Sunday, July 5, 2026
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सेंसेक्स 296 पाइंट टूटकर हुआ बंद, निफ्टी भी 9900 से नीचे

विदेशी पूंजी की सतत निकासी और उत्तर कोरिया को लेकर बनी तनाव की स्थिति के चलते निवेशकों के बीच बिकवाली का दौर देखने को मिला

नई दिल्ली। भारत के शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन बेहतर साबित नहीं हुआ। सेंसेक्स करीब 296 पॉइंट टूटकर 31626.63 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 0.93 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

वहीं निफ्टी भी 9900 के बेंच मार्क को बनाए रखने में सफल नहीं हुआ। निफ्टी में 0.92 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और यह करीब 92 पॉइंट टूटकर 9872.60 पर बंद हुआ।

ब्रोकरों के अनुसार विदेशी पूंजी की सतत निकासी और उत्तर कोरिया को लेकर बनी तनाव की स्थिति के चलते निवेशकों के बीच बिकवाली का दौर देखने को मिला। इस वजह से सेंसेक्स पर दबाव देखा गया।

बीएसई में लिस्टेड कंपनियों में से कोटक महिंद्रा (2.24 फीसदी), ल्यूपिन (2.20 फीसदी), टाटा स्टील (2.20 फीसदी) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (2.11) के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

बीएसई का टॉप गेनर कोल इंडिया रहा जिसके शेयरों में 1.20 फीसदी का उछाल आया। ICICI बैंक, हिंदुस्तान यूनीलिवर और टीसीएस के शेयरों में भी उछाल देखने को मिला।

वहीं निफ्टी में टाटा पावर, कोल इंडिया लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, बजाजा ऑटो के शेयरों में बढ़त देखने को मिली, जबकि अरबिंदो फर्मा, अडानी पोर्ट्स, अंबुजा सीमेंट, कोटक बैंक के शेयरों को झटका लगा।

सेंसेक्स 350 अंक टूटा: सभी सेक्टर लाल निशान में

नई दिल्ली । हफ्ते के पहले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। करीब 12.30 बजे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 350 अंक की गिरावट के साथ 31571 के स्तर पर और निफ्टी 104 अंक की कमजोरी के साथ 9860 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 1.32 फीसद और स्मॉलकैप में 2.02 फीसद की कमजोरी देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा मुनाफावसूली रियल्टी (2.62 फीसद) शेयर्स में है।

5 दिन में निफ्टी 3% नीचे
भारतीय शेयर बाजार की गिरावट बीते 5 सत्रों से जारी है। बीते 5 कारोबारी सत्रों में निफ्टी करीब 3 फीसद टूट गया। बीते पांच सत्रों में निफ्टी 10150 के स्तर से 9851 के स्तर पर आ गया। वहीं सेंसेक्स भी इस दौरान 2.59 फीसद  तक टूट गया। आज के सत्र में सेंसेक्स  और निफ्टी दोनों  ही 1 फीसद से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।  

वैश्विक बाजार में मिले जुले संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिले जुले संकेत देखने को मिल रहे हैं। जापान का निक्केई 0.44 फीसद की बढ़त के साथ 20384 के स्तर पर, चीन का शांघाई 0.35 फीसद की कमजोरी के साथ 3340 के स्तर पर, हैंगसैंग 1.04 फीसद की कमजोरी के साथ 27590 के स्तर पर और कोरिया का कोस्पी 0.45 फीसद की कमजोरी के साथ 2377 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

वहीं, बीते सत्र में अमेरिकी बाजार के प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस 0.04 फीसद की कमजोरी के साथ 22349 के स्तर पर, एसएंडपी500 0.06 फीसद की बढ़त के साथ 2502 के स्तर पर और नैस्डैक 0.07 फीसद की बढ़त के साथ 6426 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुए हैं।

फार्मा शेयर्स में बिकवाली
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो सभी सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बिकवाली फार्मा (1.70 फीसद) शेयर्स में देखने को मिल रही है। बैंक (1.05 फीसद), ऑटो (0.93 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.99 फीसद), एफएमसीजी (0.16 फीसद), आईटी (0.18 फीसद), मेटल (1.22 फीसद) और रियल्टी (0.70 फीसद) की कमजोरी देखने को मिल रही है।

