उत्पादन कम होने की आशंका से देशभर की मंडियों में सोयाबीन में तेजी का दौर

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ऊंची कीमतों की वजह से सोयामील के निर्यात में 50 फीसदी की गिरावट

नई दिल्ली। Soyameal Export : देश में सोयाबीन का उत्पादन कम होने के बढ़ती आशंका ने सोयाबीन में तेजी का दौर ला दिया है। सोया मिलों की तरफ से की जा रही खरीदारी की वजह से दाम 7500 रुपये प्रति क्विंटल ऊपर पहुंच गए। घरेलू खपत अधिक होने के कारण सोयाखली के निर्यात में 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

सोयामील (खली) का इस्तेमाल मुख्य रूप से पशु और मुर्गीपालन के चारे में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है। बढ़ती कीमतें और आने वाले दिनों में कमी की संभावनाओं की वजह से पॉल्ट्री उद्योग सोयामील आयात बढ़ाने की मांग कर रहा है।

भारत में सोयाबीन से बनने वाले खली उत्पाद यानी सोयामील का बचा हुआ स्टॉक नए तेल वर्ष 2026-27 की शुरुआत में बढ़कर 1.93 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल इसी समय यह स्टॉक 0.68 लाख टन था।

यानी एक साल में इसमें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के ताजा अनुमान के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 तक देश में सोयाबीन का स्टॉक भी करीब 8 फीसदी बढ़कर 8.31 लाख टन हो गया।

सोपा के अनुसार, 30 सितंबर को समाप्त हुए तेल वर्ष 2025-26 में भारत से सोयामील का निर्यात घटकर 10 लाख टन रह गया। पिछले तेल वर्ष में यह 20.23 लाख टन था। यानी निर्यात में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई। निर्यात घटने की प्रमुख वजह घरेलू बाजार में सोयामील की ऊंची कीमतें मानी जा रही हैं। घरेलू बाजार में दाम अधिक होने से भारतीय सोयामील अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए कम प्रतिस्पर्धी हो गया।

निर्यात घटने के बावजूद देश में सोयामील की घरेलू खपत बढ़ी है। सोपा के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में पशु आहार क्षेत्र में इसकी खपत बढ़कर 63 लाख टन हो गई, जो पिछले साल 62 लाख टन थी। वहीं, खाद्य क्षेत्र में सोयामील की खपत 8 लाख टन से बढ़कर 9 लाख टन हो गई। इसके बावजूद सोयामील का उत्पादन पिछले साल के 89.56 लाख टन से घटकर 83.25 लाख टन रह गया। इसकी प्रमुख वजह सोयाबीन की कम उपलब्धता रही।

तेल वर्ष 2025-26 में भारत का सोयाबीन उत्पादन 128.82 लाख टन से घटकर 110.26 लाख टन रह गया। हालांकि, इस दौरान सोयाबीन का आयात तेजी से बढ़ा। पिछले तेल वर्ष में भारत ने महज 0.02 लाख टन सोयाबीन का आयात किया था, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 11 लाख टन हो गया। भारत मुख्य रूप से अफ्रीका के कम विकसित देशों से गैर-आनुवंशिक रूप से संशोधित (नॉन-जीएम) सोयाबीन आयात करता है।

महाराष्ट्र में उत्पादन घटने की संभावना
सोपा के अनुमान के अनुसार, खरीफ सीजन 2026 में देश का सोयाबीन उत्पादन 107.93 लाख टन रह सकता है, जबकि पिछले साल यह 110.26 लाख टन था। राज्यवार आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में उत्पादन 43.2 लाख टन से बढ़कर 57.2 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि महाराष्ट्र में उत्पादन 52.2 लाख टन से घटकर 34.9 लाख टन रह सकता है। देश का कुल उत्पादन 85 से 90 लाख टन तक सीमित रह सकता है।

इस साल सोयाबीन की बुवाई का क्षेत्र करीब 5 फीसदी बढ़कर 117.73 लाख हेक्टेयर हो गया, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। खेती का रकबा बढ़ने के बावजूद मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती हैं। सोयाबीन उत्पादन में कमी का असर आगे चलकर सोयामील की उपलब्धता, घरेलू कीमतों और निर्यात पर भी पड़ सकता है।