Tuesday, June 23, 2026
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सीए के सिलेबस में बदलाव, अब ओपन बुक कंसेप्ट

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कानपुर। राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव तथा उद्योगों की जरूरतें देख इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया (आइसीएआई)  छात्रों के पाठ्यक्रम में परिवर्तन कर रहा है।

छात्रों की रटने की प्रवृत्ति को दूर कर उनमें तार्किक क्षमता का विकास करने के लिए इस साल से ओपन बुक कंसेप्ट शुरू किया जा रहा है। बदलाव के तहत अब छात्रों को परीक्षा कक्ष में किताब ले जाने की भी सुविधा मिलेगी।

बीते सप्ताह इंस्टीट्यूट की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल द्वारा जीएसटी पर दो दिवसीय सेमिनार में भी इंस्टीट्यूट के नेशनल वाइस प्रेसीडेंट नवीन एनडी गुप्ता ने पाठ्यक्रम में परिवर्तन का जिक्र किया था।

काउंसिल से जुड़े सदस्यों के अनुसार अब ऑब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) प्रश्नों के माध्यम से देखने की कोशिश की जाएगी कि आखिर छात्रों ने विषय को कितना समझा है।

अपने सामने किताब होने के बाद भी छात्र प्रश्न का उत्तर तभी ढूंढ पाएगा जब उसने अपने विषय को ठीक से समझा होगा। इंस्टीट्यूट प्रत्येक 10 साल में अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करता है।

सीए एक्ट से बना इंस्टीट्यूट :

  • इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया का गठन संसद में पारित सीए एक्ट 1949 के आधार पर हुआ है। एक प्रकार से यह सरकार हिस्सा है।
  • समय-समय पर आर्थिक क्षेत्र में लागू होने वाली सरकार की नीतियों का सही क्रियान्वयन करना इंस्टीट्यूट की जिम्मेदारी है। नीतियों को बनाने में भी इंस्टीट्यूट की अहम भूमिका रहती है।
  • आइडीएस पर देश में 470 कार्यक्रम लोगों के पास छिपे हुए कालेधन को बाहर निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आय घोषणा योजना (आइडीएस) 2016 में इंस्टीट्यूट ने देश भर में 470 बड़े कार्यक्रम आयोजित कराए।
  • इनका सार्थक परिणाम निकला और लोगों ने कालेधन की घोषणा की। इंस्टीट्यूट के इस प्रयास की वित्त मंत्री ने भी सराहना की। नोटबंदी व प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट की अग्रणी भूमिका रही।
  • अब जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के रूप में देश की कर प्रणाली में सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसके लिए भी सेमिनार के माध्यम से इंस्टीट्यूट लोगों को अपग्रेड कर रहा है।

ICICI और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने होमलोन किया सस्ता

दिल्ली। निजी क्षेत्र के बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे  बड़े बैंक  स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने होम लोन की ब्याज  दरों में कमी की  घोषणा की है।इसका सबसे बड़ा फायदा अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलेगा।आईसीआईसीआई ने 30 लाख रुपये तक के होम लोन की ब्याज दरों में 0.3 फीसद तक की कटौती की है

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी योग्य होम लोन ग्राहक 2.67 फीसद की इंट्रेस्टो सब्सिडी का फायदा भी उठा सकते हैं। कटौती के बाद कामकाजी महिलाओं को 8.35 फीसद और अन्य को 8.40 फीसद की दर पर 30 लाख रुपये तक का होम लोन मिल सकेगा।

आईसीआईसीआई बैंक की यह नई दरें 15 मई से नये ग्राहकों के लिए प्रभावी हो चुकी है। आईसीआईसीआई बैंक ने यह कटौती अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत की है।

SBI ने सस्ता किया होम लोन

देश के सबसे बड़े सरकारी एवं कर्जदाता बैंक एसबीआई ने किफायती आवास ऋण में 25 आधार अंकों की भारी कमी की है। इस कमी के साथ इसे 8.35 फीसद कर दिया है जिसका फायदा नए कर्ज लेने वालों को मिलेगा। नई सरकारी योजना के अंतर्गत 30 लाख से कम के लोन किफायती आवास की श्रेणी में आते हैं।

