Thursday, July 9, 2026
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अब एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी देने की प्रक्रिया आसान

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नई दिल्ली । वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय मंजूरी के लिए प्राप्त होने वाले प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआइ) प्रस्तावों को राजस्व विभाग के पास नहीं भेजेगा। उसने एफडीआइ प्रस्तावों की मंजूरी की प्रक्रिया आसान बनाने की दिशा में यह कदम उठाया है।

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआइपीपी) ने कहा है कि एफडीआइ प्रस्तावों को राजस्व विभाग में भेजने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इससे देश में कारोबारी सुगमता भी सुधरेगी। अभी तक सभी प्रस्तावों को राजस्व के नजरिये से अध्ययन के लिए संबंधित विभाग के पास भेजा जाता था।

विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) को खत्म करने के बाद सरकार ने जून में एफडीआइ प्रस्तावों को मंजूरी के लिए प्रक्रिया तैयार की थी।

इसके प्रक्रिया के तहत सरकार एफडीआइ प्रस्तावों पर अधिकतम दस सप्ताहों के भीतर फैसला करेगी। बीते वित्त वर्ष 2016-17 में भारत में एफडीआइ नौ फीसद बढ़कर 43.48 अरब डॉलर हो गया था।

भारतीय कंपनियों का विदेश में निवेश घटा : रिजर्व बैंक के अनुसार सितंबर में भारतीय कंपनियों का विदेशों में निवेश 39.3 फीसद घटकर 2.65 अरब डॉलर रह गया। घरेलू कंपनियों ने पिछले साल सितंबर में 4.37 अरब डॉलर का निवेश दूसरे देशों में किया था।

इस साल अगस्त में इन कंपनियों का विदेशों में निवेश 1.34 अरब डॉलर रहा था। ये निवेश सहायक कंपनियों या संयुक्त उपक्रमों में किया गया। सितंबर में 2.65 अरब डॉलर निवेश शेयर हिस्सेदारी, कर्ज और भारतीय कंपनियों की ओर से गारंटी के रूप में था।

विप्रो के मुनाफे में 6% और एक्सिस बैंक के 36% तक की वृद्धि

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नई दिल्ली । देश की तीसरी सबसे बड़ी आइटी कंपनी विप्रो ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए। जुलाई से सितंबर की इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 5.8 फीसद बढ़कर 2,191.8 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2,070.4 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। हालांकि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी की आय में 1.9 फीसद की मामूली गिरावट आई। इससे कंपनी की कुल आय 14,134.8 करोड़ रुपये रही। विप्रो ने अगली तिमाही के लिए भी कमाई के उत्साहजनक अनुमान नहीं पेश किए हैं।

कंपनी के लाभ में वृद्धि कुल खर्चो में कमी, वित्तीय लागत घटने और अन्य आय में बढ़ोतरी के चलते हासिल हुई है। ऊर्जा क्षेत्र का प्रदर्शन मध्य पूर्व में दूसरी तिमाही के दौरान छुट्टियों के चलते प्रभावित हुआ है। सीईओ अब्दाली जेड नीमचवाला ने कहा कि आइटी सेवाओं से आय के मामले में हम दो अरब डॉलर का आंकड़ा हासिल करने में कामयाब रहे।

तिमाही दर तिमाही आधार पर आइटी सेवाओं के रेवेन्यू में डॉलर के लिहाज से 2.1 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज हुई। रेवेन्यू का यह आंकड़ा 2.01 अरब डॉलर हो गया। दूसरी तिमाही में कंपनियों की कुल संख्या 1,63,759 रही। इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 1,66,790 था। समीक्षाधीन 

एक्सिस बैंक का लाभ 36 फीसद बढ़ा
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में एक्सिस बैंक का शुद्ध लाभ करीब 36 फीसद बढ़कर 432 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में निजी क्षेत्र के इस तीसरे सबसे बड़े बैंक ने 319 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

