजनीति से सियासत में कदम रखने वाले जेटली ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल से लेकर देश के वित्त मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली।

यूपीए शासन के दौरान बतौर नेता प्रतिपक्ष उन्होंने राज्यसभा में सत्ता पक्ष को अपने दमदार और तर्कपूर्ण भाषणों से अक्सर बैकफुट पर जाने को मजबूर किया। आर्थिक क्षेत्र में भी उन्होंने जीएसटी और दिवालिया कानून जैसे अहम मसलों को मजबूती से आगे बढ़ाया। आइए जानते हैं, आर्थिक क्षेत्र में उनकी ओर से लिए गए महत्वपूर्ण फैसले…

  1. गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स : GST यानी गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स को अबतक का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म माना जा सकता है। इसे लागू कराने के शिल्पकार अरुण जेटली ही रहे। राज्यों को इसके लिए मनाना निश्चित तौर पर टेढ़ी खीर थी। उन्हें मनाने का श्रेय जेटली को ही जाता है। जुलाई 2017 में जब GST लागू हुई तो शुरुआत में तमाम समस्याएं आईं और व्यापारियों ने इस कदम का स्वागत नहीं किया। लेकिन तत्कालीन वित्त मंत्री जेटली ने धैर्य के साथ काम लिया और जीएसटी फाइलिंग प्रक्रिया को आसान और बिजनस फ्रेंडली बनाने के साथ-साथ टैक्स दरों को संशोधित कर आम उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने वाला बनाया।
  2. इंसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड: जीएसटी के अलावा इंसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की भी गिनती बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों में होती है। इसका श्रेय भी जेटली को जाता है। बैंकिंग व्यवस्था में ढांचागत सुधार के तहत यह कानून बनाया गया। बैंक से बड़े-बड़े कर्ज लेकर उन्हें गटक जाने वाली कंपनियों और पूंजीपतियों में खौफ के लिए इस तरह के कानून की शिद्दत से जरूरत थी। इस कानून का सकारात्मक असर भी दिख रहा है। बीते 2 सालों में इंसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक कीमत की फंसी हुई संपत्तियों का निस्तारण किया गया है।
  3. मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी का गठन: मौद्रिक नीति बनाने में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के उद्देश्य से 2016 में मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) का गठन भी जेटली के महत्वपूर्ण आर्थिक फैसलों में शामिल है। आरबीआई गवर्नर की अगुआई वाली यह कमिटी ही अब ब्याज दरों को तय करती है। कमिटी में 6 सदस्य होते हैं जिनमें RBI से 3 और इतने ही सरकार की तरफ से नामित सदस्य होते हैं। साल में MPC की कम से कम 4 बैठकें जरूरी हैं।
  4. NPA की सफाई: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में बतौर वित्त मंत्री जेटली ने नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) की बढ़ती समस्या से निपटने में बहुत हद तक कामयाबी हासिल की। उन्हीं की देखरेख में बैंकिंग सेक्टर में NPA की सफाई शुरू हुई। इसका फायदा यह हुआ कि सार्वजनिक क्षेत्र के वे बैंक जो घाटे में चल रहे थे, वे भी धीरे-धीरे प्रॉफिट में आने लगे।
  5. बैंकों का एकीकरण: वैसे तो तमाम सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत बनाने की जरूरत बताई लेकिन यह काम जेटली के नेतृत्व में ही शुरू हुआ। बैंकों का एकीकरण बेशक जेटली के महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल है। स्टेट बैंक में उसके 5 असोसिएट बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय हो चाहे देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय, इन फैसलों से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेहत में सुधार हुआ।
  6. राजकोषीय घाटे और महंगाई पर नियंत्रण: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में बतौर वित्त मंत्री जेटली के नाम यह भी एक बड़ी उपलब्धि है। 2014 में भारत का राजकोषीय घाटा 4.5 प्रतिशत था, जो अप्रैल 2019 में घटकर 3.4 प्रतिशत पर आ गया। इसी तरह 2014 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 9.5 था जो अप्रैल 2019 में 2.92 दर्ज किया गया। यह एक शानदार कामयाबी है।
  7. एफडीआई का उदारीकरण: FDI नियमों में ढील के पक्षधर जेटली के प्रयासों से डिफेंस, इंश्योरेंस और एविएशन जैसे सेक्टर भी FDI के लिए खोले गए। FIPB (फॉरन इन्वेंस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड) को भंग किया गया। इन कदमों से FDI में उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिला। 2014 में जहां भारत में 24.3 अरब डॉलर की FDI आई थी वहीं आने वाले वर्षों में यह लगातार बढ़ते हुए 2019 में 44.4 अरब डॉलर तक पहुंच गई। इसका श्रेय बहुत हद तक जेटली को जाता है।
  8. बजट सुधार: अरुण जेटली के ही नेतृत्व में अहम बजट सुधार हुए। आम बजट में ही रेल बजट के मिलाने, बजट पेश करने की टाइमिंग में बदलाव करते हुए उसे पहले पेश करने (1 फरवरी) जैसे कदम बजट सुधार के लिहाज से काफी अहम हैं।
  9. विनिवेश पर फैसला: आर्थिक मसलों पर उनकी गहरी समझ को देखते हुए ही 1999 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विनिवेश विभाग का गठन किया तो इसकी जिम्मेदारी जेटली को दी। जेटली के कामों का ही नतीजा था कि वाजपेयी ने 2001 में अलग से विनिवेश मंत्रालय का गठन किया। तत्कालीन विनिवेश मंत्री अरुण शौरी के नेतृत्व में सरकार ने घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की। विनिवेश मंत्री के तौर पर शौरी अगर कामयाब हुए तो उसके पीछे जेटली द्वारा खड़ी की गई बुनियाद थी।
  10. जनधन योजना:वित्तीय समावेशन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जनधन योजना की कामयाबी का श्रेय अरुण जेटली को ही जाता है। बतौर वित्त मंत्री जेटली ने यह सुनिश्चित करने में सफलता पाई कि बैंक आम लोगों के लिए अपने दरवाजे न बंद करें। वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़े के मुताबिक 3 जुलाई 2019 तक कुल 36.06 करोड़ जनधन खाते खुल चुके थे। न्यूनतम राशि रखने की बाध्यता नहीं होने के बावजूद इन खातों के जरिए बैंकों के पास 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा है। योजना की सफलता से उत्साहित सरकार ने 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए खातों के लिए दुर्घटना बीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ओवरड्राफ्ट की सीमा भी दोगुनी कर 10,000 रुपये कर दी गई है।

