Saturday, July 4, 2026
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नौकरी बदलने पर भविष्य निधि ट्रांसफर दावे की जरूरत नहीं

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने यह भी फैसला किया है कि नया डिक्लेयरेशन फॉर्म (F-11) ऑटो ट्रांसफर के सभी मामले में फॉर्म-13 की जगह लेगा।

नई दिल्ली। रिटायरमेंट फंड बॉडी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के मेंबर्स को अब नौकरी बदलने पर फॉर्म-13 के जरिए अलग से कर्मचारी भविष्य निधि ट्रांसफर दावे की जरूरत नहीं है, बल्कि यह ऑटोमैटिक ही हो जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब नए नियोक्ता के पास जॉइनिंग के दौरान ही कर्मचारी नए संयुक्त F-11 फॉर्म में अपने पुराने EPF अकाउंट की जानकारी दे सकते हैं।

अधिकारी के मुताबिक, एक बार आप F-11 में कर्मचारी भविष्य निधि अकाउंट की डीटेल्स दे देते हैं तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन आपके फंड को ऑटोमैटिक रूप से नए अकाउंट में ट्रांसफर कर देगा।

एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने नए F-11 फॉर्म के इस्तेमाल का फैसला किया है, जिसमें कर्मचारी अपने नियोक्ता के जरिए बैंक अकाउंट और आधार नंबर आदि की जानकारी उपलब्ध कराता है।

अभी नौकरी बदलने पर संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को नौकरी बदलने पर कर्मचारी भविष्य निधि ट्रांसफर के लिए फॉर्म-13 भरना होता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने यह भी फैसला किया है कि नया डिक्लेयरेशन फॉर्म (F-11) ऑटो ट्रांसफर के सभी मामले में फॉर्म-13 की जगह लेगा।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन हर साल करीब 1 करोड़ दावे प्राप्त करता है, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि निकासी, पेंशन फिक्सेशन, डेथ क्लेम और कर्मचारी भविष्य निधि ट्रांसफर जैसे दावे शामिल हैं। कुल प्राप्त दावों में से 10-15 फीसदी ट्रांसफर के होते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन विकल्प भी उपलब्ध है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर भी पेश किया है, जोकि संगठित क्षेत्र के कर्मचारी के लिए लाइफटाइम के लिए एक ही रहता है।

जल्द ही पेमेंट बैंक का काम करेंगे अब पोस्टमैन

इसके जरिए बस और ट्रेनों के अनारक्षित टिकट भी ले सकते हैं, जो कैश पर ही निर्भर है

नई दिल्ली। पोस्टमैन को भूले तो नहीं हैं आप? क्या कहा बहुत दिनों से आपको उनकी जरूरत नहीं पड़ी। जल्द ही फिर पोस्टमैन आपके काम आएंगे। घर-घर चिट्ठी पहुंचाने वाले डाकिए अब जल्द चलते-फिरते पेमेंट बैंक के रूप में काम करेंगे। वे हाई टेक डिवाइस के जरिए कई वित्तीय लेनदेन को आपके घर आकर पूरा करेंगे।

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक मार्च 2018 तक अपने ऑपरेशन को राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च करने की तैयारी में है। 1.5 लाख पोस्टमैन के लिए डिवाइस के कॉन्ट्रैक्ट की तैयारी की जा रही है।

माइक्रो एटीएम जैसे इस डिवाइस में बायॉमीट्रिक रीडर, प्रिंटर और डेबिट-क्रेडिट कार्ड रीडर जुड़ा होगा। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के चीफ एग्जिक्युटिव एपी सिंह ने बताया कि 2 लाख डिवाइस के लिए टेंडर तैयार है और इसे एक महीने के भीतर जारी किया जा सकता है।

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के लिए बैकेंड सिस्टम तैयार करने के लिए HP Enterprise का चुनाव किया गया है। एपी सिंह ने कहा, ‘इसके पीछे विचार पेमेंट्स को बैंकों से जोड़ने का है। गैस, बिजली, मोबाइल, डीटीएच के बिलों और स्कूल फीस जैसे करीब एक दर्जन पेंमेंट की पहचान हमने की है, जिसे पेमेंट बैंक के जरिए पूरा सकते हैं।’

इंडिया पोस्ट एक ऐप पर भी काम कर रहा है, जिसके जरिए इन पेमेंट्स को अंजाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हमें डिपॉजिट की बजाय पेमेंट पर फोकस करना है।’ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से पेमेंट बैंकों को डिपॉजिट लेने की अनुमति नहीं है। रेवेन्यू के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक हर ट्रांजैक्शन पर फीस लेगा।