पुरुष उधारकर्ताओं के लिए, सीमित अवधि की यह पेशकश 31 जुलाई तक मान्य है। राष्ट्रीय बैंकिंग के लिए एसबीआई के प्रबंध निदेशक, रजनीश कुमार ने एक सम्मेलन में यह बात कही है।इसके साथ ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 30 लाख रुपए से ऊपर के होम लोन की दर को भी 0.10 फीसद घटा दिया है।

महिलाओं के लिए नई दर में 25 फीसद की कटौती

नौकरीपेशा उधारकर्ताओं के लिए होगी और गैर-वेतनभोगी लोगों के लिए यह 20 बीपीएस होगी।पुरुष वेतनभोगी और गैर-वेतनभोगी उधारकर्ताओं के लिए लागू दर समान होगी। उधारकर्ताओं के लिए 25 बीपीएस की कटौती के रूप में ईएमआई के रुप में 530 रुपये प्रतिमाह की बचत होगी।

वनस्पति तेलों के बेस इंपोर्ट प्राइस में बदलाव, सोया तेल का प्राइस 13 डॉलर बढ़ा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल के बेस इंपोर्ट प्राइस में बदलाव किया है, केंद्रीय वित्तमंत्रालय की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक कुछएक वनस्पति तेलों के इंपोर्ट टैरिफ प्राइस में हल्की बढ़ोतरी हुई है तो ज्यादातर का टेरिफ  शुल्क घटा है। क्रूड पाम ऑयल का बेस इंपोर्ट प्राइस 9 डॉलर बढ़कर 711 डॉलर प्रति टन निर्धारित किया गया है।

आरबीडी पाम ऑयल का बेस इंपोर्ट प्राइस घटकर 721 डॉलर और अन्य पाम ऑयल का बेस इंपोर्ट प्राइस बढ़कर 716 डॉलर प्रति टन किया गया है। पामोलीन ऑयल की बात करें तो क्रूड पामोलीन ऑयल का बेस इंपोर्ट प्राइस 725 डॉलर, आरबीडी पामोलीन का 728 डॉलर, और अन्य पामोलीन का 727 डॉलर प्रति टन निर्धारित किया गया है। क्रूड सोयाबीन तेल का बेस इंपोर्ट प्राइस 13 डॉलर बढ़कर 793 डॉलर हो गया है। 

आईपीओ के मामले में आठ इकाइयों पर सेबी का जुर्माना

नई दिल्‍ली। बाजार नियामक (सेबी) ने रशिल डेकोर, कोरपोरेट स्ट्रेटेजिक एलायंज और छह अन्य पर अपने आईपीओ दस्तावेजों में पूरी तरह खुलासा नहीं करने को लेकर जुर्माना लगाया है।

सेबी ने रशिल डेकोर और आईपीओ दस्तावेजों के हस्ताक्षरकर्ताओं – विपुल वोरा, घनश्याम अंबालाल ठक्कर, कृपेश घनश्यामभाई ठक्कर, हर्षदभाई नवनीतलाल दोषी, शंकर प्रसाद भगत एवं हसमुख कानुभाई मोदी पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

इन लोगों ने रशिल डेकोर के 40 करोड़ रुपये के आईपीओ दस्तावेज सौंपने के बाद बिना प्रतिभूति आवंटित किए 5.94 करोड़ रुपये का बिना गारंटी ऋण हासिल किया। ये ऋण आईपीओ से महज कुछ समय ही पहले लिया गया और शेयर जारी होने के तत्काल बाद चुका दिया गया।

सेबी ने 12 मई के अपने आदेश में कहा, ”यह महत्त्वपूर्ण है कि ऐसा लोन आईपीओ का 14.54 फीसदी था। लेकिन सार्वजनिक इश्तहार के माध्यम से उसके बारे में खुलासा नहीं किया गया और न ही सात जुलाई, 2011 को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी में सौंपे गए दस्तावेज में उसके बारे में बताया गया।’

सेबी ने आईपीओ से जुड़ी चीजें संभालने वाले मर्चेंट बैंकर कॉरपोरेट स्ट्रेटेजिक एलायंज पर आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाया क्योंकि वह यह सुनिश्चित नहीं कर पाया कि दस्तावेज में उपयुक्त, सही और सभी प्रासंगिक खुलासे हो।

