Thursday, July 9, 2026
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सनाढ्य आदिगौड़ सामूहिक विवाह में 8 जोड़े बने हमसफर, उपहारों से सजाई गृहस्थी

कोटा। जब सुसज्जित बग्गियों पर सवार दूल्हे-दुल्हन भगवान परशुराम की भव्य झांकी के साथ नगर की गलियों से गुजरे, तो राहगीर ठिठककर देखते रह गए। यह दृश्य था आध्या सेवार्थ फाउण्डेशन के तत्वावधान में आयोजित प्रथम सनाढ्य आदिगौड़ सामूहिक निःशुल्क कन्या विवाह महोत्सव का, जो दो दिवसीय आयोजन के बाद हर्षोल्लास एवं घर जैसे पारिवारिक वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

मुख्य संयोजक लोकेश शर्मा ने बताया कि वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार 8 जोड़ों का विधिवत पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ और नवदंपतियों ने जीवन भर साथ निभाने का पवित्र वचन लिया। मुख्यअतिथि खाटू श्याम बाबा रहे उनका विशाल दरबार सजा। महंत सत्यप्रकाश बनखण्डी ने नव वरवधुओं आशीर्वाद दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौत्तम ने नव जोडो को अपनी शुभकामनाएं दी।

नगर भ्रमण बना आकर्षण का केंद्र
मुख्य संयोजक शर्मा ने बताया कि भगवान परशुराम की भव्य झांकी के साथ निकली इस बारात ने नगर के मार्गों पर एक अलग ही उत्सव का माहौल रच दिया। नगरवासी इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। शोभायात्रा के पश्चात दूल्हों ने तोरण मारकर मंगल प्रवेश किया और वरमाला की पावन रस्म के साथ अपने जीवनसाथी का चयन किया।

खाटू श्याम के दरबार में लिए सात फेरे
फाउण्डेशन के कोषाध्यक्ष प्रियांशु शर्मा ने बताया कि आयोजन स्थल पर खाटू श्याम का भव्य दरबार सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ 8 जोड़ों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। अग्नि के सात फेरों के साथ प्रत्येक जोड़े ने एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवन पर्यंत साथ चलने की शपथ ली। वातावरण में गूंजते मंगलाष्टक और आशीर्वाद के बीच यह क्षण अत्यंत भावुक और पवित्र रहा।

गृहस्थी का सामान दिया फाउण्डेशन ने
फाउण्डेशन की अध्यक्ष शालू शर्मा ने बताया कि प्रत्येक वधू को सोने की लौंग, चांदी की पाजेब, बिछिया, अंगूठी और टॉप्स सहित आभूषण भेंट किए गए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक नवदंपती को अलमारी, पंखा, टीवी, ड्रेसिंग टेबल, गद्दा, तकिया, बेडशीट, सूटकेस, दीवार घड़ी, सेंटर टेबल, कुर्सी, डिनर सेट, गैस चूल्हा एवं संपूर्ण रसोई सामग्री सहित 120 से अधिक उपयोगी उपहार प्रदान किए गए। दूल्हे के लिए कोट-पैंट और दुल्हन के लिए बेस व चूड़ा भी समिति की ओर से उपलब्ध कराया गया। आयोजन समिति ने यातायात सुरक्षा का संदेश देते हुए नवदंपतियों को हेलमेट भेंट कर यातायात नियमों के पालन का संकल्प भी दिलाया।

नई उम्मीदों के साथ रुखसत हुईं बेटियां
ओमप्रकाश टंकारिया ने बताया कि महोत्सव का सबसे भावपूर्ण क्षण था विदाई का। जब नवविवाहिताएं अपने माता-पिता और परिजनों से गले मिलकर अश्रुपूरित नेत्रों से रुखसत हुईं, तो उपस्थित जनसमूह की आंखें भी नम हो गईं।