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पोस्ट ऑफिस में 35 करोड़ अकाउंट्स हैं और वे अगले 5 साल में 8 करोड़ परिवारों पर को पेमेंट बैंक से जोड़ेने पर फोकस करेंगे। इसके जरिए बस और ट्रेनों के अनारक्षित टिकट भी ले सकते हैं, जो कैश पर ही निर्भर है।  सिंह के मुताबिक सब्जी और फल खरीद जैसे छोटे बिल पेमेंट और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम भी रडार पर है।

प्रधानमंत्री आवास योजना: होम लोन पर ब्याज सब्सिडी की अवधि बढ़ाई

यह स्कीम इस साल दिसंबर में खत्म हो रही थी, लेकिन सरकार ने इसे 31 मार्च 2019 तक बढ़ा दिया है।

मुंबई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मिडल इनकम ग्रुप को मिलने वाली ब्याज सब्सिडी के फायदे को अगले 15 महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह स्कीम इस साल दिसंबर में खत्म हो रही थी, लेकिन सरकार ने इसे 31 मार्च 2019 तक बढ़ा दिया है।

इस स्कीम के तहत होम लोन के ब्याज पर 2.60 लाख रुपये का फायदा मध्यम आय वर्ग के लोग उठा सकते हैं। आवास और शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसंबर 2016 के अपने भाषण में घोषणा की थी कि मध्यम आय वर्ग के लोगों को भी होम लोन सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। पीएम ने बताया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) का लाभ 31 दिसंबर 2017 तक लिया जा सकता है।

कौन, कैसे, कहां से ले सकता है योजना का लाभ?
मध्यम आय वर्ग के ऐसे लोगों को जिनकी सालाना आय 6 लाख से 12 लाख रुपये के बीच है उन्हें 9 लाख रुपये के 20 साल अवधि वाले होम लोन पर 4 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी मिलेगी।

उदाहरण के लिए, अगर होम लोन पर ब्याज की दर 12 प्रतिशत है तो आपको इस योजना के तहत यह 8 प्रतिशत ही चुकानी होगी। 12 लाख रुपये से 18 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को 3 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी मिलेगी।

2022 तक सभी को घर के टारगेट को पाने के लिए सरकार ने इस योजना का लाभ लेने की अवधि बढ़ाई है। मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि टारगेट पूरा करने के लिए हम निजी निवेशकों को किफायती घर बनाने की योजना में निवेश करने के लिए जोड़ना चाहते हैं।

अब आप खाइए सब्जियों के भी केप्सूल, देखिए वीडियो

जो लोग लहसुन उसकी गंध के कारण नहीं खा पाते हैं, वे लहसुन के केप्सूल खा सकते है, लहसुन के फायदे तो आप सभी जानते हैं

कोटा। अभी तक आपने दवाइयों के केप्सूल देखे या खाये होंगे, लेकिन अब आप सब्जियों के भी केप्सूल खा सकते हैं। जी हाँ यह सच है। कल्पना को साकार रूप देने का काम किया है कृषि विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर डॉ. ममता तिवारी ने। वह विश्वविद्यालय की खाद्य प्रसंकरण यूनिट की इंचार्ज हैं

उन्होंने हमारे चैनल LEN-DEN NEWS को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि कैप्सूल बनाने की शुरुआत लहसुन के पाउडर से की गई थी।

बाद में उन्होंने पालक, गाजर, आंवला, गिलोय, सहजन, मेथी, सफ़ेद मूसली, अजवायन, गांगडी, किनोवा और अश्वगंधा के केप्सूल बनाए। उन्होंने बताया कि छह तरह के केप्सूल की लेबोरेट्री टेस्टिंग हो चुकी है। उनकी प्रसंस्करण यूनिट में सोयबीन के भी कई उत्पाद तैयार किये जाते हैं,जैसे सोया बड़ी, सोया पनीर आदि,अधिक जानकारी के लिए आप यह वीडियो देखना नहीं भूलें। आप हमें youtube, facebook और twitter पर भी फॉलो कर सकते हैं।  

