Wednesday, June 24, 2026
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सामान्य मॉनसून से जबरदस्त पैदावार का लक्ष्य

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नई दिल्ली।  सरकार ने इस साल मॉनसून से औसत बारिश होने के पूर्वानुमान पर फसल वर्ष 2017-18 के लिए रिकॉर्ड 27.3 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सरकार ने इसके साथ ही कृषि क्षेत्र के लिए 4 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने का अनुमान जताया है। सरकार ने मौजूदा फसल वर्ष (जुलाई-जून) में रेकॉर्ड 27.198 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन होने का लक्ष्य तय किया है।

कृषि मंत्रालय के दूसरे अनुमान के मुताबिक, दो साल के सूखे के बाद इस साल अच्छी बारिश होने का अनुमान है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने आगामी खरीफ सीजन के लिए बुआई की रणनीति पर चर्चा के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में सिंह ने, ‘अगले साल के लिए 27.3 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन होने का लक्ष्य रखा गया है।’

उन्होंने कहा कि इस साल औसत बारिश होने का अनुमान जताया जा रहा है। इससे सरकार को तय लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। खरीफ और रबी सीजन में लगभग आधे खाद्यान्न का उत्पादन होता है। देश में लगभग 7.2 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल बोई जाती है। इस सीजन में सबसे ज्यादा उपज चावल, दाल, तिलहन, कपास और गन्ने की होती है।

कृषि सचिव शोभना पटनायक ने लक्ष्य हासिल होने पर भरोसा जताते हुए कहा, ‘इस साल भी अच्छा मॉनसून रहने की संभावना है। हमें 2017-18 में 4 प्रतिशत कृषि वृद्धि हासिल होने की उम्मीद है।’ उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन की फसलों का उत्पादन बहुत हद तक मॉनसून पर निर्भर करता है, इसलिए राज्य सरकारों को बारिश शुरू होने में देरी, सूखे का दौर लंबा चलने और कम या ज्यादा बारिश होने जैसे हर हालात से निपटने की तैयार कर लेनी चाहिए।

 

जीएसटी के बाद महंगे हो जाएंगे मोबाइल फोन

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नई दिल्ली। सरकार जीएसटी लागू करने के बाद आयात किए जाने वाले मोबाइल फोन्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा सकती है। जानकारी के मुताबिक इसके बाद ऐसे मोबाइल की कीमतें 5-10 फीसदी बढ़ जाएंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री की ओर से कहा गया है कि इस मामले में मंत्रालय के द्वारा पहले ही एटॉर्नी जर्नल से चर्चा कर ली गई है।

इसके अंतर्गत यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कीमत बढ़ने से इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी एग्रीमेंट (आईटीए) का उल्लंघन नहीं होगा। कारण कि नियम के मुताबिक कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स को ड्यूटी फ्री रखा जाता है। मंत्रालय की अंतरिम कमेटी की ओर से इस मामले को विस्तार से समझा जा रहा है। कमेटी में फाइनेंस, कॉमर्स, टेलीकॉम और आईटी मिनिस्ट्री से संबंधित लोग शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक कस्टम ड्यूटी को लागू करने के पीछे सरकार की सोच है कि जीरो कस्टम ड्यूटी के बूते देश में मैन्यूफेक्चरिंग को कोई फायदा नहीं मिलना है।ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में बिकने वाले 30 फीसदी फोन आयातित हैं। इनमें से सबसे ज्यादा चीन से आते हैं। ऐसे में सरकार की सोच है कि ऐसे फोन्स पर कस्टम ड्यूटी लगाए जाने से लोकल मैन्यूफेक्चरर्स को फायदा पहुंचेगा।

सरकार का प्रयास है कि ऐपल जैसी कंपनियां भी भारत में ही मैन्यूफेक्चरिंग शुरू करें।आईफोन मेकर जल्द ही भारत में फोन को असेंबल करना शुरू करेंगे। कर्नाटक में एक प्लांट लगाया गया है।मगर कंपनी ने सरकार से कई तरह के टैक्स में छूट मांगी है। जबकि सरकार का कहना है कि वो एक भी कंपनी को छूट देने के मूड में नहीं है।