मोटोरोला वन ऐक्शन भारत में पेश, 30 अगस्त से शुरू होगी बिक्री

नई दिल्ली। मोटोरोला ने भारत में एक बार फिर से मोटोरोला की उपलब्धता की घोषणा की है। मोटोरोला वन ऐक्शन द्वारा यूजर्स को एक स्मार्ट एवं सेक्योर्ड एंड्रॉयड वन सॉफ्टवेयर एक्संपीरिएंस की पेशकश की जाती है। मोटोरोला वन ऐक्शन का शानदार डेनिम ब्लू वैरिएंट फ्लिपकार्ट पर 30 अगस्त से बिक्री के लिये उपलब्ध होगा।

मोटोरोला वन ऐक्शन का इंडस्ट्री का पहला अल्ट्रा-वाइड ऐक्शन कैमरा आपके फोन को वर्टिकली पकड़ने पर लैंडस्केप फॉर्मेट में वीडियो शूट करता है। मोटोरोला वन ऐक्शन के ट्रिपल कैमरा सिस्टम की बदौलत आपके वीडियोज को खूबसूरत तस्वीरों का साथ मिलेगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस द्वारा पावर्ड इस स्मार्टफोन में अपनी कहानी को 21ः9 सिनेमा विजन डिस्प्ले में देख सकते हैं। इसे एक खूबसूरत डिजाइन में पेश किया गया है, जिसे पकड़ना और एक हाथ से इस्तेमाल करना आसान है।

