Thursday, July 9, 2026
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बिना टैक्स निर्यात के लिए मैन्यूअल फॉर्म जरूरी

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नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद से नए नियमों के जाल में फंसे निर्यातकों को दिल्ली सरकार स्पेशल सेल के जरिए सहूलियतें देने जा रही है। फिलहाल बिना टैक्स चुकाए निर्यात के लिए जरूरी फॉर्म FRD-11 कॉमन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने के चलते ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग ने इसे मैन्यूअली मुहैया कराने की सुविधा शुरू कर दी है।

सीबीईसी की ओर से 1 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि अगर निर्यातक बिना आईजीएसटी का भुगतान किए गुड्स या सर्विसेज की सप्लाई करना चाहता है तो उसे अपनी रेंज के असिस्टेंट कमिश्नर को GST-RFD-11 फॉर्म के साथ लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) या बॉन्ड सौंपना होगा।

इसकी शर्तें होंगी कि अगर वह इनवॉइस जारी करने के तीन महीने के भीतर तय गुड्स या सर्विस का निर्यात नहीं करता तो तीन महीना बीतने के 15 दिन के भीतर उसे तय आईजीएसटी के साथ ही ब्याज देना होगा।

दिल्ली ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग के स्पेशल कमिश्नर कपिल सिंह ने बताया कि जीएसटी कॉमन पोर्टल पर यह सुविधा अभी बहाल नहीं होने के चलते बड़े पैमाने पर निर्यातकों की ओर से शिकायतें आ रही थीं और एक्सपोर्ट ऑर्डर व कंसाइमेंट रुके पड़े थे।

विभाग ने अपने जीएसटी फैसिलिटेशन सेंटर में स्थानीय निर्यातकों के लिए एक सेल बनाया है, जहां से जीएसटी आरएफडी-11 फॉर्म लिया जा सकता है। फिलहाल यह फॉर्म सुबह 10.30 से 1.30 तक मिलेगा, जबकि एक्सेप्टेंस लेटर 2.30 से 4.00 बजे तक जारी होंगे।

उन्होंने बताया कि एलयूटी के लिए एक्सेप्टेंस लेटर एक साल के लिए वैलिड होगा, जबकि बॉन्ड के लिए इसकी वैधता 31 मार्च तक होगी। दिल्ली गुड्स एंड सर्विस टैक्स रूल्स के रूल 96ए के मुताबिक जीएसटी आरएफडी-11 के साथ बॉन्ड भरने के लिए एक बैंक गारंटी भी देनी होगी, जो बॉन्ड की रकम का 15 पर्सेंट होगी।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के जनरल सेक्रेटरी संजय शर्मा ने बताया कि एलयूटी और बॉन्ड के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि निर्यातक वास्तव में निर्यात कर रहा है। निर्यात चूंकि जीरो रेटेड है, ऐसे में टैक्स लाइबिलिटी तो नहीं बनती, लेकिन उसे पहले टैक्स जमा करना होता है और फिर रिफंड मिलता है।

लेकिन बिना टैक्स निर्यात के लिए जरूरी फॉर्म आरएफडी-11 जीएसटी कॉमन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने के चलते हजारों निर्यातकों का काम अधर में लटका था। स्टेट लेवल पर मैन्यूअल फॉर्म जारी होने से उन्हें काफी मदद मिलेगी।

 

वेंकैया नायडू बने देश के 13वें उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। वेंकैया नायडू देश के 13वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। नायडू ने अपनी शपथ हिंदी में ली।

इस मौके पर पीएम मोदी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद और विपक्षी दलों के नेता मौजूद थे। शपथ से पहले नायडू सुबह अपने घर से निकलकर सीधे राजघाट पहुंचे जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधी पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद वो डीडीयू पार्क पहुंचे जहां पं. दीनदयाल उपाध्याय को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। शपथ ग्रहण के बाद नायडू राज्यसभा के सभापति के नाते मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन का संचालन भी करेंगे।

इससे पहले गुरुवार को उन्होंने सदन ठप करने की प्रवृत्ति रोकने के लिए सख्ती बरतने के इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि सदन चलाने के लिए वे नियमों को लागू करेंगे।