सरकार मानती है कि आईटीए भी पूरी तरह से मोबाइल फोन कैटेगरी को कवर नहीं करता है। आईटी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमारे सभी फोन आईटीए के अंतर्गत नहीं आते हैं। एटॉर्नी जनरल का भी कहना है कि आईटीए सभी मोबाइल फोन को कवर नहीं करता है।’

खाद्य तेल के दाम 15 फीसदी तक कम होंगें

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  • वैश्विक स्तर पर तिलहन में नरमी से घटेंगे दाम 
  • ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड दोनों तरह के खाद्य तेलों की कीमतें घटाएंगी कंपनियां
  • रसोई बजट 1.5-2.0 फीसदी कम हो सकता है

मुंबई । घरेलू खाद्य तेल कंपनियां कीमतों में 15 फीसदी तक कटौती पर विचार कर रही हैं। वैश्विक स्तर पर कीमतें फिसलने और स्थानीय स्तर पर तिलहन के दाम कमजोर पड़ने से कंपनियां तत्काल प्रभाव से यह कदम उठाएंगी, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा।

देसी खाद्य तेल कंपनियां (ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड दोनों) पहले उत्पादित तेल के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर छूट देने की सोच रही हैं। खुदरा विक्रेता भी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर कीमतों में कमी का लाभ उपभोक्ताओं को देंगे। हालांकि कीमतों में कटौती मौजूदा कीमतों के दीर्घ अवधि तक निचले स्तर तक बने रहने पर निर्भर करेगी।

खाद्य तेल के दाम 15 फीसदी कम हुए तो औसत भारतीय परिवारों का रसोई बजट 1.5-2.0 फीसदी कम हो सकता है। रसोई में होने वाले कुल खर्च में खाद्य तेल का योगदान 10 फीसदी तक होता है। खाद्य तेल और तिलहन की कीमतों में कमी के कई कारण हैं। इनमें उत्तरी और लैटिन अमेरिका में सोयाबीन की बंपर पैदावार, वैश्विक जैव-डीजल क्षेत्र से कमजोर मांग और भारत में तिलहन का अधिक उत्पादन शामिल हैं।

फॉर्च्‍यून ब्रांड के नाम से खाद्य तेल का उत्पादन करने वाली अदाणी विलमर लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी अतुल चतुर्वेदी कहते हैं, ‘कच्चे माल की कीमतों में कमी का फायदा तत्काल ग्राहकों को दिया जाता है और मौजूदा स्थिति भी कुछ ऐसी ही है।’ हेल्दी ऐंड टेस्टी ब्रांड तेल का उत्पादन करने वाली कोलकाता की इमामी लिमिटेड ने तिलहन और कच्चा पाम तेल की कीमतों में कमी का लाभ उपभोक्ताओं को देने का फैसला किया है।

इमामी समूह के निदेशक आदित्य वी अग्रवाल कहते हैं, ‘हम अपने गुणवत्तापूर्ण और सस्ते उत्पाद से मध्यम/ उच्च मध्य वर्ग के लोगों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार की स्थिति और हमारे उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए हम दाम निर्धारित तय करते हैं।’ इस बीच बेंचमार्क कच्चे पाम तेल की कीमतें इस कैलेंडर वर्ष अब तक 18 फीसदी तक गिर चुकी हैं और इस वक्त इसका कारोबार 2669 एमवाईआर (मलेशियाई रिंगिट) पर हो रहा है। 