मोटोरोला वन ऐक्शन के ट्रिपल कैमरा सेटअप में इंडस्ट्री का पहला 117 डिग्री अल्ट्रा-वाइड ऐक्शन वीडियो कैमरा है, ताकि आप उन रोमांचक वीडियोज को रिकॉर्ड कर सकते हैं, जो फ्रेम में चार गुणा तक फिट बैठते हैं। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर नवाचार के एक अनूठे संयोजन के जरिये, मोटोरोला ने आखिरकार फिल्म अमेजिंग अल्ट्रा-वाइड वीडियो को संभव बना दिया है।

वर्टिकल पोजीशन में फोन को अधिक स्व भाविक रूप से पकड़ सकते हैं। जब इसे हॉरिजोंटली प्ले करते हैं, तो आप फुल स्क्रीन में ऐक्शन से भरपूर अपनी यादों को दोबारा जी सकते हैं। इसका पहले से बेहतर वीडियो स्टैबिलाइजेशन चीजों को स्मू्द रखता है, ताकि अस्थिर क्लिप्स पुराने दिनों की बात रह जायें।

UAE में बोले पीएम मोदी, ‘आर्टिकल 370 पर फैसला संवैधानिक दायरे में’

दुबई। पीएम नरेंद्र मोदी ने यूएई दौरे के दौरान भारत के खाड़ी देशों के साथ संबंधों पर कहा कि इस दिशा में लगातार प्रगति हो रही है। पीएम मोदी ने खलीज टाइम्स को दिए इंटरव्यू में आर्टिकल 370 पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से फैसला लिया गया। पीएम मोदी ने अपनी सरकार की प्रमुख योजना जल संरक्षण पर भी चर्चा की। पीएम ने बेयर ग्रिल्स के संयत रहने के बयान पर कहा कि नियमित योगाभ्यास से उन्हें संयत रहने में मदद मिली।

आर्टिकल 370 हटाने पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत के संविधान के तहत ही यह फैसला लिया गया। आर्टिकल 370 के कारण भारत के खाड़ी देशों के साथ संबंध प्रभावित होने की आशंका को पीएम ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘पिछले 4 दशक से भारत सीमापार से होनेवाले आतंक से प्रभावित है। यूएई की ओर से हमें हमेशा आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में पूरा सहयोग मिला है।

जहां तक आर्टिकल 370 का सवाल है तो आतंरिक तौर पर उठाए हमारे कदम में संवैधानिक मूल्य, कानून और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया गया है। हम जम्मू-कश्मीर को विकास की प्रक्रिया से बाहर रखकर अकेले नहीं छोड़ सकते थे। यूएई की सरकार और प्रशासन ने जिस तरह से हमारे कदम का समर्थन किया है, मैं उसकी सराहना करता हूं।’

‘घबराना समस्या का हल नहीं’
प्रधानमंत्री मोदी ने बेयर ग्रिल्स के लोकप्रिय मैन वर्सेज वाइल्ड शो पर भी चर्चा की। पीएम मोदी के बारे में शो के होस्ट ने कहा था कि मुश्किल परिस्थिति में भी पीएम पूरी तरह से संयत नजर आ रहे थे। पीएम मोदी ने इस पर कहा, ‘संयमित रहने का जहां तक सवाल है तो मैं नियमित योग करता हूं। योग ने मुझे अदंर से काफी शक्ति दी है।

नेतृत्व के दौरान भी कई बार हमें मुश्किल स्थितियों का सामना करना पड़ता है। मैं आपको कह सकता हूं कि घबराने से कभी चीजें ठीक नहीं होती। मुझे व्यक्तिगत तौर पर भी कभी इसका लाभ होते नहीं दिखा। किसी भी समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान मन के शांत रहने की स्थिति में ही मिल सकता है।’

भारत को बताया नए सपनों की उड़ान वाला देश
भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में शामिल किए जाने पर पीएम मोदी ने कहा कि जनता की सेवा का मौका मिलना उनके लिए सौभाग्य है। उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए यह सौभाग्य है कि मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला। पिछले 5 वर्षों में देश का माहौल बदला है और लोगों की उम्मीद भी हमसे बढ़ी है।

आनेवाले 5 वर्षों में हमारी कोशिश है कि वैश्विक स्तर पर भी विश्व की जो उम्मीदें हमसे हैं हम उसको पूरा करें। भारत इस वक्त इंटरनैशनल सोल अलायंस का प्रमुख सहयोगी है। इस तेज रफ्तार जिंदगी में योग अब विश्व भर में लोगों के लिए शांति और सुकून का माध्यम बना है।’

