जीएसटी रिफंड तेज होगा, टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ेगा, कौंसिल की बैठक में फैसला

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नई दिल्ली। कारोबारियों को गिरफ्तारी, मुकदमों और जुर्माने के मामले में कुछ राहत देने की सिफारिश करते हुए गुरुवार को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने इस अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल एवं बेहतर बनाने का फैसला किया। उसकी सिफारिशों में टैक्स क्रेडिट की अधिक उपलब्धता और तेजी से रिफंड के साथ-साथ पंजीकरण को आसान बनाने सहित कई प्रक्रियात्मक छूट की बात है। ये कदम एक साल पहले उठाए जीएसटी दरों और स्लैब को कम करने के बाद लिए गए हैं।

इनसे जीएसटी ढांचे में बदलाव होगा और इसे करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल तथा भरोसे पर आधारित व्यवस्था बनाया जाएगा। प्रक्रियाओं में किए गए सुधारों का उद्देश्य कारोबारों के लिए रोजमर्रा के अनुपालन को आसान बनाना है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में पंजीकरण, टैक्स रिटर्न, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी), विवाद निपटान, कर प्रवर्तन, निर्यात और राज्यों के बीच माल की आवाजाही से जुड़े नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई।

जीएसटी में इन सुधारों का उद्देश्य जीएसटी प्रशासन को अधिक प्रणाली-संचालित बनाना और करदाताओं के कर अधिकारियों के साथ बातचीत करने की आवश्यकता को कम करना है। दर संरचना तय हो जाने के बाद परिषद ने अब जीएसटी के रोजमर्रा के संचालन से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘दरें पिछले सितंबर में तय हो चुकी हैं तो प्रक्रियाओं में सुधार को भी जल्द से जल्द अंतिम रूप देना होगा।’

सरकार ने कहा कि कारोबारियों को जीएसटी की दरों में बदलाव की तुलना में पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं से कहीं अधिक बार जूझना होता है। अब जीएसटी प्रणाली विक्रेता और खरीदार के चालानों का मिलान कर सकती है और नेटवर्क विश्लेषण के जरिये संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की पहचान कर सकती है। इससे कर प्रवर्तन केवल डर पैदा करने के बजाय गलतियों या गड़बड़ियों का पता लगाने पर अधिक निर्भर करेगा।

रिफंड व्यवस्था में सुधार परिषद द्वारा घोषित सबसे बड़े बदलावों में से एक है। परिषद ने इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं पर जमा आईटीसी को व्युत्क्रम शुल्क ढांचे के तहत रिफंड करने की सिफारिश की है। इनपुट सेवाओं से जुड़े आईटीसी का रिफंड 1 नवंबर, 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर उपलब्ध होगा। निर्यातकों के लिए प्लांट और मशीनरी पर आईटीसी रिफंड 1 अप्रैल, 2027 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर उपलब्ध होगा।

रिफंड प्रक्रिया भी काफी हद तक स्वचालित हो जाएगी। रिफंड दावे की स्वीकृति की पुष्टि का समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया जाएगा। यदि 10 दिनों के भीतर स्वीकृति नहीं दी जाती है और न ही समस्या बताई जाती है दावे को स्वीकृत माना जाएगा। जोखिम आकलन के आधार पर पात्र रिफंड दावों में से 90 फीसदी राशि बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के जारी कर दी जाएगी। स्वीकृति के तीन कार्यदिवस के भीतर रिफंड आदेश जारी होगा जबकि अभी इसमें सात दिन लगते हैं।