नायडू ने निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम लिए बिना देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना के माहौल वाले बयान को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की असुरक्षा का मुद्दा केवल राजनीतिक फायदे के लिए उठाया जा रहा है।

राष्ट्रपति भवन में नायडू को सुबह 10 बजे उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद नायडू राष्ट्रपति भवन से सीधे संसद भवन पहुंचेंगे और सभापति के रूप में सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करेंगे।

निर्वतमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल गुरुवार की मध्यरात्रि को खत्म हो गया। सक्रिय राजनीतिज्ञ से संवैधानिक पद के अपने नए सफर की शुरुआत से ठीक पहले नायडू ने अंसारी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना की बात कर रहे हैं। यह राजनीतिक प्रोपेगैंडा है।

हकीकत यह है कि पूरे दुनिया की तुलना में भारत में अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है। नायडू ने कहा कि वास्तव में भारतीय समाज सबसे ज्यादा सहिष्णु है। सहिष्णुता की वजह से ही हमारा लोकतंत्र इतना सफल है।

नायडू ने एक समुदाय की बात करने जैसी प्रवृत्ति को गलत बताते हुए कहा कि इससे दूसरे समुदायों पर असर पड़ेगा। इसीलिए हमें सबकी बराबरी की बात करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का शीर्ष संवैधानिक पदों पर पहुंचने से साफ है कि भेदभाव जैसी कोई बात ही नहीं।

गोरक्षा के नाम पर हुए हमलों के संदर्भ में नायडू ने कहा कि भारत इतना बड़ा देश है और ऐसे में इक्का-दुक्का मामले अपवाद हैं। कुछ लोग राजनीतिक वजहों से ऐसी घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तूल देने से बाज नहीं आते।

आम बजट दो साल बाद 26 लाख करोड़ का होगा

नई दिल्ली । विकास दर की रफ्तार में अभी भले ही उछाल नहीं आए लेकिन सरकार व्यय करने में कंजूसी नहीं करेगी। सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सार्वजनिक व्यय में खासी वृद्धि जारी रखेगी। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार का कुल व्यय यानी आम बजट करीब 26 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।

खास बात यह है कि इस आम बजट में रक्षा क्षेत्र का आवंटन अच्छा खासा होगा क्योंकि अगले दो वर्षो में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि होगी। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बृहस्पतिवार को मध्यावधि व्यय फ्रेमवर्क वक्तव्य लोकसभा में रखा जिसमें ये अनुमान व्यक्त किए गए हैं।

हालांकि व्यय के ये अनुमान विकास दर के जिन आंकड़ों को आधार मानकर तय किया गया है वे अधिक उत्साहजनक नहीं है। इसे देखने पर पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर (बाजार मूल्य पर) जहां 11.75 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में यह 12.3 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय के इस दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार का कुल व्यय 25.95 लाख करोड़ रुपये होगा जबकि चालू वित्त वर्ष में यह 21.46 लाख करोड़ रुपये है।  वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार के कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का आंकड़ा भी बढ़कर 3.90 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा जो कि चालू वित्त वर्ष में 3.09 लाख करोड़ रुपये है।

सरकार फिलहाल अपने पूंजीगत व्यय का एक चौथाई से अधिक रक्षा क्षेत्र पर खर्च करती है। माना जा रहा है कि वर्ष 2019-20 में रक्षा क्षेत्र का पूंजीगत आवंटन 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 1,04,973 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि अगले दो वर्षो में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में खासी वृद्धि होगी।

दो साल में सब्सिडी का बोझ और हल्का करेगी सरकार
लंबित आर्थिक सुधारों को लागू करने के साथ-साथ सरकार साल दर साल सब्सिडी का बोझ भी हल्का करेगी। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि अगले दो वर्षो में सरकार पर सब्सिडी का बोझ घटकर जीडीपी का 1.3 प्रतिशत रह जाएगा।

सब्सिडी में यह कमी मुख्यत: रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी और खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी को घटाकर की जाएगी। हालांकि खाद्य सब्सिडी आने वाले वर्षो में भी बढ़ती रहेगी। मंत्रालय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 सब्सिडी पर सरकार का व्यय घटकर जीडीपी का 1.3 प्रतिशत रह जाएगा जो कि चालू वित्त वर्ष में 1.4 प्रतिशत है।