सेंसेक्स 133 अंक उछल कर 30,322 के स्तर पर बंद

मुंबई। मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स सोमवार को  133 अंक की बढ़त के साथ 30,322 के स्तर पर और निफ्टी 45 अंक की तेजी के साथ 9445 के स्तर पर  बंद हुआ है।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप 0.91 फीसद और स्मॉलकैप में 0.43 फीसद की बढ़त देखने को मिली है।सबसे ज्यादा खरीदारी मेटल सेक्टर मेंसेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर को छोड़ सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर बंद हुए हैं।  सबसे ज्यादा खरीदारी मेटल (2.28 फीसद) सेक्टर में देखने को मिली है।

बैंक (0.66 फीसद), ऑटो (0.50 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.83 फीसद), एफएमसीजी (0.64 फीसद), फार्मा (1.30 फीसद) और रियल्टी (0.76 फीसद) की बढ़त के साथ बंद हुए हैं। दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 32 हरे निशान में और 19 गिरावट के साथ कारोबार कर बंद हुए हैं।

 

समर कैंप में बच्चों के साथ अभिभावकों ने भी दिखाया उत्साह

कोटा। एसआर पब्लिक सी.सै. स्कूल में सोमवार को आयोजित लक्ष्य समर कैम्प 2017 के पाँचवें दिन मुख्य अतिथि मॉय एफ.एम. की ओर आरजे कशिश थी । इस दौरान वह समर कैम्प में भाग लेने वाले बच्चों से रुबरु हुई।

इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक अंकित राठी भी उपस्थित थे । उन्होंने बताया कि 11से 21 मई तक कैम्प आयोजित किया जा रहा है। इस कैम्प में बच्चों के साथ अभिभावकों के लिए भी अनेक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।

इस कैम्प में पचास से अधिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं । इन गतिविधियों का बालक-बालिकाओं के साथ अभिभावक भी आनंद उठा रहे हैं। अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या सीमा शर्मा ने सभी उपस्थित अतिथि व अभिभावकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

RBSE ने घोषित किया 12वीं साइंस व कॉमर्स का परिणाम

अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सोमवार को बारहवीं साइंस और कॉमर्स के नतीजे घोषित कर दिए। शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री वासुदेव देवनानी ने वेबसाइट पर परिणाम जारी किया।  इस बार बोर्ड मैरिट लिस्ट जारी नहीं की गई हैं। साइंस का रिजल्ट 89.21 प्रतिशत और कॉमर्स का 88.07 प्रतिशत रिजल्ट रहा। देवनानी ने कहा कि सरकारी स्कूलों का रिजल्ट लगातार बेहतर हो रहा है। इसका अर्थ है कि सरकारी स्कूलों में लगातार शिक्षा का स्तर सुधर रहा है।

साइंस का  परिणाम जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें

कॉमर्स का परिणाम जानने के लिए यहां क्लिक करें

साइंस

  • पिछले साल 12वीं साइंस का रिजल्ट 87.20 प्रतिशत था जो इस बार बढ़कर 89.21 प्रतिशत हो गया है। यानी करीब 2 फीसदी रिजल्ट बढ़ा है।
  • इसी संकाय में लड़कियों का प्रतिशत पिछले साल 92.35 प्रतिशत था जो बढ़कर 93.33 प्रतिशत हो गया है। यानी पिछले साल से 1 फीसदी बढ़ोतरी हुई।
  • लड़कों का रिजल्ट पिछले साल 88.53 प्रतिशत था जो इस बार बढ़कर 90.36 प्रतिशत हो गया। यानी इस बार करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
  •  पिछले साल सरकारी स्कूलों के 7.25 प्रतिशत बच्चों के 75 प्रतिशत अंक थे, जबकि इस बार 16.76 प्रतिशत छात्रों के 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक आए हैं।
  • ओवरऑल सरकारी स्कूलों का रिजल्ट पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी बढ़ा है।
  • सरकारी स्कूलों का 83.18 प्रतिशत रिजल्ट था जो इस बार बढ़कर 93.09 प्रतिशत हो गया है।
  • इसके अलावा सरकारी स्कूलों 47.39 प्रतिशत बच्चों की फर्स्ट्स डिविजन आई थी, इसबार ऐसे बच्चों की संख्या बढ़कर 58.49 प्रतिशत हो गई है।