टाटा मोटर्स की बहुप्रतीक्षित एसयूवी-टाटा नैक्सन लॉन्च

टाटा मोटर्स ने कहा, युवा और प्रगति पसंद व्यक्तियों के लिए लाइफ स्टाइल एसयूवी के रूप में पेश नैक्सन हमारी सोच में इसी बदलाव के चलते सामने आने वाला उत्पाद है, जो टाटा मोटर्स के बाजार में और विस्तार करेगा

कोटा। टाटा मोटर्स ने आज जैन-नैक्सट लाइफ स्टाइल एसयूवी-टाटा नैक्सन के लॉन्च के साथ ही तेजी से बढ़ते कॉम्पैक्ट एसयूवी वर्ग में प्रवेश की घोषणा की है।

पर्सनल कार ग्राहकों को लक्षित कर पेश टाटा नैक्सन कंपनी की इंपैक्ट डिजाइन’ फिलॉसफी पर आधारित चौथा वाहन है। इसमें ग्लोबल और कंटेपरेरी डिजाइन तथा अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ टैक्नोलॉजी एवं खूबियां शामिल हैं।

पेट्रोल संस्करण और डीज़ल संस्करण के साथ टाटा नैक्सन इस श्रेणी में सबसे प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध एसयूवी है। टाटा नैक्सन देशभर में टाटा मोटर्स के 650 अधिकृत सेल्स आउटलेट्स पर उपलब्ध है।

लॉन्च के अवसर पर मयंक पारीक, प्रेसीडेंट-पैसेंजर व्हीकल बिजऩेस यूनिट, टाटा मोटर्स ने कहा, युवा और प्रगति पसंद व्यक्तियों के लिए लाइफ स्टाइल एसयूवी के रूप में पेश नैक्सन हमारी सोच में इसी बदलाव के चलते सामने आने वाला उत्पाद है, जो टाटा मोटर्स के बाजार में और विस्तार करेगा।”

टाटा नैक्सन का जबर्दस्त डिजाइन ब्रेकिंग द बॉक्स” के रूप में ऐराडायनमिक सिलुहेट में पेश है। कार का यह डिजाइन इसके स्पोर्टी चरित्र को उभारता है और एसयूवी डिजाइन को एसयूवी की उपयोगिता तथा स्पोट्र्स कूपे की स्टाइल में ढालता है।
टाटा नैक्सन चार वेरिएंट्स में उपलब्ध है तथा पांच आकर्षक रंगों-वरमॉन्ट रैड, मोरक्कन ब्लू, सिएटल सिल्वर, ग्लास्गोग्रे और कैलगरी व्हाइट में आएगी और इसके साथ ग्राहकों को मिलेगी 750000 किलो मीटर अथवा 2 साल, जो भी कम हो की वारंटी।

वित्त मंत्री पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं कर सकते?

रेवन्यू की कमी को पूरा करने का काम पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स से मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी से ही हो रहा है, वित्त वर्ष 2013 में एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन में पेट्रोल और डीजल का हिस्सा 26 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2016 में 54 प्रतिशत तक पहुंच चुका है

नई दिल्ली। करीब एक हफ्ते से सरकार देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने पर अपना फोकस कर रही है। गुरुवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि केंद्र सरकार आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान कर रही है।

इससे एक दिन पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार आर्थिक दशा सुधारने के लिए नए तरीकों पर ध्यान दे रही है। जेटली पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों को कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने के विकल्प को नकार चुके हैं।

उनका तर्क था कि सरकार को सार्वजनिक खर्च बढ़ाने के लिए रेवन्यू की जरूरत है जिसके बिना ग्रोथ पर असर पडे़गा। उन्होंने कहा, ‘आपको समझना चाहिए कि सरकार को चलाने के लिए रेवन्यू की जरूरत है। आप हाइवे कैसे बनाएंगे?’

इकॉनमी का हाल
यह साफ है कि अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं है। जीडीपी विकास दर अप्रैल-जून तिमाही में तीन साल के निचले स्तर पर गिर 5.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। यही नहीं वित्त मंत्रालय ने बुधवार को ट्वीट कर बताया कि निजी निवेश भी गिरा हुआ है, जिस पर सरकार काम कर रही है।

कुछ दिन पहले पूर्व पीएम और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने निजी निवेश के बारे में कहा था कि प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट पूरी तरह से धड़ाम है और अर्थव्यवस्था केवल सार्वजनिक खर्च के भरोसे चल रही है।

पेट्रोल-डीजल सरकार का सहारा
अर्थव्यवस्था की बुरी हालत में सरकार के खजाने को चलाने का काम पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स ही कर रहे हैं। कुछ ही दिन पहले पेट्रोल और डीजल के रेट तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। ऐसा तब है जब कच्चे तेल के दाम आधे हो चुके हैं।