एक्सिस बैंक टॉप लूजर
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 8 हरे निशान में और 43 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी इंफ्राटेल, पावरग्रिड, टीसीएस, हिंदुस्तान युनिलिवर और टाटा पावर के शेयर्स में है। वहीं, गिरावट इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स, ल्यूपिन, एक्सिस बैंक औक एसबीआईएन के शेयर्स में है।

GST को बोझ कम करें वरना महंगी होंगी उड़ान

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एयरलाइंस की सरकार को चेतावनी, GST के कारण एयरलाइंस पर 4,750 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा 

नई दिल्ली । एयरलाइंस का कहना है कि जीएसटी से उनकी कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई है और इस वजह से किराया बढ़ाना पड़ सकता है। एयरलाइंस ने सरकार से GST पर राहत देने की मांग की है।

एक एयरलाइन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘GST के कारण एयरलाइंस पर 4,750 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा और इससे हमारी ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ जाएगी। इससे एयरलाइन इंडस्ट्री को घाटा होने की आशंका है। नए टैक्स से एयरलाइंस का प्रॉफिट समाप्त हो सकता है।’

देश की तीन लिस्टेड एयरलाइंस- इंडिगो, जेट एयरवेज और स्पाइसजेट ने मार्च में समाप्त हुए फाइनैंशल इयर में संयुक्त रूप से 2,479 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हासिल किया था। नॉन-लिस्टेड एयरलाइंस में गोएयर प्रॉफिट में चल रही अकेली एयरलाइन है। अन्य एयरलाइंस एयर इंडिया, विस्तारा और एयर एशिया इंडिया घाटे में हैं।

1 जुलाई से लागू हुए GST में सर्विस के बाद विमान के इंजन और पार्ट्स के दोबारा एक्सपोर्ट पर टैक्स लगाया गया है। इससे इंडस्ट्री पर सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

एक एयरलाइन के एग्जिक्युटिव ने बताया, ‘भारत में इंजन की रिपेयर की सुविधा नहीं है और हमें इंजन को रिपेयर के लिए विदेश भेजना पड़ता है। कुछ एयरलाइंस के कई इंजन टैक्स बढ़ने के कारण कस्टम्स के पास फंसे हैं और इससे ऑपरेशंस पर भी असर पड़ा है।’

अन्य टैक्स में एयरलाइंस के अपने इस्तेमाल के लिए विमान के पार्ट्स का इंटरस्टेट ट्रांसफर और विमानों के पार्ट्स पर 28 प्रतिशत का इंटीग्रेटेड GST है।

एक अन्य एग्जिक्यूटिव ने कहा, ‘सरकार मेक इन इंडिया की बात कर रही है, लेकिन इस तरह के टैक्स से ग्लोबल लेवल पर भारतीय एयरलाइंस को कॉम्पिटिशन करने में मुश्किल होगी और मिडल ईस्ट की एयरलाइंस जैसी विदेशी एयरलाइंस को फायदा मिलेगा।’

ऐनालिस्ट्स का कहना है कि अगर एयरलाइंस को GST को लेकर राहत नहीं मिलती तो किराए बढ़ सकते हैं। सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन के भारत में डायरेक्टर और सीईओ, कपिल कॉल ने कहा, ‘हमें अगले 12 महीनों में GST का असर अनुमान से अधिक होने की उम्मीद है और इसे लेकर एयरलाइंस की ओर से राहत देने की मांग सही है।

GST काउंसिल जरूरत पड़ने पर बदलाव करने के लिए तैयार है और हमें इस मामले में भी पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है।’ एविएशन मिनिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि उन्हें एयरलाइंस की समस्या की जानकारी है और वे इसी सही मंच पर उठाने में उनकी मदद करेंगे।

माल्या ने शेल कंपनियों में डायवर्ट किया 6 हजार करोड़ का लोन

  • सीबीआई और ईडी ने बताया कि 7 देशों में मौजूद शेल कंपनियों में यह पैसा इन्वेस्ट किया था

  • यह कंपनियां यूएस, यूके, फ्रांस, आयरलैंड में स्थित हैं जिनके बारे में जानकारी मांगी गई 

नई दिल्ली। भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन से जल्दी से प्रत्यपर्ण कराने के लिए नकेल कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी ने खुलासा किया है कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के लिए बैंकों से लिए गए 6 हजार करोड़ से अधिक के लोन को विदेश में स्थित शेल कंपनियों में डायवर्ट किया था। 

