Saturday, July 4, 2026
Home Blog Page 5785

जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट कैसे लें, देखिये यह वीडियो

0

कोटा। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने के बारे में अभी तक करदाता डीलर्स पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। जैसे कि पुराने स्टॉक या माल मंगाने के दौरान एडवांस्ड दी गई राशि पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगी या नहीं इस मामले को समझने के लिए डीलर्स रोजाना सीए और अपने टैक्स कंसल्टेंट के यहाँ चक्कर काट रहे हैं।

आपको जानकारी देने के लिए हमारे LEN-DEN NEWS चैनल  ने सीनियर टैक्स कंसल्टेंट अनिल काला से बातचीत की। इनपुट टैक्स क्रेडिट को समझने के लिए देखिये यह वीडियो —

जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यापारियों ने बनाई मानव शृंखला

कोटा। कपड़े से जीएसटी हटवाने की मांग को लेकर  शुक्रवार को व्यापारियों ने न्यू क्लॉथ मार्केट से रैली निकाली और एरोड्रम चौराहे पर मानव शृंखला बनाकर विरोध जताया।  तीन दिन से कपड़ा बाजार ठप रहने से अभी तक करीब 100 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। इस दौरान न्यू क्लॉथ मार्केट समेत बजाजखाना, विजय मार्केट, शॉपिंग सेंटर, छावनी, स्टेशन और नए कोटा शहर की करीब 2000 दुकानें बंद रहीं। 

कोटा कपड़ा व्यापार संघर्ष समिति के बैनर तले कपड़ा व्यापारी सुबह 11 बजे न्यू क्लॉथ मार्केट एकत्रित हुए। यहां से दुपहिया वाहनों से रैली के रूप में सरोवर टॉकीज पहुंचे। यहां से ज्वाला तोप होकर कैनाल रोड से गुमानपुरा इंदिरा गांधी तिराहा पहुंचे। यहां से वह गुमानपुरा मेन बाजार होते हुए छावनी चौपाटी, शॉपिंग सेंटर पंजाब सभा भवन के सामने होते हुए एरोड्रम सर्किल पहुंचे। व्यापारियों ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की।

संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्वक सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया है। किसी आमजन को उन्होंने मुसीबत में नहीं डाला है। इस दौरान गिर्राज न्याती, नरेश राजानी, विजय गैरा, तेजेंद्रपाल रिंपी, राजेश जैन, सूर्य प्रकाश, मुकेश मेवाड़ा, संजय हसमुख मौजूद रहे।

जीएसटी का असर : शनिवार को भी कपड़ा व्यापारी सुबह 11 बजे न्यू क्लॉथ मार्केट एकत्रित होंगे। यहां से दादाबाड़ी, तीनबत्ती, टीचर्स कॉलोनी, घटोत्कच्छ सर्किल पर आम लोगों को बताएंगे जीएसटी से क्या असर पड़ेगा।

जीएसटी  से स्पीड पोस्ट भी महंगी
जीएसटीका असर अब डाकघरों में भी नजर आने लगा है। यहां स्पीड पोस्ट पर 50 ग्राम से अधिक आर्टिकल पर एक रुपए की बढ़ोतरी की है। यहां 50 ग्राम तक चार्ज 40 रुपए था जो बढ़ाकर 41 रुपए कर दिया है। वहीं, इससे अधिक की मात्रा पर दूरी और वजन के आधार पर अधिक चार्ज लिया जाएगा।

 

अब सीधे मुख्यमंत्री को दर्ज कराई जा सकेगी शिकायत

0

जयपुर। राजस्थान में रहने वाले लोग अब सीधे मुुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जा रही हैं। इसका नम्बर होगा 181 और शिकायत दर्ज होते ही परिवादी के मोबाइल पर शिकायत का नंबर और संबंधित विभाग को भेजे जाने का संदेश मिल जाएगा।

यह हेल्पलाइन 15 अगस्त से शुरू किए जाने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान में अभी आॅनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए सम्पर्क पोर्टल बना हुआ है। इस पर इंटरनेट के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। 181 पर शिकायत दर्ज होने के बाद उसके मोबाइल पर इसका संदेश आएगा। शिकायत या समस्या को सबसे पहले संबंधित विभाग को भेजा जाएगा। हर समस्या के लिए अलग-अलग समयावधि निर्धारित की जाएगी।