कॉमर्स

  •  12वीं कॉमर्स का पिछले साल रिजल्ट 83.32 प्रतिशत था, जो बढ़कर 88.07 प्रतिशत हो गया। यानी करीब 5 फीसदी बढ़ गया।
  • इसमें लड़कों का रिजल्ट पिछले साल 86.22 प्रतिशत था, इस बार बढ़कर 88.56 प्रतिशत हो गया। यानी करीब 2.34 प्रतिशत बढ़ गया।
  • लड़कियों का रिजल्ट पिछले बार 93.58 प्रतिशत था जो बढ़कर 95.27 प्रतिशत हो गया। यानी करीब 1.75 प्रतिशत बढ़ा।
  • पिछले साल सरकारी स्कूलों के 3.75 प्रतिशत बच्चों के 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक थे, जबकि इस बार 6.96 प्रतिशत छात्रों के 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक आए हैं।
  • सरकारी स्कूलों का रिजल्ट पांच फीसदी बढ़ गया है।

 

 

6,000 वस्तुओं पर जीएसटी की दरों के बारे में केंद्र व राज्यों के बीच सहमति

  • साबुन, कॉस्मेटिक्स, नारियल तेल जैसे उत्पादों पर अभी नहीं बन पाई है सहमति, कर की दरों को लेकर है विवाद
  • अधिकारियों ने कहा, बैठक से पहले कुछ अन्य वस्तुओं की भी तय हो सकती हैं दर
  • उद्योग जीएसटी दरों में जल्द चाहता है स्पष्टता
  • जीएसटी परिषद में नहीं बनी बात तो 1 जुलाई की राह होगी कठिन

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की श्रीनगर में गुरुवार को होने वाली दो दिवसीय बैठक से पहले ही करीब 6,000 वस्तुओं पर जीएसटी की दरों के बारे में केंद्र तथा राज्यों के बीच सहमति बन गई है। विवादास्पद वस्तुओं जैसे साबुन और कॉस्मेटिक्स, नारियल तेल और कार आदि पर लगने वाली दरों पर भी बैठक से पहले सहमति बनने के आसार हैं।

सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि समिति प्रत्येक उत्पाद और देश भर में उनके उत्पाद एवं वैट दरों को देखा है। इसके बाद करीब 70 से 75 फीसदी वस्तुओं की दरें तय कर ली गई हैं। शेष पर अभी विचार किया जा रहा है और जीएसटी को अंतिम रूप देने से पहले उस पर भी निर्णय हो जाएगा। दरों का निर्धारण उत्पादों पर मौजूदा प्रभावी कर की दर के आधार पर एचएसएन कोड के तहत किया गया है।

सोने पर चार फीसदी 

दरों पर उप-समिति की रिपोर्ट केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के अध्यक्ष वाले परिषद के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस समिति में राज्यों के वित्त मंत्री भी बतौर सदस्य शामिल हैं।  उदाहरण के तौर पर सोने की दर को परिषद की बैठक में 4 फीसदी पर रखे जाने पर जोर दिया जा सकता है। फिलहाल इस पर 1 फीसदी मूल्य वर्धित कर लगता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी जीएसटी पर अपनी रिपोर्ट में सोने पर 4 फीसदी कर लगाने की बात कही थी। जीएसटी में व्यापक तौर पर कर की चार दरें होंगी- 5, 12, 18 और 18 फीसदी। इसके अलावा शून्य कर वाली वस्तुएं तथा छूट वाली वस्तुएं भी शामिल होंगी और सिगरेट, लक्जरी कारों तथा वातित शीतलपेय जैसे अहितकर उत्पादों पर अधिभार भी लगाया जाएगा।

कारों के मामले में मौजूदा वर्गीकरण उसमें इस्तेमाल होने वाले ईंधन के आधार पर किया गया। इलेक्ट्रिक कारों पर कर दर है, वहीं डीजल कारों पर कर की दर ज्यादा है। इसके अलावा, इंजन क्षमता के आधार पर भी कर में अंतर होता है। ऐसे में एक अधिकारी का कहना है कि सभी कारों को 28 फीसदी के दायरे में लाना कठिन होगा।

