Wednesday, June 24, 2026
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जल संकट से निपटने के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगेगा वाटर सेस

नई दिल्ली। देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही जल संकट की खबरों पर सरकार गंभीर हो गई है। इस गंभीर संकट से निपटने के लिए सरकार ने अब राष्ट्रव्यापी योजना बनाना शुरू कर दिया है। जल संकट से निपटने के लिए बनाई जा रही योजनाओं के लिए फंड का इंतजाम करने के उद्देश्य से सरकार पेट्रोल-डीजल पर वाटर सेस लगाने पर विचार कर रही है।

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसको लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य पक्षों में सैद्धांतिक तौर पर सहमति बन गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस वाटर सेस की घोषणा बजट भाषण या इसके बाद की जा सकती है।

30 से 50 पैसे प्रति लीटर हो सकता है सेस
रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर 30 से 50 पैसे का सेस लगाया जा सकता है। ऐसा करने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सेस पर असर नहीं पड़ेगा। आपको बता दें कि 2018 के बजट में सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 8 रुपए का रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगाया था। तब सरकार ने कहा था कि सेस के जरिए जुटाई जाने वाली रकम को सड़क और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण व रखरखाव पर खर्च किया जाएगा।

सीधे गोदाम से फसल बेच सकेंगे किसान, बिचौलियों की होगी छुट्टी

नई दिल्ली। किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) के विस्तार पर विचार कर रही है। इस विस्तार के बाद किसानों को सीधे गोदाम-वेयरहाउस से अपने उत्पादों को बेचने का विकल्प मिलेगा जिससे किसानों को उनकी फसलों की बेहतर कीमत मिल सकेगी।

कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के विस्तार के बाद किसान सीधे गोदाम से अपनी फसल बेच सकेंगे और बिचौलियों की छुट्टी हो जाएगी। साथ ही यह सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पाने में भी मदद करेगा। अधिकारी का कहना है कि हम जल्द ही किसानों के लिए राज्यों के अंदर और राज्यों के बाहर कृषि उत्पाद बेचने के लिए की सुविधा इस प्लेटफॉर्म पर लॉन्च करेंगे।

अधिकारी का कहना है कि प्लेटफॉर्म तैयार है बस लॉन्चिंग बाकी है। अधिकारी ने बताया कि इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वेयरहाउस डवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा संचालित राज्यों के स्वामित्व वाले वेयरहाउस के जरिए ट्रेडिंग की शुरुआत होगी। इससे वेयरहाउस कारोबार में भी बढ़ोतरी होगा। इस समय करीब 1000 सरकारी वेयरहाउस हैं।

गोदाम और वेयरहाउस बनेंगे बाजार
अधिकारी के अनुसार, एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एक्ट 2017 किसानों को उनकी फसल की असली कीमत दिलाने के लिए गोदाम और वेयरहाउस को बाजार के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत देता है। इससे बाजार किसानों के नजदीक आते हैं और उन्हें अपने उत्पादन पर क्रेडिट सुविधा भी मिलती है।

अभी आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और अरूणाचल प्रदेश जैसे राज्य इस एक्ट के तहत अपने गोदामों और वेयर हाउस को बाजार के रूप में इस्तेमाल कर किसानों को सीधे फसल की बिक्री की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि जल्द ही कई और राज्य इस प्रक्रिया को अपना सकते हैं।

2016 में लॉन्च हुआ था ई-नाम पोर्टल
किसानों के लिए 2016 में लॉन्च हुआ ऑनलाइन पोर्ट्ल ई-नाम इस समय 150 से ज्यादा कृषि उत्पादों की ट्रेडिंग की सुविधा दे रहा है। यह ट्रेडिंग ऑनलाइन बिडिंग के माध्यम से होती है। इस पोर्ट्ल के जरिए 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 585 से ज्यादा थोक बाजार में ट्रेडिंग की जा सकती है। इस यूनिफाइड ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर देशभर के 1.64 करोड़ से ज्यादा किसान 1 लाख 20 हजार से ज्यादा व्यापारी पंजीकृत हैं।

