Tuesday, June 23, 2026
Home Blog Page 5814

“लक्ष्य” समर कैम्प : नॉन फायर कुकिंग में व्यंजन बनाना सीखा

कोटा। एसआर पब्लिक सी. सै. स्कूल में बुधवार को आयोजित “लक्ष्य” समर कैम्प 2017 के सातवें दिन भी बच्चों व अभिभावकों में भारी उत्साह देखने को मिला ।कैम्प में बच्चों को नॉन फायर कुकिंग में अनेक व्यंजन बनाना सिखाया जा रहा है ।

कैम्प में यह देखा गया कि एक बच्चे की माताजी बीमार होने पर सभी परिवार के सदस्यों को नॉन फायर कुकिंग के माध्यम से अनेक व्यंजन बनाकर घर वालों को आश्चर्यचकित कर दिया ।इस प्रकार की कुकिंग से बच्चों कों तैलिय बाजारी चीजों से निजात मिल सकेगी।

साथ ही उनका शरीर भी स्वस्थ और निरोगी रह सकेगा।अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या सीमा शर्मा ने बताया कि इन गतिविधियों को सीखकर बच्चे किसी पर आश्रित न रहकर अपना कार्य स्वयं कर सकते हैं और अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रख सकते हैं।

 

आईसीआईसीआई बैंक ने 10 लाख रुपए मूल्य के सिक्के और नकदी बदली

अन्ता और बारां में 3 कॉइन एक्सचेंज मेले में करीब 200 लोगों ने फायदा उठाया

कोटा। आईसीआईसीआई बैंक ने राजस्थान प्रदेश के अंता और बारां में तीन कॉइन मेलों का आयोजन किया। इनमें से दो कॉइन मेले बारां स्थित बैंक की मुख्य बाजार और राजभवन रोड शाखा में तथा तीसरा कॉइन मेला समीपवर्ती कस्बे अन्ता में आयोजित किया गया।

इन कॉइन मेलों का करीब 200 लोगों ने लाभ लिया और इन लोगों ने 10, 5, 2 और 1 रुपए के सिक्के के साथ ही 10, 20 और 50 के नोट बदलवाए जिसके बदले में नई मुद्राए उन्हें दी गईं। आईसीआईसीआई बैंक समय-समय पर इस प्रकार के कॉइन मेलों का आयोजन करता है जिसमें आम जनता को पुराने नोट एवं सिक्के मुफ्त में बदलने की सुविधा दी जाती है।

यह बहु प्रतीक्षित आयोजन है जिन्हें जिन्दगी के हर वर्ग के लोगों से काफी अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त होती है। इन मेलों में कोई भी व्यक्ति इस सुविधा का निःशुल्क लाभ उठा सकता है। आईसीआईसीआई बैंक की 31 मार्च 2017 तक पूरे देश में 4,850 शाखाएं, 13,882 एटीम्स कार्यरत थे। बैंक की राजस्थान में 400 से अधिक शाखाएं है जिस कारण यह प्रदेश के निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा कार्यरत बैंक है।

फोर्ब्‍स की ‘ग्लोबल गेम चेंजर्स’ सूची में मुकेश अंबानी सबसे ऊपर

न्यूयॉर्क।  रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी को फोर्ब्‍स पत्रिका की दुनियाभर में पासा पलटने वाला काम करने वाले लोगों की सूची में पहला स्थान मिला है। पत्रिका की इस सूची में उन लोगों को शामिल किया गया है जिन्होंने अपने उद्यमों के जरिये दुनियाभर में करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है।

फोर्ब्‍स की इस दूसरी वार्षिक वैश्विक पासा पलटने वालों की सूची में 25 ‘साहसी व्यावसायियों’  को शामिल किया गया है जो चुप नहीं बैठे रह सकते और यथास्थिति से संतुष्ट नहीं रहते हैं। वह अपने उद्योग धंधों में कुछ नया करते रहते हैं जिससे कि दुनियाभर में करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव आता है।

