Monday, June 22, 2026
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GST: कपड़ों की धुलाई भी एक जुलाई से महंगी

नई दिल्ली। जीएसटी के बाद धुलाई महंगी हो जाएगी। डिटर्जेंट, वॉशिंग मशीन और साबुन पर 28 पर्सेंट जीएसटी लागू होने के चलते कपड़ों की धुलाई अब महंगी हो जाएगी। वहीं, टूथपेस्ट, सोप बार और हेयर ऑइल पर 18 पर्सेंट का टैक्स लगेगा। इन आइटम्स पर अब तक 28 फीसदी की दर से टैक्स चार्ज होता था। इसके अलावा प्रॉसेस्ड फूड, घी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, वाइट गुड्स और मोबाइल फोन भी महंगे हो सकते हैं।

28 फीसदी की दर से जीएसटी

20,000 करोड़ रुपये के डिटर्जेंट बिजनस पर 28 फीसदी की दर से जीएसटी लागू होगा, जबकि अब तक इस पर 22 पर्सेंट टैक्स ही लगता रहा है। मदर डेयरी (फ्रूट ऐंड वेजिटेबल्स) के सीएफओ मेघनाद मित्रा ने कहा, ‘घी पर टैक्स 5 पर्सेंट से बढ़कर 12 फीसदी तक पहुंच जाएगा।’ इसी तरह प्रॉसेस्ड फूड पर टैक्स की दर 12 पर्सेंट से बढ़कर 18 पर्सेंट हो जाएगी। कोला मेकर्स भी टैक्स की बढ़ी दरों को लेकर परेशान हैं।

सॉफ्ट ड्रिंक्स पर 40 फीसदी तक टैक्स

सॉफ्ट ड्रिंक्स पर सेस समेत कुल 40 फीसदी तक टैक्स लगाने की तैयारी है। यही नहीं स्नैक्स जैसे रेडी-टु-ईट स्नैक्स भी 12 की बजाय 18 पर्सेंट टैक्स लगाए जाने से महंगे हो जाएंगे। रसना के सीएमडी पिरुज खामबट्टा ने कहा, ‘1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के साथ ही प्रॉसेस्ड फूड्स की कीमतें 5 से 6 पर्सेंट तक महंगी हो जाएंगी।’

प. म. रेलवे के डाटा सिस्टम पर रेनसमवेयर का अटैक, बोर्ड ने किया अलर्ट जारी

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कोटा / जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के डाटा सिस्टम पर रेनसमवेयर वायरस ने अटैक किया है। फाइनेंस, इंजीनियरिंग, स्टोर विभाग के कुछ सिस्टमों में वायरस के बाद इन्हें नेटवर्क से अलग कर बंद कर दिया गया है। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने भी अलर्ट जारी कर डाटा सिस्टम यूज करने वाले जोन और विभागों को सावधानी बरतने को कहा है।

 इसका असर टिकट सिस्टम, रिजर्वेशन, कलेक्शन या ऑपरेशन से जुड़े डाटा बेस पर नहीं पड़ा है। दूसरी तरफ, कोटा मंडल में नेटवर्किंग टीम वायरस क्लीन करने में लग गई है। एंटी वायरस इंस्टॉल होने के बाद ही इन सिस्टमों को दोबारा शुरू किया जाएगा। कोटा मंडल के फाइनेंस विभाग के सिस्टम गुरुवार शाम को ही फेल होने लगे थे ।  

लेकिन वायरस की पुष्टि कुछ  देर पहले  ही हो पाई।  इंजीनियरिंग, स्टोर, पर्सनल विभाग के सिस्टम में भी वायरस का अटैक हुआ। इसके बाद इन सिस्टम को इंटरनेट से अलग कर बंद कर दिया गया। लगभग 20 से 25 सिस्टम प्रभावित हुए हैं। संभवत: सोमवार को ही ये सिस्टम दोबारा शुरू हो पाएंगे।

जबलपुर, भोपाल समेत सभी मंडल में अलर्ट

वायरस अटैक के बाद जबलपुर और भोपाल मंडल के सभी विभागों को रेलवे ने इंटरनेट का कम से कम उपयोग करने को कहा है। पश्चिम मध्य रेलवे जोन कार्यालय में भी नेटवर्किंग के उपयोग के दौरान सावधानी रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक नार्थ सेंट्रल रेलवे, सेंट्रल रेलवे आदि दूसरे रेल जोन के भी सिस्टम में वायरस अटैक की बात सामने आई है।