तीस सितंबर, 2017 को समाप्त तिमाही में बैंक की कुल आय पूर्व वर्ष की समान अवधि के 13,698 करोड़ से बढ़कर 13,821 करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान बैंक के ग्रॉस एनपीए (फंसे कर्ज) का आंकड़ा भी बढ़कर 5.9 फीसद पर पहुंच गया।

रुपये में बात करें तो दूसरी तिमाही में एक्सिस बैंक का ग्रॉस एनपीए बढ़कर 27,402 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान एक्सिस बैंक का नेट इंटरेस्ट माजिर्ंन 3.63 फीसद से घटकर 3.45 प्रतिशत पर आ गया।

एसीसी सीमेंट का मुनाफा हुआ दोगुना
समीक्षाधीन तिमाही में एसीसी सीमेंट ने मुनाफे में दोगुना से ज्यादा की वृद्धि का एलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर 181.53 करोड़ रुपये हो गया।

बीते साल की समान अवधि में यह 89.73 करोड़ रुपये था। कंपनी की बिक्री में भी 9.42 फीसद का इजाफा हुआ है। चालू साल की दूसरी तिमाही में कंपनी के कंसॉलिडेटेड सेल्स का आंकड़ा 3,140.76 करोड़ रुपये रहा।

बजाज ऑटो का लाभ घटा
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बजाज ऑटो के मुनाफे में मामूली कमी आई है। इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ छह फीसद घटकर 1,193.6 करोड़ रुपये रहा। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय में भी गिरावट आई।

कंपनी ने इसके लिए बिक्री में कमी को जिम्मेदार ठहराया है। इस माहौल में पुणो की इस कंपनी ने मंगलवार को नतीजों के साथ ही अपनी प्रीमियम मोटरसाइकिलों को ऑस्ट्रेलिया और थाइलैंड निर्यात करने का भी एलान किया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का गैस क्षेत्रों पर निवेश

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नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज और केजी-डी6 गैस क्षेत्र में उसकी सहयोगी ब्रिटेन की कंपनी बीपी की वहां 1.5 अरब डॉलर निवेश करने की योजना है।

इसे वह इस ब्लॉक के आसपास मिले छह अन्य गैस कुंओं (सैटेलाइट गैस क्षेत्र) के विकास पर खर्च करेगी। यह निवेश 2022 तक किया जाना है।

इस घटना क्रम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दोनों कंपनियों ने सोमवार को हाइड्रोकार्बन निदेशालय (डीजीएच) को वहां गैस क्षेत्र विकास की अपनी योजना रिपोर्ट जमा की। इसमें मुख्य परियोजना क्षेत्र के आसा पास के गैस स्रोतों का विकास किया जाना है।

सूत्रों के अनुसार पूरी तरह चालू हो जाने पर इनसे रोज कुल एक करोड़ से 1.2 करोड घन मीटर गैस का उत्पादन होने की उम्मीद है।

कंपनी ने बताया कि चार गहरे पानी के सैटेलाइट गैस क्षेत्र और दो अन्य सैटेलाइट गैस क्षेत्र आर-श्रृंखला और एमजे श्रृंखला की उन गैस खोजों में से हैं जिन पर रिलायंस और बीपी ने इस साल मध्य जून में 40,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी।

सूत्रों ने बताया कि इन छह सैटेलाइट गैस क्षेत्रों की विकास योजना को एक साथ लागू किया जाएगा जबकि आर-श्रृंखला की डी-34 और एमजे श्रृंखला की डी-55 के लिए अलग-अलग विकास योजनाएं हैं।

दिवाली से एक दिन पहले सुस्ती के साथ बाजार की शुरुआत

नई दिल्ली। बुधवार को दिवाली से एक दिन पहले बाजार ने कमजोर शुरुआत की। सेंसेक्स आज 88 अंक गिरकर 32,520 के स्तर पर खुला। निफ्टी की भी शुरुआत कमजोर रही। निफ्टी ने लगभग 34 अंक गिरकर 10,200 पर शुरुआत की।

बाजार खुलने के बाद के शुरुआती घंटे में सेंसेक्स 110 अंक से ज्यादा गिरकर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी के शुरुआती कारोबार में 40 अंको की गिरावट देखी गई।

दिन की शुरुआत में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सुस्ती का माहौल दिख रहा है। एक ओर जहां ऑटो, बैंकिंग, फार्मा आदि के शेयर्स में बिकवाली का माहौल है, वहीं दूसरी ओर पावर, आईटी आदि के शएयर्स में हल्की खरीदारी होती दिख रही है।

बुधवार को नॉन बैंकिंग फाइनैंस कंपनी एमएएस फाइनैंशल बाजार में डेब्यू करने जा रही है, इस पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही धनतेरस के कारोबार के बाद शेयर बाजार कैसे रिऐक्ट करता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

मंगलवार को सेंसेक्स 24.48 पॉइंट्स गिरकर 32,609.16 पर बंद हुआ था, लेकिन निफ्टी 3.60 अंक चढ़कर 10,234.50 के नए स्तर पर बंद हुआ था।

गूगल देश का सबसे ज्यादा प्रामाणिक ब्रैंड

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नई दिल्ली। देश के उपभोक्ता गूगल को सबसे अधिक प्रामाणिक ब्रैंड के रूप में देखते हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इस सूची में ऐमजॉन डॉट कॉम सबसे आगे है।

एक नए सर्वेक्षण से मंगलवार को यह जानकारी मिली। भारत में गूगल के बाद माइक्रोसॉफ्ट, ऐमजॉन डॉट कॉम, मारुति सुजुकी और ऐपल को सबसे प्रामाणिक माना जाता है।

वैश्विक कम्युनिकेशन एजेंसी कॉन ऐंड वॉल्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डोना इंपेराटो ने बताया, ‘उपभोक्ता आज उन कंपनियों से खरीदना चाहते हैं जो उनके साथ वास्तविक तरीके से जुड़ते हैं।

हमारा शोध उन ब्रैंड्स के बीच एक कड़ी दिखाता है जो व्यावहारिक संवाद करते हैं और जिनमें ग्राहकों को आकर्षित करने और बनाए रखने की क्षमता होती है, और इससे उनका व्यवसाय मजबूत होता है।’

कॉन ऐंड वॉल्फ द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, दुनियाभर में ऐपल प्रामाणिकता की दौड़ में ऐमजॉन के बाद दूसरे नंबर पर है।

प्रामाणिक ब्रैंड अध्ययन 2017 की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक प्रामाणिकता सूचकांक में क्रमश: तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और पेपाल को रखा गया है और ये सभी प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियां हैं।

इस अध्ययन के निष्कर्षों के मुताबिक, भारत में 67 फीसदी उपभोक्ताओं ने उस ब्रैंड में खरीद की रुचि जाहिर की, जिसे वे प्रामाणिक मानते हैं।

कॉटन ऐंड वॉल्फ में एशिया प्रशांत क्षेत्र के अध्यक्ष मैट स्टैफोर्ड ने बताया, ‘ब्रैंड जो प्रामाणिकता से व्यवहार करते हैं और संवाद करते हैं, वे ग्राहकों के साथ बेहतर संबंध बनाएंगे और बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे।’

स्टैफॉर्ड कहते हैं, ‘हमारे शोध से पता चलता है कि भारत के ब्रैंड्स को अपनी ऑफरिंग और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रामाणिकता के तीन कारकों- विश्वसनीयता, सम्मान और वास्तविकता पर ध्यान देने की जरूरत है।’

एसी रेस्ट्रॉन्ट्स में खाना होगा सस्ता, अब लगेगा 12% जीएसटी

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नई दिल्ली। चुनावी मौसम में मोदी सरकार अब शहरी मिडिल क्लास को खुश करने के उसे जीएसटी में बड़ी राहत दे सकती है।  जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में AC रेस्ट्रॉन्ट्स में खाने पर जीएसटी की मौजूदा 18 फीसदी की दर को सरकार घटाकर 12 फीसद कर सकती है।