सीबीआई और ईडी ने बताया कि 7 देशों में मौजूद शेल कंपनियों में यह पैसा इन्वेस्ट किया था। यह कंपनियां यूएस, यूके, फ्रांस, आयरलैंड में स्थित हैं जिनके बारे में जानकारी मांगी गई । माल्या ने  किंगफिशर एयरलाइंस को सुधारने के लिए 17 बैंकों के कंशोर्सियम से 6027 करोड़ का लोन लिया था।

इसमें से सबसे ज्यादा एसबीआई से लिया था, जिसका अमाउंट 1600 करोड़ रुपये था।  सीबीआई ने इसी आधार पर ब्रिटेन से माल्या का भारत जल्द प्रत्यपर्ण कराने के लिए लंदन स्थित कोर्ट में अर्जी दाखिल करने का फैसला किया है। इसके लिए नई चार्जशीट जल्द ही दाखिल की जाएगी।  

20 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने के लिए  प्रत्यर्पण केस की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। माल्या भारतीय बैंकों से 9 हजार करोड़ रुपए का लोन लेकर फरार है। माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में रह रहा है और उसे प्रर्त्यपण वारंट मामले में अप्रैल 2017 में भी गिरफ्तार किया गया था।
 
ब्रिटेन सरकार से भारत ने माल्या के प्रत्यर्पण की गुहार लगाई है। जिसके बाद लंदन कोर्ट ने माल्या के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करते हुए गत 18 अप्रैल को गिरफ्तार भी किया था लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया था।

माल्या ने अदालत के बाहर मीडिया से कहा, ‘मैं किसी भी अदालत से भाग नहीं रहा हूं। मेरे पास अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत हैं।’ माल्या ने कहा, ‘मैं मीडिया में इसलिए बयान नहीं देता क्योंकि उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है। 

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की डिमांड बढ़ेगी : नैस्कॉम

सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने एंप्लॉयीज के स्किल बढ़ाने में इन्वेस्टमेंट कर रही हैं।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे नए एरिया में एंप्लॉयीज को ट्रेनिंग दी जा रही है।

नई दिल्ली। सॉफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नैस्कॉम ने अगले फाइनैंशल इयर में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की डिमांड बढ़ने की उम्मीद जताई है । नैस्कॉम का कहना है कि फाइनैंशल इयर 2019 में फाइनैंशल सेक्टर का टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ सकता है और अमेरिकी क्लाइंट्स की ओर से डिमांड में बढ़ोतरी हो सकती है।

नैस्कॉम के प्रेजिडेंट आर चंद्रशेखर ने कहा, ‘अगले फाइनैंशल इयर के लिए आशावादी होने के कारण मौजूद हैं। हम बेहतर संकेत देख रहे हैं। डिमांड को लेकर संभावना अच्छी दिख रही है।’

उन्होंने बताया कि फाइनैंशल सेक्टर की ओर से टेक्नोलॉजी में इन्वेस्टमेंट बढ़ सकता है और अमेरिका से भी डिमांड में वृद्धि हो सकती है।

नैस्कॉम प्रेजिडेंट आर चंद्रशेखर ने कहा कि सॉफ्टवेयर कंपनियां ग्रोथ बढ़ाने के लिए नई डिजिटल टेक्नोलॉजी के बारे में अपने एंप्लॉयीज को स्किल ट्रेनिंग दे रही हैं।

उन्होंने बताया, ‘इसके नतीजे अगले कुछ महीनों में दिखने लगेंगे। इससे अगला वित्त वर्ष बेहतर रह सकता है।’ चंद्रशेखर ने इस वर्ष सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के अपना ग्रोथ का टारगेट पूरा करने का भी विश्वास जताया।

नैस्कॉम ने जून में सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के लिए सालाना गाइडेंस जारी करते हुए कहा था कि भारत का इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी  एक्सपोर्ट पिछले वर्ष के समान 7-8 पर्सेंट बढ़ेगा। नैस्कॉम ने देश की इन्फोटेक इंडस्ट्री की ग्रोथ 10-11 पर्सेंट रहने की संभावना जताई थी।

सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें अमेरिका और ब्रिटेन जैसे महत्वपूर्ण मार्केट्स में वर्क वीजा को लेकर कड़े नियम और बिजनस का अनिश्चित माहौल शामिल हैं।

चंद्रेशखर ने कहा कि इंडस्ट्री को संरक्षणवाद को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि जारी किए गए वीजा की संख्या में बदलाव नहीं हुआ है। उनका कहना था, ‘65,000 वीजा की सीमा बरकरार है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

