वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की मांग से बासमती धान के दाम 60 फीसदी तक बढ़े

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नई दिल्ली। मौसम की अटपटी चाल और अलनीनो संकट का असर चावल उत्पादन पर पड़ने के आसार बढ़ गए। वैश्विक बाजार के साथ घरेलू बाजार में चावल विशेषकर बासमती की कीमतों में तेज बढ़ोत्तरी हुई है। मंडियों में धान की नई फसल की सप्लाई शुरू हो गई है। इसके बावजूद भाव में जबरदस्त तेजी बनी हुई है।

बासमती धान के दाम 60 फीसदी तक बढ़ गए है। कीमतें बढ़ने के बावजूद वैश्विक बाजार में भारतीय चावल के दाम प्रतिस्पर्धी देश के मुकाबले कम हैं जिसके कारण अफ्रीकी देशों में भारतीय चावल की मांग तेजी से बढ़ रही है।

भारत के उत्तरी राज्यों और खासकर पंजाब-हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में खरीफ कालीन धान के नए माल की आवक पहले ही शुरू हो चुकी है जबकि अगले महीने (नवम्बर) से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं बिहार जैसे राज्यों में भी नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही राज्य की आपूर्ति एवं उपलब्धता में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी होने लगेगी। अफ्रीकी देशों को सस्ते भारतीय चावल की सख्त जरूरत है इसलिए इसका निर्यात शिपमेंट आगे भी बेहतर होने की उम्मीद है।

नई फसल की सप्लाई शुरू होने के बावजूद धान किसानों को अच्छा भाव मिल रहा है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के चौथे हफ्ते में बासमती की कई किस्मों के भाव में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 40 से 59 प्रतिशत तक बढ़त दर्ज की गई है, जबक‍ि उत्तर प्रदेश में सामान्य बासमती के भाव में हालिया गिरावट दर्ज की गई है। भारत सरकार के पोर्टल एगमार्कनेट के आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में सामान्य बासमती का भाव महज एक सप्ताह में 7.5 प्रतिशत बढ़कर 4,803.29 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

बासमती धान की कीमतों में जोरदार तेजी
पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले राजस्थान में 1121 किस्म का भाव 57.9 प्रतिशत बढ़कर 4,665.60 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। उत्तर प्रदेश में सुपरफाइन बासमती के दाम 59.2 प्रतिशत बढ़कर 4,125 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए। पंजाब में 1121 किस्म का भाव भी 50 प्रतिशत बढ़कर 4,416.65 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। पिछले एक महीने में हरियाणा में सामान्य बासमती का भाव 19.9 प्रतिशत और 1121 किस्म का भाव 13.2 प्रतिशत बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में 1509 किस्म के दाम में 9.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सामान्य बासमती के भाव में 21.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।

उत्तर प्रदेश की मंडियों में सबसे ज्यादा सप्लाई
एगमार्कनेट के अनुसार, 1 से 27 अक्टूबर 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश की मंडियों में सबसे ज्यादा 10.93 लाख मीट्रिक टन बासमती धान पहुंचा. हरियाणा में 3.22 लाख टन और पंजाब में 1.29 लाख टन आवक दर्ज की गई। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले उत्तर प्रदेश में आवक 4.7 प्रतिशत और हरियाणा में 0.5 प्रतिशत बढ़ी। इसके उलट, पंजाब में आवक 36.4 प्रतिशत घट गई. राजस्थान में आवक 13,193 टन से बढ़कर 33,245 टन हो गई। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के बासमती अध्यक्ष राजीव सेतिया के मुताबिक इस साल बासमती की पैदावार पिछले साल की तुलना में 5 से 10 प्रतिशत ज्यादा रहने का अनुमान है । इसके बावजूद मंडियों में भाव मजबूत बने हुए हैं ।

वैश्विक बाजार में एक साल के उच्च स्तर पर दाम
भारतीय चावल का दाम भी बढ़कर पिछले करीब एक वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 5 प्रतिशत टूटे भारतीय सेला चावल का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल 387-392 डॉलर प्रति टन और सफेद चावल का ऑफर मूल्य 389-394 डॉलर प्रति टन चल रहा है जो वियतनामी एवं थाई चावल की तुलना में बहुत कम है। थाईलैंड के 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 480 डॉलर प्रति टन के ऊंचे स्तर पर बरकरार है। निकट भविष्य में दाम घटने की संभावना बहुत कम है।

अफ्रीकी देशों में भारतीय चावल की मांग तेज
वियतनाम एवं थाईलैंड में भाव काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचने से अफ्रीकी देशों में सस्ते भारतीय चावल की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। बांग्लादेश में भी भारतीय चावल का आयात करने की उम्मीद है क्योंकि वहां कीमतों में तेजी का माहौल बना हुआ है। वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य गत सप्ताह के 440-450 डॉलर प्रति टन से उछलकर अब 470-480 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वियतनाम में धान की दूसरी फसल की कटाई नवम्बर के अंत से आरंभ होने की संभावना है। फिलीपिंस में चावल का आयात शुरू होने वाला है। थाईलैंड में चावल का स्टॉक कम बताया जा रहा है।