PM ने यूएई और भारत की साझेदारी और मजबूत होगी
यूएई और भारत की दोस्ती का मूल यूएई का सहिष्णु समाज और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में और मजबूत होगी। पीएम मोदी ने कहा कि शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान ने यूएई को संसार के सभी वर्ग के लोगों के लिए रहने की जगह बनाया है। मौजूदा यूएई नेतृत्व की प्रगतिशील नीतियों ने देश को नए क्षेत्रों में भी महाशक्ति के तौर पर तैयार किया। आज यूएई में ही लाखों भारतीय रह रहे हैं। यह दोनों देशों की एकता और साझी विरासत का उदाहरण है।

UAE में पीएम नरेंद्र मोदी को मिला ऑर्डर ऑफ जायद सम्मान

अबु धाबी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायद से नवाजा गया। पीएम मोदी ने आज सम्मान लेने से पहले यूएई के शासक के साथ उच्चस्तरीय वार्ता भी की। पीएम मोदी ने यूएई दौरे के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। पीएम ने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ यूएई हमेशा मजबूती से खड़ा रहा।

पीएम मोदी आज यूएई से बहरीन भी रवाना होंगे। बहरीन में पीएम एक प्राचीन मंदिर का उद्घाटन भी करेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। पीएम ने यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान से भी मुलाकात की। पीएम मोदी ने एक मीडिया समूह से बातचीत में कहा था कि भारत और यूएई के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने दुबई का उदाहरण देते हुए कहा कि लाखों भारतीयों ने इस शहर को बनाने में अपना योगदान दिया और आज यहां सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं।

आर्टिकल 370 पर भी पीएम मोदी ने इंटरव्यू में की चर्चा
पीएम मोदी ने यूएई के स्थानीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत और यूएई का संबंध लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने स्थानीय मीडिया में दिए इंटरव्यू में कहा कि आर्टिकल 370 हटाने के फैसले का असर भारत और यूएई के संबंध पर नहीं पड़ेगा। पीएम ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का साथ यूएई ने हमेशा दिया।

टेक्स्ट टाइप करने से सर्च होगी इमेज, Google Photos का नया फीचर

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नई दिल्ली। Google अपने यूजर्स के एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए अक्सर नए फीचर रोलआउट करता रहता है। इसी कड़ी में अब उसने अपने Photos ऐप के लिए एक नया फीचर इंट्रोड्यूस किया है। इस फीचर की मदद से क्लिक की गई फोटो में टेक्स्ट को डिटेक्ट करना और टेक्स्ट टाइप कर फोटो को सर्च करना आसान हो जाएगा।

बेहतर कैमरा वाले स्मार्टफोन्स के इस दौर में हम अपने फोन की गैलरी को हजारों इमेज के भर देते हैं। ऐसे में अचानक किसी खास इमेज की जरूरत पड़ जाए तो उसे ढूंढना काफी मुश्किल हो जाता है। हालांकि, अब यूजर्स की यह समस्या गूगल फोटोज के इस नए फीचर से दूर होने वाली है। आइए डीटेल में जानते हैं क्या है यह फीचर और कैसे यह काम करता है।

खास टेक्स्ट वाले वाले फोटो को खोजना हुआ आसान
गूगल फोटो ने कुछ महीनों पहले ऐप में गूगल लेंस फीचर उपलब्ध कराया था। लेंस की मदद से यूजर्स को किसी खास ऑब्जेक्ट वाले फोटोज को सर्च करने में आसानी होती है। फोटोज के लिए रिलीज किए गए इस फीचर की मदद से यूजर अब फोटो में मौजूद टेक्स्ट को सर्च ऑप्शन में टाइप कर उसे सर्च कर सकेंगे।

डॉक्यूमेंट्स सर्च करना होगा आसान
फोटोज ऐप में मौजूद हजारों फोटो के बीच किसी डॉक्यूमेंट को सर्च करना काफी मुश्किल तो होता ही है साथ ही इसमें काफी समय भी खराब हो जाता है। गूगल के इस नए फीचर के आने से अब ऐप में डॉक्यूमेंट्स को खोजने में आसानी होगी। यूजर अब जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे कॉलेज नोट्स, बुक पेज, पोस्टर ऐड को फोटो में मौजूद टेक्स्ट को टाइप कर फोटोज ऐप में सर्च कर सकेंगे।