रेवन्यू की कमी को पूरा करने का काम पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स से मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी से ही हो रहा है। वित्त वर्ष 2013 में एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन में पेट्रोल और डीजल का हिस्सा 26 प्रतिशत था जो वित्त वर्ष 2016 में 54 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

सत्ताधारी बीजेपी के आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने पेट्रोलियम मंत्रालय के डेटा को ट्वीट करते हुए बताया कि पेट्रो प्रॉडक्ट्स से केंद्र सरकार से ज्यादा फायदा राज्य सरकारों के रेवन्यू को होता है।

एक्साइज ड्यूटी से मिलने वाले रेवन्यू में भी बढ़ोतरी हुई है। साफ है कि सरकार पेट्रो प्रॉडक्ट्स से होने वाले फायदे को आपकी जेब तक नहीं पहुंचाने वाली।

कोई और रास्ता?
इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों से सरकार की बड़ी कमाई हो रही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकार दूसरे तरीकों के बारे में नहीं सोच रही।

गुरुवार को वित्त मंत्रालय के हैंडल से किए गए ट्वीट्स में बताया गया कि सरकार विनिवेश के जरिए भी रेवन्यू बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसके अलावा सरकार आर्थिक दशा को सुधारने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये खर्च कर इकॉनमी को पटरी पर लाएगी।

ग्लोबल तेजी से सोना 350 रुपये उछला, चांदी भी महंगी

भू-राजनैतिक तनाव के कारण निवेशक सेफ हेवन की तलाश कर रहे हैं, इस वजह से सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली है

नई दिल्ली । दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में रिकवरी देखने को मिली है। सकारात्मक वैश्विक संकेत, रुपये में पांच महीने की गिरावट और स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी मांग के चलते सोने में तेजी दर्ज की गई है। सोना 350 रुपये बढ़कर 30850 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

इसी तरह चांदी की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई है। इंडस्ट्रीयल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से बढ़े उठान के कारण चांदी 400 रुपये चढ़कर 40700 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।

सर्राफा कारोबारियों का मानना है कि हाल में शुरू हुए भू-राजनैतिक तनाव (जियो-पॉलिटिकल टेंशन) के कारण निवेशक सेफ हेवन की तलाश कर रहे हैं। इस वजह से सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।

इंट्रा डे में रुपया 34 पैसे की गिरावट के साथ पांच महीने के निचले स्चर पर आ गया, इस कारण आयात मंहगा हो गया। इससे सोने की कीमतों को समर्थन मिला जिससे कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

वैश्विक स्तर पर सोना 0.57 फीसद तेजी के साथ 1298 डॉलर प्रति औंस के स्तर आ गया। वहीं, चांदी 0.21 फीसद की तेजी के साथ 16.97 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।

इसके अलावा नवरात्र के चलते घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से मांग बढ़ी है। इससे भी कीमतों को समर्थन मिला है।

दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 350 रुपये बढ़कर क्रमश: 30850 रुपये और 30700 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गई हैं।

बीते गुरुवार के कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में 250 रुपये की गिरावट देखने को मिली थी। गिन्नी के भाव हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर स्थिर रहे हैं।

चांदी तैयार 400 रुपये बढ़कर 40700 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 265 रुपये की तेजी के साथ 39930 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। 

ऑनलाइन आयुर्वेद मार्केट प्लेस के लिए डाबर ने एमेजॉन से मिलाया हाथ

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कंपनी ने एक बयान में कहा कि इस मार्केटप्लेस का मकसद मरीजों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सभी तरह की स्वास्थ्य और निजी देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराना है

नई दिल्‍ली। रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनी डाबर इंडिया ने एक ऑनलाइन आयुर्वेद मार्केटप्लेस के लिए ई-वाणिज्य कंपनी एमेजॉन से हाथ मिलाया है। इस पर मार्केटप्लेस पर देश में उपलब्ध सभी आयुर्वेदिक ब्रांड और उत्पाद उपलब्ध होंगे।

डाबर स्वयं कई तरह के आयुर्वेद उत्पादों और दवाओं का निर्माण करती है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि इस मार्केटप्लेस का मकसद मरीजों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सभी तरह की स्वास्थ्य और निजी देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराना है। डाबर के अनुसार इस विशेष ई-मार्केटप्लेस का संचालन एमेजॉन इंडिया करेगी, जबकि इसकी सामग्री का विकास डाबर इंडिया करेगी।

