कोटा। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली से सड़क मार्ग से एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करते हुए बुधवार को कोटा पहुंचे। इस मौके पर उनके साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे। गडकरी ने कोटा के गोपालपुरा के पास आम सभा को संबोधित किया।
इस दौरान प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक संदीप शर्मा, कल्पना देवी व बेगू विधायक सुरेश धाकड़ सहित कई लोग मौजूद रहे। यहां गडकरी ने करीब 16,000 करोड़ रुपये की लागत वाले नए हाईवे प्रोजेक्ट्स की घोषणा की। इनमें तीन प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
पहली परियोजना के तहत कोटा शहर को एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ने के लिए बालापुरा इंटरचेंज तक नई सड़क का निर्माण होगा। दूसरी परियोजना में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के चेचट इंटरचेंज के पास से नेशनल हाईवे 52 को जोड़ने के लिए 10 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी।

तीसरी बड़ी घोषणा चंबल एक्सप्रेसवे की रही, जिसे अब अटल एक्सप्रेसवे नाम दिया गया है। नितिन गडकरी ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे चंबल नदी के किनारे-किनारे कोटा से उत्तर प्रदेश के इटावा तक जाएगा।
रास्ते में ग्वालियर भी आएगा, जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मभूमि है। हालांकि, यह परियोजना पहले से प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से निर्माण शुरू नहीं हो सका था।
गडकरी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक बार हेलीकॉप्टर से कोटा के ऊपर से गुजरते समय उन्होंने देखा कि कोटा से दिल्ली का सीधा रास्ता बनाया जा सकता है। लोगों को घूमकर जाना पड़ता था, इसलिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की परिकल्पना की गई। अब इस एक्सप्रेसवे से मात्र 12 घंटे में दिल्ली से मुंबई के नरीमन पॉइंट तक पहुंचा जा सकेगा।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा बताई गई मांगों को पूरा करने का भरोसा जताया। समय की कमी के बावजूद कार्यकर्ताओं की सभा में पहुंचने पर जोर देते हुए कहा कि जितनी मांगे रखी गई हैं, वे पहले से प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से निर्माण शुरू नहीं हो सका था।
आर्थिक समृद्धि और उद्योगों का विकास होगा: नितिन गडकरी ने कहा कि एक्सप्रेसवे जिन इलाकों से गुजर रहा है, वहां ज्यादातर ट्राइबल क्षेत्र हैं। ये सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। एक्सप्रेसवे बन जाने से यहां इंडस्ट्री, नई कंपनियां, लॉजिस्टिक पार्क, एजुकेशन संस्थान और मेडिकल कॉलेज स्थापित होंगे। किसानों के उत्पादों पर आधारित उद्योग विकसित होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करना है। 2014 में सरकार बनने के बाद वॉटर, पावर, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया, जिससे रोजगार बढ़ेगा और गरीबी घटेगी।
इन परियोजनाओं की हुई घोषणा
- नेशनल हाईवे 52 को कमलपुरा के पास मुकुंदरा बाउंड्री के सहारे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के चेचट इंटरचेंज से जोड़ने के लिए 10 किलोमीटर सड़क का काम 551 करोड़ रुपये की लागत से होगा। तीन महीने के अंदर निर्माण शुरू।
- कोटा शहर के एयरपोर्ट से बालापुरा इंटरचेंज तक 21 किलोमीटर सीधी सड़क 1000 करोड़ रुपये से बनेगी।
- चंबल एक्सप्रेसवे (अब अटल एक्सप्रेसवे) कोटा से इटावा तक 15,000 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा. डीपीआर तैयार हो रही है।
- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बारां-झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह की मांग पर भवानीमंडी को एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम भी जल्द शुरू होगा।
हाईवे समृद्धि का प्रतीक-ओम बिरला
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि नितिन गडकरी ने सड़कों का एक ऐसा नेटवर्क बनाया गया है जिससे भारत की खुशहाली, समृद्धि और तरक्की आगे बढ़ी है। इनोवेशन व नई सोच के माध्यम से सड़कों का विकास किया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे आने वाले दिनों में लोगों की लाइफ लाइन होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए कहा कि हर खेत को पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। कोटा के हैंगिंग ब्रिज का काम अटका हुआ था, तब नितिन गडकरी ने कहा था कि “मुझे यह नहीं सुनना कि कैसे बनेगा, केवल बना हुआ ब्रिज चाहिए। यह 2017 में बनकर तैयार हो गया।”
टनल नायाब इंजीनियरिंग का नमूना: सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बना रही मुकुंदरा टनल आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग का नायाब नमूना बना है। कोटा की बात करते हुए सीएम ने कहा कि ढाई साल में 5000 करोड रुपए दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोटा के कामों के लिए चार पन्ने मेरे पास है, कोटा का हमने पूरा ध्यान रखा है। बड़े-बड़े काम हुए हैं. कोटा रेल मार्ग, सड़क मार्ग और अब एयर कनेक्टिविटी से भी जुड़ेगा।

