Monday, June 22, 2026
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वाटर कूलर के उद्घाटन में छलका उद्यमियों का दर्द

कोटा।  हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोशियसन की पहल पर शनिवार को इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र  रोड नंबर सात पर देवेंद्र स्टोन एंड मार्बल की ओर से वाटर कूलर लगाया गया।  जिसका शुभारम्भ विधायक प्रहलाद गुंजल ने किया। यह इस औद्योगिक क्षेत्र का 12वां वाटर कूलर है। इस मौके पर विधायक गुंजल ने कहा कि शहर के औद्योगिक विकास के लिए जल्दी ही ओपन हाउस बुलाया जायेगा।

कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने स्टोन उद्यमियों की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में कोटा का औद्योगिक माहौल पूरी तरह ठहर गया है। नए उद्योग तो आना दूर, पुराने भी बंद  होते जा रहे हैं। कोटा स्टोन की वर्तमानं में 500 में से मात्र 50 यूनिट ही चल रही हैं। सरकारी स्तर पर इसे बचाने के पिछले तीन साल में कोई प्रयास नहीं किये ।

दी एसएस आई एसोसिएशन के संस्थापक अध्य्क्ष गोविंदराम मित्तल ने औद्योगिक क्षेत्र में पानी की समस्या उठाई। अध्यक्ष छुट्टन लाल शर्मा ने कहा कि एसोसिएशन के प्रयास से जल्दी ही सघन पौधा रोपण अभियान चलाया जायेगा। देवेंद्र स्टोन के संचालक देवेंद्र जैन ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि इस वाटर कूलर से गर्मीं में लोगों को शीतल जल पीने को मिलेगा।

कार्यक्रम का संचालन जम्बू कुमार जैन ने किया। इस अवसर पर एसोसिएशन के संरक्षक विकास जोशी ने भी सम्बोधित किया। समारोह में प्रमुख रूप से देवेंद्र स्टोन परिवार से पूरणमल हरसोरा, बाबूलाल हरसोरा भी मौजूद थे।  इनके अलावा कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष अचल पोद्दार, जिला  अध्यक्ष विपिन सूद, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र जैन, निर्यातक बीएल गुप्ता समेत कई उद्यमी मौजूद थे। 

कोचिंग के दम पर जेईई मेन्स एग्जाम क्वालिफाई करने में राजस्थान तीसरे नंबर पर

कोटा। मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए होने वाली पढ़ाई का हब बन चुके कोटा के दम पर राजस्थान आगे बढ़ रहा है। जेईई मेन्स एग्जाम क्वालिफाई करने वाले छात्रों में राजस्थान देश का तीसरे प्रदेश बनकर उभरा है। इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े केन्द्र माने जाने वाले दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व तमिलनाडु को राजस्थान ने पीछे छोड़ दिया है।

सीबीएसई ने 27 अप्रेल को आयोजित जेईई मेन परीक्षा में सफल हुए छात्रों के राज्यवार आंकड़े जारी किए हैं। जिनके मुताबिक जेईई मेन्स में सफलता का परचम लहराने वालों में उत्तरप्रदेश के विद्यार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा है। यूपी के 26,002 विद्यार्थी इस बार जेईई मेन्स क्वालिफाई करने में सफल रहे।

 दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र (22,897 विद्यार्थी) और तीसरे स्थान पर राजस्थान (20, 438 सफल विद्यार्थी) रहा। हालांकि इस सफलता में लड़के-लड़कियों का अनुपात बेहद खराब रहा। सीबीएसई की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान के 17,688 लड़के और 2750 लड़कियों ने जेईई मेन्स क्वालिफाई किया है।

हर पांचवा विद्यार्थी कोटा कोचिंग से

जेईई मेन्स में कोटा कोचिंग का जलवा साफ झलक रहा है। सीबीएसई की ओर से सफल घोषित किए गए 2.20 लाख विद्यार्थियों में से 39 हजार से ज्यादा छात्र कोटा कोचिंग्स के छात्र हैं। यानि हर पांचवा विद्यार्थी कोटा कोचिंग से जुड़ा है।

