नई दिल्ली। India China Trade: भारत और चीन के बीच व्यापार को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन भारतीय सामान को अपने बाजार में आसानी से बिकने नहीं देता। चीन की ओर से लगाए गए गैर-शुल्क प्रतिबंध दोनों देशों के बीच व्यापार की सबसे बड़ी रुकावट बन गए हैं।
इसकी वजह से भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्त मंत्री के मुताबिक, भारत पिछले 10 साल से अपने उत्पादों के लिए चीनी बाजार में जगह मांग रहा है, लेकिन इस दिशा में खास प्रगति नहीं हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की सालाना बैठकों के दौरान अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत की जेनेरिक दवाओं, मांस और कृषि उत्पादों की चीन में बिक्री की अच्छी संभावनाएं हैं। इसके बावजूद चीन भारतीय उत्पादों को अपने बाजार में पहुंचने से रोकने के लिए कई तरह के नियम और शर्तें लगाता है।
इनमें स्वास्थ्य, गुणवत्ता और दूसरे तकनीकी नियम शामिल हैं। इन्हें गैर-शुल्क बाधाएं कहा जाता है। यानी सामान पर सीधे आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय ऐसे नियम लगाना, जिनकी वजह से विदेशी कंपनियों के लिए अपना सामान बेचना मुश्किल हो जाए। सीतारमण ने कहा कि भारत लगातार बातचीत के जरिए इन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चीन इन बाधाओं का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटता।
10 साल में दोगुने से ज्यादा हुआ व्यापार घाटा
चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2015-16 में यह 52.7 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 112 अरब डॉलर पहुंच गया। आसान भाषा में कहें तो भारत चीन को जितना सामान बेचता है, उससे कहीं ज्यादा सामान वहां से खरीदता है। इसी अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने इस घाटे को कम करने के लिए चीन के खिलाफ जवाबी शुल्क लगाने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना है। उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया लंबी और कई बार थकाने वाली होती है, लेकिन भारत व्यापार विवादों को बातचीत से सुलझाने में विश्वास रखता है।
सीतारमण ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान (ASEAN) के साथ भारत के व्यापार समझौते की समीक्षा करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा समझौते का फायदा आसियान देशों को ज्यादा मिल रहा है, जबकि भारतीय कंपनियों और उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, भारत इस समझौते को जारी रखना चाहता है, लेकिन इसमें बदलाव जरूरी हैं ताकि दोनों पक्षों को बराबर फायदा मिल सके। वित्त वर्ष 2025-26 में आसियान देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा भी 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया था।
उन्होंने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) से बाहर रहने के भारत के फैसले को भी सही ठहराया। उनका कहना था कि सरकार को इस समझौते में शामिल होने से देश को पर्याप्त फायदा मिलने की उम्मीद नहीं थी।
मुश्किल हालात में भी भारतीय निर्यात बढ़ा
वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में व्यापार से जुड़ी परेशानियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने नए बाजार तलाशे हैं।
उनके मुताबिक, सितंबर में भारत के सामान और सेवाओं के कुल निर्यात में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। भारतीय कंपनियों ने उन देशों में भी अपना सामान बेचना जारी रखा है, जिन्होंने भारत के उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया है।
सीतारमण ने कहा कि भारत दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए नए समझौतों पर तेजी से काम कर रहा है। इनमें यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात और कनाडा जैसे देश शामिल हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर क्या कहा
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर भी वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच जल्द समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ाने के साथ वैश्विक कारोबार के हित में भी इस समझौते का जल्द पूरा होना जरूरी है। इससे पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया था कि इस दिशा में अभी काफी कुछ होना बाकी है।

