नई दिल्ली। सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन (EPS) को लेकर एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। पीएफ की वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि वह ईपीएस खातों में अपनी तरफ से दी जाने वाली 1.16% की सब्सिडी केवल 15,000 रुपये की पुरानी लिमिट पर ही देती रहेगी।
इसका सीधा मतलब यह है कि वेज लिमिट बढ़ने के बावजूद सरकार का प्रति कर्मचारी अधिकतम योगदान 174 रुपया ही रहेगा। यह बढ़कर 290 रुपया नहीं होगा। हालांकि, ईपीएस एक तय पेंशन वाली योजना है, इसलिए कर्मचारियों की मिलने वाली पेंशन पर इसका कोई सीधा नुकसान या नेगेटिव असर नहीं पड़ेगा। नोटिफिकेशन में मंत्रालय ने कहा कि अंशदान 17 सितंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। सरकार किसी सदस्य के मूल वेतन का 1.16% हिस्सा उनके ईपीएस खाते में जमा करती है।
पेंशन पर क्या असर
मंत्रालय ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि केंद्र सरकार ईपीएस के सदस्यों के वेतन के 1.16% की दर से योजना में योगदान देगी, जो प्रति माह 15,000 रुपये तक के वेतन तक सीमित होगी। इसका मतलब है कि सरकार का अधिकतम मासिक योगदान 174 रुपये (15,000 का 1.16%) ही हो सकता है।
अब सरकार ने वेज सीलिंग बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है। अगर सरकार इस नई वेज सीलिंग के हिसाब से योगदान देती, तो ईपीएस खाते में हर महीने जाने वाली रकम 174 रुपये से बढ़कर 290 रुपये हो जाती, जो कि 66.66% की बढ़ोतरी होती। लेकिन चूंकि ईपीएस एक तय लाभ वाली योजना है, जहां आपकी पेंशन की गणना आपकी पेंशन योग्य नौकरी के सालों और सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए आपकी ईपीएस पेंशन पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
174 रुपया ही मिलेगा
- वेज सीलिंग 25,000 रुपये होने के बावजूद सरकार 1.16% का पेंशन अंशदान 15,000 रुपये के वेतन के आधार पर ही देगी।
- श्रम मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर नियमों में संशोधन की पुष्टि की है, प्रभावी तारीख 17 सितंबर, 2025 है।
- नई वेज लिमिट पर सरकारी अंशदान मिलता तो यह 174 रुपये से बढ़कर 290 रुपये (66.66% ज्यादा) हो जाता, जो अब नहीं होगा।
- पेंशन की गणना सर्विस पीरियड, सैलरी फॉर्म्युले पर आधारित होती है, इसलिए पेंशनर्स की तय पेंशन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
लानी पड़ सकती है नई नीति
अगर सरकार EPS फंड में पर्याप्त पैसा नहीं डालती है और भविष्य में पेंशन देने के लिए फंड में पर्याप्त रकम नहीं जुट पाती है, तो पेंशन के इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को कोई नई नीति लानी पड़ सकती है।