कॉस्मेटिक्स पर 28 फीसदी

साबुन, कॉस्मेटिक्स आदि पर अभी 24-25 फीसदी कर लगता है लेकिन जीएसटी के तहत करीब कर स्लैब 28 फीसदी के दायरे में ऐसी वस्तुएं आ सकती हैं। नारियल तेल भी ऐसा ही उत्पाद है जिस पर चर्चा चल रही है, क्योंकि इसे हेयर ऑयल और खाद्य तेल दोनों माना जाता है। हेयर ऑयल को कॉस्मैटिक्स के तहत माना जाता है और उस पर 28 फीसदी कर लगेगा जबकि खाद्य तेल पर 5 या 12 फीसदी कर लग सकता है।

एक अधिकारी ने कहा कि नारियल तेल पर 6 फीसदी वैट लगता है और कुछ राज्यों ने वैट में छूट भी दी है। एक अधिकारी ने कहा कि साबुन को भी 28 फीसदी के दायरे में रखा जा सकता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा, ‘कुछ लोग उम्मीद कर रहे हैं कि कॉस्मेटिक तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स आदि को 18 फीसदी के दायरे में रखा जाना चाहिए।’

सिनेमा के टिकट पर लगने वाले कर को भी सुलझाने की जरूरत है। अभी ऐसी टिकट पर सेवा कर नहीं लगता है और राज्य मनोरंजन कर लगाते हैं जो 12 से 40 फीसदी के बीच है। मोबाइल फोन पर भी वैट की दर 5 फीसदी से 15.5 फीसदी के बीच है।

इसी तरह न्यूजप्रिंट पर शून्य उत्पाद शुल्क है लेकिन कुछ राज्य इस पर वैट लगाते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार को बुनियायदी ढांचा क्षेत्र के तहत वर्गीकृत किया गया है और इस पर 15 फीसदी कर लगता है। ऐसे में इसे 18 फीसदी के दायरे में रखा जाए या 12 फीसदी के दायरे में।

वित्त मंत्री को मीडिया, शिक्षा एवं स्वास्थ क्षेत्र से शून्य कर दायरे में रखे के लिए कई प्रस्तुतीकरण दिए गए हैं। ईवाई के लीडर, अप्रत्यक्ष कर विपिन सप्रा ने कहा कि 1 जुलाई से जीएसटी को लागू करना है ऐसे में उद्योग चाहते हैं कि जीएसटी दरों की घोषणा जल्द से जल्द की जाए, ताकि उन्हें इसके हिसाब से चीजों को दुरुस्त करने का समय मिल सके। 

GST अच्छा लेकिन, छोटे और मझोले उद्योगों पर पड़ेगा भारी

कोटा। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अर्थव्यवस्था के लिए भारी उलटफेर करने वाला है। नई कर व्यवस्था में सरल टैक्स अनुपालन, टैक्स पर टैक्स की समाप्ति, अंतर्राज्यीय कारोबार में सहजता, कीमतों में कटौती और कर आधार में भारी वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। इसके टेक्नोलॉजी संचालित होने के कारण ज्यादा पारदर्शिता आएगी।

इन्वॉयस मैचिंग से जीएसटी न केवल कर प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित होगा, बल्कि इससे कारोबार करने के तरीके भी बेहतर होंगे। इसमें संभावनाओं के बावजूद नियम- कानूनों के मौजूदा प्रारूप में परेशानी खड़ी करने वाली बातें भी हैं। खासकर छोटे और मझोले उद्यम (एसएमई) इनके शिकार होंगे।

छोटे व्यवसायों पर कारोबार से बाहर कर दिए जाने का खतरा रहेगा। अभी इसमें सुधार की गुंजाइश है। वैसे, नियम-कानून समय के साथ बेहतर होंगे, फिर भी मूल कमियों को जल्द दूर करना होगा।इनमें सबसे बड़ी खामी आपूर्तिकर्ता द्वारा कर भुगतान को खरीदार को उपलब्ध इनपुट क्रेडिट के साथ न कि ‘वास्तविक इन्वॉयस मिलान’ (मैच्ड जेन्यूइन इन्वॉयस) के साथ लिंक करना है।

