Stock Market: शेयर मार्केट की चाल इस सप्ताह कैसी रहेगी, जानिए एक्सपर्ट से

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नई दिल्ली। Stock Market This Week : भारतीय शेयर बाजार की चाल इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कंपनियों के तिमाही नतीजों की शुरुआत से तय होगा।

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) नौ जुलाई को अपने जून तिमाही के वित्तीय नतीजों का ऐलान करेगी। विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति और विदेशी निवेशकों (FPIs) की कारोबारी गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा ने कहा, “निवेशक नौ जुलाई को आने वाले TCS के तिमाही नतीजों पर करीबी नजर रखेंगे। इसमें मांग के रुझान, विवेकाधीन खर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यावसायिक अवसरों को लेकर मैनजमेंट की टिप्पणियों पर विशेष ध्यान रहेगा।”

बीते सप्ताह बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 663.44 अंक यानी 0.86 फीसदी बढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी में 214.85 अंक यानी 0.89 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौर ने कहा, “घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान नौ जुलाई से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों पर केंद्रित रहेगा। कंपनियों की आय के शुरुआती आंकड़े और मैनजमेंट की टिप्पणियां मांग की स्थिति, मार्जिन के रुझान और कमाई की स्पष्टता के बारे में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करेंगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति और खरीफ फसलों की बुआई ग्रामीण मांग, महंगाई की उम्मीदों और वृहद आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेगी।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि इसके स्थान के बारे में अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, “हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई में बाधा की आशंकाएं कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 68-69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हुई हैं। एनर्जी कीमतों में लगातार स्थिरता भारत में महंगाई के परिदृश्य और बाह्य क्षेत्र के संतुलन के लिए सकारात्मक होगी।”

उन्होंने कहा कि अमेरिकी श्रम बाजार (लेबर मार्केट) के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों के बाद यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों को लेकर पहले जितना सख्त रुख नहीं अपनाएगा।

ऐसे में निवेशकों की नजर अब फेड की जून बैठक पर रहेगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि फेड के नीति-निर्माता अर्थव्यवस्था और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा को लेकर क्या सोच रहे हैं।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि इस सप्ताह बाजार की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, भारत में तिमाही नतीजों के सीजन की शुरुआत और मॉनसून की प्रगति से तय होगी।