भूमाफियाओं के दबाव में सरकार ने जमीनों के दाम 40 % बढ़ा दिए

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कोटा। सरकार ने भूमाफियाओं के दबाव में जमीनों के दाम 40 % तक बढ़ा दिए। इससे अब आम आदमी को शहर और जिले में मकान और भूखंड खरीदना महंगा हो गया है। जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई डीएलसी दर निर्धारण समिति की बैठक में जिले में 25 से 40 प्रतिशत तक दरें बढ़ाई गई हैं। नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी होंगी। जिले में ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में कृषि, व्यावसायिक एवं आवासीय भूमि के पंजीयन दरों में वृद्धि की गई है।

शहर में लैंडमार्क सिटी, नए कोटा में कोचिंग क्षेत्र और बारां रोड की कुछ कॉलोनियों की डीएलसी दरें ज्यादा बढ़ी हैं। डीआईजी स्टांप नरेश मालव ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित गांव में कृषि भूमि की 0 से 100 मीटर तक भूमि के पंजीयन में 40 प्रतिशत वृद्धि की गई है। 101 मीटर से अधिक में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

उन्होंने बताया कि स्टेट हाइवे एवं मेगा हाइवे के किनारे बसे हुए गांव में 0 से 100 मीटर तक 30 प्रतिशत तथा 101 मीटर से आगे 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि जिले में अन्य सभी गांव में कृषि भूमि के पंजीयन की दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

डीआईजी स्टाम्प ने बताया कि नगरीय क्षेत्र की कृषि भूमि के पंजीयन में 30 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी प्रकार व्यवसायिक एवं आवासीय भूमि में नगर पालिका कैथून, सांगोद, रामगंजमंडी व इटावा में 25 प्रतिशत की वृद्धि तथा पैराफेरी व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

377 कॉलोनियों में 20 प्रतिशत बढ़ी
नगर निगम क्षेत्र में कोटा सब रजिस्ट्रार प्रथम के अधिकार क्षेत्र में 43 कॉलोनियों में 10 प्रतिशत, 66 कॉलोनियों में 15 प्रतिशत, 377 कॉलोनियों में 20 प्रतिशत, 25 कॉलोनियों में 25 प्रतिशत, 22 कॉलोनियों में 25 प्रतिशत, तथा 33 नवीन कॉलोनियों में पहली बार नवीन दरें तय की गई हैं।

निगम के गांवों में 15 प्रतिशत दर बढ़ी
उन्होंने बताया कि नगर निगम क्षेत्र के 41 गांवों में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है अन्य गांव में आवासीय भूमि में 150 प्रति फुट तथा व्यावसायिक में 300 फुट की वृद्धि की गई है। उप पंजीयक द्वितीय के अधिकार क्षेत्र में 30 कॉलोनियों में 25 प्रतिशत तथा 49 कॉलोनियों में 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी प्रकार जिले में सभी कुओं एवं ट्यूबवैलों के पंजीयन में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

किसानों को ज्यादा मुआवजा मिलेगाा
राष्ट्रीय राजमार्ग जहां से गुजरेगा, वहां डीएलसी की दरें बढऩे से अब किसानों को ज्यादा मुआवजा मिल सकेगा। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बड़ी संख्या में किसानों की जमीन आवाप्त की जा रही है।

राजस्थान पहुंचा मानसून, कोटा समेत सात जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

जयपुर। मानसून को लेकर अब प्रदेशवासियों का इंतेजार खत्म होने को है। क्योंकि मानसून ने राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर गया है। अब किसी भी समय मानसून प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार मानसून गुजरात में द्वारका, अहमदाबाद, जबलपुर होते हुए झालावाड़ के रास्ते प्रदेशमें पहुँच गया है ।

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पश्चिमी मानसून उत्तर अरब सागर, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहने की संभावना है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है। इसके गहरा होने पर कोटा, बूंदी में अच्छी बारिश होने का अनुमान है।

सात जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान कई स्थानों पर 30 से 40 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती है। शनिवार को सीकर, झुंझुनूं, अजमेर, अलवर, दौसा, कोटा, जयपुर, सिरोही, बांसवाड़ा, भरतपुर, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, चितौडगढ़़, झालावाड़, प्रतापगढ़, उदयपुर, राजसमंद, सवाई माधोपुर जिला प्रभावित होगा।