हालांकि, भारतीय कंपनियों की वीजा पर निर्भरता कम हुई है। कंपनियों के लिए ऑटोमेशन जैसे टेक्नॉलजी और बिजनस ट्रेंड्स पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।’

उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने एंप्लॉयीज के स्किल बढ़ाने में इन्वेस्टमेंट कर रही हैं। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे नए एरिया में एंप्लॉयीज को ट्रेनिंग दी जा रही है।

इससे एफिशिएंसी के साथ ही रेवेन्यू ग्रोथ बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। नैस्कॉम सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (COE) बनाने के लिए सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

नैस्कॉम ने बेंगलुरु में इस तरह का एक सेंटर बनाया है जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर फोकस कर रहाहै। सरकार ने अब गुरुग्राम, अहमदाबाद और विशाखापट्टनम में तीन और सेंटर बनाने की स्वीकृति दी है।

जीएसटी चुकाने वाले ही पकड़ाएंगे टैक्स चोरी

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सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी रजिस्टर्ड या माइग्रेटेड ट्रेडर बिना बिल के 200 रुपये से ज्यादा की टैक्सेबल सेल नहीं कर सकता, अगर ग्राहक ने बिल नहीं लिया तो भी उस सेल को अकाउंट बुक में दर्ज करना अनिवार्य है।

नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद से बिल नहीं देने, फर्जी बिलिंग और बिल काटने के बाद भी टैक्स जमा नहीं कराने की बढ़ती शिकायतों पर राज्य सरकारें अलर्ट हो गई हैं। राज्य सरकारें अब टैक्स चुकाने वाले ग्राहकों को ही टैक्स चोरी पकड़ने का हथियार बनाने में जुटी हैं।

दिल्ली, यूपी, हरियाणा, गुजरात सहित कई राज्यों की सरकारें त्योहारी डिमांड के बीच ग्राहकों से अपने-अपने तरीके से टैक्स चोरी रोकने में मदद मांग रही हैं।

यूपी सरकार ने तो बाकायदा एक स्कीम पेश की है, जिसके तहत ग्राहकों से शॉपिंग बिल की कॉपी वॉट्सऐप या ईमेल करने को कहा गया है, जिसकी मैचिंग की जाएगी या फील्ड सर्वे से जांच की जाएगी।

यूपी के कमिश्नर (कमर्शल टैक्स) मुकेश मेश्राम की ओर से जारी आदेश में सभी जिलों में ऐसे बिलों की कॉपी मैच करने, असेस करने, ग्राहकों को सूचित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।

हरियाणा सरकार ने भी विज्ञापन के जरिए ग्राहकों से हर शॉपिंग पर बिल लेने और उसमें कुछ निश्चित डेटा चेक करने की अपील की है।

दिल्ली सरकार ने वैट रिजीम में ही इस तरह की धांधली रोकने के लिए ‘बिल बनावाओ, इनाम पाओ’ स्कीम चला रखी थी, जिससे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरों को पकड़ने में मदद मिली थी।

अब अधिकारी सोशल मीडिया में शेयर हो रहे फर्जी और गलत बिलों को गंभीरता से ले रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि फेसबुक, वॉट्सऐप, ट्विटर पर शेयर हो रहे करीब 100 बिलों को संज्ञान में लिया गया है और उनका असेसमेंट चल रहा है।

उनमें से करीब एक दर्जन वास्तविक ग्राहकों का पता लगा लिया गया है। उनकी मदद से दोषी रेस्तरां, दुकानों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारी ने बताया कि जरूरत पड़ी तो जीएसटी में भी इनामी स्कीम लाई जा सकती है। हालांकि, इसके लिए केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों की राय भी ली जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि बोगस बिलिंग की सबसे ज्यादा शिकायतें रेस्तरां और खानपान की दुकानों से आ रही हैं, जबकि बिल नहीं देने संबंधी शिकायतें मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संज्ञान में ली गई हैं।

इन दिनों त्योहारी सीजन की सेल के बीच बहुत से ट्रेडर बिल नहीं दे रहे और उसके पीछे इस तरह की दलीलें दे रहे हैं कि अभी रेट नहीं पता या टिन नंबर नहीं मिला है।

हालांकि, सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी रजिस्टर्ड या माइग्रेटेड ट्रेडर बिना बिल के 200 रुपये से ज्यादा की टैक्सेबल सेल नहीं कर सकता। अगर ग्राहक ने बिल नहीं लिया तो भी उस सेल को अकाउंट बुक में दर्ज करना अनिवार्य है।