खाद्य सब्सिडी का बोझ 2019-20 में बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि खाद्य सब्सिडी में बढ़ने की वजह भारतीय खाद्य निगम की देनदारियों को चुकाने के चलते बढ़ेगी। वैसे खाद्य सब्सिडी को घटाने के लिए भी सरकार प्रयास करेगी।

मंत्रालय का कहना है कि वर्ष 2015-16 में खरीफ मौसम में यूरिया का उपभोग 152.37 लाख मीटिक टन से घटकर 2016-17 में 143.71 लाख मीटिक टन रह गया है। इससे खाद सब्सिडी में लगभग 1000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। 

300 से ज्यादा पॉइंट गिर कर खुला BSE सेंसेक्स

नई दिल्ली। नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों में गिरावट का असर इंडियन शेयर मार्केट पर भी पड़ा है। शुक्रवार को बाजार सेंसेक्स करीब 300 पॉइंट गिरकर खुला जबकि निफ्टी में भी करीब 100 अंकों की गिरावट देखी गई।

शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक वक्त 330 पॉइंट फिसलकर 31,531.30 के निचले स्तर तक पहुंच गया, हालांकि थोड़ी देर बाद इसमें सुधार दिखी।

9.20 बजे 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का यह संवेदी सूचकांक 286 पाइंट गिरकर 31,244 पर ट्रेड कर रहा था। उधर, 50 शेयरों वाला नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 94 पॉइंट गिरकर 9,726.10 तक आ गया। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 9,704.35 अंक के निचले स्तर तक आ गिरा था।

निफ्टी में पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा और विप्रो के शेयर ही चढ़े। जे कुमार इन्फ्रा और प्रकाश इंडस्ट्रीज के शेयर तो 20 प्रतिशत तक गिर गए। वहीं, जेपी असोसिएट्स, इंडो काउंट, बालाजी टेलिफिल्म्स, एससीआई और इंडो अमाइंस के शेयर भी 6 प्रतिशत तक गिरे।

हालांकि, गुजरात गैस और एमओआईएल के शेयरों ने अर्निंग्स पर 4 प्रतिशत की मजबूती दिखाई। दरअसल, गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की उत्तर कोरिया को नए सिरे से दी गई चेतावनी से अमेरिकी बाजारों ने गोता लगा दिया। इसका असर एशियाई देशों के बाजारों पर भी देखा गया।

Whatsapp यूजर्स जल्द ट्रांसफर कर पाएंगे पैसा

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मुंबई।  इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप जल्द ही यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिये इंस्टेंट मनी ट्रांसफर फीचर जारी कर सकता है। यह फीचर व्हाट्सएप के नए बीटा अपडेट में देखा गया है।

ब्लॉग वेबसाइट WABetaInfo के अनुसार, व्हाट्सएप UPI सिस्टम के जरिये बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर की सर्विस मुहैया कराएगा। व्हाट्सएप के नए वर्जन 2.17.295 के तहत इस सर्विस का जिक्र किया गया है।

एंड्रॉयड के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप पेमेंट सेक्शन अभी तैयार किया जा रहा है।ब्लॉग में यह भी बताया कि इस सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को व्हाट्सएप पेमेंट और बैंक की नियम व शर्तें स्वीकार करनी होंगी।

फंड ट्रांसफर की सुविधा देता है यूपीआई –
यूपीआई मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिये दो बैंकों के बीच इंस्टेंट फंड ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। इसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लॉन्च किया था। 200 मिलियन एक्टिव यूजर्स के साथ व्हाट्सएप यूपीआई सर्विस को ऐप में जोड़ने जा रही हैं।

इससे यूजर्स का अनुभव पहले से ज्यादा बढ़ जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो व्हाट्सएप एनपीसीआई और यूपीआई के जरिये भुगतान लेने वाले बैंक्स के साथ बातचीत कर रही है।