जर्मनी के विश्लेषक थॉमस मील्के के अनुसार इस साल विश्व में अतिरिक्त 55 लाख टन सीपीओ उत्पादन हो सकता है। मलेशिया और इंडोनेशिया में सीपीओ उत्पादन क्रमश: 25.3 लाख और 30 लाख टन अतिरिक्त रह सकता है। एनसीडीईएक्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार एक्स-कांडला डिलिवरी के लिए पाम तेल की कीमतेंं 10 फीसदी कम होकर 518.80 रुपये प्रति 10 किलोग्राम रह गईं।

परिष्कृत तेल की कीमतें 10.81 फीसदी घटकर 553 रुपये प्रति 10 किलोग्राम रह गईं। हालांकि इंदौर में शोधित सोया तेल 14.17 फीसदी फिसलकर 625 रुपये प्रति 10 किलोग्राम रह गया। तिलहन कीमतें में भी तेल की तरह ही गिरावट देखी गई। सरसों बीज की कीमत 15 फीसदी घटकर 3767.50 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। अधिक सोयाबीन उत्पादन और मलेशिया और इंडोनेशिया में पाम तेल की जबरदस्त पैदावार की खबरों के बाद शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (सीबीओटी) पर सोया तेल की कीमतों पर भी दबाव है।

मलेशिया इस साल से बी10 बायोडीजल का मिश्रण शुरू करना चाहता है। इस बीच सरकार ने सभी खाद्य तेलों का आधार आयात मूल्य कम कर दिया है। सबसे ज्यादा कमी पाम तेल के मामले में हुई है और इसे 22 डॉलर कम कर 725 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है जबकि कच्चा सोया तेल का आयात मूल्य 14 डॉलर कम होकर अप्रैल के दूसरे सप्ताह के लिए 770 डॉलर प्रति टन हो गया है।

सीपीओ और सोया तेल के आधार आयात मूल्य में यह 5वीं कटौती है। आधार आयात मूल्य हरेक पखवाड़े में तय होता है। सरकार ने अप्रैल-सितंबर अवधि के लिए सूर्यमुखी बीज पर सीमा शुल्क 30 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। अप्रैल-सितंबर में 10 लाख टन सूर्यमुखी बीज का आयात हो सकता है।

सहारा की ऐम्बी वैली पर 24,646 करोड़ का जुर्माना

सहारा समूह पर आयकर विभाग की बढ़ी कार्रवाई

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने सहारा समूह की ऐम्बी वैली प्रॉजेक्ट को 24,646 करोड़ रुपए की टैक्स मांग का नोटिस भेजा है। विभाग ने कंपनी के विशेष ऑडिट के बाद यह नोटिस भेजा है। विभाग ने एवीएल के लेखा खातों की विशेष जांच और ऑडिट के बाद पाया कि आकलन वर्ष के लिए 48,000 करोड़ रुपए से अधिक की आय को कंपनी के खातों में नहीं दिखाया गया। ऐसे में विभाग ने कंपनी को टैक्स और पेनल्टी का नया नोटिस भेजा है।

सहारा समूह के एक प्रवक्ता ने इस खबर की पुष्टि की है। प्रवक्ता ने संक्षिप्त बयान में स्वीकार किया कि आयकर विभाग ने ऐम्बी वैली प्रॉजेक्ट की 48,085.79 करोड़ रुपए की आय का मामला दिखा कर कुल 24,646.96 करोड़ रुपए का कर नोटिस भेजा है। अधिकारियों ने बताया कि कर विभाग ने इस साल जनवरी में यह नोटिस जारी किया।

आकलन वर्ष 2012-13 के लिए एवीएल की आय के विशेष ऑडिट में यह सामने आया कि मूल कंपनी ने कथित रूप से कई विशेष कंपनियां बनाईं, जिनकी आय को बाद में एवीएल के खातों में डाला गया। समय के साथ इन कंपनियों का एवीएल में विलय हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एवीएल ने 2012-13 के लिए अपने आयकर रिटर्न में कुछ करोड़ रुपए का नुकसान दिखाया था। लेकिन आयकर विभाग के विशेष ऑडिट से यह अतिरिक्त आय सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह मुंबई उच्च न्यायालय के आधिकारिक परिसमापक को सहारा समूह के स्वामित्व वाली ऐम्बी वैली प्रॉजेक्ट की 34,000 करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों की बिक्री का निर्देश दिया है। साथ ही सहारा के प्रमुख सुब्रत राय को 28 अप्रैल को व्यक्तिगत रुप से पेश होने को कहा गया है।