147 अंक की गिरावट पर खुला बाजार, निफ़्टी भी फिसला

 नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबार दिन बाजार गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स बाजार खुलते ही कुछ ही समय में 147 अंक गिर 31,781 पर पहुंच गया वहीं, निफ्टी 50 अंक टूट 9920 अंकों पर पहुंच गया। इससे पहले डॉलर के मुकाबले रुपया 64.79 पर ट्रेड कर रहा था। छोटे-मझोले शेयरों में बिकवाली जारी।

एशियाई बाजारों की बात करें तो उनमें मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर जापान का बाजार निक्केई 0.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 118 अंक बढ़कर खुला वहीं दूसरी ओर सिंगापुर का एसजीएक्स निफ्टी में 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुला।

शॉपर्स स्टॉप, एसार पोर्ट्स पर आज मार्केट की नजर रहेगी। पीएम मोदी द्वारा बिजली योजना शुरू किए जाने की खबरों से पावर स्टॉक्स मजबूत दिख रहे हैं।

आरटीयू स्टूडेंट्स को मिलेगी अब डिजीटल डिग्री

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स्टूडेंट्स की डिग्री और डिटेल माक्र्स संबद्ध यूनिवर्सिटी के साथ-साथ नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी यानी नेशनल डिजिटल स्टोर हाउस में सुरक्षित रहेंगे

कोटा । राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) से पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स को अब डिजीटल डिग्री मिलेगी। नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) योजना के तहत आरटीयू ने इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स से एग्जाम फार्म में आधार नंबर लिखना अनिवार्य कर दिया है।

जबकि प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स से प्रवेश फार्म में ही आधार नंबर लिखवाया गया था। इससे अब इन स्टूडेंट्स को डिजीटल डिग्री ऑनलाइन देने में आसानी होगी। वहीं स्टूडेंट्स को डिटेल मार्क्स या डिग्री लेने के लिए कैंपस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्हें घर बैठे ही ऑनलाइन डिग्री या डिटेल मार्क्स मिल जाएंगे।

साथ ही इस सिस्टम के बाद नकली डिग्री बनाने वालों पर भी लगाम लग सकेगी तथा डिग्री के प्रमाणित और क्रॉस वैरीफाई करने में भी सुविधा रहेगी। यूजीसी ने नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी के संबंध में जुलाई में सभी यूनिवर्सिटी को इस संबंध में पत्र लिखे थे।

डिजीटल रूप में सुरक्षित
स्टूडेंट्स की डिग्री और डिटेल माक्र्स संबद्ध यूनिवर्सिटी के साथ-साथ नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी यानी नेशनल डिजिटल स्टोर हाउस में सुरक्षित रहेंगे। यह केन्द्र सरकार की नेशनल पॉलिसी का हिस्सा है। सभी यूनिवर्सिटी में यह सिस्टम शीघ्र शुरू होगा। जिससे सर्टिफिकेट सुरक्षित रहेंगे।

इस व्यवस्था से दूसरे विश्वविद्यालय व नौकरी देने वाली कम्पनियों को भी सुविधा रहेगी। वे संबंधित विद्यार्थी व आवेदक की डिग्रियां ऑनलाइन देख सकेंगे। साथ ही फर्जी प्रमाण पत्र पर भी लगाम लगेगी। दस्तावेज की गड़बड़ी थमेगी।

स्टूडेंट्स को यह होगा फायदा

  • डिग्री व डॉक्यूमेंट खोने का डर नहीं रहेगा।
  • स्टूडेंट्स कहीं भी प्रमाणपत्रों का सत्यापन करा सकेंगे।
  • ऑनलाइन एक क्लिक पर सारे दस्तावेज उपलब्ध हो जाएंगे।
  • डॉक्यूमेंट किसी भी वेबसाइट पर अपलोड करा जा सकेगा।

डॉक्यूमेंट को डिजिटलाइज्ड करने की प्रक्रिया शुरू
एनएडी से जोडऩे के लिए यूजीसी के निर्देश पर स्टूडेंट्स की डिग्री व एकेडमिक डॉक्यूमेंट को डिजिटलाइज्ड करने की प्रक्रिया शुरू की है। परीक्षा फार्म के साथ स्टूडेंट्स से आधार नंबर मांगे है। प्रथम वर्ष में तो प्रवेश फार्म पर ही आधार नंबर ले लिए थे।
प्रो. एनपी कौशिक, वाइस चांसलर, आरटीयू