30 से दो जुलाई तक सीकर, झुंझुनूं, बूंदी, धौलपुर, करौली, टोंक, अलवर, अजमेर, अलवर, दौसा, कोटा, जयपुर, सिरोही, बांसवाड़ा, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, चितौडगढ़़, झालावाड़, प्रतापगढ़, उदयपुर, राजसमंद, सवाई माधोपुर जिले के एक दो स्थानों पर तेज हवाएं चलेगी। इस दौरान मेघगर्जना व आकाशीय बिजली भी गिर सकती है। 28 से दो जुलाई तक भीलवाड़ा, चितौडगढ़़, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, सिरोही व उदयपुर जिले में एक दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

ऐपल वॉच से खींच सकेंगे फोटो, बैंड में होगा कैमरा

नई दिल्ली।ऐपल अपने प्रॉडक्ट में हाई-एंड टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करने के लिए जानी-जाती है। अब ऐसा ही कुछ ऐपल वॉच के साथ होने जा रहा है। हाल ही में ऐपल द्वारा सबमिट किए गए एक पेटेंट से पता चला है कि कंपनी ऐसी घड़ी लाने की सोच रही है जिससे तस्वीरें भी ली जा सकेंगी।

वैसे तो ऐपल वॉच में कई सेंसर होते हैं लेकिन कैमरा एक भी नहीं। यही वजह है कि इस डिवाइस से शूट नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसा नहीं है कि कंपनी ने इस बारे में कभी सोचा नहीं। 9टु5मैक के मुताबिक, कंपनी ने एक पेटेंट कराया है, जिससे पता चलता है कि वॉच के बैंड पर कैमरा होगा। जी हां, यह कैमरा घड़ी के स्कॉयर डिस्प्ले पर नहीं, बल्कि बैंड पर लगा हो सकता है।

कैसे काम करेगा बैंड बेस्ड कैमरा
यह कैमरा घड़ी के बैंड के एक छोर पर फिट होगा, जिसके लिए ऐपल हिडन ऑप्टिकल केबल का इस्तेमाल करेगी। इसके जरिए फोटोग्राफ्ड डेटा को वापस वॉच में ट्रांसमिट किया जा सकेगा। बैंड में कैमरा होने की वजह से इसे यूजर्स ट्विस्ट करके आसानी से तस्वीरें ले सकेंगे।

फोटो लेने के लिए बैंड को खींच सकेंगे आप
ऐसा कहा जा रहा है कि इस सिस्टम में यूजर्स को एक ऑप्शन मिलेगा जिसमें वे घड़ी के स्ट्रैप्स को खींचकर तस्वीर ले सकेंगे। इतना ही नहीं, रिपोर्ट्स की मानें तो ऐपल अपनी वॉच में एक नहीं बल्कि दो कैमरे देने की सोच रही है।

ये कैमरे बैंड के ऑपोजिट ऑप्टिकल डायरेक्शन में होंगे जिससे 360 डिग्री विडियो और सेल्फी लेने में फ्लेक्सिबिलिटी रहेगी।अगर वाकई ऐपल ऐसा करता है, तो ऐपल वॉच को आईफोन का एक स्मॉल रिप्लेसमेंट भी कहा जा सकता है। इस डिवाइस में पहले से ही जीपीएस और सेल्युलर कनेक्टिविटी मौजूद है। हालांकि, अब तक यह सिर्फ एक पेटेंट है कंपनी इसे इसपर काम करेगी ही, ऐसा जरूरी नहीं है।

100 करोड़ से ज्यादा के फर्जी बिल पर 19 करोड़ की GST चोरी पकड़ी

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सिवनी । मध्यप्रदेश जीएसटी में ऑनलाइन फर्म का रजिस्ट्रेशन कराकर कर अपवंचन एवं धोखाधड़ी के मामले में एंटी इवेजन ब्यूरो व राज्य जीएसटी की टीम ने सिवनी से अमित अवधिया नाम के युवक को गिरफ्तार किया। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उसके नाम पर बनाई गई जाली कंपनी के साथ अन्य और चार फर्मों में 100 करोड़ से भी अधिक का ट्रांजेक्शन मिला है।