टेक्स्ट को करना होगा कॉपी
दूसरे देश में यात्रा करते समय हमें कई बार भाषा ना समझ आने के कारण काफी परेशानी होती है। दूसरी भाषा में लिखी जानकारी, साइन बोर्ड इत्यादि को आमतौर पर समझना आसान नहीं होता। ऐसे में यूजर उसकी फोटो को क्लिक कर गूगल के इस नए फीचर की बदौलत उसका मतलब समझ सकेंगे। इसके लिए आपको क्लिक की गई फोटो में मौजूद टेक्स्ट को सिलेक्ट करना होगा। नया फीचर फोटो में मौजूद पूरे टेक्स्ट को कॉपी करने का ऑप्शन देता है। यूजर को केवल फोटो को ओपन करने के बाद लेंस बटन पर क्लिक करना है और टेक्स्ट सिलेक्ट करना है।

गूगल ने रोलआउट शुरू किया
गूगल के मुताबिक फोटोज ऐप के लिए लाया गया यह नया फीचर अगस्त की शुरुआत में ही डिवाइसेज तक पहुंचना शुरू हो गया है। गूगल का यह फीचर ऐंड्रॉयड के साथ ही आईओएस पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपनी इसे बैचेज में रोलआउट कर रही है। भारत में भी यह यूजर्स तक पहुंचना शुरू हो गया है और आने वाले कुछ दिनों में यह सभी यूजर्स को मिल जाएगा।

31 मार्च, 2020 तक रजिस्टर होने वाले BS-4 वाहनों पर खतरा नहीं

नई दिल्ली। ऑटो सेक्टर मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से ऑटो सेक्टर को राहत दी गई है। उन्होंने साफ किया कि 31 मार्च 2020 तक बीएस-4 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन होगा। 31 मार्च, 2020 तक रजिस्टर्ड होने वाली बीएस-4 गाडि़यां अपने पूरे कार्यकाल के लिए मान्य होगी।

अभी बाजार में इस बात को लेकर असमंजस था कि बीएस-4 गाड़ियों को कहीं सरकार बीएस-6 आने के बाद अवैध न घोषित कर दे। इस वजह से ग्राहक बीएस-4 गाड़ियों की बिक्री प्रभावित हो रही थी।ऑटो सेक्टर की तरफ से लगातार इस बात की मांग आ रही थी कि सरकार इस मामले में अपना रुख साफ करे। सीतारमण के इस बयान से उन सभी अटकलों पर विराम लग गया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि 31 मार्च 2020 के बाद सभी बीएस4 वाहन अवैध हो जाएंगे।

फिलहाल नहीं बढ़ेगी वाहन रजिस्ट्रेशन फीस
सीतारमण ने गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को जून 2020 तक के लिए टाल दिया है। बता दें कि इससे पहले सरकार ने बीते 24 जुलाई 2019 को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन फीस 10 से 20 गुना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली पुरानी गाड़ियों को रिप्लेस किया जाएगा। सरकार ने सरकारी विभाग पर नई गाड़ियों की खरीद पर लगाई रोक को हटा दिया है। और साथ ही मार्च 2020 तक अधिग्रहित किए गए सभी वाहनों की कीमत पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्यह्रास बढ़ा दिया गया है, जो अब बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया इससे ऑटो मार्केट में डिमांड बढ़ाई जा सकेगी।

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के संबंध में ऐलान किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर समेत बैटरी के एक्सपोर्ट क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। सरकार ने कहा कि स्क्रैपऐज पॉलिसी को लेकर किसी को घबराने की जरूरत नहीं है।

वाहन रजिस्ट्रेशन बढ़ाने का था प्रस्ताव
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक दोपहिया गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन फीस 50 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक बढ़ाने का प्रस्ताव था। वहीं तिपहिया गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन फीस 300 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक बढ़ाने और हल्की गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन फीस 1000 रुपए से लेकर 10,000 रुपए करने प्रावधान था। इसके अलावा हेवी व्हीकल्स की 1500 रुपए से लेकर 20,000 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ सकती है।