निर्धारित समय मे समस्या निस्तारित ना हो पाने या परिवादी के असंतुष्ट होने की स्थिति में यह शिकायत जिला स्तरीय अधिकारी और इसके बाद जिला कलेक्टर को भेजी जाएगी। इस स्तर पर भी निस्तारित ना होने की दशा में परिवाद की सुनवाई खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी और यह पता किया जाएगा कि समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ। इसके लिए मुख्यमंत्री राजे अब हर माह कलक्टरों से वीडियो काॅन्फ्रेंस करेंगी।

जीएसटी : बिना बिके सामान पर रिवाइज्ड एमआरपी का टैग नहीं लगाया तो जेल

0

नई दिल्ली। 1 जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद जो मैन्युफैक्चरर बिना बिके हुए सामान पर रिवाइज्ड एमआरपी का टैग नहीं लगाएगा उन पर पेनल्टी भी लगाई जा सकती है, जिसमें जेल भेजा जाना भी शामिल है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उपभोक्ता संरक्षण कानूनों में संशोधन किया है।

यह कदम केंद्र सरकार के उस फैसले के बाद सामने आया है जिसमें सभी ट्रेडर्स से कहा गया है कि उन्हें अपने बिना बिके हुए माल पर मौजूदा एमआरपी के साथ ही संशोधित एमआरपी का टैग भी लगाना होगा।

उन्हें ऐसा 30 सितंबर तक करते रहना होगा, एक अक्टूबर से सामानों पर सिर्फ नई एमआरपी का उल्लेख करना ही पर्याप्त होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि उपभोक्ताओं को यह अंदाजा लग सके कि जीएसटी के लागू होने के बाद उनपर कितना असर पड़ा है।

गुरुवार को, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ‘दोहरी’ एमआरपी नीति पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह एक ऐसी प्रैक्टिस है जिसकी मदद से मॉल, एयरपोर्ट और होटल जैसे स्थानों पर अपने प्रोडक्ट की हायर एमआरपी पर बिक्री किया करते थे।

इस आदेश के मुताबिक जो कि 1 जनवरी 2018 से अमल में आएगा, कंपनियों को प्रीमियम स्थानों पर पानी, शीतल पेय या स्नैक्स के लिए अलग कीमत वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। महाराष्ट्र के लीगल मैट्रोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से की गई अपील के बाद यह निर्णय लिया गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार 386.53 अरब डॉलर की रिकॉर्ड उंचाई पर

मुंबई। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 30 जून को समाप्त सप्ताह में 4.007 अरब डॉलर बढ़कर 386.53 अरब डॉलर की नई रिकॉर्ड उंचाई को छू गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि इस वृद्धि का कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों (एफसीए) में वृद्धि होना है।

इससे पूर्व के सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 57.64 करोड़ डॉलर बढ़कर 382.53 अरब डॉलर हो गया था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों (एफसीए) समीक्षाधीन सप्ताह में 3.724 अरब डॉलर बढ़कर 362.388 अरब डॉलर हो गई।

अमेरिकी डॉलर में अभिव्यक्त किये जाने वाले एफसीए में मुद्राभंडार में रखे यूरो, पौंड और जापानी येन जैसे गैर.अमेरिकी मुद्राओं की मूल्यवृद्धि : अवमूल्यन के प्रभावों को शामिल किया जाता है।

 

जम्मू-कश्मीर में GST लागू करने को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

0

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जम्मू एवं कश्मीर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून लागू करने संबंधी आदेश को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब जम्मू एवं कश्मीर में भी जीएसटी के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी दिए जाने के बाद इसे आगे की कार्यवाही के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज दिया गया है।

 जम्मू एवं कश्मीर को छोड़कर 1 जुलाई को ही जीएसटी को देश के सभी राज्यों में लागू कर दिया गया था। गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल ने 1200 से ज्यादा वस्तुओं और 500 से अधिक सेवाओं पर कर दी दरों का निर्धारण किया है और कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं को इससे बाहर रखा है।राज्य की पीडीपी-भाजपा सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया है।

इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजें जाने वाले आदेश के मसौदे को स्वीकार कर लिया गया।राज्यपाल एन एन वोहरा की स्वीकृति के साथ ही, राष्ट्रपति का यह आदेश धारा 370 के तहत जारी किया गया है जो कि भारतीय संविधान के कुछ विशेष प्रावधानों के अनुपालन से जुड़ा हुआ है।

जानकारी के लिए बता दें कि अनुच्छेद 370 राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता है। राज्य के वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने बीते दिन कहा था कि राष्ट्रपति का आदेश मिलने के बाद सरकार इसे राज्य जीएसटी पारित कराने के लिये राज्य विधानसभा में ले जायेगी।