Kota Mandi: आवक की कमी से कोटा मंडी में सोयाबीन 50 रुपये तेज बिकी

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शुक्रवार को आवक की कमी से सोयाबीन 50 रुपये और लहसुन एवरेज 500 रुपये ऊंचा बिका । मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब डेढ़ लाख कट्टे और लहसुन की 11000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं नया मिल लस्टर 2470 से 2500, गेहूं एवरेज टुकड़ी 2500 से 2550, बेस्ट टुकड़ी 2550 से 2670, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1400 से 1850, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ नया 2100 से 2450 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3601, धान (1509) 3400 से 3800, धान (1847) 3200 से 4001, धान (1718-1885) 4000 से 4400, धान (पूसा-1) 3000 से 4000, धान (1401-1886) 4100 से 4250, धान दागी 1500 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 5000 से 6250, सोयाबीन बीज क्वालिटी 6000 से 6300, सरसों 6400 से 6801, अलसी 8000 से 9050, तिल्ली 7000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 7400, उड़द 4500 से 7600, चना देशी 4800 से 5250, चना मौसमी नया 5100 से 5150, चना पेप्सी 5100 से 5251, चना डंकी पुराना 4000 से4600, चना काबुली 5500 से 6700 रुपये प्रति क्विंटल ।

लहसुन 2500 से 15500, मैथी नयी 5800 से 6750, धनिया बादामी 11000 से 11400, धनिया ईगल 11500 से 12300, धनिया रंगदार 13000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल।

वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ 50 जोड़े बने हमसफर

सर्व समाज सामूहिक विवाह, ऊर्जा मंत्री नागर ने नव-दंपतियों को दिया आशीर्वाद

कोटा। अखिल हाड़ौती सर्व समाज समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को विज्ञान नगर स्थित बीएसएनएल कॉलोनी के मैदान में 17वें सर्व समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी समारोह में हाड़ौती सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए सर्व समाज के 50 जोड़े एक ही पांडाल के नीचे वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह के अटूट बंधन में बंधे।

कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर नव-दंपतियों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर राकेश जैन, विवेक राजवंशी, जगदीश जिंदल, राकेश बोयत, रेखा लखेरा, गजाला खान और चैन सिंह राठौड़ सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सम्मेलन सामाजिक समरसता और एकता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह की यह परंपरा हमारी उस सोच को दर्शाती है जहाँ हम ‘स्व’ से ऊपर उठकर ‘सर्व’ की चिंता करते हैं। फिजूलखर्ची त्याग कर सादगी से समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना ही असली मानवता है।

उन्होंने समिति के अध्यक्ष अशोक पचेरवाल और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि 17 वर्षों से निरंतर समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की चिंता करना और उनके बच्चों के हाथ पीले करना ईश्वर की सच्ची सेवा है। नागर ने सरकार के “सबका साथ, सबका विकास” के ध्येय को दोहराते हुए प्रदेश की प्रगति और ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे सुधारों का भी जिक्र किया।

इस दौरान विवाह की रस्में पूरी भव्यता और शुद्धता के साथ संपन्न की गईं। समिति के अध्यक्ष अशोक पचेरवाल ने बताया कि गणेश स्थापना से लेकर तोरण, वरमाला और पाणिग्रहण संस्कार तक की समस्त रस्में विधि-विधान से पूरी हुईं। सम्मेलन स्थल पर हजारों लोगों के लिए प्रीतिभोज का भी आयोजन किया गया। इस पुनीत कार्य में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से भी नव-विवाहित जोड़ों के सुखद भविष्य के लिए विशेष उपहार भेजे गए, जो आकर्षण का केंद्र रहे।

समिति द्वारा नव-दंपतियों के नए जीवन की शुरुआत के लिए उपहारों की झड़ी लगा दी गई। प्रत्येक जोड़े को भेंट स्वरूप सोने का मंगलसूत्र, सोने के कान के टॉप्स, नाक की लौंग, चांदी की पायल, और चांदी की बिछिया प्रदान की गई।