इस दिवाली पर ज्यादा महंगा नहीं होगा सोना

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और एएमएल नियमों के अमल में आने से लोगों की खरीदारी का पैटर्न बदला है, इनसे धनतेरस से ज्यादा शादी-ब्याह के लिए की जाने वाली सोने की खरीदारी प्रभावित होगी

नई दिल्ली। वर्ल्डगोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) का मानना है कि इस बार दिवाली पर सोने के दाम ज्यादा नहीं बढ़ेंगे। इसकी वजह नोटबंदी, जीएसटी और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) नियमों का लागू होना है।

डब्ल्यूजीसी के एमडी सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि इस बार दिवाली पर अलग तरह की चुनौतियां हैं। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और एएमएल नियमों के अमल में आने से लोगों की खरीदारी का पैटर्न बदला है। इनसे धनतेरस से ज्यादा शादी-ब्याह के लिए की जाने वाली सोने की खरीदारी प्रभावित होगी।

सोमसुंदरम ने कहा कि पिछले साल दिवाली नाेटबंदी से पहले पड़ी थी। साथ ही तीन साल बाद देश में मॉनसून बेहतर रहने से सोने की अच्छी मांग देखने को मिली थी। लेकिन जेम्स एंड ज्वैलरी उद्योग को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत लाने से नियमों के पालन की अनिवार्यता बढ़ी है।

650 से 750 टन सोने का आयात संभव
डब्ल्यूजीसी के मुताबिक इस कैलेंडर वर्ष में देश में सोने का आयात 650 से 750 टन के बीच रहने का अनुमान है। पिछले साल सोने का आयात घटकर 676 टन रहा था। यह 2015 में हुए 857 टन सोने के आयात से 21% कम है।

पेट्रोल-डीजल से 5 साल में 3 गुना बढ़ी केंद्र की कमाई

बीते वित्त वर्ष में अप्रत्यक्ष करों में कई बार की गई बढ़ोतरी से सरकार के खजाने में 2.67 लाख करोड़ रुपए की रकम आई है

भोपाल। कच्चे तेल के दामों में कमी रही है वहीं हमारे देश में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ रहे हैं। इससे आम आदमी की जेब हल्की हो रही है। लेकिन सरकार का खजाना भर रहा है।

बीते वित्त वर्ष में अप्रत्यक्ष करों में कई बार की गई बढ़ोतरी से सरकार के खजाने में 2.67 लाख करोड़ रुपए की रकम आई है। यह एक रिकॉर्ड है। यह जानकारी राजस्व विभाग के अंतर्गत काम करने वाले डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिस्टम एंड डाटा मैनेजमेंट (डीजीएसडीएम) द्वारा आरटीआई अर्जी के जवाब में उपलब्ध कराए आंकड़ों में सामने आई है।

इसके मुताबिक पेट्रोलियम उत्पादों पर अप्रत्यक्ष करों (केंद्रीय उत्पाद और आयात सीमा शुल्क) से बीते पांच वित्त वर्ष में सरकार की आमदनी लगभग तीन गुना हो गई है। डीजीएसडीएम ने यह आंकड़े मध्यप्रदेश में नीमच जिले के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को मुहैया कराई है।

उन्होंने निदेशालय से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत 2012-13 से 2016-17 के बीच पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले केंद्रीय शुल्क सरकार की आमदनी पर जानकारी मांगी थी। गौड़ का कहना है कि सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों को भी जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए।

ऐसा करना तर्कसंगत होगा। आम उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। ऐसा मैकेनिज्म विकसित करना चाहिए जब पेट्रोलियम उत्पादों के दाम एक सीमा से ऊपर जाने लगे तो टैक्स की दरों में स्वत: कमी आने लगे।

पेट्रोलियम उत्पादों पर अप्रत्यक्ष करों से आय
वित्तवर्ष           प्राप्त राजस्व
2012-13      98,602 करोड़ रु.
2015-16        2.38 लाख करोड़ रु.
2016-17        2.67 लाख करोड़ रु.
पांच साल में डीजल पर राजस्व 5.51 गुना बढ़ा
वर्ष              पेट्रोल         डीजल
2012-13     23,710      22,513
2016-17     66,318   1,24,266
वृद्धि           2.80 गुना  5.51 गुना
(आंकड़े करोड़ रुपए में)