 

निर्यातकों को कर दावे का रिफंड 7 दिन में मिलेगा

नयी दिल्ली । वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज निर्यातकों को आश्वासन दिया कि उन्हें नयी वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत सात दिनों के अंदर कर दावे का रिफंड मिलेगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत टैक्स रिफंड के मुद्दे पर गौर कर रही है। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू होने की संभावना है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, रिफंड पर हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि :जीएसटी व्यवस्था के तहत निर्यातकों द्वारा अग्रिम भुगतान राशि का 90 फीसदी हिस्सा छह से 10 दिन मंे रिफंड कर दिया जाएगा, उसके बाद निर्यातकों को विलंब करने पर सरकार द्वारा करीब छह फीसदी की दर से ब्याज दिया जाएगा।

निर्मला सीतारमण ने अपने मंत्रालय के तीन साल की पहलों और उपलब्धियों का जिक्र करते हुए यह बात कही। हालांकि, उन्होंने यह कहा कि उनके मंत्रालय ने जीएसटी परिषद से करों के भुगतान के मुद्दे पर छोटे और मझौले निर्यातकों के लिए वैकल्पिक प्रणाली तैयार करने पर विचार करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा, परिषद से हमारा अनुरोध एसएमई के लिए है। हम उन्हें पहले भुगतान करने और बाद में रिफंड पाने के लिए कहने के बजाय उन्हें विकल्प देने पर विचार कर सकते हें। हमें परिषद से अभी जवाब नहीं मिला है। निर्यातक इस दलील के साथ जीएसटी व्यवस्था के तहत कर भुगतान से प्रारंभिक छूट की मांग कर रहे हैं कि रिफंड में महीनों देरी हो जाती है।

कपड़े पर जीएसटी 3 जून तक टला, परिषद में नहीं बनी सहमति

नई दिल्ली । कपड़ा क्षेत्र को लेकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद में सहमति नहीं बन सकी, जिससे दरों की घोषणा को 3 जून के लिए टाल दिया गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले को टालने की वजह पूरी कपड़ा मूल्य शृंखला में जटिलताएं और पूरी शृंखला में कपड़े पर कर की दरें पहले के स्तर पर बनी रहने की उद्योग की उम्मीदें हैं।

कपड़ा उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि कपड़ा मूल्य शृंखला के अलग-अलग खंडों में अलग-अलग दरें हैं। कुछ पर कर लगता है और कुछ पर नहीं, जिससे कर चोरी हो रही है और असंगठित क्षेत्र फल-फूल रहा है। इसके अलावा देश में सूती कपड़े का ज्यादा उत्पादन होता है, जबकि वैश्विक स्तर पर मानव निर्मित कपड़े का दबदबा है। 
 
इस समय कपड़ा क्षेत्र में करों में अंतर इतना है कि जहां देश के ज्यादातर राज्यों में कपड़ों पर उत्पाद शुल्क या बिक्री कर नहीं है, लेकिन ब्रांडेड परिधानों पर उत्पाद शुल्क और बिक्री कर दोनों लगते हैं। वहीं कपड़ों के स्तर पर सूती जैसे प्राकृतिक कपड़े पर देश में कोई कर नहीं है, लेकिन मानव-निर्मित कपड़े पर 10 फीसदी उत्पाद शुल्क लगता है।

ज्यादातर राज्य चाहते हैं कि सूती धागे पर शून्य शुल्क जारी रहे, लेकिन इस बात के आसार जताए जा रहे हैं कि मानव-निर्मित कपड़े पर 5 फीसदी कर बना रह सकता है। हालांकि असली विवाद इनपुट क्रेडिट को लेकर है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के पूर्व चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि अगर ब्रांडेड परिधानों पर 18 फीसदी कर लगेगा तो किस तरह का इनपुट क्रेडिट दिया जाएगा।’

