कोटा। जैनेश्वरी दीक्षा के पावन प्रसंग पर गुरुवार को चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में तीन दीक्षार्थियों की भव्य गोद भराई एवं बिंदौरी का आयोजन किया गया। मुनिश्री विवर्धन सागर एवं प्रवर्तक मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित समारोह में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर दीक्षार्थियों के संयम मार्ग पर अग्रसर होने की मंगलकामना की।
जयपुर में 16 दिसंबर 2026 को होने वाली जैनेश्वरी दीक्षा के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में धर्म, भक्ति और उल्लास का संगम देखने को मिला। विशुद्धसागर यतिराज के सान्निध्य तथा आदित्य सागर महाराज से दीक्षा ग्रहण करने जा रहे ब्रह्मचारी अतिशय भैया, ब्रह्मचारी विशाल भैया एवं ब्रह्मचारी रोहित भैया की गोद भराई की रस्म संपन्न हुई। दीक्षार्थियों को माला एवं मुकुट पहनाकर श्रीफल, मिश्री, काजू, बादाम, मेवे और वस्त्र भेंट किए गए।
इसके बाद मंदिर परिसर से बैंड-बाजे और भक्ति गीतों के साथ भव्य बिंदौरी निकाली गई। यात्रा कमला उद्यान, बी सेक्टर और चंचल विहार सहित कॉलोनी के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। मार्ग में ‘आदित्य सागर गुरूवर का दिल दीवाना हो गया’ जैसे भक्ति गीत गूंजते रहे। श्रद्धालु नाचते-गाते हुए यात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह घरों से निकलकर लोगों ने दीक्षार्थियों का स्वागत किया और उन्हें मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दीं।
धर्मसभा में मुनिश्री विवर्धन सागर एवं प्रवर्तक मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति आत्मकल्याण का सशक्त माध्यम है। मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मचिंतन और धर्म साधना की ओर अग्रसर होना चाहिए। मोक्षमार्ग पर चलना जीवन का परम लक्ष्य है। दीक्षा का मार्ग त्याग, संयम और आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है।