GST के जरिए एक देश-एक टैक्स की नींव जेटली ने रखी थी

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नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का आज निधन हो गया। जेटली ने अपने वित्त मंत्रालय के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था के तेज विकास और कर सुधारों की दिशा में कई अहम फैसले किए थे। इनमें वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को लागू कराना सबसे बड़ा फैसला था।

विभिन्न वस्तुओं पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर की दर के कारण लंबे समय से एक देश-एक कर की मांग उठ रही थी। 2014 में केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनने के बाद पहली बार वित्त मंत्री बने अरुण जेटली ने इस मांग को पूरा करने का बीड़ा उठाया।

लंबी जद्दोजहद के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े चार बिल सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और कॉम्पेंसेशन जीएसटी बिल तैयार किए। सही रणनीति के दम पर पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में इन चारों बिलों को पास कराया गया।

इसके बाद वस्तुओं पर करों की दरें तय करने की जिम्मेदारी जीएसटी काउंसिल को दी गई। अंतत 30 जून 2017 की आधी रात को संसद भवन में भव्य समारोह का आयोजन कर देश को जीएसटी का तोहफा दिया गया। देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधार में शुमार जीएसटी 1 जुलाई 2017 को जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू हो गया।

इन पदों पर रहे जेटली

  • 1999 में पहली बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार बनने पर 13 अक्टूबर 1999 को सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने। इस दौरान वह विनिवेश मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी बनाए गए।
  • 23 जुलाई 2000 को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री का अतिरिक्त प्रभार मिला।
  • नवंबर 2000 में अरुण जेटली को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया और एक साथ कानून, न्याय और कंपनी मामलों और जहाजरानी मंत्री बनाया गया।
  • 26 मई 2014 से 14 मई 2018 तक केंद्र सरकार में वित्त और कॉरपोरेट मंत्रालयों के मंत्री रहे।
  • इसके बाद 23 अगस्त 2018 से 30 मई 2019 तक वित्त और कॉरपोरेट मंत्रालयों के मंत्री रहे।
  • 16 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक रक्षा मंत्री रहे। इसके बाद 13 मार्च 2017 से 3 सितंबर 2017 तक भी रक्षा मंत्रालय का पदभार संभाला।
  • पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में 9 नवंबर 2014 से 5 जुलाई 2016 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री भी रहे।
  • 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद भी संभाला।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली नहीं रहे, एम्स में ली आखिरी सांस

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का आज दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। उन्होंने 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे और दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में उनका उपचार चल रहा था। वह 66 वर्ष के थे। उनके वित्त मंत्री के कार्यकाल में कई ऐसे आर्थिक फैसले लिए गए, जिनके लिए वे हमेशा याद रखे जाएंगे।