फोक्सवैगन की पोलो कार जीटीएस एडिशन में लॉन्च

नई दिल्ली । फोक्सवैगन की प्रीमियम हैचबैक पोलो अब भारत में जीटी स्पोर्ट लिमिटेड एडिशन में लॉन्च हुई है। पोले के स्पेशल एडिशन मॉडल्स TSI और TDI, दोनों में उपलब्ध रहेंगे। इसकी कीमत 9.21 लाख रुपये तक जाती है। आपको बता दें कि एक्स शोरूम प्राइस के अलावा 20, 000 की अतिरिक्त कीमत पर यह शोरूम में उपलब्ध है।

नई पोलो में कोई मकैनिकल बदलाव नहीं किए गए हैं व दो इंजन विकल्प – 1.2-लीटर टीएसाई व 1.5-लीटर टीडीआई इंजन के साथ आई है। फोक्सवैगन के मैनेजिंग डायरेक्टर थीरी लेसीपक ने बताया, ‘पोलो जीटी हमेशा से उन लोगों की पहली पसंद रही है, जो हैचबैक सेगमेंट में प्रीमियम फीचर्स व पावर को तवज्जो देते हैं। नए एडिशन में हमने पोलो की खूबियों को और बढ़ाया है।’

नई पोलो जीटी के एक्सटीरियर में 16-इंच पोर्टैगो अलॉय वील्स, ब्लैक रूफ फॉइल जैसे चेंजेस किए गए हैं। कार के भीतर जो अहम बदलाव किया गया है, वह है इसके लेदर-फिनिश जीटी स्पोर्ट सीट कवर्स। कलर ऑप्शंस की बात करें तो यह कार आपको फ्लैश रेड और कैंडी वाइट में मिलेगी।

जीएसटी के बाद प्रॉपर्टी पर बढ़ सकता है टैक्स: आढिया

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  • स्थानीय निकायों के मनोरंजन कर जीएसटी से बाहर
  • राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए बढ़ा सकेंगे जनोपयोगी सेवाओं पर शुल्क
  • जमाखोरी रोकने के लिए 1 जुलाई से कुछ दिन पहले होगी दरों की घोषणा

नई दिल्ली। एकजुलाई से लागू होने वाले गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के तहत स्थानीय निकायों को चुंगी तथा अन्य शुल्कों के रूप में मिलने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए संभव है कि प्रॉपर्टी पर टैक्स और जनोपयोगी सेवाओं के शुल्क बढ़ा दिया जाए। स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले मनोरंजन कर को भी जीएसटी में समाहित नहीं किया गया है। इससे भी स्थानीय निकायों को राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी।

राजस्व सचिव हसमुख आढिया ने मंगलवार को जीएसटी पर आयोजित विशेष कार्यशाला में संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के तहत कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और प्राकृतिक गैस अभी जीएसटी के दायरे से बाहर होगी। इन्हें जीएसटी में शामिल करने के बारे में हर वर्ष समीक्षा की जाएगी।

शराब भी जीएसटी से बाहर है। तंबाकू पर सेस लगेगा। जीएसटी से घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। स्वदेशी उत्पाद आयातित उत्पादों के समक्ष प्रतिस्पर्धी हो जाएंगेे। राजस्व सचिव ने कहा कि जीएसटी की तैयारी पूरी हो चुकी है। किस उत्पाद अथवा सेवा को किस स्लैब में रखना है यह भी जल्द तय कर लिया जाएगा। कर जमा कराने वाले मौजूदा करदाताओं में 71% ने जीएसटी के लिए पंजीकरण करा लिया है।