अंबानी (60 वर्ष) इस सूची में सबसे ऊपर हैं। भारत में आम लोगों तक इंटरनेट को पहुंचाने के पासा पलटने वाले उनके प्रयास के लिए उन्हें सूची में यह स्थान मिला है। फोर्ब्‍स ने मुकेश अंबानी की कंपनी के मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर रिलायंस जियो के बारे में जानकारी देते हुए लिखा है, ‘तेल एवं गैस क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपति ने देश के दूरसंचार बाजार में जोरदार ढंग से प्रवेश किया।

उसने काफी सस्ते दाम पर लोगों को तीव्र इंटरनेट उपलब्ध कराया और छह महीने में ही 10 करोड़ ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा। इससे दूरसंचार बाजार में सुदृढ़ीकरण की लहर सी चल पड़ी।’ फोर्ब्‍स ने अंबानी द्वारा कही बात को दोहराते हुए कहा, ‘सब कुछ और हर वह चीज जो डिजिटल हो सकती है, वह डिजिटल हो रही है। भारत इसमें पीछे नहीं रह सकता।’

विभिन्न क्षेत्रों में खेल का पासा पलटने वालों की इस सूची में जो  घरेलू सामान बनाने वाली कंपनी डायसन के जेम्स डायसन, अमेरिका के ग्लोबल इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट कॉरपोरेशन ब्लैक रॉक के सह- संस्थापक लैरी फिंक, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान, सोशल मीडिया कंपनी स्नैप के सह-संस्थापक एवान स्पीजेल, चीन की कंपनी दीदी चुक्सिंग के संस्थापक चेंग वेई और अफ्रीका की खुदरा कारोबार कंपनी क्रीस्टो वीएसे शामिल हैं।

खेलने की उम्र में बाइक पर फर्राटा भरते ये जनाब

नई दिल्ली। चार साल की उम्र में जहां बच्चे ठीक से बाय-बाय करना भी नहीं सीख पाते, एक जनाब ऐसे भी हैं जो मिनी मोटरबाइक पर रफ्तार से बात कर उम्र को ठेंगा दिखाते हैं। आपको शायद याद भी न हो कि इस उम्र में आपने क्या किया था, लेकिन इन्हें अच्छे से याद है कि बाइक पर बैलेंस कैसे बनाना है।

आइये मिलाते हैं आपको यूक्रेन के इस बेबी-बाइकर से…यूक्रेन के रहने वाला टीमा कुलेशोव महज ढाई साल की उम्र से मिनी मोटरबाइक चला रहा है। अच्छी बात यह है कि उसके पैरेंट्स भी उसे पूरा सपोर्ट कर रहे हैं।

उसके माता-पिता अलेक्जेंडर और विक्टोरिया ने उसे टायर बैलेंस वाली स्ट्राइडर मिनी मोटरबाइक लेकर दी है। उन्हें टीमा की सेफ्टी की चिंता जरूर है लेकिन उन्होंने कभी इसे टीमा की बाइकिंग के आड़े नहीं आने दिया। टीमा के पिता कहते हैं कि उसे रफ्तार पसंद है, मगर वह कभी शो-आफ नहीं करता।

कई बार तो वह मिलने वालों को बताता तक नहीं कि वह बाइकर है।टीमा ने चार साल से कम उम्र में मोटरसाइकिल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। उसने यूक्रेन और रूस दोनों में आयोजित होने वाली चिल्ड्रेंस मोटो प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया है।

बच्चों की मिनी मोटरसाइकिल का मतलब धीमी रफ्तार जरा भी नहीं, ये बाइक्स 72 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। टीमा ने इन प्रतियोगिताओं में सबसे कम उम्र के सवार होने का रिकॉर्ड बनाया है, और अपने आयु वर्ग में प्रतिस्पर्धा खोजने में भी परेशानी हो रही है।

चाइना के सेब और नाशपाती में कीड़े, इंपोर्ट रोका

0

नई दिल्ली। चीन से आने वाले कृषि उत्पादों पर रोक लगाने के पहले मामले के तहत सरकार ने वहां के सेब और नाशपाती के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। इंडिया ने आने वाले शिपमेंट्स में कीड़े होने का हवाला देते हुए चीन के सेब, नाशपाती और मेरीगोल्ड फ्लॉवर सीड्स पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है।