इस प्रावधान की जड़ें कारोबारियों द्वारा जाली बिलों के जरिये कर चोरी के इतिहास में और इस तथ्य में हैं कि सरकार के लिए इसका पता करके अंकुश लगाना संभव नहीं था।सरकार को लगता है जीएसटी लागू होने से गलत लोग बाजार से स्वतः बाहर हो जाएंगे। इसमें गलती यह है कि जीएसटी अमल में लाने के चरणबद्ध नतीजों और पैदा होने वाली दिक्कतों की अनदेखी की जा रही है।

हालांकि, अनुपालन बढ़ाने की जद्दोजहद कम होगी, लेकिन इसके कारण कारोबार बंद होने और ऐसी वसूली कम होने को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया है। सरकार का तर्क यह भी है कि आजकल कुछ लोग गलत तरीके से इनपुट क्रेडिट लेने के लिए साठगांठ कर रहे हैं।इसलिए जोखिम को वापस नागरिकों पर डालना उचित ही है।

समस्या प्रत्यक्ष जोखिम के प्रबंधन की नहीं, कैश फ्लो के दुष्प्रभावों, गलत अकाउंटिंग और नए सप्लायरों व ग्राहकों के साथ लोगों की व्यापार क्षमता में गिरावट की है। वजह यह है कि कारोबारी रिटर्न को लेकर अनिश्चितता है।सामान्य व्यावसायिक स्थितियों में कोई लेनदेन तब पूरा होता है जब वस्तु/सेवा की सुपुर्दगी, इन्वॉयस की प्राप्ति व उनके बदले में भुगतान हो चुका होता है।

अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में सप्लायर इन्वॉयस पर कर लगाने, संग्रह करने और प्रेषित करने के लिए सरकार के एजेंट की भूमिका निभाता है। वैट व्यवस्था में क्रेता को इन्वॉयस पर चुकता टैक्स की इनपुट क्रेडिट का लाभ मिलता है, जो आपूर्तिकर्ता को अदा किया गया है।गैर-मौजूद इन्वॉयस या मूल इन्वॉयस से मेल नहीं खाने वाली राशि से जुड़े जाली दावों को रोकने के लिए जीएसटी कानून में इन्वॉयस मैचिंग का प्रावधान है।

इससे जालसाजी खत्म हो जाएगी। ज्यादा से ज्यादा करदाताओं को टैक्स के दायरे में लाया जा सकेगा। हालांकि, भुगतान के अतिरिक्त लिंकेज ने इस व्यवस्था पर धब्बा लगाया है।कोई कारोबारी यह कैसे मान लेगा कि लेनदेन पूरा हो गया जैसा कि उसे रिटर्न साइकल (अगले माह की 30 तारीख) के बाद 10 दिनों तक इंतजार करना होगा।

तभी जाकर उसे पता चल पाएगा कि वह अपने चुकता टैक्स के लिए इनपुट क्रेडिट का हकदार है या नहीं। बाजार में कई तरह के व्यवहार होने लगेंगे।कुछ लोग अगले माह की 30 तारीख तक सप्लायर को भुगतान करने से मना कर देंगे। इससे कार्यशील पूंजी की आवश्यकता में असामान्य बढ़ोतरी होगी। कुछ लोग कर भुगतान करने से इन्कार करेंगे।

व्यापार लागत में वृद्धि होगी

नतीजतन बहुस्तरीय लेनदेन की स्थिति पैदा होगी। व्यापार लागत में वृद्धि होगी। ऐसे में कुछ लोगों से जोखिम से बचने के लिए बैंक गारंटी मांगी जाएगी। अधिकतर एसएमई के पास ऐसी मांग पूरी करने का आसान उपाय नहीं होगा।छोटे कारोबारियों के लिए इसके मायने छोटे व्यवसायों को आमतौर पर नगदी प्रवाह बराबर न रहने की वजह से दिक्कतों से जूझना पड़ता है।

बेचे गए माल के बदले पैसे मिलने में एक हफ्ते के विलंब से भी उनकी सारी योजना ध्वस्त हो जाती है। हालांकि व्यवसायी का कर के मामले में छल करने का इरादा नहीं होगा, तो भी इसके साथ समय पर अनुपालन पूरा करने की कठिनाई हमेशा बनी रहेगी।इस तरह की हर कठिनाई से इसके समक्ष खरीदारों को लेकर संकट पैदा होगा, जो अपना जोखिम कम करने के लिए सप्लायर बदल सकते हैं।