अभी 5 पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखा गया है। इनमें कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और प्राकृतिक गैस शामिल  हैं। इन्हें जीएसटी में शामिल करने के बारे में हर वर्ष समीक्षा की जाएगी। सचिवोंकी फिटमेंट कमेटी भले ही तय कर ले कि किस वस्तु और सेवा पर कितना टैक्स लगेगा, उसे अभी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

अभी नहीं किया जाएगा दरों का एलान

सूत्रों के अनुसार पहले घोषणा से चीजों की जमाखोरी हो सकती है। इसलिए 1 जुलाई से चंद रोज पहले दरों का ऐलान किया जाएगा।
अभी तक बजट में एक्साइज या कस्टम ड्यूटी में जो बदलाव होते थे, वे बजट घोषणा के साथ ही लागू हो जाते थे। 

आयातित चीजों के दाम घरेलू से कम नहीं

अढिया ने बताया कि आयातित वस्तुओं पर टैक्स की दर घरेलू से कम नहीं होगी। इसका फायदा भी घरेलू कंपनियों को मिलेगा। यह एक मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाएगा।

एसएमई की मदद के लिए सर्विस प्रोवाइडर

छोटे  कारोबारियों को समस्या हो इसके लिए 34 सर्विस प्रोवाइडर्स का चयन कर लिया गया है। दूसरे चरण में और सर्विस प्रोवाइडर्स सेलेक्ट किए जाएंगे। इसके अलावा जीएसटी प्रैक्टिशनर भी कारोबारियों की मदद करेंगे। केंद्र तथा राज्य सरकारों के दफ्तरों में रिटर्न भरने में मदद के लिए केंद्र बनाने की भी योजना है। स्थानीय भाषाओं में हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किए जाएंगे।

नहीं बढ़ेगी महंगाई

राजस्वसचिव ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई नहीं बढ़ेगी। जीएसटी से वस्तु एवं सेवाओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना नहीं है, जैसा कि नई टैक्स व्यवस्था लागू करते समय दूसरे देशों में हुअा। भारत में जीएसटी सुचारू रूप से लागू होगा।

कारोबारियोंकी होगी ‘कंप्लायंस रेटिंग’

अढियाने बताया कि समय पर टैक्स और रिटर्न जमा करने वालों को ‘कंप्लायंस रेटिंग’ दी जाएगी। यह जीएसटीएन पर सार्वजनिक रूप से दिखेगा। इससे कारोबारी तय कर सकेंगे वह कम रेटिंग वाले के साथ बिजनेस करना चाहते हैं या नहीं। जीएसटीएन सीईओ प्रकाश कुमार ने बताया कि रेटिंग का तरीका बाद में तय किया जाएगा।

निर्यातकों को 90% रिफंड 7 दिनों में

निर्यातकी जाने वाली वस्तुओं के लिए जीएसटी में ‘शून्य कर’ होने से भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा। सस्ता होने के कारण वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। निर्यातकों को 90% टैक्स रिफंड सात दिनों में मिल जाएगा।

 

WIPRO के प्रॉफिट में 7% बढ़ोत्तरी, आय भी 5 फीसदी बढ़ी

मुंबई। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो ने मंगलवार को बताया कि वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में कंपनी का कारोबार 2,267 करोड़ हो गया है। 

विप्रो ने अपने कारोबार में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। वहीं पिछले साल कंपनी ने चौथी तिमाही में 1,918.50 करोड़ का कारोबार दर्ज किया था। कंपनी के बोर्ड ने 1:1 के अनुपात में बोनस शेयरों की भी सिफारिश की है।

रोशनी से खुद चार्ज होगी स्मार्टफोन की नई बैटरी

टोक्यो। वैज्ञानिक ऐसी बैटरी विकसित कर रहे हैं, जिससे स्मार्टफोन को बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह नई बैटरी रोशनी से खुद चार्ज होकर ऊर्जा संग्रहित कर सकती है।लिथियम आयन बैटरी की बदौलत स्मार्टफोन, टैबलेट, और कंप्यूटर जैसे मोबाइल उपकरणों का तेजी से फैलाव हुआ है।

