नई दिल्ली। NEET UG MBBS Seats : इस साल नीट यूजी परीक्षा के लिए कुल 22,79,743 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। नीट में इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 3000 उम्मीदवार बढ़ गए हैं।
साथ ही आने वाले एकेडमिक सेशन के लिए एमबीबीएस ( MBBS ) सीटों में काफी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे देश की सबसे ज्यादा कॉम्पिटिटिव एंट्रेंस परीक्षाओं में से एक नीट में दबाव कुछ कम होने की संभावना है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 22,79,743 उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड जारी किए है। पिछले साल करीब 1.29 लाख MBBS सीटों के मुकाबले 22.76 लाख रजिस्ट्रेशन हुए थे।
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के सूत्रों के मुताबिक नए MBBS कोर्स शुरू करने के लिए बड़ी संख्या में नए आवेदन मिले हैं, साथ ही मौजूदा मेडिकल कॉलेजों से भी सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने बताया, ‘सीटों में काफी बढ़ोतरी होगी। सही संख्या आने वाले दिनों में घोषित होने की संभावना है।’ MBBS के अलावा, बैचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी (BDS), आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध जैसे कोर्स में एडमिशन भी नीट यूजी के जरिए ही होते हैं, हालांकि मुख्य मुकाबला MBBS सीटों के लिए ही रहता है।
नए नियमों के तहत अब प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया को भी काफी सरल बना दिया गया है। इसके अलावा अधिकतम 150 एमबीबीएस सीटों की सीमा भी हटा दी गई है।
तीसरे बदलाव के तहत मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच की दूरी के नियम में भी तब्दीली की गई है। पहले नियम यह था कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच का ट्रैवल टाइम अधिकतम 30 मिनट का होना चाहिए।
अब सरकार ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच की दूरी को 10 किलोमीटर तक रखने की अनुमति दे दी है। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल 10 और पहाड़ी क्षेत्रों (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य) में 15 किलोमीटर दूर तक स्थापित हो सकते हैं।
देश के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए बेटियां आगे हैं। पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो लगातार मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए पंजीयन करने से लेकर रिजल्ट में लड़कियां आगे हैं।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक 2026 के लिए पंजीकरण के आंकड़े चिकित्सा के क्षेत्र में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी की कहानी बयां कर रहे हैं। इस साल कुल 22,79,743 अभ्यर्थियों ने नीट यूजी के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें 13,32,928 महिला और 9,46,815 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। यानी कुल पंजीकरण में लगभग 58 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है।
पिछले कुछ वर्षों से नीट में महिला अभ्यर्थियों की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही है। 2026 के आंकड़े दिखाते हैं कि चिकित्सा अब सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि ऐसा क्षेत्र बन रहा है, जहां बेटियां आगे बढ़कर बाधाएं तोड़ रही हैं और स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य तय कर रही हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से लड़कियां बड़ी संख्या में डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा में शामिल हो रही हैं।
2025 में 13.10 लाख महिला अभ्यर्थी पंजीकृत : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक में महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी लगातार पुरुषों से आगे बनी हुई है। 2026 में 13.32 लाख महिलाओं के पंजीकरण के साथ यह रुझान और मजबूत हुआ है। पिछले दो वर्षों के आंकड़े देखें तो चिकित्सा के क्षेत्र में बेटियों का रुझान साफ दिखता है। पिछले दो साल का आंकड़े को देखा जाए तो नीट यूजी 2024 कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या 24,06,079 थी। इसमें पुरुष अभ्यर्थी 10,29,198 महिला अभ्यर्थी 13,76,863 शामिल हुई थी। इसमें कुल पंजीकरण में महिलाओं की भागीदारी 57.2 प्रतिशत रही।
उत्तीर्ण होने में भी लड़कियां रहीं हैं आगे
वर्ष 2025 में 7,22,462 महिलाएं उत्तीर्ण हुईं, जबकि पुरुषों की संख्या 5,14,063 रही। 2024 में भी 7,69,277 महिलाओं ने सफलता पाई, पुरुष 5,46,566 रहे। बिहार से एक लाख 63 हजार अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इसमें महिला अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है।