सावधानी रखने को कहा

अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। सभी जोन को सावधानी रखने को कहा है। हमारा पैसेंजर डाटा सिस्टम सुरक्षित है।

-वेदप्रकाश, पीआरओ, रेलवे बोर्ड, दिल्ली

सिस्टम में वायरस

कोटा मंडल के कुछ विभागों के सिस्टम में वायरस के बाद उन्हें बंद कर दिया गया है। सभी मंडलों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है। –

सुरेन्द्र यादव, सीपीआरओ, पमरे

सिस्टम नेटवर्क से अलग

इंजीनियरिंग, फाइनेंस, स्टोर समेत कुछ विभाग के सिस्टम में वायरस की बात सामने आई है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है। हमने सिस्टम को नेटवर्क से अलग कर दिया है। इंटरनेट सुविधा यूज नहीं हो रही है। सोमवार तक इनका वायरस क्लीन कर इन्हें अपडेट करेंगे।

आलोक अग्रवाल, एडीआरएम, कोटा मंडल

मोदी सरकार दाल मिलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने को तैयार

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नई दिल्ली। दालों के उत्पादन और अंतिम उपभोग के बीच के अंतर को कम करने के लिए केंद्र सरकार दालों का उत्पादन करने वाले राज्यों में मिलिंग क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि बाजार में बिना मिलिंग वाली दालों की बिक्री के बाद उनके अंतिम उपभोग तक पहुंचने में कम समय लगेगा।

भारत में करीब 10,000 दाल मिलें हैं जिनमें से प्रत्येक की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 10-20 टन है। दालों की अधिकतर मिलिंग में फलियों को दो भागों में विभाजित करना और बीज को निकालना शामिल रहता है। परंपरागत मिलों में कई बार इस प्रक्रिया के जरिये केवल 65-70 प्रतिशत का ही उत्पादन हो पाता है, जबकि आधुनिक मिलों में यह उत्पादन बढ़कर 90 प्रतिशत तक हो जाता है।

दूसरे शब्दों में अपर्याप्त आधुनिक मिलिंग सुविधा की वजह से कुल उत्पादन का तकरीबन 25-30 प्रतिशत हिस्सा बेकार हो जाता है। हाल में बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए एक साक्षात्कार में केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि इस साल अधिक उत्पादन के बावजूद कुछ खुदरा बाजारों में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ज्यादा हैं। अपर्याप्त मिलिंग क्षमता के कारण ऐसा हो सकता है। 

इसकी वजह से अंतिम उत्पाद के लक्ष्य तक पहुंचने में देरी होती है। उनका कहना है कि सरकार शीघ्र ही सभी भागीदारों के साथ विचार-विमर्श की पहल करेगी और दालों का उत्पादन करने वाले राज्यों में आधुनिक मिलिंग सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए विस्तृत नीति पर भी विचार किया जा सकता है। देश में 80 प्रतिशत से ज्यादा दाल राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से आती हैं।

पासवान ने कहा कि 2016-17 में भारत का कुल दलहन उत्पादन 2.24 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है जिसमें आयात का 50 लाख टन जोड़ दें तो कुल उपलब्धता 2.74 करोड़ टन हो जाती है, जबकि उपभोग करीब 2.46 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इसका अर्थ यह निकलता है कि तकरीबन 28 लाख टन का आधिक्य रहेगा। हालांकि इसके बावजूद कुछ खुदरा बाजारों में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा बनी हुई हैं।

भारत में बने एप्पल के आईफोन एसई की बिक्री शुरू

बेंगलुरु। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल ने भारत में निर्मित एप्पल के आईफोन एसई की बिक्री कुछ स्टोरों पर शुरू कर दी है। कंपनी ने ट्रायल के तौर पर आईफोन एसई का उत्पादन बेंगलुरु में शुरू किया है। उद्योग सूत्र के अनुसार ऐपल ने कुछ स्टोरों पर आईफोन एसई की बिक्री शुरू कर दी है। सीमित संख्या में इन फोनों की देश में ही एसेंबलिंग हुई है।