हालांकि इन उपकरणों को बराबर चार्ज करने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि इनकी बैटरी की क्षमता सीमित होती है।कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉर्ज पी डेमोपोलोस ने कहा कि र्स्माटफोन समेत कई उपकरणों को आपको दफ्तर ले जाने की जरूरत पड़ती है। इसलिए आपको इन्हें रोजाना चार्ज करने की जरूरत पड़ती है।

कई दफा ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे आप इन्हें चार्ज नहीं कर पाते हैं।इस परेशानी को दूर करने के लिए पोर्टबल सोलर चार्जर का विकास किया गया, लेकिन इन हाइब्रिड डिवाइस में बड़ी दिक्कत यह है कि इन्हें छोटा आकार में बनाना कठिन है। इस समस्या का हल निकालने के लिए शोधकर्ता सिंगल डिवाइस पर काम कर रहे हैं।

यह डिवाइस रोशनी के उपयोग से ऊर्जा संग्रहित करने में सक्षम होगी। शोध से जाहिर हुआ है कि फोटो-हार्वेस्टिंग डाई मोलेक्यूल के मिश्रण से लिथियम आयन बैटरी के कैथोड को रोशनी के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकता है।

बिजलीघरों के निजीकरण के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति की वार्ता होगी

राज्य के 8 प्रमुख बिजलीघरों के हजारों अभियंता एवं कर्मचारियों द्वारा राज्य स्तरीय धरने को विफल करने के लिए प्रबंधन ने दिया वार्ता का न्यौता

कोटा। राज्य के सरकारी बिजलीघरों को विनिवेश के नाम पर निजी क्षेत्र को बेचने का मुद्दा गरमाने लगा है। दो बडे़ बिजलीघरों छबड़ा सुपर थर्मल एवं कालीसिंघ सुपर थर्मल के विनिवेश को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी होने से अभियंताओं, कर्मचारियों एवं श्रमिकों में गहरा आक्रोश है।

पिछले दो माह से राज्य के प्रत्येक बिजलीघर में जनांदोलन कर कोर कमेटी ने राज्य सरकार से अपील की कि 750 करोड़ रूपए के लाभ में चल रहे विद्युत उत्पादन निगम के संयंत्रों को बेचने की बजाय अधिक बिजली उत्पादन किया जाए। राजस्थान राज्य उत्पादन निगम (आरवीयूएन) संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा बुधवार को निजीकरण एवं विनिवेश के विरोध में जयपुर के विद्युत भवन मुख्यालय पर राज्यस्तरीय धरना प्रस्तावित था लेकिन निगम प्रशासन ने कोर कमेटी को धरना स्थगित कर पहले बातचीत के लिए बुलाया।

समिति के संजय जोशी, रवि प्रकाश विजय, घनश्याम शर्मा एवं गोविंद राजपुरोहित ने बताया कि कोर कमेटी का दल सीएमडी से वार्ता करेगा। साथ ही प्रत्येक बिजलीघर में निजीकरण के विरोध में सांकेतिक धरना दिया जाएगा।

इससे पहले राज्य स्तरीय धरने को लेकर कोटा, कालींसंध, छबड़ा व सूरतगढ सुपर थर्मल पावर स्टेशन तथा धौलपुर, रामगढ़, गिराल, माही बिजलीघरों से लगभग 2000 कर्मचारी एवं इंजीनियर्स ने एक दिन के आकस्मिक अवकाश का आवेदन किया था।, जिसमें चपरासी से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश को भेजे मार्मिक पत्र