चीन से होने वाले फल और सब्जी आयात में इन दो फलों की हिस्सेदारी करीब 90 पर्सेंट है। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया, ‘हमें लगातार चीन से आ रहे सेब, नाशपाती और मेरीगोल्ड फ्लॉवर सीड्स में पेस्ट्स मिल रहे थे। ऐसे में हमने इनके इंपोर्ट्स को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।’

अप्रैल से फरवरी के बीच में इंडिया ने चीन से 13.2 करोड़ डॉलर के सेब और नाशपाती इंपोर्ट किए। पिछले साल इसी अवधि में 4.42 करोड़ डॉलर के सेब और नाशपाती आयात हुए थे। इस तरह से इसमें 200 पर्सेंट का उछाल दर्ज किया गया। चीन को भेजे गए कई पत्रों में भारतीय अधिकारियों ने नियमों के पालन न होने और फायटोसैनिटरी नॉर्म्स का उल्लंघन का जिक्र किया, जिनसे इंडियन ऐग्रिकल्चर को गंभीर बायोसिक्यॉरिटी रिस्क हो सकता है।

1 मई को भेजे गए अपने हालिया पत्र में इंडिया ने कहा, ‘सेब, नाशपाती और मेरीगोल्ड फ्लॉवर सीड्स से जुड़े हुए पेस्ट्स लगातार पाए गए हैं। इससे चीन में फायटोसैनिटरी कंट्रोल सिस्टम की नाकामी का पता चलता है।’ चीन ने इसके जवाब में कहा कि ये पकड़े गए क्वारंटाइन पेस्ट्स शायद पैकेजिंग और सर्कुलेशन की प्रक्रिया के दौरान आए होंगे।

इंपोर्टेड कमोडिटीज के मामले में नियमों का पालन न होने के बारे में चीन को लगातार बताए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं है। भारत ने अब इन तीनों कमोडिटीज को लेकर अतिरिक्त जानकारी मांगी है। इंडिया जानना चाहता है कि फायटोसैनिटरी रिस्क से बचने का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर क्या है। साथ ही, पैकेजिंग और वेयरहाउसिंग के लिए अप्रूवल की लिस्ट भी इंडिया ने मांगी है।

 

ग्राहक अब खुद जनरेट करेंगे अपना एटीएम का पिन

नए बैंक खाते व कार्ड जारी कराने पर नई व्यवस्था, ई-मेल आईडी की तरह तैयार करना होगा पासवर्ड

कोटा। ग्राहकों की गोपनीय जानकारी को और भी सुरक्षित करने की दिशा में बैंकों ने व्यवस्था में एक और बदलाव किया है। कैश के लिए अपने एटीएम का इस्तेमाल कर रहे ग्राहकों को भी अब बैंक केवल एटीएम कार्ड जारी करेंगे, जबकि उनका कोड या पासवर्ड ग्राहकों को खुद ही जनरेट करना होगा।

अपने ईमेल अकाउंट की तरह एटीएम से खाते में रकम लेन-देन की कार्रवाई करने पिन का तैयार करने ग्राहकों को एक आसान प्रक्रिया से गुजरना होगा। एसबीआई में एटीएम का पिन जनरेट करने की प्रक्रिया खाता धारक द्वारा ही पूरी किए जाने की व्यवस्था लागू कर दी गई है।

बैंकों में केवल एटीएम कार्ड ही जारी जा रहे हैं और पिछले कुछ माह से किसी भी शाखा में मुख्यालय से एटीएम के पिन नहीं भेजे जा रहे। मशीन के जरिए प्रदान की जा रही सेवाओं में एटीएम का पिन नंबर और बैंक खाते ऑपरेट करने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर कॉमन कड़ी है।

अब तक निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैंक में आवेदन देने के कुछ दिन बाद एटीएम कार्ड जारी किए जाते थे। ग्राहक या तो बैंक जाकर या उनके दिए पते पर एटीएम कार्ड और उसका पिन नंबर घर पहुंच जाया करता था।

कुछ बैंक एटीएम कार्ड या पिन प्रदान करने के लिए ग्राहक को बैंक बुलाकर ही प्रक्रिया पूरी करते हैं। पर अब ऐसा नहीं होगा और ग्राहकों को अपने पिन खुद ही तैयार करने होंगे। बैंक प्रबंधन अपने ग्राहकों को केवल एटीएम कार्ड उपलब्ध कराएंगे, जबकि उसका पिन उन्हें अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की मदद से ही जनरेट करना होगा।