हालांकि कंपनी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुछ दिनों पहले कंपनी ने कहा था कि उसने बेंगलुरु में सीमित संख्या में आईफोन एसई का ट्रायल के तौर पर उत्पादन शुरू कर दिया है।एक अन्य सूत्र ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि भारत में निर्मित हाई-एंड स्मार्टफोन आईफोन एसई की बिक्री पहले ही शुरू हो चुकी है।

कंपनी पिछले दो मई से इनकी बिक्री कर रही है। सूत्र ने एक फोटो भी दिया है जिसमें बॉक्स पर आईफोन एसई के विवरण के साथ 32 जीबी स्टोरेज क्षमता की जानकारी दी गई है और उस पर ‘डिजाइंड बाई एप्पल इन कैलीफोर्निया’ और एसेंबल्ड इन इंडिया अंकित था। बॉक्स पर सभी टैक्स मिलाकर कीमत 27,200 रुपये अंकित थी।

सूत्रों के अनुसार कंपनी ने बेंगलुरु में आईफोन एसई का निर्माण अप्रैल में ही शुरू कर दिया था। इसकी एसेंबलिंग एप्पल के ताईवानी मैन्यूफैक्चरिंग पार्टनर विस्ट्रॉन कॉरपोरेशन द्वारा की जा रही है।

महंगा होगा रेलवे का जनरल टिकट, 2 फीसदी सेफ्टी सेस बढ़ाने का प्लान

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नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ट्रेन टिकटों पर 2 फीसदी सेफ्टी सेस बढ़ाने का प्लान कर रही है।  अनारक्षित यानि जनरल टिकट पर सफर करने वालों पर इस इजाफे का बोझ पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 94 फीसदी लोग इन जनरल टिकटों पर सफर करते हैं।

कुछ दिन पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी यात्रियों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि हमे सेफ्टी फंड्स बढ़ाने की जरूरत है, इसके लिए हर दांव-पेच अपनाए जा रहे हैं। बता दें कि एसी 1 और 2 की टिकटों में पिछले पांच सालों से लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं अब सेफ्टी सेस के नाम पर जनरल टिकट धारकों पर भी मार पड़ने वाली है।

बताया जा रहा है कि, रेलवे में सेफ्टी के लिए करीब 20000 करोड़ का स्पेशल सेफ्टी फंड खर्च किया जाता है। रेलवे अब तक 15000 करोड़ का फंड रिसिव कर चुका है, 10000 करोड़ केंद्र से और 5000 करोड़ वित्त मंत्रालय से ले चुका है। जबकि बचा हुआ 5000 करोड़ वो अपने राष्ट्रीय रेल सरंक्षक कोष से इक्कट्ठा करने पर सोच रही है

महंगी बाइक, नौकाओं, निजी जेट पर 31 प्रतिशत की दर से लगेगा जीएसटी

श्रीनगर। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत 350 सीसी इंजिन क्षमता से अधिक की मोटरसाइकिलों, निजी जेट विमानों और महंगी आलीशान नौकाओं की खरीदारी पर 31 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। पान-मसाला गुटखा पर जीएसटी की शीर्ष दर के ऊपर 204 प्रतिशत उपकर लगेगा। जीएसटी व्यवस्था 1 जुलाई से लागू होगी।

जीएसटी परिषद की यहां जारी दो दिवसीय बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक सभी कारों, बसों, ट्रकों और मोपेड व मोटरसाइकिलों के साथ-साथ व्यक्तिगत इस्तेमाल के विमान, लक्जरी नौकायानों पर सबसे ऊंची दर 28 प्रतिशत पर जीएसटी लगाया जाएगा। इसके अलावा सभी तरह की कारों, एसयूवी और 350 सीसी इंजिन वाली मोटरसाइकिलों पर अतिरिक्त उपकर भी लगाया जाएगा।

निजी विमानों, लक्जरी नौकायानों और 350 सीसी से अधिक इंजिन क्षमता वाली मोटर साइकिलों पर 28 प्रतिशत के ऊपर तीन प्रतिशत उपकर भी लगाया जाएगा। इस प्रकार इन पर कुल 31 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। इसी प्रकार चार मीटर से कम लंबी और 1200 सीसी के पेट्रोल इंजन वाली कारों पर 28 प्रतिशत के ऊपर एक प्रतिशत उपकर लगेगा।