राज्य में निगम के सभी सरकारी बिजलीघरों से कर्मचारियों, अभियंताओं एवं उनके बच्चों ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 1700 से अधिक पोस्टकार्ड लिखकर जनहित में विनिवेश के खिलाफ प्रसंज्ञान लेने की गुहार लगाई। कई बेटियों ने अपने पत्र में लिखा कि अच्छा कार्य करने वालों के साथ राज्य सरकार यह कैसा व्यवहार कर रही है।

वनिता, तान्या, मनीषा, अमिता ने लिखा- क्या सस्ती दरों पर अधिक बिजली पैदा करना अपराध है? हमारे पापा बहुत तनाव में हैं। आप न्याय कीजिए। आकांक्षा, अर्पिता, मधु, आरूषि व मोनिका ने लिखा- चालू बिजलीघरों को अचानक बंद करके सरकार क्या मैसेज दे रही है। हम पढ़ लिखकर भविष्य में कभी सरकारी सेवा में सर्विस नहीं करेंगे। आईआईटी कर रहे गौरव गर्ग ने लिखा कि निजी कंपनियों के दबाव में शर्तों में बदलाव कर देना न्यायसंगत नहीं है।

जनहित में पुनर्विचार हो 

समिति ने मांग की कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कालीसिंध तथा छबड़ा सुपर थर्मल की विनिवेश प्रक्रिया पर जनहित में पुनर्विचार किया जाए, अन्यथा निजी क्षेत्र की मनमानी से जनता को महंगी दरों से बिजली मिलेगी। इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, जिसमे विनिवेश को गलत बताया गया है। विनिवेश के लिए कंसलटेंट मुंबई की अर्नेस्ट व यंग ऑडिट कम्पनी ने टेंडर प्रक्रिया में निजी कंपनियों के नियम व शर्तो को एकतरफा मंजूरी दे दी, क्योकि यही कम्पनी दोनों पक्षों की सलाहकार है। इसकी जांच की जाए।

स्पेक्ट्रम नीलामी पर परामर्श पत्र 15 दिन में : ट्राई

नयी दिल्ली। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ट्राई के अगले दौर की स्पेक्ट्रम नीलामी पर अगले पखवाड़े के भीतर परामर्श प्रक्रिया शुरू करने की उम्मीद है। यहां एक कार्यक्रम में  पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में ट्राई के चेयरमैन आर. एस. शर्मा ने कहा, हमें इसके स्पेक्ट्रम नीलामी पर परामर्श पत्र करीब 15 दिनों में जारी करने की उम्मीद है।

दूरसंचार विभाग ने विभिन्न आवृत्ति के स्पेक्ट्रमों की नीलामी के लिए कीमत पर ट्राई के सुझाव मांगे हैं। इसमें 700 मेगाहट्र्ज वाला प्रीमियम बैंड भी शामिल है जो अक्तूबर 2016 की नीलामी में बिका नहीं था। दूरसंचार विभाग ने ट्राई से 5जी सेवाओं के लिए भी सुझाव मांगे हैं। शर्मा ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया में आमतौर पर छह माह का समय लगता है। उसी समय तक इस बारे में सुझाव दिए जाने की उम्मीद है।अपने संबोधन में शर्मा ने कहा कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को पाने के लिए हम बुनियादी ढांचे की साझेदारी पर जोर दे रहे हैं।

शर्मा ने कहा कि हमारा स्पष्ट दृष्टिकोण है कि पिछले दरवाजे बुनियादी ढांचे की साझेदारी से सामने के पक्ष पर प्रतिस्पर्धा कम नहीं होनी चाहिए। साझेदारी स्मार्ट शहरों की जरूरत होगी।उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर इस बात पर विचार-विमर्श हो रहा है कि देश में केबल टीवी आपरेटरों को ब्रांडब्रैंड की सुविधा उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी जाए।  स्पेक्ट्रम नीलामी पर दूरसंचार क्षेत्र के उद्योग संगठन सीओएआई के महासचिव राजन मैथ्यूज ने कहा कि नीलामी का समय 2018 के अंत या 2019 की शुरूआत में होना चाहिए।