 WeChat और हाइक मैसेंजर जैसे मोबाइल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पहले से ही यूपीआई आधारित पेमेंट सर्विस मुहैया करा रहे हैं। NPCI ने जुलाई में बताया था कि यूपीआई ने जून 2017 के आखिरी तक 10 मिलियन ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार किया था।

यूपीआई ट्रांजेक्शन सिस्टम को 21 बैंकों के साथ अगस्त 2016 में लॉन्च किया गया था। अब इसके साथ 50 बैंक जुड़ गए हैं। बताया जा रहा है कि 22 फीसद ट्रांजेक्शन मर्चेंट आधारित हैं जिसमें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

देश के सबसे बड़े औद्योगिक मेले का आयोजन जयपुर में

जयपुर। जनवरी में देश के छोटे-मोटे करीब 800 उद्यमी जयपुर में जुटेंंगे। उद्योग विभाग व लघु उद्योग भारती के बीच आज उद्योग भवन में इस आशय का एमओयू संपन्न हुआ। एमओयू पर उद्योग आयुक्त  कुंजीलाल मीणा और उद्योग भारती की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी मित्तल ने हस्ताक्षर किए।

उद्योग आयुक्त कुंजीलाल मीणा ने बताया कि लघु उद्योग भारती के सहयोग से आयोजित यह औद्योगिक मेला प्रदर्शनी प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक मेला होगा।

उन्होंने बताया कि इसमें देश के विभिन्न प्रदेशाें के औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ ही प्रदेश के अनेक औद्योगिक प्रतिष्ठान अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे।

उन्होेंने बताया कि लघु उद्योग भारती के सहयोग से यह भी प्रयास किए जाएंगे कि इस औद्योगिक मेले के दौरान एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ब्रिक सम्मेलन भी आयोजित हो जिससे मेले को अंतरराष्ट्रीय स्वरुप दिया जा सके।

इसके अलावा लघु उद्योग भारती के सहयोग से प्रदेश में एमएसएमई कॉन्कलेव और स्टार्ट अप अवार्ड जैसे कार्यक्रम आयोजित करते हुए प्रदेश के एमएसएमई उद्योगों को अपने उत्पादों को प्रदर्शन के साथ ही देश विदेश में बाजार मिल सकेगा।

लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी मित्तल ने बताया कि औद्योगिक मेले में देश के औद्योगिक प्रतिष्ठानों की अधिक से अधिक भागीदारी तय की जाएगी।

अध्यक्ष  मित्तल और महासचिव  महेन्द्र कुमार खुराणा ने बताया कि राजस्थान के उद्योग विभाग और लघु उद्योग भारती परस्पर सहयोग से प्रदेश के उद्योगों को नई पहचान दिलाने के संयुक्त प्रयास करेंगी। इस अवसर पर अतिरिक्त निदेशक पी.के. जैन भी उपस्थित थे।

चांदी 40,000 के पार, सोना 340 रुपये उछला

नई दिल्ली । दिल्ली के सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी खरीदारी के कारण गोल्ड 340 रुपये बढ़कर 29890 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। गोल्ड का यह स्तर दो महीनों का उच्चतम स्तर है। वहीं चांदी ने भी 40,000 का स्तर पार कर लिया है।

चांदी 570 रुपये बढ़कर 40,070 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। चांदी की कीमतों में यह तेजी इंडस्ट्रीयल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से तेज उठान के चलते देखने को मिली है।

अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच चल रहे भूराजनैतिक तनाव (जियो पॉलिटिकल टेंशन) के कारण सोने की मांग में तेजी देखने को मिली है। घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी मांग के चलते कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.09 फीसद बढ़कर 1278 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.44 फीसद बढ़कर 16.99 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। देश की राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद की शुद्धता वाला सोना 340 रुपये बढ़कर क्रमश: 29890 और 29740 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है।

सोने का यह स्तर आखिरी 7 जून को देखा गया था। जानकारी के लिए बता दें कि बीते सत्र में गोल्ड 200 रुपये चढ़ा था। गिन्नी हालांकि 24500 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर बरकरार रही है।

सोने की तरह चांदी तैयार भी 570 रुपये बढ़कर 40,070 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 1195 रुपये बढ़कर 38990 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। 

 