इसके साथ ही घरेलू उपयोग के लिए अलमारी, पलंग, बिस्तर, फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, बर्तन, गैस सिलेंडर, टेबल और कुर्सी समेत विभिन्न आवश्यक सामग्री उपहार में दी गई। अंत में अशोक पचेरवाल ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन में संयोजक रामप्रसाद पचेरवाल व सूरजमल, उप-संयोजक राजेश खोड़ा, रामप्रसाद कलौंसिया, प्रेम प्रकाश ढंढोरिया, जमना देवी, गीता यादव, सरोज, संगीता दास, कोटा जिला अध्यक्ष नितिन सक्सेना, कोटा शहर अध्यक्ष राजेश चाँवरिया, बूंदी जिला अध्यक्ष अर्जुन डाबोडिया, बारां जिला अध्यक्ष लेखराज डागर और झालावाड़ जिला अध्यक्ष भगवान दास गहलोत, देवेंद्र पचेरवाल, सिकंदर पवार, लोकेश मेघवाल, देवेंद्र मेघवाल, यश पचेरवाल, चिराग खरारिया, कबीर धूलिया, अंकित चौहान, अर्जुन नरवाल, अजय टॉक, अजय पचेरवाल, रामप्रसाद कलोसिया, राजेश खांड़ा, महेश घेंघट उपस्थित रहे।

घर में शादी है तो निमंत्रण कार्ड लेकर डीलर से सम्पर्क करें, मिलेंगे आठ सिलेण्डर

नई दिल्ली। देश में शादियों का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैस सिलेंडर की है। मौजूदा परिस्थितियों में एलपीजी सिलेंडर प्राप्त करना काफी कठिन हो गया है।

सरकार एलपीजी सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर नियमों को काफी सख्त कर दिया है। 1 मई से बिना ओटीपी के एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलेगा। नियमों में हुई सख्ती की वजह से जिनके घर में शादियां हैं वो काफी परेशान हैं। आइए जानते हैं कि कैसे आप आसानी से 7-8 गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार शादी वाले घरों में 8 एलपीजी सिलेंडर मिल सकते हैं। इसके लिए आपको शादी के कार्ड के जरिए आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच होगी। सबकुछ सही होने पर आपको सिलेंडर जारी किए जाएंगे। एक व्यक्ति को अधिकतम 8 सिलेंडर मिल सकते हैं।

क्या है सिलेंडर प्राप्त करने का प्रोसेस
अगर आप दिल्ली में रह रहे हैं तो इसके लिए आपको डिस्ट्रीब्यूटर्स के यहां जाना होगा। वहां पहुंचकर आपको शादी का कार्ड दिखाना होगा। इसके बाद आपको 2 से 3 कॉमर्शियल सिलेंडर मिल सकते हैं। बता दें, इन सिलेंडर की रिफिलिंग अमाउंट और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करवाना होगा।

बान्द्रा टर्मिनस–गोरखपुर–बोरीवली विशेष अनारक्षित एक्सप्रेस 3 मई को

यह गाड़ी कोटा जंक्शन, सवाई माधोपुर, बयाना एवं भरतपुर स्टेशनों से होकर गुजरेगी

कोटा। यात्रियों की ग्रीष्मकालीन अवकाश में बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन द्वारा बान्द्रा टर्मिनस–गोरखपुर–बोरीवली के मध्य ग्रीष्मकालीन विशेष अनारक्षित रेलगाड़ी का संचालन किया जा रहा है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि गाड़ी संख्या 09157 (बान्द्रा टर्मिनस–गोरखपुर) 3 मई रविवार को 1 फेरे में बान्द्रा टर्मिनस से रात्रि 00.30 बजे प्रस्थान कर उसी दिन कोटा जंक्शन 14.17 बजे, सवाई माधोपुर जंक्शन 16.27 बजे, बयाना जंक्शन 18.37 बजे, भरतपुर जंक्शन 19.27 बजे होते हुए अगले दिन सोमवार को 17.30 बजे गोरखपुर जंक्शन पहुँचेगी।