जानकारी नहीं, परेशान हो रहे ग्राहक

इस संबंध में जानकारी नहीं होने के कारण कई ग्राहक एटीएम कार्ड लेकर भटकने मजबूर हैं। एटीएम मशीन पर अपना कार्ड स्वाइप पर वे सभी सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं, जो बैंक उन्हें प्रदान करते हैं।

इनमें कैश निकालना या जमा करना, कार्ड टू कार्ड कैश ट्रांसफर, पासबुक एंट्री, खाते का बैलेंस, अकाउंट टू अकाउंट पैसे ट्रांसफर करने से लेकर अन्य कई अहम सेवा एटीम सेंटर से ही ऑपरेट की जा सकती है।

पुरानी व्यवस्था के तहत अब तक जारी किए जा चुके एटीएम कार्ड और उनके लिए पिन की जानकारी बैंक मुख्यालय के सर्वर में मौजूद रहती थी, जहां से पिन जनरेट करने पर मौजूद डाटा हैक होने का खतरा अब नहीं रहेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही।
बाक्स पिन बनाने प्रक्रिया

  • एसबीआई से जारी 567676 नंबर पर पीआईएन स्पेस एटीएम के लास्ट 4 डिजिट स्पेस अकाउंट नंबर लास्ट चार डिजिट लिखकर एसएमएस करना होगा।
  • इसके बाद मोबाइल पर एक पिन नंबर आएगा।
  •  इस पिन का एटीएम सेंटर जाकर मशीन में बताए गए दिशा-निर्देश के अनुसार पिन नंबर चेंज करना होगा।
  •  इस नंबर जिस दिन एसएमएस भेजा जाएगा, उसी दिन रात 12 बजे से पहले प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • उसी दिन प्रक्रिया पूरी न हुई, तो अगले दिन वही प्रक्रिया शुरू से दोहरानी होगी।
  •  एक बैंक में एक ही मोबाइल नंबर करेगा काम । 
  • कुछ बैंकों के एटीएम में पिन होम ब्रांच के एटीएम पर जाकर ही बनाना होता है। 

कर्मचारियों को 10 दिन में मिलेगा पीएफ का पैसा

नई दिल्ली। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत की खबर है। अब कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) निकासी, पेंशन और बीमा जैसे दावों का निपटारा 20 के बजाय 10 दिन में होगा।कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने कई तरह के क्लेम निपटाने के लिए समयसीमा घटाकर यह सहूलियत दी है।

इससे पहले संगठन ने जुलाई, 2015 में दावों के निपटान के लिए समय सीमा घटाकर 20 दिन की थी। ईपीएफओ ने अपने करीब पांच करोड़ अंशदान करने वालों को दी जाने वाली सेवा में सुधार के मकसद से यह कदम उठाया था।संगठन ने इस साल एक मई से ऑनलाइन दावा निपटान की व्यवस्था शुरू की है।

ईपीएफओ की सभी आधार और बैंक खाते से जुड़े ईपीएफ खातों के संदर्भ में आवेदन प्राप्त होने के तीन घंटे के भीतर दावों के निपटान की योजना है।दत्तात्रेय ने पेश किया सिटीजन चार्टरईपीएफओ ने एक बयान में कहा, ‘दावे निपटाने की समयसीमा 10 दिन और शिकायतों के निपटारे के लिए 15 दिन होगी।

केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने मंगलवार को बेंगलुरु में ईपीएफओ के सिटीजन चार्टर 2017 लांच किया।यह चार्टर ईपीएफओ की ओर से पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की कोशिश है। इसके जरिये सेवा देने व शिकायत निपटान की प्रणाली को और कारगर बनाना है।

बिना सरकारी नियंत्रण के चल रहे कोचिंग संस्थान, अभिभावकों की कट रही जेब

-दिनेश माहेश्वरी 

कोटा ।  मेडिकल और इंजिनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए विद्यार्थी कोचिंग क्लासेज में पढ़ने के लिए मजबूर हैं।  अभिभावक चाहते हैं कि उनका बेटा या बेटी पढ़ाई कर डॉक्टर-इंजीनियर बने। उन्हें मजबूरन अपने बच्चों को कोचिंग क्लासेस में पढ़ाना पड़ता है। क्योंकि स्कूलों में पढाई नहीं होती है।  