इसमें 18 से 19 करोड़ रु. की टैक्स चोरी की भी बात सामने आई है। राज्य कर विशेष आयुक्त मध्य प्रदेश अविनाश लवानिया का मानना है कि प्रदेश में जीएसटी में फर्जी बिलों के आधार पर ट्रांजेक्शन व कर अपवंचन का प्रदेश में यह पहला मामला है। इस पूरे मामले में जिस युवक ने इस फर्जीवाड़े का जिक्र करते हुए सच सामने लाने की कोशिश की उसे ही सजा मिल गई। जानकारी के अनुसार एंटी इवेजन ब्यूरो ने अमित नामक को इस बात का दोषी बताया है कि उसकी फर्म के नाम से लेनदेन हुआ है।

माल सप्लाई नहीं किया गया, लेकिन बिल बना दिए गए। करीब 18 से 19 करोड़ से अधिक का टैक्स एवीजन करना पाया। सीजेएम कोर्ट में पेश करने के बाद से 14 जुलाई तक ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेजा गया है। हालांकि इस मामले में अमित का कहना था कि वह तो नौकरी करता था, लेकिन किसी भी प्रकार की फर्म नहीं बनाई। जाली हस्ताक्षर करके पूरा खेल उसकी आड़ में खेला गया।

कागजों में बनी फर्म : प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि जिन फर्म के नाम से लेनदेन हुआ है, असल में उसमें गुड्स यानी माल की सप्लाई नहीं हुई। केवल नकद राशि का लेनदेन हुआ। बिल जनरेट कर दिए गए। वहीं चार फर्मों को एक ही परिसर का पता बताया गया। जबकि मौके पर ऐसी कोई फर्म का संचालन नहीं मिला। माना जा रहा है कि ऑनलाइन जीएसटी के लिए किए गए पंजीयन में कोई भी सर्वे नहीं होने से इसका फायदा कारोबारियों ने किया। संयुक्त आयुक्त सुनील मिश्रा का भी कहना है कि अपनी तरह का प्रदेश में यह पहला मामला है।

जितना रिचार्ज उतनी मिलेगी बिजली सप्लाई, बदलेगा आपका मीटर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार का देश भर में 30 करोड़ स्मार्टमीटर लगाने का प्लान है। दरअसल सरकार बिजली चोरी रोकने के उद्देश्य से तीन साल में देश के घर-घर में मीटर बदलने की योजना पर काम कर रही है। इस मीटर की खासियत यह होगी कि इन्हें पहले रिचार्ज कराना होगा। इससे जहां बिजली की चोरी की बंद हो जाएगी और ईमानदार लोगों को 24 घंटे बिजली की सप्लाई भी सुनिश्चित होगी।

कॉस्ट पर सब्सिडी दे सकती है सरकार
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए बिजली मंत्रालय ने स्मार्ट मीटर की सप्लाई के लिए मैन्युफैक्चरर्स के साथ चर्चा करनी शुरू कर दी है, जिससे निगरानी में सुधार होगा। इस योजना के मुताबिक सरकार मीटर की कॉस्ट पर सब्सिडी देने की योजना भी बना रही है।

2 हजार रु हो सकती है कीमत
शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, सरकार स्मार्टमीटर पर 2,000 रुपए (29 डॉलर) प्रति पीस कॉस्ट आएगी। इससे पहले 2017 में दिए गए 50 लाख मीटर के ऑर्डर पर प्रति पीस 2,503 रुपए कॉस्ट आई थी। हालांकि इस बार बड़ा ऑर्डर होने के कारण कॉस्ट कम आने की उम्मीद है। हालांकि बिजली मंत्रालय से इस पर कोई टिप्पणी नहीं मिल सकी है।

डिस्कॉम्स के बदलेंगे दिन
बिजली मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, सभी मीटर को प्री-पेड कर देने से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की लागत काफी कम हो जाएगी और डिस्कॉम आसानी से घाटे से उबर जाएंगी। अभी देश के कई राज्यों की डिस्कॉम भारी घाटे में चल रही है। इस कारण डिस्कॉम के पास बिजली खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं।