डीजल कारों पर जीएसटी की शीर्ष दर के ऊपर उपकर

1500 सीसी से कम क्षमता वाली छोटी डीजल कारों पर जीएसटी की शीर्ष दर के ऊपर तीन प्रतिशत उपकर लगेगा। इसी प्रकार मध्यम आकार की कारों, एसयूवी और लक्जरी कारों पर 28 प्रतिशत की जीएसटी दर के ऊपर 15 प्रतिशत की दर से उपकर लगेगा। बसों और ऐसे वैन जिनमें 10 से ज्यादा लोग बैठक सकते हैं उन पर भी इसी दर से उपकर लागू होगा। 1500 सीसी इंजन क्षमता से अधिक की हाइब्रिड कारों पर भी शीर्ष जीएसटी दर के ऊपर 15 प्रतिशत की दर से उपकर लगाया जाएगा।

एरेटिड पेयों पर 12 प्रतिशत उपकर

एरेटिड पेयों और नींबू पानी पर शीर्ष दर के ऊपर 12 प्रतिशत उपकर लगाया जाएगा। पान-मसाला, गुटखे पर जीएसटी की शीर्ष दर के ऊपर 204 प्रतिशत की दर से उपकर लगेगा। केंद्र और राज्यों के बीच अहितकर और लक्जरी सामानों पर 28 प्रतिशत की शीर्ष दर के ऊपर उपकर लगाने पर सहमति बनी है।

तंबाकू उत्पादों पर उपकर

तंबाकू उत्पादों पर 71 से 204 प्रतिशत की दर से उपकर लगाया जाएगा। इसके अलावा खुशबूदार जर्दा और फिल्टर खैनी पर 160 प्रतिशत की दर से उपकर लगेगा। फिल्टर और बिना फिल्टर वाली सिगरेट जिसकी लंबाई 65 मिलीमीटर से अधिक नहीं होगी पर पांच प्रतिशत उपकर लगेगा। इसके ऊपर प्रति 1,000 सिगरेट पर 1,591 रुपये भी लिए जाएंगे।

बिना फिल्टर वाली 65 मिलीमीटर से अधिक लेकिन 70 मिलीमीटर से कम लंबी सिगरेट पर शीर्ष दर के ऊपर पांच प्रतिशत जमा 2,876 रुपये का उपकर लगाया जाएगा। इसी प्रकार फिल्टर सिगरेट पर पांच प्रतिशत जमा 2,126 रुपये प्रति एक हजार सिगरेट की दर से उपकर लगेगा। सिगार पर जीएसटी की शीर्ष दर के ऊपर 21 प्रतिशत या प्रति 1,000 सिगार 4,170 रुपये जो भी अधिक होगा की दर से उपकर लगेगा।

ब्रांडेड गुटखे पर 72 प्रतिशत उपकर

ब्रांडेड गुटखे पर 72 प्रतिशत उपकर होगा। पाइप और सिगरेट में भरे जाने वाले तंबाकू मिश्रण पर 290 प्रतिशत की दर से उपकर लगाया जाएगा। इसके अलावा कोयला, लिग्नाइट और पीट उत्पादन पर प्रति टन 400 रुपये का स्वच्छ ऊर्जा उपकर लगाया जाएगा।

30 जून से ही आधार अनिवार्य, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया है कि 30 जून से आधार को अनिवार्य कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि अलग-अलग समाज कल्याण योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने संबंधी 30 जून की समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ के सामने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वेलफेयर स्कीम के लिए आधार को अनिवार्य बनाने का मकसद यही है कि इसका लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंचे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं, जैसा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी योजनाओं के मामले में पाया गया है।

उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न अधिसूचनाओं को चुनौती देने और अंतरिम राहत का अनुरोध किए जाने पर भी आपत्ति की और कहा कि इस मामले को 5 सदस्यीय संविधान पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। रोहतगी ने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह की अंतरिम राहत के लिए याचिकाएं दायर की गईं थीं और वे मामले सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित हैं। 