में हाल ही में  इस संदर्भ में गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से Len-den News ने बातचीत , तो उन्होंने पाठ्यक्रम से लेकर स्कूल में पढ़ाई तक आने वाली कई समस्याएं गिनाईं, जिन पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

सीबीएसई के समकक्ष नहीं है  पाठ्यक्रम

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पाठ्यक्रम अच्छा है। इससे संलग्न स्कूलों में यह पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। कई राज्यों ने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के पाठ्यक्रम सीबीएसई के समकक्ष बनाए हैं। इसलिए वहां के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में दिक्कत नहीं होती है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकांश विद्यार्थी पिछड़ जाते हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए अब अभिभावक मजबूरन अपने बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की जेईई और एनईईटी जैसे परीक्षाओं के लिए कोचिंग क्लासेज में पढ़ाते हैं। कोचिंग क्लास वाले इसी का फायदा उठाते हुए मोटी फीस वसूल रहे हैं। साथ ही अच्छी तैयारी कराने के नाम पर कई आकर्षक पैकेज बनाए हुए हैं। ये पैकेज नौवीं से बारहवीं कक्षा तक तैयारी कराने के नाम पर बनाए गए हैं। 

 लाखों खर्च क्यों करता

एक अभिभावक ने कहा कि उनकी बेटी इस साल बारहवीं में गई है। हमें उसकी पढ़ाई को लेकर बहुत चिंता हैं। इसलिए ग्यारहवीं से ही उसे कोचिंग क्लासेज में डाल दिया था। अगर यही पढ़ाई जूनियर कॉलेजों में होती, तो कोचिंग क्लासेज पर लाखों रुपये खर्च क्यों करने पड़ते। हमारी जितनी साल भर की कमाई है, कोचिंग क्लासेज की फीस उससे कहीं अधिक है। बच्चे की पढ़ाई के लिए कर्ज लेकर फीस भरनी पड़ी है।

सरकार भी जिम्मेदार 

 स्टेट बोर्ड की दसवीं कक्षा का नतीजा घोषित होने के बाद विद्यार्थियों में नामचीन कॉलेजों में दाखिले का बहुत क्रेज होता है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह क्रेज दर्शाता है कि दाखिला लेते समय विद्यार्थी कॉलेजों पर पूरा भरोसा जताते हैं। लेकिन पढ़ाई शुरू होने पर उनका भरोसा उठ जाता है और वे कोचिंग क्लासेज में नाम लिखा लेते हैं। जिसके चलते कोचिंग क्लासेज का व्यवसाय तेजी से फल-फूल रहा है। इसके लिए सरकार भी जिम्मेदार है।

सरकार तय करे एक पाठ्यक्रम

एनईईटी की परीक्षा देने वाली पूजा ने कहा कि जब हमें मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम को पढ़ना ही है, तो उसी पाठ्यक्रम को स्टेट बोर्ड में भी पढ़ाना चाहिए। ऐसे में सरकार को स्टेट बोर्ड के पाठ्यक्रम को सीबीएसई के समकक्ष बना देना चाहिए था। सरकार की वजह से विद्यार्थियों को मेडिकल, जेईई मेन व अडवांस परीक्षा के लिए शत-प्रतिशत कोचिंग क्लासेज पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

कोचिंग संस्थानों और स्कूलों में सांठगांठ 

शहर में अधिकतर बड़े कोचिंग क्लासेज वालों की स्कूलों से सांठगांठ है। वे विद्यार्थियों से उन्हीं कॉलेजों में ऑनलाइन ऐडमिशन के लिए कहते हैं, जिनसे उनकी सांठगांठ रहती है। इससे क्लासेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नियमित रूप से कॉलेज नहीं जाना पड़ता है। इसके एवज में कॉलेज वालों को एकमुश्त बड़ी रकम मिलती है। इससे स्कूलों और कोचिंग क्लासेज दोनों का स्वार्थ सध जाता है, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ता है। 

 