जानिए अरुण जेटली का सियासी सफर

  • अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर, 1952 को दिल्ली में हुआ था।
  • अरुण जेटली के पिता का नाम महाराज किशन जेटली और मां का नाम रतन प्रभा जेटली है।
  • अरुण जेटली की पत्नी का नाम संगीता जेटली है। उनके बेटे का नाम रोहन जेटली और बेटी का नाम सोनाली जेटली है।
  • अरुण जेटली ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी की डिग्री हासिल की।
  • अरुण जेटली 70 के दशक की शुरूआत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हुए थे। साल 1974 में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष चुने गए।
  • इमरजेंसी के दौरान अरुण जेटली को भी हिरासत में लिया गया था। इस दौरान उन्हें अंबाला जेल और फिर तिहाड़ जेल में रखा गया था।
  • 1977 में जेटली लोकतांत्रिक युवा मोर्चा के संयोजक बनाए गए। जिसके बाद उन्हें दिल्ली एबीवीपी का अध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान वह एबीवीपी की भारत इकाई में सचिव पद पर भी रहे। जेटली की राजनीति में सक्रियता को देखते हुए उन्हें बीजेपी की युवा इकाई का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
  • वकालत पूरी करने के बाद अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश की कई हाईकोर्ट्स में प्रैक्टिस भी की थी। 1989 में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था।
  • अरुण जेटली साल 1990 में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बने। 1998 में वह यूएन जनरल असेंबली भेजे गए भारतीय शिष्टमंडल में शामिल थे।
  • 13 अक्टूबर, 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद जेटली विनिवेश नीति के लिए बनाए गए नए मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए।
  • अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में अतिरिक्त प्रभार के तौर पर उनको कानून मंत्रालय भी सौंपा गया। बाद में उन्हें इसी मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
  • 3 जून, 2009 को राज्यसभा में उन्हें विपक्ष का नेता चुना गया। वर्तमान में अरुण जेटली उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं।
  • 26 मई, 2014 को नरेंद्र मोदी सरकार में उन्होंने बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ ली थी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह देश के वित्त मंत्री रहे। कुछ समय के लिए उन्हें रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।
  • अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए ही मोदी सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने देश में जीएसटी लागू किया।
  • अरुण जेटली आज तक लोकसभा चुनाव नहीं जीते हैं। 2019 आम चुनाव में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।
  • अरुण जेटली को क्रिकेट बहुत पसंद है। वह बीसीसीआई के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। जेटली को राजनीति के साथ-साथ लिखना भी बहुत पसंद है। वह वकालत से संबंधित कई किताबें लिख चुके हैं।
  • कांग्रेस के दिवंगत नेता माधवराव सिंधिया, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से लेकर जनता दल के शरद यादव तक, उनके क्लाइंट (वकालत के पेशे में) रह चुके हैं।
  • अरुण जेटली को भारतीय जनता पार्टी का संकटमोचक भी कहा जाता है। पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने से लेकर सरकार के अहम फैसलों तक, जेटली की अहम भूमिका रहती है। जेटली के इतने लंबे सियासी सफर में पार्टी के लिए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता है। यही वजह है कि शुक्रवार रात उनके AIIMS में भर्ती होने की जानकारी मिलते ही पीएम मोदी स्वयं अस्पताल पहुंच गए थे। – अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर, 1952 को दिल्ली में हुआ था। अरुण जेटली के पिता का नाम महाराज किशन जेटली और मां का नाम रतन प्रभा जेटली है।
  • अरुण जेटली की पत्नी का नाम संगीता जेटली है। उनके बेटे का नाम रोहन जेटली और बेटी का नाम सोनाली जेटली है।
  • अरुण जेटली ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी की डिग्री हासिल की।
  • अरुण जेटली 70 के दशक की शुरूआत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हुए थे। साल 1974 में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष चुने गए।
  • इमरजेंसी के दौरान अरुण जेटली को भी हिरासत में लिया गया था। इस दौरान उन्हें अंबाला जेल और फिर तिहाड़ जेल में रखा गया था।
  • 1977 में जेटली लोकतांत्रिक युवा मोर्चा के संयोजक बनाए गए। जिसके बाद उन्हें दिल्ली एबीवीपी का अध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान वह एबीवीपी की भारत इकाई में सचिव पद पर भी रहे। जेटली की राजनीति में सक्रियता को देखते हुए उन्हें बीजेपी की युवा इकाई का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
  • वकालत पूरी करने के बाद अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश की कई हाईकोर्ट्स में प्रैक्टिस भी की थी। 1989 में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था।
  • अरुण जेटली साल 1990 में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बने। 1998 में वह यूएन जनरल असेंबली भेजे गए भारतीय शिष्टमंडल में शामिल थे।
  • 13 अक्टूबर, 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद जेटली विनिवेश नीति के लिए बनाए गए नए मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए।
  • अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में अतिरिक्त प्रभार के तौर पर उनको कानून मंत्रालय भी सौंपा गया। बाद में उन्हें इसी मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
  • 3 जून, 2009 को राज्यसभा में उन्हें विपक्ष का नेता चुना गया। वर्तमान में अरुण जेटली उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं।
  • 26 मई, 2014 को नरेंद्र मोदी सरकार में उन्होंने बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ ली थी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह देश के वित्त मंत्री रहे। कुछ समय के लिए उन्हें रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।
  • अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए ही मोदी सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने देश में जीएसटी लागू किया।
  • अरुण जेटली आज तक लोकसभा चुनाव नहीं जीते हैं। 2019 आम चुनाव में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।
  • अरुण जेटली को क्रिकेट बहुत पसंद है। वह बीसीसीआई के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। जेटली को राजनीति के साथ-साथ लिखना भी बहुत पसंद है। वह वकालत से संबंधित कई किताबें लिख चुके हैं।
  • कांग्रेस के दिवंगत नेता माधवराव सिंधिया, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से लेकर जनता दल के शरद यादव तक, उनके क्लाइंट (वकालत के पेशे में) रह चुके हैं।
  • अरुण जेटली को भारतीय जनता पार्टी का संकटमोचक भी कहा जाता है। पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने से लेकर सरकार के अहम फैसलों तक, जेटली की अहम भूमिका रहती है।