अगर ऐसा होता है तो रेस्ट्रॉन्ट में खाना पहले के मुकाबले सस्ता हो जाएगा। हालांकि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर रेस्ट्रॉन्ट्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा छोड़ना पड़ सकता है।

एयर-कंडिशंड रेस्ट्रॉन्ट्स अभी 18 पर्सेंट और बिना एयर-कंडिशन वाले रेस्ट्रॉन्ट्स 12 पर्सेंट GST वसूलते हैं। अगर इन दोनों तरह के रेस्ट्रॉन्ट्स के लिए GST का रेट एक समान किया जाता है तो इससे उन्हें इनपुट पर चुकाए गए टैक्स को क्लेम करने की सुविधा छोड़नी पड़ सकती है।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘यह देखा जा रहा है कि रेस्ट्रॉन्ट्स अपने कस्टमर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं दे रहे।’ GST काउंसिल ने इस मामले पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई है।

रेस्ट्रॉन्ट मालिकों ने सभी प्रकार के रेस्ट्रॉन्ट्स के लिए 12 पर्सेंट GST रेट तय करने के साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा बरकरार रखने की मांग की थी।

एक करोड़ रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले रेस्ट्रॉन्ट्स कंपोजिशन स्कीम का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के 5 पर्सेंट का टैक्स देना होता है। सरकार ने यह स्कीम छोटे कारोबारियों की मदद के लिए पेश की थी।

अधिकारी ने बताया कि GST काउंसिल को शिकायतें मिली थीं कि रेस्टोरेंट 18 पर्सेंट GST वसूल करने के बावजूद इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा कस्टमर्स को नहीं दे रहे।

1 जुलाई को GST लागू होने के बाद इस तरह की सर्विसेज पर टैक्स 15 पर्सेंट से बढ़कर 18 पर्सेंट हो गया था। हालांकि, इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के कारण इस बढ़ोतरी का बोझ नहीं पड़ेगा।

इंडस्ट्री की ओर से लॉबिंग करने के बाद GST काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम को अधिक आकर्षक बनाने और रेस्टोरेंट्स पर GST रेट पर दोबारा विचार करने के लिए असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई में एक कमेटी बनाई थी। अधिकारी ने बताया कि कमेटी ने अपने सुझावों को अंतिम रूप दे दिया है।

राज्य सरकार कोटा में ट्रिपल आईटी के लिए लेगी आईएल की जमीन

कोटा।  शहर में ट्रिपल आईटी शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंगलवार को जयपुर में मुख्य सचिव अशोक जैन की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें कलेक्टर रोहित गुप्ता ने शिरकत की।

इसमें कहा गया कि कोटा में क्लास अगले सत्र से शुरू करनी है। इसलिए इसके लिए जगह देखी जाए। अभी आईएल बंद हुई है। इसलिए वही उपयुक्त है। उसकी जमीन का अधिग्रहण किया जाए। इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर को सौंपी गई।

कोटा में ट्रिपल आईटी खोलने की घोषणा करने के बाद जमीन का आवंटन भी हो गया, लेकिन उस पर बाउंड्रीवाल करके छोड़ दिया गया। चार साल से क्लास जयपुर में चल रही है।

पिछली बैठक में तय किया गया था कि ट्रिपल आईटी की क्लास कोटा में ही चालू की जाए। इसके लिए आईएल को सही माना था। मंगलवार को हुई बैठक में चीफ सेक्रेटरी ने कलेक्टर को जमीन के अधिग्रहण के लिए कहा। दीपावली के बाद से प्रक्रिया शुरू होगी।

जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के साथ ही जयपुर से ट्रिपल आईटी की एक टीम कोटा आकर जमीन का निरीक्षण करेगी। यह देखेगी की क्लासें कहां संचालित की जा सकती हैं। इसके बाद दिल्ली से टीम आकर निरीक्षण करेगी।