देशभर में आईआईटी -जेईई की काउंसिलिंग पर रोक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज जेईई-एडवांस्ड प्रवेश परीक्षा में 18 बोनस अंक देने के मामले पर सुनवाई करते हुए आईआईटी, ट्रिपल आईटी और एनआईटी समेत अन्य इंजीनियरिंग कालेज की काउंसलिंग और दाखिले की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा एडमिशन की इजाज़त बोनस अंक देने के मामले मे सुनवाई के बाद ही दी जा सकती है।

मामले में अगली सुनवाई आगामी सोमवार को होगी। कोर्ट के फैसले के बाद इंजीनियरिंग कालेज में काउंसलिंग और दाखिले का कार्यक्रम कानूनी अड़चनों में फंसता दिख रहा है। ऐसे में करीब 33 हजार छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। कोर्ट ने कहा कि बोनस अंक देने का मामला एक परेशानी है और इसका जल्द निपटारा किया जाना जरुरी है।

सुनवाई के दौरान आईआईटी पक्ष के वकील ने कहा कि करीब 2.5 लाख स्टूड़ेंट्स की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांचना संभव नहीं है और ऐसे में बोनस अंक देना बहुत ही प्रैक्टिकल समाधान था। कोर्ट ने इशारा किया कि वो अपने वर्ष 2005 में दिए गए फैसले को आगे बढ़ाएगा, जिसके तहत गलत सवाल पर उसे ही अंक दिया जा सकता है, जिसे सवाल को हल किया है। कोर्ट ने कहा कि बोनस अंक देने के मसला आईआईटी के सवालों की तरह उलझन से भरा हुआ है।

क्या था बोनस अंकों का मामला
इस बार की जेईई-एडवांस्ट की प्रवेक्ष परीक्षा में पेपर-वन के कोड एक के सवाल नंबर 29 में प्रिंटिंग की गलती मानते हुए तीन नंबर दिए गए। मैथ्स के सवाल में भी बोनस के चार अंक दिए गए हैं। वहीं पहली आंसर-की में आईआईटी ने तीन सवालों पर डाउट करते हुए 11 बोनस अंक दिए थे। ऐसे में परीक्षा में बैठे सभी छात्रों को कुल 18 बोनस अंक दिए गए हैं। 

नेट बैंकिंगः अब फ्रॉड होने पर भी नहीं होगा नुकसान

रिजर्व बैंक का कहना है कि अगर ग्राहक अनधिकृत रूप से निकाली गई राशि की जानकारी चार से सात दिन के भीतर देता है तो उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी बशर्ते यह राशि 25000 रुपये तक हो।

नई दिल्ली । अगर आपकी जानकारी और अनुमति के बगैर नेट बैंकिंग के जरिये आपके बैंक खाते से पैसे कट जाते है तो तीन दिन के भीतर इसकी जानकारी बैंक को देने पर आपको नुकसान नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार ऐसी स्थिति में आपके खाते में फ्रॉड के चलते निकाली गई धनराशि दस दिन के भीतर वापस जमा कर दी जाएगी।

रिजर्व बैंक का कहना है कि अगर ग्राहक अनधिकृत रूप से निकाली गई राशि की जानकारी चार से सात दिन के भीतर देता है तो उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी बशर्ते यह राशि 25000 रुपये तक हो। इससे ज्यादा नुकसान की भरपाई बैंक करेंगे। लेकिन ग्राहक की लापरवाही जैसे अपने खाते की जानकारी किसी दूसरे को बताने के कारण नुकसान होता है तो इसका नुकसान उसे खुद उठाना पड़ेगा।

रिजर्व बैंक के अनुसार अनधिकृत ट्रांजैक्शन की जानकारी देने के बाद अगर कोई नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी बैंक की होगी। आरबीआइ ने ‘ग्राहक सुरक्षा- अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन में ग्राहकों की सीमित जिम्मेदारी’ पर संशोधित दिशानिर्देश जारी किये हैं। बैंक खाते और कार्ड के अनधिकृत ट्रांजैक्शन से पैसा कटने की शिकायतें बढ़ने के बाद संशोधित दिशानिर्देश जारी किये गये हैं। अगर बैंक या ग्राहक की गलती से नहीं बल्कि सिस्टम में कहीं गड़बड़ी होने के कारण नुकसान होता है तो ग्राहकों की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

जीएसटी के बाद भी ई-कॉमर्स साइट्स पर डिस्काउंट

0

नई दिल्ली। देशभर में 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के पहले ई-कॉमर्स कंपनियों ने सेल की झड़ी लगा दी थी। जीएसटी लागू होने के बाद हालांकि इन ऑफर्स में कमी आने की बात कही गई थी, लेकिन कुछ पॉप्युलर साइट्स अभी भी सेल ऑफर कर रही हैं।

इस महीने कुछ प्रॉडक्ट्स के दाम बढ़ने की आशंका के मद्देनजर फ्लिपकार्ट, ऐमजॉन इंडिया, पेटीएम मॉल जैसे ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स के वेंडरों ने हार्डवेयर, बड़े अप्लायंसेज और फर्नीचर जैसे सामानों की बढ़ी मांग के लिए आपूर्ति बढ़ा दी। ऐसे सेलर्स जिन्होंने जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है और उन्हें इन प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया है वे अपना स्टॉक तेजी से निकालने में लगे हैं और इसके लिए कम से कम कीमत ले रहे हैं।

ई-कॉमर्स वेबसाइट पर सबसे ज्यादा मांग फैशन प्रॉडक्ट्स की है। हाल ही में फ्लिपकार्ट ने फैशन ब्रैंड्स दिवास्त्री और मेट्रनॉट लॉन्च किए हैं। देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अभी भी बैग और घड़ियों समेत फैशन प्रॉडक्ट्स पर 70% डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। ऐमजॉन इंडिया भी अडीडस, लीवाइस और यूसीबी ब्रैंड्स पर इसी तरह के डिस्काउंट ऑफर कर रहा है।

स्पोर्ट्स वेअर पर 80% डिस्काउंट देने वाली कंपनी शॉपक्लूज के सीनियर वाइज प्रजिडेंट (प्रॉडक्ट) उत्कर्ष बिरादर ने कहा, ‘इन प्लेटफॉर्म्स पर सेलर्स की बिक्री काफी ज्यादा होती है क्योंकि वह देशभर के ग्राहकों से जुड़ने में सक्षम हैं। जीएसटी के लागू होने के बाद भी ऑनलाइन और ऑफलाइन बिके सामान पर टैक्स में हमें कोई अंतर समझ नहीं आता इसलिए मांग और खपत में कोई परिवर्तन नहीं होगा।’

फर्नीचर का बिजनस अच्छा-खासा मुनाफा दे रहा है। जीएसटी में लकड़ी के ज्यादातर सामान को 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया है, इससे कीमतों में इजाफा होना तय है। बावजूद इसके प्लाईवुड की मांग में तेजी देखने को मिल रही है। पेपरफ्राई ‘हैपी जीएटी सेल’ में 55% तक का ऑफर दे रहा है। फ्लिपकार्ट भी होम और फर्निचर आइटम्स पर 80 फीसदी डिस्काउंट दे रहा है।

डेलॉइट इंडिया के सीनियर डायरेक्टर एमएस मणि ने बताया, ‘ई-कॉमर्स साइट्स को पता है कि ग्राहकों के मन में यह शंका है कि जीएसटी में चीजों के दाम बढ़ेंगे या घटेंगे। इस अनिश्चितता के चलते ग्राहक सामान खरीद रहे हैं और कंपनियां उसका फायदा उठा रही हैं। इससे बिक्री बढ़ी है और बिक्रेताओं को सेल्स बंद करने का कोई कारण नहीं दिख रहा इसलिए ई-कॉमर्स साइट पर अभी तक ये ऑफर चल रहे हैं।’

जीएसटी को लेकर छलका डीलर्स का दर्द, देखिये वीडियो

कोटा। जीएसटी लागू होने के बाद से शहर के व्यापारी,करदाता डीलर्स ने अभी तक बिल काटना शुरू नहीं किया है। क्योंकि अभी तक वह कन्फ्यूजन में हैं। किसी के सामने जीएसटी दरों को लेकर मुश्किल आ रही है तो किसी किसी के सामने एचएसएन कोड को लेकर भ्रम है।

इस मामले में शहर के डीलर्स कभी स्टेट गुड्स एवं सर्विस विभाग तो कभी सेन्ट्रल गुड्स एवं सर्विस विभाग के अधिकारियों के पास चक्कर काट रहे हैं। स्टोन व्यापारी , कपड़ा व्यापारी पिछले एक सप्ताह से आंदोलन पर हैं। इस मामले में गुरुवार को कोटा व्यापार महासंघ का प्रतिंनिधिमंडल जीएसटी विभाग के अधिकारियों से भी मिल चुका है।

वहीं जनरल मर्चेंट एसोसिएशन भी जीएसटी को लेकर मुश्किल में हैं। उनकी समस्या जानने के लिए हमारे चैनल LEN-DEN NEWS ने एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश जैन से बात की। देखिए वीडियो —