बिना लाइसेंस कर सकेंगे कारोबार, सरकार ने जारी किया ड्राफ्ट

नई दिल्ली। इजी ऑफ डूइंग बिजनेस को आसान बनाने के लिए सरकार जल्द किसी भी कारोबार को शुरू करने के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था को समाप्त कर सकती है। इसके लिए डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (जीपीआईआईटी) ने एक कैबिनेट नोट तैयार किया है। इस नोट को अंतर मंत्रालयी सुझाव के लिए भेजा गया है।

लाइसेंस व्यवस्था को खत्म करके सरकार भारत को विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रैंकिंग में विश्व में टॉप 50 में ले जाना चाहती है। कैबिनेट नोट के अनुसार, मंत्रालय और विभाग यह बताएंगे कि कहां पर लाइसेंसिंग व्यवस्था को खत्म किया जा सकता है और इसके एक आसान प्रक्रिया में बदला जा सकता है। नोट में सुझाव दिया गया है कि जहां पर लाइसेंसिंग व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जा सकता है वहां पर रिन्यूअल का प्रावधान किया जाए। साथ ही विभाग को नवीनीकरण की प्रक्रिया को सही कारणों के साथ आसान करने के लिए भी कहा जा सकता है।

समस्याओं के समाधान के लिए तय होगा समय
कैबिनेट नोट में कारोबारियों की समस्याओं के समाधान के लिए समय तय करने का सुझाव दिया गया है। नोट में कहा गया है कि स्टार्टअप के लिए महीने में एक बार आधा घंटे का समय समस्याओं के समाधान के लिए तय किया जा सकता है। इसी कारोबार के निरीक्षण की सीमा भी तय करने की बात कही गई है। साथ ही पहली बार कानून का उल्लंघन करने वालों को केवल सलाह जारी करने की सिफारिश की गई है।

इजी ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत 77वें स्थान पर
विश्व बैंक की ओर से हर साल वैश्विक स्तर पर इजी ऑफ डूइंग बिजनेस पर एक रैंकिंग जारी की जाती है। पिछले पांच सालों से 190 देशों की रैंकिंग जारी की जा रही है। 2018 में भारत इसमें 77वीं रैंकिंग पर था। इससे पहले 2017 में भारत 100वें स्थान पर था। विश्व बैंक यह रैंकिंग कारोबार शुरू करने, निर्माण परमिट, बिजली की सुविधा प्राप्त करना, कर्ज प्राप्त करना, करों का भुगतान, सीमापार व्यापार, अनुबंधों को लागू करना और दिवाला प्रक्रिया निपटान आदि के आधार पर करता है।

तत्काल रेल टिकट के धंधे में लगी 1.25 लाख फर्जी आईडी पकड़ी

नई दिल्ली। देश में फेस्टिवल, समर वेकेशन और हॉलीडे में रेल टिकट की डिमांड बढ़ जाती है। साथ ही इस दौरान टिकट रिजर्वेशन में धांधली भी बढ़ जाती है। ऐसे आईआरसीटीसी (IRCTC) ने इस फर्जीवाड़े को दूर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। रेलवे के मुताबिक 1 अप्रैल 2018 से 31 मई 2019 के दौरान करीब 1.26 लाख फर्जी यूजर आईडी को डिएक्टिवेट किया गया है।

तत्काल टिकट बुकिंग के लिए उठाए गए कदम
रेलवे ने एक यूजर केवल एक आईआरसीटीसी आईडी बनाने का नियम तय किया। इसके लिए उसे अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी देना होता है।

एक यूजर एक माह में 6 से ज्यादा रेलवे टिकट नहीं बुक कर सकता है। हालांकि इस लिमिट को बढ़ाकर एक माह में 12 किया जा सकता है। इसके लिए आईआरसीटीसी यूजर आईडी को आधार नंबर से वेरिफाई करना होगा। आईआरसीटीसी की ओर से रोजाना एक यूजर आईडी से बुक किए जाने वाले टिकट की चेकिंग होती है और उन आईडी को डिएक्टिवेट किया जाता है, फर्जी टिकट बुकिंग के धंधे में लगी हुई हैं।