इसी प्रकार गाड़ी संख्या 09158 (गोरखपुर–बोरीवली) 4 मई सोमवार को 1 फेरे में गोरखपुर जंक्शन से 20.30 बजे प्रस्थान कर अगले दिन मंगलवार को भरतपुर जंक्शन 15.47 बजे, बयाना जंक्शन 16.37 बजे, सवाई माधोपुर जंक्शन 18.42 बजे, कोटा जंक्शन रात्रि 20.52 बजे होते हुए तीसरे दिन बुधवार को 11.30 बजे बोरीवली पहुँचेगी।

यह गाड़ी रास्ते में दोनों दिशाओं में बान्द्रा टर्मिनस, बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा जंक्शन, रतलाम जंक्शन, कोटा जंक्शन, सवाई माधोपुर जंक्शन, गंगापुर सिटी जंक्शन, हिंडौन सिटी, बयाना जंक्शन, भरतपुर जंक्शन, मथुरा जंक्शन, हाथरस सिटी, कासगंज, बरेली सिटी, इज्जतनगर जंक्शन, पीलीभीत जंक्शन, मैलानी, सीतापुर जंक्शन, बुढ़वल जंक्शन, गोंडा जंक्शन, बस्ती, खलीलाबाद तथा गोरखपुर जंक्शन स्टेशनों पर ठहराव लेगी।
इस विशेष गाड़ी में 18 सामान्य श्रेणी सहित कुल 20 डिब्बे होंगे।

रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि गाड़ी की स्थिति एवं ठहराव की जानकारी के लिए www.enquiry.indianrail.gov.in अथवा एनटीईएस मोबाइल ऐप का उपयोग करें।

60 दिन की समयसीमा से पहले खत्म हुआ ईरान युद्ध, ट्रंप प्रशासन का बड़ा दावा

वाशिंगटन। US-Iran War: ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान में युद्ध पहले ही समाप्त हो चुका है, क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए युद्धविराम (सीजफायर) ने संघर्ष को रोक दिया है। इस तर्क के जरिए व्हाइट हाउस कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेने की आवश्यकता से बचना चाहता है।

यह बयान रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के उस तर्क को आगे बढ़ाता है, जो उन्होंने गुरुवार को सीनेट में बयान के दौरान रखा था। उन्होंने कहा था कि युद्धविराम ने प्रभावी रूप से युद्ध को रोक दिया है। इस तर्क के आधार पर प्रशासन ने अभी तक 1973 के कानून के तहत अनिवार्य कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली है, जो 60 दिनों से अधिक समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर अनिवार्य होती है।

नाम न बताने की शर्त पर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कानून के संदर्भ में “28 फरवरी शनिवार को शुरू हुई शत्रुता अब समाप्त हो चुकी है।” अधिकारी ने बताया कि 7 अप्रैल से शुरू हुए दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है। हालांकि युद्धविराम को बढ़ा दिया गया है, लेकिन ईरान अब भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है और अमेरिकी नौसेना ईरान के तेल टैंकरों को समुद्र में जाने से रोकने के लिए नाकेबंदी जारी रखे हुए है।

वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के अंतर्गत राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पास शुक्रवार तक का समय था कि वे कांग्रेस से अनुमति लें या सैन्य कार्रवाई रोक दें। यह कानून 30 दिन की अतिरिक्त समयसीमा बढ़ाने की अनुमति भी देता है।

डेमोक्रेटिक नेताओं ने प्रशासन पर ईरान युद्ध के लिए औपचारिक मंजूरी लेने का दबाव डाला है। 60 दिन की समयसीमा कई रिपब्लिकन सांसदों के लिए भी एक अहम मोड़ बन सकती थी, जिन्होंने अस्थायी कार्रवाई का समर्थन किया था, लेकिन लंबे समय के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी बताई थी।