यह मामला इसलिए महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि क्योंकि कपड़ा उद्योग का ज्यादातर हिस्सा असंगठित है और यह इनुपट टैक्स क्रेडिट के प्रवाह में अवरोध पैदा कर रहा है। इसकी वजह यह है कि अगर पंजीकृत करदाता असंगठित स्रोतों से इनपुट्स खरीदते हैं तो उन्हें क्रेडिट नहीं मिलता है। कपड़ा उद्योग की एक अन्य चिंता अनुपालना का मसला है।

अगर कर की दर ऊंची रखी गई तो अनुपालना के हालात और खराब होंगे। परिधान क्षेत्र के मुताबिक ‘ब्रांडेड परिधान’ की परिभाषा भी विवादास्पद मसला है। असंगठित क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियां निजी लेबल लगातार ब्रांडेड परिधानों के रूप में अपना माल बेचती हैं। यह देखना होगा कि पूरे उद्योग में बेहतर अनुपालना के लिए इसे जीएसटी के तहत किस तरह परिभाषित किया जाता है। 

बैंक में ट्रांजेक्शन करना जुलाई से महंगा , हर 100 रुपये पर लगेगा 3 रुपये टैक्स

जीएसटी कानून का बैंक ग्राहकों पर पड़ेगा असर, बैंकिंग सेवाएं महंगी होंगी

कोटा । पहली जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी कानून से बैंक में जाकर के ट्रांजेक्शन करना काफी महंगा हो जाएगा। सरकार ने बैंक में होने वाले प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर सर्विस टैक्स को 15 फीसदी से बढ़ाकर के 18 फीसदी कर दिया है। यह टैक्स सभी तरह की बैंकों में हर तरह के खाते पर लागू होगा। 

फ्री ट्रांजेक्शन के बाद देना होगा टैक्स 

ज्यादातर बैंकों में अब फ्री ट्रांजेक्शन करने की सीमा तय कर दी गई है। प्राइवेट बैंकों जैसे कि आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और एक्सिस बैंक ने वैसे ही बैंक में होने वाले फ्री ट्रांजेक्शन को सीमित कर दिया था।

अब भारत के सबसे बड़े बैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी 1 जून से बैंकिंग ट्रांजेक्शन को सीमित कर दिया है। एसबीआई के ग्राहक बैंक और एटीएम मिलाकर के चार ट्रांजेक्शन हर महीने कर सकते हैं। एसबीआई के बाद बाकी सरकारी बैंक भी ग्राहकों के लिए ट्रांजेक्शन सीमित कर सकते हैं। 

100 रुपये के ट्रांजेक्शन पर देना होगा 3 रुपये अतिरिक्त टैक्स

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट के मुताबिक 1 जुलाई से फ्री टांजेक्शन के बाद होने वाले प्रत्येक ट्रांजेक्शन करने के लिए हर 100 रुपये पर 3 रुपये अतिरिक्त टैक्स देना होगा।

इसके साथ ही इन्श्योरेंस पॉलिसी खरीदना या फिर उनको रिन्यु कराना भी काफी महंगा हो जाएगा।अगर कोई भी व्यक्ति लाइफ, हेल्थ या फिर जनरल इन्श्योरेंस पॉलिसी  खरीदता है, तो उसकी जेब पर ज्यादा बोझ पड़ेगा। 

अब एक साल में दो बार ही होगा नेट और सीटेट

नई दिल्ली। यूजीसी-नैशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) और सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटेट) फिलहाल साल में दो बार ही होंगे। हालांकि, सीबीएसई चाहती है कि ये दोनों टेस्ट साल में एक बार ही आयोजित किए जाएं, जिससे उस पर कई टेस्ट कराने का बोझ कुछ कम हो।