रोजाना तौर पर चंद मिनटों में फर्जी तरीके से तत्काल टिकट बुक किए जाते हैं। सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक एक यूजर लॉग-इन एक बुकिंग की जा सकती है। ई-टिकट बुकिंग के दौरान पैसेंजर डिटेल और कैप्चा दर्ज करने के लिए एक निश्चित वक्त दिया जाता है।

अब मजदूर नहीं, नीट में सफल जोधाराम बनेगा डॉक्टर

कोटा। राजस्थान के बाड़मेर में गुढ़ामालानी तहसील के डेडावास गांव निवासी जोधाराम पटेल ने हालातों के आगे बेबस होकर मजदूरी के लिए मुम्बई जाने का मन बनाया, लेकिन जब शिक्षकों ने प्रेरित किया तो नीट की परीक्षा दी। चार बार असफलता के बाद पांचवें प्रयास में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में सफलता हासिल की।

बड़ी बात यह कि पांचवे प्रयास से पहले जोधाराम को कॅरियर सिटी कोटा और एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट का साथ मिला और नीट में ऑल इंडिया 3886 एवं ओबीसी कैटेगिरी में 1209 रैंक प्राप्त की है। जोधाराम के गांव डेडावास में करीब 400 घर हैं और वो अपने गांव का पहला युवा है जो डॉक्टर बनने जा रहा है।

जोधाराम का कहना है कि हमारे गांव और आस-पास के इलाकों के अधिकतर युवा 10वीं तक पढ़ने के बाद मजदूरी करने अन्य राज्यों में चले जाते हैं। उनमें जागरूकता का अभाव भी है। एमबीबीएस करने के बाद गांव के युवाओं का पलायन रोकना चाहता हूं। निर्धन परिवारों के प्रतिभावान विद्यार्थियों की हरसंभव मदद करने का प्रयास करूंगा ताकि वे भी अपना भविष्य उज्जवल बना सकें।

निरक्षर माता-पिता हैं नरेगा मजदूर
जोधाराम का परिवार आर्थिक दृष्टि से कमजोर है। घर में करीब 6 बीघा जमीन है लेकिन, सूखाग्रस्त इलाका होने के कारण ज्यादा फसल नहीं हो पाती। कभी-कभी जीरा या बाजरा की फसल होती है लेकिन उससे पेट भरने जितना इंतजाम हो पाता है। जोधाराम के दो बहिनें एवं एक बड़ा भाई है। भाई पढ़ाई में होशियार था लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण 8वीं के आगे नहीं पढ़ सका।

पिता नरिगाराम एवं मां सुगनी देवी दोनों निरक्षर है और नरेगा में मजदूरी कर जैसे-तैसे बच्चों का पेट पाल रहे है। घर भी कच्चा बना हुआ है। पढ़ाई में होनहार जोधाराम ने 10वीं 64 प्रतिशत अंक से सरकारी विद्यालय से उत्तीर्ण की। घर की आर्थिक स्थिति देखते हुए मुम्बई जाकर मजदूरी करने का निर्णय लिया। ऐसे में उसके मामा आगे आए और उन्होने मदद कर जोधाराम को 12वीं तक पढ़ाया-लिखाया।

असफलता से सफलता तक
जोधाराम ने नीट परीक्षा में चयनित होने के लिए मन लगाकर पढ़ाई की लेकिन, उसे लगातार चार बार असफलता मिली। सफलता प्राप्त करना मानो उसका जुनून बन गया था। 12वीं कक्षा उत्त्तीर्ण करने के बाद जोधाराम ने एक वर्ष जोधपुर रहकर नीट की तैयारी की लेकिन असफलता मिली। पहली बार में उसकी रैंक डेढ़ लाख तक आई।

फिर उसने घर पर रहकर तैयारी की लेकिन असफलता हाथ लगी। इस बार 35 हजार रैक आई। तीसरे साल 17500 एवं चौथे साल में 12000 के आस-पास रैंक प्राप्त की। जोधाराम के इन मजबूत इरादों और लगातार परिणामों में आ रहे सुधार को देखकर उसके मामा ने मदद का हाथ बढ़ाया और उसे पढ़ने के लिए कोटा भेजा। यहां एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट पहुंचे और अपनी बात रखी, जोधाराम की प्रतिभा और परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए एलन द्वारा फीस में रियायत दी गई।