इस निरीक्षण के बाद ही यहां पर संसाधन बढ़ाए जाएंगे। प्रयास यही है कि अगले सत्र से ट्रिपल आईटी की क्लासें कोटा में ही चलें। ट्रिपल आईटी का आवंटन कोटा को आईआईटी की जगह हुआ था। ट्रिपल आई टी का एक बैच जयपुर एमएनआईटी से पास आउट हो चुका है।

अब तक रानपुर स्थित जमीन पर चारदीवारी और सिक्योरिटी गार्ड के रूम पर ही ढाई करोड़ रुपए का खर्चा हो गया था। इसका निर्माण करने वाले एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी ने 100 करोड़ का रफ एस्टीमेट भेजा था, जो लंबे समय तक नहीं मिला।

हैंगिंग ब्रिज से हर साल 50 से 70 करोड़ की होगी कमाई

कोटा। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) हैंगिंग ब्रिज पर जल्द ही टोल प्लाजा बनाने की कोशिशों में जुट गई है। एनएचएआई ने हैंगिंग ब्रिज पर टोल स्थापित करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेज दिया है।

जिसकी मंजूरी मिलते ही टोल चुकाने के बाद ही कोई वाहन हैंगिंग ब्रिज से गुजर सकेगा। फिलहाल हैंगिंग ब्रिज पर आने-जाने का कोई पैसा नहीं वसूला जा रहा।

कोटा की खूबसूरती और चंबल की अटखेलियां देखने के लिए निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से ही हैंगिंग ब्रिज पर मेला सा लगा रहता है, लेकिन एक महीने बाद इस भीड़ पर लगाम लग जाएगी। एनएचएआई हैंगिंग ब्रिज पर आने-जाने के लिए टोल टैक्स वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है।

टोल टैक्स का आंकलन करने के लिए एनएचएआई अधिकारियों ने इस हाइवे पर यातायात के लोड गणना, टोल मार्ग और दूरी की सूचनाएं जुटाकर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय को भेज दी हैं।

इस तरह लगेगा टोल
एनएचएआई नियमों के मुताबिक बड़े पुल या स्ट्रक्चर के निर्माण पर दस गुना और बाइपास से गुजरने पर डेढ़ गुना टोल वसूला जाता है। हैंगिंग ब्रिज 1.4 किमी है। इसका दस गुना 14 किमी होगा और 26 किमी बाइपास का डेढ़ गुना 39 किमी। इस तरह कुल 53 किमी का टोल देना होगा गुजरने वाले वाहनों को।

शहर से रोजाना 8 से 10 हजार बाहरी वाहन गुजरते हैं। इनमें 5 से 7 हजार हैवी और 2 से 3 हजार छोटे व्हीकल शामिल हैं। मोटे अनुमान के मुताबिक रोज की टोल वसूली करीब 13 लाख होगी। साल में यह आंकड़ा 45 से 50 करोड़ का होगा।

मंत्रालय करेगा टोल दरें तय
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय हैंगिंग ब्रिज की लागत से एनएचएआई राजस्थान की ओर से भेजी गई सूचनाओं का आंकलन कर तय करेगा कि प्रति वाहन कितना टोल टैक्स वसूला जाए। टोल गणना होने के बाद नवंबर के आखिर तक टोल स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

पहले तीन माह लगेगा अस्थाई टोल
ब्रिज की मॉनिटरिंग व कंट्रोलिंग के लिए दोनों सिरों के पास दो टोल प्लाजा बनाए जाएंगे। नोटिफिकेशन जारी होने के तुरंत बाद ई-टेंडरिंग से टोल का तीन माह का अस्थाई कॉन्ट्रेक्ट दिया जाएगा। इसके बाद स्थाई टोल स्थापित होगा।