सीनेटर सुसान कॉलिन्स (मेन) ने कहा, “यह समयसीमा कोई सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त है।” उन्होंने गुरुवार को उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिसमें कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान में सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की बात कही गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि “ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए स्पष्ट मिशन, प्राप्त करने योग्य लक्ष्य और संघर्ष समाप्त करने की रणनीति होनी चाहिए।”

ट्रंप के पहले कार्यकाल में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में ईरानी हथियारों से निपटने के निदेशक रह चुके रिचर्ड गोल्डबर्ग ने सुझाव दिया कि प्रशासन को एक नए ऑपरेशन की शुरुआत करनी चाहिए, जिसे उन्होंने “एपिक पैसेज” नाम देने की बात कही। यह “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का अगला चरण हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यह नया मिशन आत्मरक्षा पर आधारित होगा, जिसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा और जरूरत पड़ने पर आक्रामक कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रहेगा, ताकि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बहाल की जा सके।

सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने बयान देते हुए हेगसेथ ने कहा कि प्रशासन की “समझ” यह है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम के दौरान 60 दिन की समयसीमा रुकी हुई है। हालांकि ब्रेनन सेंटर की विशेषज्ञ कैथरीन योन एब्राइट ने इस व्याख्या को “कानूनी प्रावधानों का बड़ा विस्तार” बताया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप से, वॉर पावर्स रेजोल्यूशन में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि 60 दिन की समयसीमा को रोका या समाप्त किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राष्ट्रपतियों ने पहले यह तर्क दिया है कि उनकी सैन्य कार्रवाई इतनी तेज या निरंतर नहीं थी कि वह इस कानून के तहत आए। लेकिन ट्रंप का ईरान युद्ध ऐसा मामला नहीं है और लॉमेकर्स को इस तरह के तर्कों का विरोध करना चाहिए।

शेयर मार्केट से अप्रैल में विदेशी निवेशकों ने 60847 करोड़ रुपये निकाले

नई दिल्ली। FPI Withdrawals : विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से लगातार बिकवाली जारी रखी और अप्रैल में ₹60,847 करोड़ (6.5 अरब डॉलर) की निकासी की। इसकी मुख्य वजह बढ़ते भूराजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई।

हालिया आउटफ्लो के साथ ही 2026 के पहले चार महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का कुल आउटफ्लो ₹1.92 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पूरे 2025 के ₹1.66 लाख करोड़ के आउटफ्लो से काफी ज्यादा है। यह आंकड़े NSDL के डेटा से सामने आए हैं।

2026 में फरवरी को छोड़कर सभी महीनों में FPI नेट सेलर रहे। जनवरी में ₹35,962 करोड़ की निकासी हुई, जबकि फरवरी में ₹22,615 करोड़ का निवेश आया, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक निवेश था। हालांकि मार्च में यह रुझान पूरी तरह उलट गया और रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी हुई, जो अप्रैल में भी जारी रही।

महंगाई को लेकर चिंता फिर बढ़ी
मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार यह लगातार बिकवाली वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ते भूराजनीतिक जोखिमों का परिणाम है। मार्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में ही भारी बिकवाली देखने को मिली, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता फिर से बढ़ गई।

इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम हो गई और वैश्विक बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रही, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।

टेक्स्टबुक रिस्क-ऑफ रिएक्शन!
अंजल वन के सीनियर एनालिस्ट वकार जावेद खान ने अप्रैल के आउटफ्लो को “टेक्स्टबुक रिस्क-ऑफ रिएक्शन” बताया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने, रुपये के 92 प्रति डॉलर के करीब कमजोर होने और महंगाई व चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ने से भारत का शेयर बाजार महंगा लगने लगा है। अगर ईरान के साथ युद्धविराम बना रहता है और WTI क्रूड $90 प्रति बैरल से नीचे आता है, तो FPI निवेश स्थिर हो सकता है।

इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मजबूत खरीद, जो अब तक ₹1.7 लाख करोड़ रही है, और FY26 से FY28 के बीच 16% की अनुमानित कमाई वृद्धि बाजार को सहारा दे सकती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में तना

अप्रैल में GST कलेक्शन रिकॉर्ड 8.7 प्रतिशत बढ़कर 2.43 लाख करोड़ के पार हुआ

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नई दिल्ली। GST Collection: अप्रैल में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन 8.7 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड लगभग ₹2.43 लाख करोड़ हो गया। इससे पहले सबसे अधिक कलेक्शन अप्रैल पिछले वर्ष में ₹2.23 लाख करोड़ से अधिक दर्ज किया गया था। सरकार ने शुक्रवार को जीएसटी के आंकड़े जारी किए।

आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से ग्रॉस रेवेन्यू 4.3 प्रतिशत बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ से अधिक हो गया, जबकि आयात से जीएसटी कलेक्शन में 25.8 प्रतिशत की बड़ी ग्रोथ दर्ज हुई और यह अप्रैल 2026 में ₹57,580 करोड़ पर पहुंच गया।

अप्रैल के दौरान रिफंड 19.3 प्रतिशत बढ़कर ₹31,793 करोड़ हो गया। रिफंड एडजस्ट के बाद, नेट जीएसटी कलेक्शन 7.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग ₹2.11 लाख करोड़ हो गया।

NEET UG: इस बार नीट में 3000 आवेदक बढ़े, MBBS सीटों में बंपर इजाफे के संकेत

नई दिल्ली। NEET UG MBBS Seats : इस साल नीट यूजी परीक्षा के लिए कुल 22,79,743 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। नीट में इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 3000 उम्मीदवार बढ़ गए हैं।

साथ ही आने वाले एकेडमिक सेशन के लिए एमबीबीएस ( MBBS ) सीटों में काफी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे देश की सबसे ज्यादा कॉम्पिटिटिव एंट्रेंस परीक्षाओं में से एक नीट में दबाव कुछ कम होने की संभावना है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 22,79,743 उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड जारी किए है। पिछले साल करीब 1.29 लाख MBBS सीटों के मुकाबले 22.76 लाख रजिस्ट्रेशन हुए थे।

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के सूत्रों के मुताबिक नए MBBS कोर्स शुरू करने के लिए बड़ी संख्या में नए आवेदन मिले हैं, साथ ही मौजूदा मेडिकल कॉलेजों से भी सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव आए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने बताया, ‘सीटों में काफी बढ़ोतरी होगी। सही संख्या आने वाले दिनों में घोषित होने की संभावना है।’ MBBS के अलावा, बैचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी (BDS), आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध जैसे कोर्स में एडमिशन भी नीट यूजी के जरिए ही होते हैं, हालांकि मुख्य मुकाबला MBBS सीटों के लिए ही रहता है।

नए नियमों के तहत अब प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया को भी काफी सरल बना दिया गया है। इसके अलावा अधिकतम 150 एमबीबीएस सीटों की सीमा भी हटा दी गई है।

तीसरे बदलाव के तहत मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच की दूरी के नियम में भी तब्दीली की गई है। पहले नियम यह था कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच का ट्रैवल टाइम अधिकतम 30 मिनट का होना चाहिए।

अब सरकार ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच की दूरी को 10 किलोमीटर तक रखने की अनुमति दे दी है। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल 10 और पहाड़ी क्षेत्रों (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य) में 15 किलोमीटर दूर तक स्थापित हो सकते हैं।