एचआरडी मिनिस्ट्री सीबीएसई की इस मांग को मानने के मूड में नहीं है और मिनिस्ट्री इसपर कोई विचार भी नहीं कर रही है। नेट और सीटेट साल में एक बार कराने या अभी की तरह दो बार कराने का फैसला नैशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी। अभी यह एजेंसी बनने की प्रक्रिया चल रही है।

 CBSE ही कराएगी टेस्ट

एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर से इस मामले में पूछे जाने पर कि सीबीएसई पर टेस्ट कराने का एक्स्ट्रा बोझ है, उन्होंने कहा कि जब तक नैशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं बन जाती, तब तक सीबीएसई ही टेस्ट कराएगी।

यह पूछने पर कि यह साल में क्या अब एक बार ही होगा, जावड़ेकर ने जवाब दिया कि अभी जैसा चल रहा है, वैसा ही चलेगा। हम इस मसले पर अभी कुछ नहीं कर रहे हैं। यह काम बाद में नैशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई के अगले साल तक नैशनल टेस्टिंग एजेंसी बन जाएगी।

प्रतियोगी परीक्षाएं साल में एक बार, ये दो बार क्यों’

नैशनल लेवल पर होने वाले ये दोनों टेस्ट अभी साल में दो बार होते हैं और इन्हें सीबीएसई करवाती है। जहां नेट  यूनिवर्सिटी और कॉलेज में फैकल्टी बनने के लिए जरूरी है, वहीं इसके आधार पर ही जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) दी जाती है। सीटेट स्कूल टीचर्स बनने के लिए होता है।

पहली क्लास से 8वीं क्लास तक के टीचर बनने के लिए यह टेस्ट होता है। सीबीएसई का इन टेस्ट को साल में दो बार की बजाय एक बार कराने के पीछे यह तर्क है कि जब सभी अहम प्रतियोगी परीक्षाएं साल में एक बार ही होती हैं तो नेट  और सीटेट को साल में दो बार क्यों कराया जाए। इसके लिए बहुत तैयारी करनी होती है और एक तरीके से कैंडिडेट भी इसे सीरियसली नहीं लेते।

रोमी ड्यूमॉन्ट से समर कैंप में बच्चों ने सीखा फ्रैंच भाषा का सही उच्चारण

कोटा। एसआर पब्लिक सी. सै. स्कूल में “लक्ष्य” समर कैम्प 2017 समापन समारोह 21 मई को होगा । जिसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है । शनिवार को कैम्प में किमबर्ली हेरर ने स्काईप के माध्यम से बेल्जियम की रोमी ड्यूमॉन्ट द्वारा बच्चों को फ्रैंच भाषा के सही उच्चारण का अभ्यास करवाया जिससे बच्चे विशेष रूप से लाभांवित हुए।

कैम्प में भाग लेने वाले बच्चों व अभिभावकों ने बताया कि हमने बहुत-से समर कैम्पों में भाग लिया मगर एसआर पब्लिक सी. सै. स्कूल, कोटा में आयोजित लक्ष्य समर कैम्प में जितना कुछ सीखने को मिला उतना शायद कहीं अन्य कैम्प में मिला हो । यह कैम्प हमें हमेशा जीवन-भर याद रहेगा ।

हमने इस कैम्प में अनेक गतिविधियों के साथ-साथ सुसंस्कार व अच्छे गुणों को अपने जीवन में उतारने के तौर-तरीकों को भी जाना और समझा। जिस चीज की कल्पना हमने नहीं की थी उससे भी बढ़कर हमें इस कैम्प में मिला । यहाँ के सम्पूर्ण स्टाफ के मार्गदर्शन में हमें बहुत कुछ सीखने को मिला ।

इस विद्यालय की प्रधानाचार्या का भी सहयोग हमें पूरा-पूरा मिला और मेम बीच-बीच में हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी ।विद्यालय की प्रधानाचार्या सीमा शर्मा ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों सें बच्चों में नये संस्कार प्रस्फुटित कर उनका मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं ।

