GST काउंसिल की 57वीं बैठक आज, रिफंड और गिरफ्तारी में राहत पर फैसला संभव

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नई दिल्ली। GST Council Meeting: GST काउंसिल की 57वीं बैठक आज से शुरू हो गई है। बैठक में कारोबारियों के लिए टैक्स से जुड़े नियम आसान बनाने पर चर्चा हो सकती है। इस बार टैक्स दरों में बदलाव के बजाय कागजी काम कम करने, रिफंड जल्दी देने और प्रशासनिक बोझ घटाने पर जोर रहने की उम्मीद है।

पिछले साल सितंबर में GST 2.0 के पहले चरण के तहत टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव किए गए थे। इस बैठक में कुछ नियमों पर स्पष्टीकरण के अलावा दरों में बदलाव की संभावना कम है। काउंसिल उन उलझनों और नियमों के बीच अंतर को दूर करने पर ध्यान दे सकती है, जिनसे कारोबारियों को परेशानी होती है।

इन प्रस्तावों पर राज्यों के साथ करीब नौ महीने तक चर्चा हुई है। इस दौरान तीन राष्ट्रीय समन्वय बैठकें और राज्य अधिकारियों के कार्य समूहों की कई बैठकें हुईं। GST सिस्टम से मिले आंकड़ों के आधार पर प्रस्तावों की जांच करने के बाद उन्हें काउंसिल के सामने रखने की तैयारी की गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, 2017 में लागू होने के बाद से GST सिस्टम काफी विकसित हुई है। शुरुआती सालों में कारोबारियों को नई व्यवस्था से जोड़ने, टैक्स वसूली स्थिर करने और चोरी रोकने पर जोर था। अब विभाग के पास लेनदेन के ज्यादा आंकड़े, बिलों का मिलान करने की सुविधा और संदिग्ध कारोबार पहचानने की तकनीक है। इससे सभी कारोबारियों पर एक जैसा बोझ डालने के बजाय टैक्स चोरी करने वालों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है।

PWC इंडिया के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल के मुताबिक, इस बैठक को GST 2.0 का दूसरा चरण माना जा सकता है। पिछले साल दरों को आसान बनाने के बाद अब जरूरी प्रक्रियाओं और व्यवस्था में बदलाव पर ध्यान दिया जा रहा है। मकसद प्रक्रियाओं को ऐसा बनाना है कि वे अधिकारियों के दखल के बजाय तकनीक के जरिए चलें।

गिरफ्तारी और मुकदमे के नियम बदलेंगे
काउंसिल टैक्स उल्लंघन के मामलों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। एक अन्य प्रस्ताव में GST अधिकारियों से सीधे गिरफ्तारी का अधिकार हटाने की बात है। इसके तहत गिरफ्तारी के लिए न्यायिक अनुमति जरूरी होगी।

इनपुट टैक्स क्रेडिट में क्या राहत मिल सकती है
कारोबार की लागत घटाने के लिए भी कई प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। इनमें सप्लायर की चूक के कारण ईमानदार खरीदारों से टैक्स मांगने से सुरक्षा देना शामिल है।

मोटर वाहनों और समूह बीमा जैसे कारोबारी खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC की सुविधा बढ़ाने का प्रस्ताव भी है। ITC के जरिए कारोबारी खरीद पर चुकाए गए टैक्स को अपनी टैक्स देनदारी में समायोजित कर सकते हैं।