भारतीय अर्थव्यवस्था को आईएमएफ ने माना लोहा, फिर भी घटाया ग्रोथ अनुमान

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नई दिल्‍ली। IMF Growth Projection: भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने अपने जुलाई 2026 के ‘ वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक ‘ (WEO) अपडेट में यह बात कही। हालांकि, इसके निकट-अवधि के विकास के अनुमान में थोड़ी कमी की गई है।

IMF का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में देश की अर्थव्यवस्था 6.4% की दर से बढ़ेगी (जो अप्रैल में अनुमानित 6.5% से कम है) और फिर वित्त वर्ष 2027-28 में यह बढ़कर 6.7% हो जाएगी (जो पहले के 6.5% के अनुमान से अधिक है)।

वित्त वर्ष 2026-27 का अनुमान IMF के अप्रैल के पूर्वानुमान से 0.1 फीसदी कम है, जबकि वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमान को 0.2 फीसदी बढ़ाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसकी विकास दर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है। इसे निजी खपत और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूत तेजी का समर्थन मिल रहा है।’

आईएमएफ को उम्मीद है कि 2024-25 के दौरान दर्ज 3.5% के औसत की तुलना में 2026 में ग्‍लोबल ग्रोथ धीमी होकर 3.0% हो जाएगी। फिर 2027 में इसके सुधरकर 3.4% पर पहुंच जाने के आसार हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, यह मामूली सुस्ती दिखाती है कि मिडिल ईस्‍ट में युद्ध के प्रभावों को ग्‍लोबल टेक्नोलॉजी साइकिल में मांग-आधारित तेजी से आंशिक रूप से संतुलित किया जा रहा है। इसका श्रेय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रगति और इसके अपनाए जाने को जाता है।

हालांकि, अप्रैल 2026 के ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (WEO) के पूर्वानुमानों की तुलना में 2026 और 2027 में वैश्विक विकास दर कुल मिलाकर लगभग वैसी ही बनी हुई है। लेकिन, IMF ने कहा है कि बुनियादी स्थिति काफी असमान हो गई है। देशों का प्रदर्शन मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि वे मिडिल ईस्‍ट के संघर्ष से कितने प्रभावित हैं। वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में उनकी स्थिति क्या है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संघर्ष वाले इलाके के बाहर एनर्नी एक्सपोर्ट करने वाले देशों को व्यापार की अनुकूल शर्तों का फायदा मिलता है। वहीं, टेक्नोलॉजी से जुड़ी तेजी में शामिल अर्थव्यवस्थाओं में एनर्जी इंपोर्ट करने वाले देशों में भी गतिविधियां तेज रहती हैं। इसके उलट टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में कम भागीदारी वाले ऊर्जा इंपोर्ट करने वाले देशों में गतिविधियां कमजोर पड़ जाती हैं। इस ग्रुप में कम आय वाले कई देश शामिल हैं।’

हालांकि, भारत के लिए घरेलू मांग ही विकास की मुख्य वजह बनी हुई है। IMF के अनुमान बताते हैं कि कमोडिटी की ऊंची कीमतों, लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितता और धीमी ग्लोबल ट्रेड वाले मुश्किल ग्लोबल माहौल के बावजूद परिवारों का मजबूत खर्च और सर्विस सेक्टर की मजबूत गतिविधियां आर्थिक विस्तार को सहारा देती रहेंगी।

RBI का विकास का अनुमान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% हो गई। यह एक साल पहले 7.1% थी। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी। जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी।