Tuesday, June 23, 2026
Home Blog Page 5840

सरकार का रिकॉर्ड 27.3 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य

0

नई दिल्‍ली।  सरकार ने बेहतर मॉनसून की उम्मीद को देखते हुए जुलाई से शुरू होने वाले नए फसल वर्ष 2017-18 में रिकार्ड 27.3 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। वहीं मौजूदा फसल वर्ष (जुलाई 2016 से जून 2017) के दौरान खाद्यान्न उत्पादन 27.19 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

कृषि मंत्रालय ने खाद्यान्न उत्पादन का दूसरा अनुमान आज जारी किया। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘अगले साल के लिए सरकार ने रिकॉर्ड 27.3 करोड़ टन के खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है।’ सिंह आज यहां आगामी खरीफ मौसम की बुआई रणनीति के बारे में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस साल भी मॉनसून सामान्य रहने की उम्मीद है। यह वांछित लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

कृषि मंत्रालय के अनुसार आगामी खरीफ मौसम के लिए बीजों की पर्याप्त आपूर्ति है। उदाहरण के तौर पर 83.46 लाख क्विंटल धान के बीज और 3.75 लाख क्विंटल तुअर दाल के बीज की मात्रा उपलब्ध है। मंत्रालय के अनुसार इस बुवाई मौसम में 2.90 करोड़ टन उवर्रक की जरूरत का आकलन है। सिंह ने कहा कि आगामी खरीफ मौसम में बुआई कार्य सुनियोजित तरीके से सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों को किसानों के लिए अच्छी गुणवत्ता के विभिन्न प्रकार के बीज और उर्वरकों की खरीद करने की योजना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही राज्य सरकारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फसली मौसम के दौरान विभिन्न जरूरत के सामान की कमी न हो। सिंह ने कहा कि राज्य सरकारों को सभी योजनाओं के आसान और समयबद्ध अनुपालन के लिए प्रयास करना चाहिए जैसे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इत्यादि ताकि किसानों को काम की शुरुआत के समय ही धन उपलब्ध हो सके।

जीएसटी : उधारी चुकाने की मियाद तय

0

इंदौर। जुलाई से लागू होने वाली एकीकृत कर प्रणाली जीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट चैप्टर में नए नियम जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत उधारी में माल खरीदने वाले व्यापारी को बेचवाल व्यापारी (जिसने उसे माल बेचा) का भुगतान 180 दिन यानी छह महीने में करना ही होगा। यदि इस समय-सीमा में उधारी नहीं चुकाई तो खरीदने वाले व्यापारी को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा।

इसके अलावा माल बेचने वाले व्यापारी का टैक्स भी खरीदने वाले को चुकाना होगा। बेचवाल द्वारा भरा गया टैक्स तो खरीदार व्यापारी को चुकाना होगा ही, इसके साथ उस पर छह महीने या ज्यादा का ब्याज भी चुकाना पड़ेगा। सीए भरत नीमा के मुताबिक ईमानदार और उधारी वसूलने में परेशान हो रहे व्यापारियों के लिए यह अच्छा प्रावधान है। जीएसटी के जरिए समय पर व्यापारियों की उधारी वसूली की व्यवस्था खुद सरकार ने कर दी है। जीएसटी का टैक्स रेट जारी होने के साथ ही प्रावधान के तहत ब्याज की दरें भी जल्द जारी हो जाएंगी।

देशव्यापी हो सकेगा व्यापार
नीमा के मुताबिक, जीएसटी एक देश एक बाजार की कल्पना पर आधारित है। अभी यहां का व्यापारी पैसा डूबने या उधारी के डर से सुदूर प्रदेश के व्यापारी से सीधे कारोबार करने में डरता है। उधारी चुकाने की मियाद लागू होने से व्यापारियों का यह डर खत्म होगा। ईमानदार कारोबार और देशव्यापी व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

अभी परेशानी है उधारी
बाजार के कई व्यापारियों के लिए उधारी वसूलना ताजा स्थिति में सिरदर्द से कम नहीं है। अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इडस्ट्री के सचिव सुशील सुरेका के मुताबिक उधार में माल लेने वाले कुछ व्यापारी तो ऐसे होते हैं, जिनसे वसूली नहीं हो पाती।
ऐसे में पूंजी अटकने से व्यापार की लागत और परेशानी बढ़ जाती है। इस स्थिति में वर्तमान कर प्रणाली में कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अंकुश के लिए बाजार ने अपना सिस्टम बना रखा था। कई तरह के व्यापार में नकद माल लेने वालों के लिए अलग रेट हैं और उधारी की मियाद के हिसाब से अलग। जीएसटी में सब कुछ ऑनलाइन होगा।

इसलिए हुई व्यवस्था
कई व्यापारी के साथ अधिकारी भी उधारी चुकाने की मियाद लागू होने से हैरान हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बाजार की उधारी से सरकार का क्या वास्ता। सीए नीमा के मुताबिक जीएसटी में क्रेडिट रेटिंग सिस्टम भी है। इसके जरिए समय पर टैक्स चुकाने से लेकर पालन प्रतिवेदन पर रेटिंग मिलेगी। ऐसे में समय पर उधारी नहीं चुकाने वाले व्यापारी इस सिस्टम से रडार पर आ जाएंगे। उनकी रेटिंग गिरेगी। आगे जाकर गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों को ब्लैक लिस्ट में डालना भी संभव हो जाएगा।

 

दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिलेबस में शामिल होगा चेतन का नॉवल

कोटा। चेतन भगत अब दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिलेबस का हिस्सा हैं। उनका पॉपुलर नॉवल ‘फाइव पॉइंट समवन’ इस साल से डीयू में इंग्लिश लिटरेचर में पढ़ाया जाएगा। जुलाई से शुरू होने वाले अकैडमिक सेशन में बीए सेकंड इयर के लिटरेचर स्टूडेंट्स यह नॉवल पढ़ेंगे। रविवार को चेतन भगत ने ट्वीट करके इस खबर को अपने फैंस के साथ शेयर किया।

इसके बाद उनके लिटरेचर पर हमेशा से उठती रही कंट्रोवर्सी सोशल मीडिया पर फिर से सुलगती नजर आई। कई लोगों ने डीयू के इस फैसले पर नाराजगी जताई, हालांकि उनके फैंस ने उन्हें बधाई दी। चेतन का लिटरेचर पॉपुलर फिक्शन पेपर का पार्ट होगा, ऐसे में टीचर्स का कहना है कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है।

चेतन भगत का नॉवल ‘फाइव पॉइंट समवन’ बीए सेकंड इयर के स्टूडेंट्स के लिए जनरल इलेक्टिव पेपर होगा। यह पॉपुलर फिक्शन पेपर का पार्ट बनाया गया है। दो साल पुराने आए चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम सीबीसीएस की कोर कमिटी ने चेतन भगत के इस नॉवल के लिए सिफारिश की थी। सीबीसीएस के तहत यह पेपर प्रोग्राम समेत ऑनर्स के स्टूडेंट्स को भी पढ़ाया जाता है।

हालांकि, टीचर्स ने बताया कि चेतन का नॉवल इंग्लिश डिपार्टमेंट पढ़ाया जाएगा, लेकिन ऑनर्स स्टूडेंट्स को यह नहीं पढ़ाया जाएगा। जे के राउलिंग की हैरी पॉटर सीरीज, अमेरिकन पोएट एम एल्कॉट की लिटिल विमन और क्राइम नॉवलिस्ट अगाथा क्रिस्टी की ओरिएंट एक्सप्रेस भी पॉपुलर फिक्शन पेपर का पार्ट है।

हालांकि, डीयू के कुछ टीचर्स का कहना है कि इंग्लिश लिटरेचर में हर तरह का लिटरेचर पढ़ाया जाना चाहिए, इससे स्टूडेंट्स एनालिसिस करना सीखते हैं। अगर हम पॉपुलर लिटरेचर की बात कर रहे हैं, तो चेतन भगत भी इसमें फिट बैठते हैं। चेतन भगत ने ट्वीट कर कहा, मैं सम्मानित हूं कि डीयू मेरी किताब अपने कोर्स में जोड़ रहा है। 

कोटा ब्रांच को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट चैप्टर अवार्ड

कोटा। दी इंस्टीटूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया कोटा चैप्टर को वर्ष 2016 का राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट चैप्टर अवार्ड केटेगरी “डी” में दिया गया । संस्था को राष्ट्रीय स्तर पर मेंबर्स स्ट्रेंथ बढ़ाने का भी  बेस्ट चैप्टर अवार्ड मिला है ।

 चैप्टर सेक्रेटरी सीएमए आकाश अग्रवाल ने बताया कि कोटा चैप्टर की ओर से यह दोनों अवार्ड चेप्टर डायरेक्टर कोचिंग सीएमए एस.एन.मित्तल ने 22 अप्रैल को चंडीगढ़ में होटल के.सी.क्रॉसवर्ड में आयोजित राष्ट्रीय रीजनल एवं चैप्टर्स मीट में प्राप्त किया। चैप्टर चेयरमैन सीएमए विनोद झालानी ने सभी सदस्यों, फेकल्टी, राष्ट्रीय टीम एवं विद्यार्थियो का आभार व्यक्त किया। 

स्टेंट बनाने वाली कंपनियों पर सरकार का शिकंजा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मनचाहे दाम पर हृदय रोग में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट की निर्माता कंपनियों पर शिकंजा कसा है। स्टेंट को मनचाहे दाम पर बेचने की शिकायत मिलने पर नैशनल फार्मासूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने स्टेंट की कीमत तय कर दी थी। इसके बाद कुछ कंपनियां अपने स्टेंट मार्केट से वापस लेने की योजना बना रही थीं। इसे देखते हुए सरकार ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए अगले छह महीने तक स्टेंट को मार्केट से वापस लेने पर रोक लगा दी। अब ये कंपनियां अगले छह महीने तक मार्केट से अपने स्टेंट वापस नहीं ले सकेंगी और एनपीपीए द्वारा निर्धारित मूल्यों पर ही उनको स्टेंट बेचना पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक, एनपीपीए द्वारा कीमत निर्धारित किए जाने के बाद स्टेंट बनाने वाली दो बड़ी कंपनियों ऐबट और मेडट्रॉनिक ने अपने प्रीमियम स्टेंट को वापस लेने के लिए एनपीपीए को आवेदन दिया था। कई अन्य कंपनियां भी इस राह पर चलने की योजना बना रही थीं।सरकार ने ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 2013 के सेक्शन 3(i) के तहत मिले विशेषाधिकार का प्रयोग किया और कंपनियों को स्टेंट्स का उत्पादन, आयात और सप्लाई जारी रखने का निर्देश दिया है ताकि स्टेंट्स की कमी न हो।

इसके अलावा सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे एनपीपीए और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के पास तैयार और वितरित हुए स्टेंट्स पर साप्ताहिक रिपोर्ट भी जमा करें। साथ ही कंपनियों को अगले हफ्ते के लिए अपना प्रॉडक्शन प्लान भी जमा करना होगा। डीओपी ने कहा कि यह आदेश अगले छह महीने तक के लिए वैध रहेगा। स्थिति के अनुसार एनपीपीए और डीसीजीआई आदेश को वापस लेने या इसे बढ़ाने की सिफारिश आदेश की समयावधि समाप्त होने से दो हफ्ते पहले करेगा।

नए अंदाज में नजर आएगी अब डिजायर

नई दिल्ली। कॉम्पैक्ट सिडान का कॉन्सेप्ट इंडिया में नया नही है लेकिन इसने सही मायने में रफ्तार पकड़ी 2008 में जब मारुति सुजुकी ने डिजायर को लॉन्च किया। हालांकि, इससे पहले भी टाटा ने इंडिगो को पेश किया था लेकिन ये कार इस सेगमेंट को स्टैब्लिश नही कर पाई थी। ये काम किया डिजायर ने, और तब से इस सेगमेंट की लीडर बनी हुई है।

पिछले कुछ सालों में डिजायर को होंडा अमेज, ह्यूंदै एक्सेंट, फोर्ड ऐस्पायर और हाल में लॉन्च हुई टाटा टीगौर से तगड़ा कॉम्पिटिशन मिला है। मार्किट लीडर बने रहने के लिए मारुति अब डिजायर को नए अवतार में पेश कर रही है। 16 मई को इसे इंडिया में लॉन्च किया जाएगा और मई के पहले हफ्ते में ही इसकी बुकिंग शुरू हो जाएगी।

इसे सुजुकी के लेटेस्ट 5th जनरेशन प्लेटफार्म पर बनाया गया है। इसमें कई नई खूबियां डाली गई हैं। नई डिजायर का लुक ज्यादा प्रीमियम और मॉडर्न है। सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। ड्यूल एयर बैग्स और ABS स्टैंडर्ड दिए गए हैं। वील बेस बढ़ाया गया है, जिससे अब कार में ज्यादा स्पेस बन गई है। इंटीरियर में वुड फिनिश इसके प्रीमियम फैक्टर को बढ़ाता है।

फ्लैट बॉटम स्टीयरिंग वील पहली बार मारुति की किसी कार में लगाया गया है। टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम में ऐपल कार प्ले, ऐंड्रॉइड ऑटो और मिरर लिंक जैसे फीचर्स मिलेंगे। रियर एसी वेंट भी दिया गया है। इंजन ऑप्शन्स वही पुराने वाले हैं। बेस मॉडल को छोड़कर सभी वैरिएंट्स में ऑटो गियर शिफ्ट या AMT का ऑप्शन भी दिया गया है।

रेस्टोरेंट ने सर्विस चार्ज वसूलने का नया तरीका निकाला

कोटा । रेस्ट्रॉन्ट्स ने सर्विस चार्ज को ग्राहक की इच्छा पर निर्भर बताने वाली केंद्रीय गाइडलाइंस का पालन तो शुरू कर दिया है, लेकिन अपनी कमाई पर कोई चपत नहीं लगने दी है। कुछ रेस्ट्रॉन्ट अब बिल में सर्विस चार्ज तो नहीं दिखा रहे, लेकिन उन्होंने लगभग उतनी ही रकम फूड प्राइस में बढ़ा दी है। उनका कहना है कि स्टाफ के कॉन्ट्रैक्ट में सर्विस चार्ज को सेल्स के रूप में शामिल किया गया है, जिसका एक हिस्सा उन्हें देना ही होगा।

शुक्रवार को सरकारी गाइडलाइंस आने के बाद कई रेस्ट्रॉरंट चेन ने अपने ब्रांचेज में ऐसे नोटिस या बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं, जिसमें लिखा है कि सर्विस चार्ज देना आपकी मर्जी पर है। कुछ रेस्ट्रॉन्ट बिल में सर्विस चार्ज के सामने ब्लैंक छोड़कर ग्राहक को दे रहे हैं और उनकी मर्जी से दी गई रकम की एंट्री कर रहे हैं, लेकिन वहीं रेग्युलर विजिट करने वाले ग्राहकों का कहना है कि कई फूड आइटम्स के दाम 8 से 10 पर्सेंट तक ज्यादा लिए जा रहे हैं।

एक रेस्ट्रॉन्ट चेन के मैनेजर ने बताया, ‘हमारे ज्यादातर स्टाफ की सैलरी पैकेज में सर्विस चार्ज को सेल्स कंपोनेंट के रूप में शामिल किया गया है, जिसका एक हिस्सा उन्हें मिलता है। अगर इसे खत्म कर दें तो बहुतों को मिनिमम वेज से ज्यादा नहीं मिल पाएगा और वे तुरंत नौकरी छोड़ देंगे। ऐसे में हमारे पास इस रकम को प्राइस लिस्ट में जोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है।’

अगर आप दिल्ली के किसी रेस्ट्रॉन्ट में 1000 रुपये का खाना खाते हैं, तो उसकी बिलिंग कुछ इस तरह होती है। 1000 पर 10 पर्सेंट सर्विस चार्ज यानी कुल 1100 रुपये । इस पर 12.5 पर्सेंट वैट और इसके 40 पर्सेंट हिस्से पर 15 पर्सेंट केंद्रीय सर्विस टैक्स ( 66 रुपये) लगता है। इस तरह कुल भुगतान 1303 रुपये करना होता है, लेकिन फूड आइटम के दाम 10 पर्सेंट बढ़ाने के बाद बिल से सर्विस चार्ज भले ही गायब हो जाए, ग्राहक को लगभग उतनी ही रकम देनी पड़ेगी।

जीएसटी से छोटी व मझोली कारें महंगी होंगी

नई दिल्ली। आगामी एक जुलाई को देश में जीएसटी लागू होने के बाद छोटी और मझोले आकार की कारों की कीमत कुछ बढ़ सकती है क्योंकि इन पर टैक्स की दर थोड़ी बढ़ जाएगी।

हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद कम से कम दस केंद्रीय व राज्य स्तरीय टैक्स खत्म हो जाएंगे। जीएसटी लागू होने पर तमाम तरह की वस्तुएं और सेवाएं टैक्स के लिहाज से चार स्लैबों में बंटी होंगी।ये दरें 5, 12, 18 और 28 फीसद होंगी। इस समय जिस रेट पर टैक्स लगता है, उसके  निकटतम स्लैब में उस वस्तु को रखा जाएगा। इस समय राज्यों में छोटी कारों पर 14.5-15 फीसद वैट लगता है और 12.5 फीसद उत्पाद शुल्क लगता है। ये जोड़कर कुल 27-27.5 फीसद टैक्स बनता है।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस लिहाज से निकटतम स्लैब 28 फीसद होगा। इस तरह छोटी कारों पर टैक्स बढ़कर 28 फीसद हो जाएगा। इसी तरह 1500 सीसी तक की मझोले आकार वाली कारों पर 24 फीसद उत्पाद शुल्क और 14.5 फीसद वैट लागू है। इस तरह इन कारों पर कुल टैक्स 38.5 फीसद है।

जीएसटी की अधिकतम दर 28 फीसद टैक्स ही इन कारों पर लगेगा लेकिन इन पर राज्यों को मुआवजा देने के लिए लगने वाला सेस भी लगेगा। इसे जोड़कर जो भी निकटतम स्लैब होगा, उसी दर से टैक्स लगेगा। जीएसटी कानून में प्रावधान है कि अवगुणी और लक्जरी वस्तुओं पर अधिकतम टैक्स रेट के अलावा सेस लगाया जा सकता है। इस कैटागरी में पान मसाला, तंबाकू उत्पाद और कुछ श्रेणी के वाहन आएंगे।

सेस से एकत्रित धन से राज्यों को जीएसटी के नुकसान की भरपाई की जाएगी। राज्यों को अगले पांच साल तक जीएसटी राजस्व के नुकसान की भरपाई की जानी है। अधिकारी के अनुसार जीएसटी मुआवजा कानून के तहत 15 फीसद तक सेस लगाया जा सकता है। उच्चतम टैक्स रेट में सेस जोड़कर कुल टैक्स की दर तय होगी। सेस की दर इस तरह तय होगी कि कार पर टैक्स की कुल दर मौजूदा रेट के आसपास ही हो।

एसयूवी और 1500 सीसी से बड़ी कारों पर इस समय 27-30 फीसद उत्पाद शुल्क और 14.5 फीसद वैट मिलाकर कुल 41.5-44.5 फीसद टैक्स लगता है। इस वर्ग में 28 फीसद टैक्स के साथ अधिकतम 15 फीसद सेस मिलाकर कुल 43 फीसद टैक्स लगेगा। इस तरह इस वर्ग के कुछ वाहनों पर टैक्स कुछ कम हो सकता है।

गूगल जल्दी ही बदल देगा कॉपी पेस्ट का तरीका

मुंबई। सर्च जाइंट गूगल अपने वेब ब्राउजर क्रोम के एंड्रॉयड वर्जन के लिए नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है। गूगल ने इस फीचर का नाम कॉपीलेस पेस्ट रखा है। इस फीचर के नाम से ही साफ समझ आता है कि इस फीचर में अपको कॉपी करने की जरूरत नहीं होगी। 

खबरों के मुताबिक गूगल इस फीचर पर फरवरी से ही काम कर रहा है। अभी ये फीचर केवल टेस्टिंग के लिए है, लेकिन कंपनी इसे मई के अंत तक लॉन्च कर सकती है। लॉन्चिंग के बाद ये फीचर गूगल क्रोम के लेटेस्ट वर्जन पर उपलब्ध होगा।

एक रिपोर्ट के अनुसार कॉपीलेस पेस्ट ऑटोमेटिक पेस्टिंग का फीचर होगा। इसमें क्रोम अपने आप जरूरी जानकारियों को कॉपी कर लेगा और आवश्यकता अनुसार जगहों पर पेस्ट का विकल्प देगा। ब्राउजर आपको पेस्ट करने के लिए सुझाव देगा, जिसे आप इग्नोर भी कर सकते हैं।