पीठ ने कहा कि अंतरिम राहत के लिए दायर सभी याचिकाओं पर वह एक साथ सुनवाई करेगी ताकि दोहराव से बचा जा सके। कोर्ट ने इसके साथ ही इस मामले को 27 जून के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट जब इस सवाल पर विचार कर रही थी कि क्या इन मामलों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

तभी एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि इसमें शीघ्र सुनवाइ की आवश्यकता है। यदि इस पर 30 जून से पहले सुनवाई नहीं होती है तो फिर केंद्र को इसकी समय सीमा आगे बढ़ानी चाहिए। इस पर रोहतगी ने कहा कि इसका कोई सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट ने अंतरिम राहत का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को 27 जून को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। 

जीएसटी के तहत दूरसंचार सेवाएं होंगी महंगी

नयी दिल्ली। दूरसंचार सेवाएं माल एवं सेवा कर (जीएसटी)  के अंतर्गत महंगी होंगी। सरकार ने इसे 18 प्रतिशत कर के दायरे में रखा है।वित्त मंत्री अरूण जेटली ने श्रीनगर में जीएसटी परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं पर मानक 18 प्रतिशत की दर से कर लगेगा।

कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनियांे ने जीएसटी दर को लेकर अप्रसन्नता जतायी और कहा कि दूरसंचार सेवा ग्राहकों के लिये महंगी होंगी और डिजिटल इंडिया तथा डिजिटल भुगतान जैसी सरकार की परियोजनाएं प्रभावित होंगी। फिलहाल दूरसंचार उपभोक्ताओं से उनके फोन बिल 15 प्रतिशत कर और उपकर लगता है।

मोबाइल उद्योग संगठन सीओएआई के महानिदेशक राजन एस मैथ्यूज ने एक बयान में कहा, दूरसंचार उद्योग ने एक महत्वूपर्ण सुधार के रूप में जीएसटी की सराहना की लेकिन हम 18 प्रतिशत की दर से कर लगाये जाने की घोषणा से नाखुश हैंं। उन्होंने कहा, हमने सरकार से क्षेत्र की मौजूदा वित्तीय स्थिति पर गौर करने को कहा था  अधिक दर से दूरसंचार सेवाएं अधिक महंगी होंगी। 

 

सरकार के आर्थिक सुधारों से एफडीआई 9 % बढ़ा

नई दिल्ली। सरकार के आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाए जाने से देश में फ़ॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) वर्ष  2016-17 में 9 प्रतिशत बढ़कर 43.48 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2015-16 में देश में 40 अरब डॉलर विदेशी निवेश आकर्षित किया गया था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि, ‘देश में एफडीआई निवेश के बढ़ने का कारण सरकार के एफडीआई व्यवस्था को व्यवहारिक बनाने के लिये साहसिक नीतिगत सुधार हैं। भारत अब विदेशी निवेश के लिये सबसे ज्यादा आकर्षक स्थान बन गया है। इसमें कहा गया है, ”एफडीआई इक्विटी फ्लो 2016-17 में 43.48 अरब डॉलर रहा।

किसी एक वित्त वर्ष में यह सबसे ज्यादा है।’ प्राप्त आय के फिर से निवेश को भी लिया जाए तो कुल एफडीआई पिछले वित्त वर्ष में अब तक के सर्वाधिक 60.08 अरब डॉलर पर पहुंच गया जो 2015-16 में 55.6 अरब डॉलर था। पिछले तीन साल के दौरान सरकार ने 87 क्षेत्रों से जुड़े कुल 21 क्षेत्रों में विदेशी निवेश नियमों को आसान बनाया।

निर्माण, प्रसारण, खुदरा कारोबार, हवाई परिवहन, बीमा और पेंशन जैसे क्षेत्रों में प्रावधानों को आसान बनाया गया। मंत्रालय ने  कहा कि एफडीआई नीति आसान बनाने तथा कारोबार सुगमता बढ़ने से घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने, आयात सीमित होने, रोजगार सृजन और मंहगे फ़ॉरन एक्सचेंज के संरक्षण में मदद मिली। पिछले तीन वित्त वर्ष में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 40 प्रतिशत बढ़कर 114.41 अरब डॉलर रहा ।

शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं GST के दायरे से बाहर, सोने पर टैक्स की दर का फैसला होना बाकी