गृह मंत्री ने रद्द किया हैदराबाद दौरा
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन की खबर आने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने अपना हैदराबाद दौरा रद्द कर दिया है और वे दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। गृह मंत्री हैदराबाद में आईपीएस प्रोबेशनर्स अधिकारियों की पासिंग आउट परेड में शामिल होने के लिए पहुंचे थे।

राजनाथ सिंह, कपिल सिब्बल और सुरेश प्रभु ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन पर सभी दलों के नेता श्रद्धांजलि दे रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जेटली के निधन पर दुख जताया है।

नोटबंदी में अवैध रूप से नोट बदलकर बुरा फंसा PNB कर्मचारी, चार वर्ष की सजा

नई दिल्ली। नोटबंदी के दौरान अवैध रूप से धन के लेन-देन के एक मामले में संभवत: पहली बार दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को पीएनबी के तीन अधिकारियों को चार वर्ष जेल की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि उनके कृत्यों से उस संस्थान पर धब्बा लगा है जिसमें वे काम करते हुए आगे बढ़े हैं।

विशेष न्यायाधीश राजकुमार चौहान ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों रामानंद गुप्ता, भुवनेश कुमार जुल्का और जितेन्दर वीर अरोड़ा को 10.51 लाख रुपए की वैध राशि को गलत तरीके से नोटबंदी की राशि के रूप में दिखाने और इसे अनधिकृत और अवैध रूप से बदलने के लिए दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि दोषी के बैंक अधिकारी होने के कारण उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करें।

दोषियों के कृत्य ने संस्थान पर धब्बा लगा दिया जिसमें काम करते हुए वे वरिष्ठ अधिकारी के पद तक पहुंचे…यह नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों द्वारा शक्ति के दुरूपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रतीत होता है। अदालत ने हर दोषी पर चार- चार लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

2017 में दर्ज हुई थी शिकायत
अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ धारा 409 (आपराधिक विश्वासभंजन), धारा 471 (फर्जी दस्तावेजों को मूल दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल करना), 477 ए (खाते में धोखाधड़ी) के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2), धारा 13(1) (डी) (नौकरशा द्वारा आपराधिक आचरण) के तहत दोषी ठहराया। अभियोजन के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा के उप सर्कल प्रमुख ने पांच अप्रैल 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी।

10 लाख 51 हजार के नोट अवैध तरीके से बदले
शिकायत में दावा किया गया कि नोटबंदी के दौरान (दस नवम्बर 2016 से 30 दिसम्बर 2016 तक) बैंक की सिविल लाइंस शाखा में दो बार कुछ फर्जी रिकॉर्ड कम्प्यूटर, कोर बैंक सॉल्यूशन (सीबीएस) में डाला गया, जो जमाकर्ताओं द्वारा भरे गए मूल वाउचर के विपरीत थे।

इसने कहा कि जमाकर्ताओं ने वैध नोट नकदी में जमा कराए थे लेकिन कम्प्यूटर में इन्हें प्रतिबंधित करंसी नोट (एक हजार और पांच सौ रुपए) के तौर पर जिक्र किया गया। शिकायत में कहा गया कि तीन अधिकारियों ने दस लाख 51 हजार रुपए के वैध नोट अनधिकृत रूप से बदले। सीबीआई ने छह अप्रैल 2017 को मामला दर्ज किया था।