देश के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए बेटियां आगे हैं। पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो लगातार मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए पंजीयन करने से लेकर रिजल्ट में लड़कियां आगे हैं।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक 2026 के लिए पंजीकरण के आंकड़े चिकित्सा के क्षेत्र में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी की कहानी बयां कर रहे हैं। इस साल कुल 22,79,743 अभ्यर्थियों ने नीट यूजी के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें 13,32,928 महिला और 9,46,815 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। यानी कुल पंजीकरण में लगभग 58 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है।

पिछले कुछ वर्षों से नीट में महिला अभ्यर्थियों की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही है। 2026 के आंकड़े दिखाते हैं कि चिकित्सा अब सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि ऐसा क्षेत्र बन रहा है, जहां बेटियां आगे बढ़कर बाधाएं तोड़ रही हैं और स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य तय कर रही हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से लड़कियां बड़ी संख्या में डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा में शामिल हो रही हैं।

2025 में 13.10 लाख महिला अभ्यर्थी पंजीकृत : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक में महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी लगातार पुरुषों से आगे बनी हुई है। 2026 में 13.32 लाख महिलाओं के पंजीकरण के साथ यह रुझान और मजबूत हुआ है। पिछले दो वर्षों के आंकड़े देखें तो चिकित्सा के क्षेत्र में बेटियों का रुझान साफ दिखता है। पिछले दो साल का आंकड़े को देखा जाए तो नीट यूजी 2024 कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या 24,06,079 थी। इसमें पुरुष अभ्यर्थी 10,29,198 महिला अभ्यर्थी 13,76,863 शामिल हुई थी। इसमें कुल पंजीकरण में महिलाओं की भागीदारी 57.2 प्रतिशत रही।

उत्तीर्ण होने में भी लड़कियां रहीं हैं आगे
वर्ष 2025 में 7,22,462 महिलाएं उत्तीर्ण हुईं, जबकि पुरुषों की संख्या 5,14,063 रही। 2024 में भी 7,69,277 महिलाओं ने सफलता पाई, पुरुष 5,46,566 रहे। बिहार से एक लाख 63 हजार अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इसमें महिला अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 993 रुपये हुआ महंगा, बढ़ी हुई दरें आज से लागू

नई दिल्ली। Commercial LPG cylinder New price: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम) की कीमत में 1 मई से 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इससे कारोबारियों के लिए कुकिंग फ्यूल की लागत में बड़ा इजाफा हुआ है।

इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 2,078.50 रुपये से बढ़कर 3,071.50 रुपये हो गई है। मुंबई में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़कर 2,031 रुपये से 3,024 रुपये हो गए हैं। वहीं, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यह ताजा बढ़ोतरी 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तीसरी बार हुई है। इससे पहले मार्च में 144 रुपये और 1 अप्रैल को करीब 200 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद अब यह बड़ी वृद्धि हुई है।

Commercial LPG Cylinder की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर रेस्टोरेंट, ढाबों और उन व्यवसायों पर पड़ेगा जो रोजमर्रा के काम में एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं। माना जा रहा है कि कारोबारी इस बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। इससे बाहर खाना और फूड डिलीवरी महंगी हो सकती है।

5 किलो वाला सिलेंडर भी महंगा
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी के बाद एक बुरी खबर 5 किलो वाले सिलेंडर के लिए है। एएनआई के अनुसार 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमतों में भी आज से 261 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और अन्य छोटे-बड़े बिजनेस पर पड़ेगा। वहीं, घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किग्रा) के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे करीब 33 करोड़ परिवारों को राहत मिली है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर
वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 1 मई से अगले पखवाड़े के लिए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में बदलाव किया है। जबकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य ही रखा गया है। डीजल के निर्यात पर शुल्क 23 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। इसमें पूरा हिस्सा विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) का है और रोड व इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (आरआईसी) शून्य रखा गया है।

एटीएफ के निर्यात पर 33 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगेगा, जो पूरी तरह एसएईडी होगा। वहीं, पेट्रोल के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें 1 मई 2026 से लागू हो गई हैं।