जीएसटी काउंसिल ने शुक्रवार को 4 टैक्स दरों पर अपनी सहमति दी 

नई दिल्ली। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) काउंसिल ने शुक्रवार को 4 टैक्स दरों पर अपनी सहमति जता दी है । हेल्थकेयर और एजुकेशन को सर्विस सूची से बाहर रखा गया है और बहुत सारी सेवाओ को पहले की ही तरह छूट मिलती रहेगी। हालांकि गोल्ड पर किस दर से टैक्स लगेगा इसपर अभी फैसला किया जाना बाकी है। इन 4 टैक्स दरों को 5, 12, 18 और 28 फीसद रखा गया है।

 अगली बैठक 3 जून को होगी

5000 रुपए प्रति रात से ऊपर के किराए वाले होटल्स पर 28 फीसद की दर से जीएसटी लागू होगा। केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने बताया कि लग्जरी आइट्म्स पर 28 फीसद की दर से टैक्स लगेगा। काउंसिल की अगली बैठक 3 जून को होगी।

महत्वपूर्ण सेवाओं पर ऐसे होंगे टैक्स दर

  •  छोटे रेस्टोरेंट्स पर 5 प्रतिशत टैक्स
  • ट्रांसपोर्ट सेवाएं 5 प्रतिशत के दायरे में
  • 1 हजार से 2500 तक के होटल 12 प्रतिशत के दायरे में
  •  शराब परोसने वाले रेस्टोरेंट्स पर 18 प्रतिशत टैक्स
  • ब्रांडेड गारमेंटस 18 प्रतिशत टैक्स के दायरे में
  • एंटरटेनमेंट टैक्स सर्विस टैक्स में शामिल
  •  लग्जरी होटल पर 28 प्रतिशत टैक्स
  • 5 हजार से ज्यादा किराए वाले होटल पर भी 28 प्रतिशत टैक्स
  •  लग्जरी प्रोडक्ट्स 28 प्रतिशत के दायरे में
  •  सट्टेबाजी, रेसिंग पर बैटिंग पर 28 प्रतिशत टैक्स

यह बोले वित्त मंत्री

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी कंज्यूमर फ्रेंडली होगा। उन्होंने कहा कि एजुकेशन और हेल्थकेयर जीएसटी के दायर से बाहर रहेंगे। रेल, रोड और एयर ट्रांसपोर्ट पर 5 फीसद की दर से टैक्स लगेगा। वहीं नॉन एसी रेस्टोरेंट पर 12 फीसद की दर से सर्विस टैक्स लगाया जाएगा। साथ ही लिकर लाइसेंस के साथ एसी रेस्टोरेंट में 18 फीसद की दर से सर्विस टैक्स लगाया जाएगा।

43 फीसद वस्तुओं पर लगेगा 18% टैक्स

काउंसिल की ओर से लिए गए निर्णय के मुताबिक जीएसटी के लागू होने के बाद कुल 81 फीसद चीजें 18 फीसद तक के दायरे में आएंगी। वहीं, सात फीसद वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इनको जीरो फीसद की स्लैब में रखा गया है। 14 फीसद वस्तुएं 5 फीसद के स्लैब में, 17 फीसद वस्तुएं 12 फीसद की स्लैब में और 43 फीसद वस्तुएं 18 फीसद की स्लैब में आएंगी। वहीं, सात फीसद वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

अनाज और दूध पर नहीं लगेगा कोई टैक्स

जीएसटी लागू हो जाने के बाद दूध और अनाज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, वहीं चीनी, चाय और खाद्य तेल 5 फीसद टैक्स स्लैब के दायरे में आएंगे। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जीएसटी के लागू होने के बाद कंज्यूमर के लिए खाद्य अनाज सस्ते हो जाएंगे।

GST काउंसिल ने सभी 9 नियमों को दी मंजूरी

श्रीनगर में प्रस्तावित जीएसटी काउंसिल की 14वीं बैठक में जीएसटी से जुड़े 9 अहम नियमों को मंजूरी दे दी गई है। इन नए नियमों में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, कंपोजीशन, ट्रांजिशन, इनवॉइस, पेमेंट, वैल्युएशन और इनपुट टैक्स क्रेडिट शामिल है।