डाबर इंडिया के कार्यकारी निदेशक (ग्राहक देखभाल कारोबार) केके चुटानी ने कहा, ग्राहक कंपनी, ब्रांड और बीमारियों के हिसाब से इस पर सर्च कर सकेंगे और देश में उपलब्ध सभी तरह के आयुर्वेद उत्पादों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी। इस पर बाबा रामदेव द्वारा प्रवर्तित पतंजलि और हिमालया जैसी कंपनी के उत्पाद भी शामिल होंगे।

नार्थ कोरिया के न्यूक्लियर हमले के भय से सेंसेक्स 450 अंक से ज्यादा टूटा

नई दिल्ली। हफ्ते के आखिरी दिन नार्थ कोरिया के न्यूक्लियर हमले के भय से बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। एशियाई बाजारों के कमजोर प्रदर्शन का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ा और मार्केट शुरू गिरावट के साथ हुआ और बंद भी।

सेंसेक्स 450 अंक टूट कर 31,922 के स्तर पर बंद हुआ और निफ्टी 10,000 के आंकड़े से नीचे गिरते हुए 155 अंक गिर 9,965 अंकों पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में 1.3 प्रतिशत और निफ्टी में 1.5 प्रतिशत की गिरावट रही। अगर गिरावट के प्रतिशत की बात करें तो निफ्टी की यह इस साल की सबसे बड़ी गिरावट है।

बाजार में गिरावट का मुख्य कारण दक्षिण कोरिया के प्रशांत महासागर में परमाणु हथियार का परीक्षण करने की आशंका है। इसका एशियाई मार्केट्स पर बुरा असर पड़ा।

इस आशंका से मेटल, रियल्टी, बैंकिंग, ऑटो, एफएमसीजी शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई। अधिकतर इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

मोदी सरकार ने माना, 60% घट गए नई नौकरियों के अवसर

अर्थशास्त्री सारथी आचार्य का कहना है कि नई नौकरियों में गिरावट आने की सबसे बड़ी वजह मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ में तेज गिरावट है

नई दिल्ली। मोदी सरकार नई नौकरियां पैदा करने में नाकाम रही है। इसका खुलासा श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट में किया गया है। मोदी सरकार के तीन साल से ज्यादा के कार्यकाल में नई नौकरियों के मौकों में 60 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। 

इसका मतलब है कि जितनी नई नौकरियां 2014 में मार्केट में पैदा हुई थीं, उसकी तुलना में साल 2016 में 60 फीसदी से कम रोजगार के नए अवसर बने। साल 2014 में मार्केट में 4.21 लाख नए जॉब्स पैदा हुए।

वहीं साल 2015 में मात्र 1.35 लाख नई नौकरियां मार्केट में आईं। इसी तरह से 2016 में कमोबेश 1.35 लाख नए जॉब्स के अवसर पैदा हुए।

पीएम मोदी ने देश के लोगों से यह वादा किया था कि उनकी सरकार इस तरह की पॉलिसी लेकर आएगी जिससे हर साल करीब 2 करोड़ नए जॉब्स मार्केट में लोगों को मिलेंगे।

अर्थशास्त्री सारथी आचार्य का कहना है कि नई नौकरियों में गिरावट आने की सबसे बड़ी वजह मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ में तेज गिरावट है। पिछले 3 साल में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 10 से घट कर एक प्रतिशत रह गई है।

इसका कारण है कि मार्केट में डिमांड नहीं है। जब डिमांड नहीं है तो इसका मतलब है कि खरीददारी नहीं हो रही है। ऐसे में कंपनियां को उत्पादन कम करना होगा। जब उत्पादन कम होगा तो फिर किस तरह से मार्केट में नए जॉब्स आएंगे।

स्किल डिवेलपमेंट स्कीम पर उठे सवाल
स्किल डिवेलपमेंट स्कीम पर सवाल उठने लगे हैं। इसके जरिए देश में व्यापक पैमाने पर जॉब मिलने की उम्मीद थी। बीते 3 साल में 30 लाख से अधिक नौजवानों को इस स्कीम के तहत ट्रेनिंग मिली लेकिन जॉब मिली तीन लाख से भी कम लोगों को। इस स्कीम के तहत 2016-20 के लिए सरकार ने 12,000 करोड़ का बजट अलॉट किया।