GST: कपड़ों की धुलाई भी एक जुलाई से महंगी

नई दिल्ली। जीएसटी के बाद धुलाई महंगी हो जाएगी। डिटर्जेंट, वॉशिंग मशीन और साबुन पर 28 पर्सेंट जीएसटी लागू होने के चलते कपड़ों की धुलाई अब महंगी हो जाएगी। वहीं, टूथपेस्ट, सोप बार और हेयर ऑइल पर 18 पर्सेंट का टैक्स लगेगा। इन आइटम्स पर अब तक 28 फीसदी की दर से टैक्स चार्ज होता था। इसके अलावा प्रॉसेस्ड फूड, घी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, वाइट गुड्स और मोबाइल फोन भी महंगे हो सकते हैं।

28 फीसदी की दर से जीएसटी

20,000 करोड़ रुपये के डिटर्जेंट बिजनस पर 28 फीसदी की दर से जीएसटी लागू होगा, जबकि अब तक इस पर 22 पर्सेंट टैक्स ही लगता रहा है। मदर डेयरी (फ्रूट ऐंड वेजिटेबल्स) के सीएफओ मेघनाद मित्रा ने कहा, ‘घी पर टैक्स 5 पर्सेंट से बढ़कर 12 फीसदी तक पहुंच जाएगा।’ इसी तरह प्रॉसेस्ड फूड पर टैक्स की दर 12 पर्सेंट से बढ़कर 18 पर्सेंट हो जाएगी। कोला मेकर्स भी टैक्स की बढ़ी दरों को लेकर परेशान हैं।

सॉफ्ट ड्रिंक्स पर 40 फीसदी तक टैक्स

सॉफ्ट ड्रिंक्स पर सेस समेत कुल 40 फीसदी तक टैक्स लगाने की तैयारी है। यही नहीं स्नैक्स जैसे रेडी-टु-ईट स्नैक्स भी 12 की बजाय 18 पर्सेंट टैक्स लगाए जाने से महंगे हो जाएंगे। रसना के सीएमडी पिरुज खामबट्टा ने कहा, ‘1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के साथ ही प्रॉसेस्ड फूड्स की कीमतें 5 से 6 पर्सेंट तक महंगी हो जाएंगी।’

प. म. रेलवे के डाटा सिस्टम पर रेनसमवेयर का अटैक, बोर्ड ने किया अलर्ट जारी

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कोटा / जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के डाटा सिस्टम पर रेनसमवेयर वायरस ने अटैक किया है। फाइनेंस, इंजीनियरिंग, स्टोर विभाग के कुछ सिस्टमों में वायरस के बाद इन्हें नेटवर्क से अलग कर बंद कर दिया गया है। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने भी अलर्ट जारी कर डाटा सिस्टम यूज करने वाले जोन और विभागों को सावधानी बरतने को कहा है।

 इसका असर टिकट सिस्टम, रिजर्वेशन, कलेक्शन या ऑपरेशन से जुड़े डाटा बेस पर नहीं पड़ा है। दूसरी तरफ, कोटा मंडल में नेटवर्किंग टीम वायरस क्लीन करने में लग गई है। एंटी वायरस इंस्टॉल होने के बाद ही इन सिस्टमों को दोबारा शुरू किया जाएगा। कोटा मंडल के फाइनेंस विभाग के सिस्टम गुरुवार शाम को ही फेल होने लगे थे ।  

लेकिन वायरस की पुष्टि कुछ  देर पहले  ही हो पाई।  इंजीनियरिंग, स्टोर, पर्सनल विभाग के सिस्टम में भी वायरस का अटैक हुआ। इसके बाद इन सिस्टम को इंटरनेट से अलग कर बंद कर दिया गया। लगभग 20 से 25 सिस्टम प्रभावित हुए हैं। संभवत: सोमवार को ही ये सिस्टम दोबारा शुरू हो पाएंगे।

