जहां संतों का वास, वहां ज्ञान और संयम का प्रकाश: स्वस्तिभूषण माताजी

0
3

संत निवास निर्माण का शुभारंभ, धर्म और संस्कारों के नए केंद्र की रखी गई नींव

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुण्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर में सोमवार को संत निवास निर्माण योजना का बहुप्रतीक्षित शिलान्यास समारोह श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) के आशीर्वाद व सानिध्य में हुआ।

माताजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि संत समाज के चलायमान ऊर्जा केंद्र होते हैं। जहां संतों का निवास होता है, वहां ज्ञान, संयम और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश स्वतः फैलता है। उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति को शांति, संतोष, सहनशीलता और जीवन जीने की सही कला प्रदान करता है, जो संसार की किसी भी भौतिक संपदा से प्राप्त नहीं की जा सकती।

प्रातः नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद आयोजित मंगल प्रवचन के पश्चात वैदिक एवं जैनाचार्य परंपरा के मंत्रोच्चार के बीच संत निवास का शिलान्यास विधिवत संपन्न कराया गया।

मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा व मंत्री पंकज खटोड ने बताया कि समारोह में मुख्य शिलान्यास कर्ता के रूप में चंद्रप्रकाश जैन, चंदा जैन, संदीप -मेघा जैन, हितार्थ एवं वीरा जैन (बंसल परिवार, सांवर वाले) ने परिवार सहित शिलान्यास कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।

इसके साथ ही विनोद -सुमिता जैन, मनोज-नेहा जैन, राजरानी दोशी, नीरज सुनीता दोशी,टीकमचंद जैन, उत्तमचंद जैन, अरविंद कुमार जैन, तथा कनकमाला जैन बांकलीवाल परिवार अलीगढ़ वाले ने शिलान्यास कर्ता परिवार के रूप में सहभागिता निभाते हुए निर्माण योजना में अपना योगदान दिया।

मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा ने कहा कि संत निवास का निर्माण केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक संस्कारों और धर्म साधना का स्थायी केंद्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

संतों के आगमन एवं प्रवास से क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा श्रद्धालुओं को नियमित रूप से धर्मोपदेश एवं साधना का लाभ प्राप्त होगा। शिलान्यास कार्यक्रम में धर्मसभा में सकल जैन समाज के विनोद टोरडी, मनोज जैसवाल सहित समाज के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।