सिमरन का टीजर जारी, कंगना नटखटअंदाज में नजर आई

मुंबई। सिमरन नाम सुनते ही डीडीएलजे की काजोल याद आ जाती है लेकिन इस बार काजोल नहीं कंगना सिमरन बनी हैं। फिल्म का ऑफिशियल टीजर आ चुका है और इसमें कंगना बेहद चुलबुले अंदाज में नजर आने वाली हैं।

सिमरन इसी साल 15 सितम्बर को रिलीज हो रही है।हंसल मेहता की इस फिल्म में कंगना सिमरन के किरदार में हैं। रविवार देर रात फिल्म का टीजर जारी हुआ है। टीजर देखते ही पहली ही नजर में आपको इस नटखट, चुलबुली, ज़िंदगी और जोश से भरी सिमरन से प्यार हो जाएगा!नेशनल अवार्ड विनर एक्ट्रेस कंगना रनौत ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।

आज की तारीख में वो सबसे अधिक कमाई करने वाली एक्ट्रेस में से एक हैं। कंगना अपनी खूबसूरती, फिल्मों में निभाए गए किरदार के अलावा अपनी बेबाकी के लिए भी जानी जाती हैं। बहरहाल, अब तैयार हो जाइए कंगना के नए अवतार को देखने के लिए! उनका यह अवतार दिखेगा उनकी आने वाली फिल्म ‘सिमरन’ में।आपने देखा इस टीजर में कंगना जिंदगी, जोश और उमंग से भरी हुई लग रही हैं। 

https://www.youtube.com/watch?v=aX7TE08Xmm8

 

नोकिया 3310 इंडिया में लॉन्च, कीमत 3310 रुपए

नई दिल्ली। जिस फोन ने लाखों दिलों पर राज किया वो आखिरकार भारत में लॉन्च हो गया है। एचएमडी ग्लोबल ने नोकिया 3310 बाजार में पेश कर दिया है और यह 18 मई से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इस फोन की खास बात यह है कि इसकी कीमत भी कंपनी ने 3310 रुपए ही रखी गई है।

नोकिया 3310 फोन 4 कलर वेरिएंट में पेश होंगे- वार्म रेड और येलो कलर ग्लॉस फिनिश के साथ जबकि डार्क ब्लू और ग्रे कलर मैट फिनिश के साथ उपलब्ध होंगे।एचएमडी ग्लोबल के भारत के वाइस प्रेसिडेंट, अजय मेहता ने बताया कि, “एक बार चार्ज करने पर पूरा दिन बातें करें, टेस्ट्स सेंड करें, फोटो खींचे, अपनी जेब में में आसानी से फिट हो जाने वाले फोन में FM रेडियो और MP3 का आनंद लें।

नए अवतार वाला नोकिया 3310 आपके चहरे पर मुस्कान भरने आ गया है। इसमें वो सब है जो आपको याद है, हालाँकि इसे एक मॉडर्न ट्विस्ट के साथ फिर से पेश किया गया है। तो अगर आपको एक शानदार बैटरी लाइफ वाला फीचर फ़ोन चाहिए तो नोकिया 3310 भारत में एक बार फिर से आ गया है।

यह खास फीचर होंगे शामिल:

नोकिया 3310 फोन के स्पेसिफिकेशन की अगर बात करें तो, 2G सपोर्ट फीचर फोन ड्यूल-बैंड 900/1800MHz के साथ, ड्यूल सिम वेरिएंट में मिलेगा। फोन मजे दोनों ही सिम माइक्रो होने चाहिए। इसके अलावा नोकिया सीरीज 30+ ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करेगा। फोन में 2.4 इंच का डिस्प्ले दिया गया है। जिसका रेजोल्यूशन QVGA 240×320 पिक्सल है।

कनेक्टिविटी के लिए, नोकिया 3310 में माइक्रो USB, 3.5mm AV कनेक्टर, ब्लूटूथ 3.0 के साथ SLAM दिया गया है। इसके अलावा फोन में फोटोग्राफी के लिए 2 मेगापिक्सल का कैमरा LED फ्लैश के साथ दिया गया है। फोन में 32GB तक माइक्रोएसडी कार्ड सपोर्ट करेगा। नोकिया ने दावा किया है कि डिवाइस 25.3 दिन का स्टैंडबाय टाइम और , लगभग 22.1 घंटे का टॉक टाइम देगी। \