बैंक कर्मियों व अधिकारियों ने किया प्रदर्शन

कोटा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रव्यापी आव्हान पर कोटा में बैंक कर्मी एवं अधिकारियों ने शाम 5.15 बजे ओरिएण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स की घोड़ेवाला चौराहा मार्ग स्थित एरोड्राम सर्किल शाखा के समक्ष प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के जन विरोधी बैंकिंग सुधार, कॉर्पोरेट घरानों के एनपीए को बट्टे खाते में डालने, बैंक प्रभार बढ़ाने के विरोध में तथा एनपीए की वसूली हेतु कारगर कदम उठाने के लिए संसदीय समिति की रिपोर्ट लागू करने, सभी वर्गों में नई भर्ती करने, बैंक बोर्ड ब्यूरो भंग करने, बैंक कर्मियों अधिकारियों के मुद्दे तुरंत हल करने आदि मांगों के समर्थन में नारे लगाए गए।

इन्ही मुद्दों को लेकर 22 अगस्त को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आव्हान किया गया है। प्रदर्शनकारी बैंक कर्मी एवं अधिकारियों को पदम पाटोदी, विपिन चोरायवाल, सुशील मेहता,मोहम्मद अकरम, देवनारायण,संजीव झा, गजानंद मीणा, अनिल ऐरन,डी के गुप्ता, सुरेश खंडेलवाल, रमेश सिंह,रवि कांत शर्मा, मुनीश्वर पाइक, आर बी मालव, मिर्जा नफीस बेग, भारत भूषण गौतम आदि ने संबोधित किया

सुप्रीम कोर्ट का ऐंबी वैली की नीलामी रोकने से इनकार

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नई दिल्ली। सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट से फिर बड़ा झटका लगा है। पुणे के निकट अपने प्रीमियम प्रॉजेक्ट ऐंबी वैली की नीलामी रोकने के लिए सहारा ग्रुप ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने नीलामी रोकने से इनकार कर दिया।

मार्केट रेग्युलेटर सेबी को बकाया रकम न चुकाने की वजह से ऐंबी वैली की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप से लगभग 20,000 करोड़ रुपये चुकाने के लिए कहा था। यह रकम उन इनवेस्टर्स को दी जानी है जिन्होंने सेबी की ओर से अवैध घोषित की गई सहारा ग्रुप की दो स्कीमों में इनवेस्टमेंट किया था।

सेबी का दावा है कि यह रकम अब मूल और ब्याज को मिलाकर करीब 37,000 करोड़ रुपये हो गई है। सहारा ने अभी तक प्रिंसिपल अमाउंट के एक बड़े हिस्से का भुगतान नहीं किया है। कंपनी को अभी प्रिंसिपल अमाउंट के हिस्से के तौर पर 9,000 करोड़ रुपये और चुकाने हैं।

जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने सहारा ग्रुप पर दबाव बनाना जारी रखा है। बेंच ने कहा कि ब्याज की रकम चुकाने को लेकर सहारा ग्रुप की आपत्ति पर बेंच के सुनवाई करने से पहले ये भुगतान किया जाए।

25 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में सहारा ग्रुप ने रकम चुकाने के लिए और समय मांगा था। सहारा की ओर से कोर्ट में दिए गए प्रपोजल में बाकी की रकम देने के लिए 18 महीने का समय मांगा गया था। लेकिन बेंच इसके लिए अधिक समय नहीं देना चाहती।

बेंच ने कंपनी को प्रत्येक तीन महीने में 1,500 करोड़ रुपये की किस्त चुकाने के लिए कहा है। ऐसा न करने पर सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय को दोबारा जेल भेजा जा सकता है। रॉय को दो वर्ष तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में रहने के बाद पिछले वर्ष मई में पैरोल पर रिहा किया गया था। इसके बाद से उनकी पैरोल कई बार कुछ महीनों के लिए बढ़ाई जा चुकी है।

कोर्ट ने इसके साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट के रिसीवर को ऐंबी वैली की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा है। सहारा ग्रुप ने ऐंबी वैली की कीमत 39,000 करोड़ रुपये से अधिक लगाई है। बेंच ने पहले ही ऐंबी वैली की बिक्री से जुड़े नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है।