नई दिल्ली। Turmeric Price: किचन में सबसे जरुरी मासले के तौर पर उपयोग की जाने वाली हल्दी की कीमतें लगातार बढ़ रही है। मांग में तेजी और बाजार में कम आपूर्ति के कारण कीमतों को और मजबूत कर रही है।
हल्दी की कीमतों में और तेजी आने के अनुमान के चलते किसान और स्टॉकिस्ट अपना माल बेचने से कतरा रहे हैं। वहीं, अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति और फसल की पैदावार पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
पिछले एक महीने में हल्दी के दाम 18 फीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि एक साल में दाल 80 फीसदी बढ़ चुके हैं। यह अब तक की रिकॉर्ड तेजी है। हाजिर बाजार में (पेरुंदुरई मंडी) हल्दी के दाम 23,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए। यह बीते सालों में हल्दी का रिकॉर्ड स्तर है।
वायदा बाजार (एनसीडीईएक्स) में हल्दी के दाम बढ़कर 24500 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए हैं। बाजार में हल्दी की कम आवक, प्रमुख उत्पादक इलाकों में कम बारिश और अगली फसल पर खतरे की संभावना के चलते आने वाले हफ्तों में भी कीमतों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
कर्नाटक में सूखे के संयुक्त सर्वे के अनुसार, राज्य में लगभग 18,000–20,000 हेक्टेयर के कुल खेती वाले क्षेत्र में से 13,446 हेक्टेयर में हल्दी की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिसकी कीमत 188.24 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पिछले सीजन के 20 लाख से अधिक बोरों की तुलना में, इस बार लगभग 15 लाख बोरे स्टॉक (कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक) बचने का अनुमान है, जो सप्लाई बफर में कमी को दर्शाता है।
सूखे और अलनीनों के कारण विदेशी खरीदारों ने हल्दी की मांग बढ़ा दी है हालांकि विदेशी मांग को पूरा करना भारतीय निर्यातकों को मुश्किल हो रहा है। जुलाई 2026 में भारत से हल्दी का निर्यात पिछले साल के 15,071 टन से 10% घटकर 13,489 टन रह गया।
हालांकि, अप्रैल-जुलाई के दौरान कुल निर्यात पिछले साल के 63,020 टन से 4% बढ़कर 65,476 टन हो गया। तुर्की को निर्यात 431% बढ़कर 3,007 टन, श्रीलंका को 644% बढ़कर 156 टन और नाइजीरिया को 983% बढ़कर 69 टन हो गया।
इरोड हल्दी मर्चेंट्स एंड गोडाउन ओनर्स एसोसिएशन के सचिव एम. सत्यमूर्ति के अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, तेलंगाना के निजामाबाद और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों सहित प्रमुख हल्दी उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की स्थिति कीमतों को ऊपर धकेल रही है।
उन्होंने बताया कि पानी की कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में हल्दी की बुवाई का रकबा पहले ही 20% से 30% तक घट चुका है और आने वाले महीनों में खेती में और कमी आने की आशंका है। सूखे का असर काफी गहरा होने की उम्मीद है, जिससे अगले साल हल्दी के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
हालांकि, साल 2026 में भारत में हल्दी के उत्पादन में लगभग 15% की वृद्धि होने का सरकारी अनुमान है। इसका मुख्य कारण खेती के रकबे में लगभग 20% की बढ़ोतरी है, खासकर महाराष्ट्र में। महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में मानसून की बेहतर स्थिति, और तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश के जलाशयों में पानी भरने से फसल बर्बाद होने की तत्काल चिंताएं कम हुई हैं। बारिश के बाद उत्तरी कर्नाटक में दोबारा बुवाई भी पूरी हो चुकी है, हालांकि अच्छी पैदावार के लिए मौसम का लगातार अनुकूल बने रहना जरूरी है।
अभी और चटक होगी हल्दी
कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए, जिन किसानों ने अपनी उपज का भंडारण कर रखा है। वे आगे दाम और बढ़ने की उम्मीद में अभी हल्दी बेचने से कतरा रहे हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि तकनीकी रूप से बाजार अभी भी मजबूत अपट्रेंड में है। हल्दी के कम उत्पादन की आशंका, कम कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक, सीमित किसानों की बिक्री और मजबूत घरेलू व निर्यात मांग जैसे फंडामेंटल बाजार को समर्थन दे रहे हैं।
हल्दी की खेती मुख्य रूप से इरोड, धर्मपुरी जिलों और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में की जाती है। इसकी खरीद-बिक्री इरोड और पेरुंदुरई की मंडियों के साथ-साथ करंगलपलायम और गोबिचेट्टीपलायम की कृषि उत्पादक सहकारी विपणन समितियों में होती है।