एक संबंधित प्रावधान यह है कि सरकार ‘अनुपालन मूल्यांकन’ सार्वजनिक करना चाहती है। इस तरह आपको खरीदारी के पहले पता रहेगा कि आपके सप्लायरों का मूल्यांकन ‘अच्छा या खराब’ है। उद्देश्य यह है कि चूंकि आपका इनपुट टैक्स आपूर्तिकर्ता की इस ‘गुणवत्ता’ पर निभर करता है। इसलिए आप खराब मूल्यांकन वालों से खरीदारी करने से बचेंगे।

यानी लोग खराब मूल्यांकन से बचने के लिए भी हरसंभव कोशिश करेंगे। मूल्यांकन सिर्फ आपके डाटा फीड करने में देरी से ही खराब नहीं होता है, बल्कि आपके अपने भुगतान में विलंब से भी होता है।संक्षेप में, इन प्रावधानों को एक साथ देखने पर पता चलता है कि एक छोटे व्यवसाय को जो कठिनाई झेलनी पड़ेगी, वह अब सार्वजनिक होगी।

छोटे कारोबारियों पर खतरा 

इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए आपके सामने जब कभी दिक्कत आएगी तो वह अगले महीने और बड़ी हो जाएगी है। वजह यह है कि आपका ग्राहक सावधानी बरतेगा और माल दूसरे से खरीदेगा।इससे समस्या बढ़ेगी। नतीजतन भुगतान में और देरी होगी। फिर मूल्यांकन और नीचे जाएगा। नतीजतन ज्यादा ग्राहक पल्ला झाड़ेंगे। इसके कारण धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से छोटे व्यवसाय अंततः बंद हो जाएंगे।

नकली बिल गायब हो जाएंगे

जीएसटी सुराग लगाने की असाधारण क्षमता प्रदान करती है। इन्वॉयस मैचिंग के चलते सारे नकली बिल गायब हो जाएंगे और गलत दावे भी।अलबत्ता, फर्जी कंपनियों की समस्या बनी रहेगी, लेकिन पैन, बैंक खाते से जुड़ने के कारण सुराग लगाने की क्षमता इतनी ज्यादा होगी कि लोगों के लिए जालसाजी करके बच पाना लगभग असंभव होगा।भुगतान को इनपुट टैक्स क्रेडिट से अलग करने और इसे इन्वॉयस अपलोड व मैचिंग से संबद्ध करने के संदर्भ में प्रस्तावित कानून में संशोधन होने से कानून में जान आएगी। 

हर्षद मेहता घोटाले में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की 25 साल बाद भी वसूली 

नई दिल्ली। हर्षद मेहता घोटाले से हुए नुकसान की वसूली मेहता फैमिली से 25 साल बाद भी चल रही है। कोर्ट की ओर से नियुक्त किए कस्टोडियन ने अब तक दिवंगत मेहता की संपत्तियों को बेचकर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैंकों और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नाम जारी कराई है।

मेहता के पारिवारिक सदस्यों और सहयोगियों ने बीते सप्ताह भी 614 करोड़ रुपये की रकम बैंक को दी। कस्टोडियन ने मेहता परिवार से इस घोटाले की राशि को वसूलने के लिए 2,000 करोड़ रुपये तक की एक और संपत्ति के बारे में पता लगाया है, जिसकी नीलामी का जाएगी। इस केस में अब तक मेहता परिवार से कुल 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकवरी की जा चुकी है।

इसमें मेहता परिवार की प्रॉपर्टी और शेयर्स भी शामिल हैं। इस मामले पर सुनवाई के लिए सरकार ने जून, 1992 में एक ऑर्डिनेंस पास कर स्पेशल कोर्ट का गठन किया था। इस कोर्ट ने ही कस्टोडियन की नियुक्ति की थी, जिसे मेहता की संपत्तियों की जानकारी जुटाने, उन्हें जब्त कराने और नीलामी के जरिए रकम की वसूली करने का काम सौंपा गया था।

कस्टोडियन का हालिया फैसला 2 मई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए उस आदेश के बाद आया है, जिसमें 614 करोड़ रुपये डिस्बर्स किए जाने का आदेश दिया गया था। इसमें से 507 करोड़ रुपये स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के खाते में जाने हैं, जबकि 107 करोड़ रुपये एसबीआई ग्रुप को मिलेंगे।