जबलपुर, भोपाल समेत सभी मंडल में अलर्ट

वायरस अटैक के बाद जबलपुर और भोपाल मंडल के सभी विभागों को रेलवे ने इंटरनेट का कम से कम उपयोग करने को कहा है। पश्चिम मध्य रेलवे जोन कार्यालय में भी नेटवर्किंग के उपयोग के दौरान सावधानी रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक नार्थ सेंट्रल रेलवे, सेंट्रल रेलवे आदि दूसरे रेल जोन के भी सिस्टम में वायरस अटैक की बात सामने आई है।

सावधानी रखने को कहा

अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। सभी जोन को सावधानी रखने को कहा है। हमारा पैसेंजर डाटा सिस्टम सुरक्षित है।

-वेदप्रकाश, पीआरओ, रेलवे बोर्ड, दिल्ली

सिस्टम में वायरस

कोटा मंडल के कुछ विभागों के सिस्टम में वायरस के बाद उन्हें बंद कर दिया गया है। सभी मंडलों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है। –

सुरेन्द्र यादव, सीपीआरओ, पमरे

सिस्टम नेटवर्क से अलग

इंजीनियरिंग, फाइनेंस, स्टोर समेत कुछ विभाग के सिस्टम में वायरस की बात सामने आई है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है। हमने सिस्टम को नेटवर्क से अलग कर दिया है। इंटरनेट सुविधा यूज नहीं हो रही है। सोमवार तक इनका वायरस क्लीन कर इन्हें अपडेट करेंगे।

आलोक अग्रवाल, एडीआरएम, कोटा मंडल

मोदी सरकार दाल मिलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने को तैयार

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नई दिल्ली। दालों के उत्पादन और अंतिम उपभोग के बीच के अंतर को कम करने के लिए केंद्र सरकार दालों का उत्पादन करने वाले राज्यों में मिलिंग क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि बाजार में बिना मिलिंग वाली दालों की बिक्री के बाद उनके अंतिम उपभोग तक पहुंचने में कम समय लगेगा।

भारत में करीब 10,000 दाल मिलें हैं जिनमें से प्रत्येक की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 10-20 टन है। दालों की अधिकतर मिलिंग में फलियों को दो भागों में विभाजित करना और बीज को निकालना शामिल रहता है। परंपरागत मिलों में कई बार इस प्रक्रिया के जरिये केवल 65-70 प्रतिशत का ही उत्पादन हो पाता है, जबकि आधुनिक मिलों में यह उत्पादन बढ़कर 90 प्रतिशत तक हो जाता है।

दूसरे शब्दों में अपर्याप्त आधुनिक मिलिंग सुविधा की वजह से कुल उत्पादन का तकरीबन 25-30 प्रतिशत हिस्सा बेकार हो जाता है। हाल में बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए एक साक्षात्कार में केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि इस साल अधिक उत्पादन के बावजूद कुछ खुदरा बाजारों में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ज्यादा हैं। अपर्याप्त मिलिंग क्षमता के कारण ऐसा हो सकता है। 

इसकी वजह से अंतिम उत्पाद के लक्ष्य तक पहुंचने में देरी होती है। उनका कहना है कि सरकार शीघ्र ही सभी भागीदारों के साथ विचार-विमर्श की पहल करेगी और दालों का उत्पादन करने वाले राज्यों में आधुनिक मिलिंग सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए विस्तृत नीति पर भी विचार किया जा सकता है। देश में 80 प्रतिशत से ज्यादा दाल राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से आती हैं।

पासवान ने कहा कि 2016-17 में भारत का कुल दलहन उत्पादन 2.24 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है जिसमें आयात का 50 लाख टन जोड़ दें तो कुल उपलब्धता 2.74 करोड़ टन हो जाती है, जबकि उपभोग करीब 2.46 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इसका अर्थ यह निकलता है कि तकरीबन 28 लाख टन का आधिक्य रहेगा। हालांकि इसके बावजूद कुछ खुदरा बाजारों में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा बनी हुई हैं।