एनएचएआई राजस्थान के सीजीएम एमके जैन ने बतााय कि सरकार को टोल नोटिफिकेशन के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। नोटिफिकेशन के बाद दोनों हिस्सों पर टोल प्लाजा स्थापित होंगे, पहले तीन माह का अस्थाई ठेका दिया जाएगा।

राजावत ने रेरा को बिल्डरों के खिलाफ बताया, जीएसटी को विकास में बाधक

कोटा। स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि रैरा कानून दुनिया का सबसे अच्छा कानून है। इससे एक ओर जहां उपभोक्ताओं को जो अपनी मेहनत का पैसा अपना घर बनाने के लिए एक बिल्डर के पास जमा कराते हैं। उनको सुरक्षा मिलेगी। इसके जवाब में विधायक भवानी सिंह  राजावत ने रेरा को बिल्डरों के खिलाफ बताया, जीएसटी को विकास में बाधक।  

कृपलानी ने कहा कि अब कोई भी बिल्डर उनके साथ धोखाधड़ी नहीं कर पाएगा। वहीं बिल्डरों पर लगाम लग सकेगी। उन्हें तय समय सीमा पर ही उपभोक्ताओं को मकान उपलब्ध कराने होंगे। अन्यथा कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उक्त बात स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कही।

वे यहां यूआईटी की ओर से मंगलवार को नगर विकास न्यास की ओर से रायपुरा में बनने वाले मुख्यमंत्री जनआवास योजना के शिलान्यास कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सरकार हर गरीब के घर का सपना साकार करने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने यूआईटी चेयरमैन आरके मेहता से कहा कि वे अन्य जगह भी ऐसी ही योजना बनाए। बैठक में लाडपुरा विधायक भवानीसिंह राजावत ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर अंगुली उठा दी। उन्होंने जीएसटी व रैरा पर सवाल खड़े कर दिए।

इस पर मंत्रीं कृपलानी ने भी उनसे पूछ लिया कि रैरा कानून किसके लिए है। इस योजना में 2254.45 करोड़ में थेगड़ा से रायपुरा चौराहे के बीच कैथून रोड पर 400 फ्लैट बनेंगे। जिसमें ईएसडब्ल्यू के 288 और एलआईजी के 112 फ्लैट शामिल है।

कार्यक्रम में यूआईटी चेयरमैन आरके मेहता ने अतिथियों का स्वागत किया। अतिथियों में कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला, कोटा दक्षिण विधाायक संदीप शर्मा, सांगोद विधायक हीरालाल नागर, महापौर महेश विजय, उपमहापौर सुनीता व्यास व यूआईटी आयुक्त आनंदीलाल वैष्णव उपस्थित थे।

विधायक राजावत ने उठाए प्रश्न कहा 
बैठक में लाडपुरा विधायक भवानीसिंह राजावत ने जीएसटी व रैरा पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि चेयरमैन साहब ने रिपोर्ट पूरी बताई विकास की, लेकिन हकीकत यह है कि 18 फीसदी जीएसटी लगने के बाद यूआईटी का पूरा विकास ठप हो गया।

राजावत ने कहा कि कोई भी ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं है, जो काम कर रहे थे वो सब पलायन कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

मंत्री कृपलानी ने विधायक राजावत से मांगा जवाब
मंत्री कृपलानी ने विधायक भवानीसिंह राजावत के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि रैरा से अच्छा कानून इस दुनिया में ही नहीं आया है। पब्लिक व उपभोक्ता जो किश्त जमा कराता उसे इस कानून से सुरक्षा मिल रही है, उसे कई सालों तक मकान नहीं मिलता है।

बिल्डर उसके पैसे का उपयोग दूसरे व तीसरे प्रोजेक्ट में कर लेते हैं। इस कानून का रिजल्ट आएगा, तब लोग आपको धन्यवाद देने आएंगे। जीएसटी से जिन संवेदकों की समस्या है एमपी का जो आदेश है उस संबंध में मुख्यमंत्री से बात करेंगे।