Tuesday, June 30, 2026
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कर्मचारियों का एडिशनल महंगाई भत्ता एक प्रतिशत बढ़ा

चालू वित्त वर्ष की 8 महीने की अवधि (जुलाई, 2017 से फरवरी, 2018) के दौरान महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीआर) से सरकार पर क्रमश: 3,068.26 करोड़ रुपये और 2,045.50 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा

नई दिल्ली । केंद्र ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (डीए) एक प्रतिशत बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से उसके 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मूल्यवृद्धि से राहत के लिए मूल वेतन-पेंशन पर डीए की 1 प्रतिशत बढ़ी हुई किस्त जारी की जाएगी।

महंगाई भत्ते की नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। चालू वित्त वर्ष की 8 महीने की अवधि (जुलाई, 2017 से फरवरी, 2018) के दौरान महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीआर) से सरकार पर क्रमश: 3,068.26 करोड़ रुपये और 2,045.50 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इस कदम से केंद्र सरकार के 49.26 लाख कर्मचारियों और 61.17 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।

पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी (संशोधन) बिल
इसके अलावा कैबिनेट ने पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी (संशोधन) बिल, 2017 को संसद में पेश करने की मंजूरी दी। इसके तहत सरकार ग्रैच्युटी पर टैक्स छूट सीमा को दोगुना करना चाहती है। अब तक 10 लाख रुपये से अधिक राशि की ग्रैच्युटी पर टैक्स लगता रहा है, लेकिन अब ग्रैच्युटी पर छूट की सीमा को 20 लाख रुपये तक की जा सकती है।

रिटायरमेंट के बाद नियोक्ता की ओर से एंप्लॉयी को ग्रैच्युटी की रकम दी जाती है। इसके अलावा कंपनियां 5 साल या उससे अधिक समय तक नौकरी करने पर भी एंप्लॉयीज को यह लाभ देती हैं।

मौजूदा पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट, 1972 के तहत सरकारी एंप्लॉयीज को मिलने वाली ग्रैच्युटी की राशि पर टैक्स में छूट मिलती है यानी सरकारी कर्मचारियों को ग्रैच्युटी पर कोई टैक्स नहीं देना होता।

दूसरी तरफ गैर-सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर मिलने वाली ग्रैच्युटी की 10 लाख रुपये तक की राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता है, लेकिन इसके बाद टैक्स चुकाना होता है।

इन संस्थानों पर लागू है नियम
10 या उससे अधिक एंप्लॉयीज की संख्या वाले संस्थानों पर ग्रैच्युटी ऐक्ट लागू होता है। इस ऐक्ट के तहत यदि कोई संस्थान इस ऐक्ट के दायरे में एक बार आ जाता है तो एंप्लॉयीज की संख्या 10 से कम होने पर भी उस पर यह नियम लागू रहता है। यदि कोई संस्थान इसके अंतर्गत नहीं है तो वह अपने एंप्लॉयीज को एक्सग्रेशिया पेमेंट कर सकता है।

योग्यता
ऐक्ट के तहत कोई भी एंप्लॉयी लगातार 5 साल या फिर उससे अधिक वक्त तक संस्थान में काम करता है, तभी वह ग्रैच्युटी का हकदार है। हालांकि बीमारी, दुर्घटना, लेऑफ, स्ट्राइक या लॉकआउट की स्थिति में आए व्यवधान को इसमें नहीं जोड़ा जाता।

कब होती है ग्रैच्युटी की पेमेंट
आमतौर पर एंप्लॉयी के रिटायर होने पर ही ग्रैच्युटी ही पेमेंट की जाती है। हालांकि इसके अलावा भी कुछ अन्य स्थितियों में कर्मचारी को ग्रैच्युटी का लाभ मिलता है। जैसे:

1. पेंशन की स्थिति में
2. यदि वह संस्थान में 5 साल तक काम करने के बाद इस्तीफा देता है।
3. यदि कोई एंप्लॉयी 5 साल पूरे नहीं कर पाता है और बीच में ही उसकी मृत्यु हो जाती है, तब भी उसके परिवार को ग्रैच्युटी की राशि मिलेगी।
4. 5 साल का कार्यकाल पूरा न होने से पहले ही यदि वह हादसे के चलते अक्षम हो जाता है या फिर वह किसी बीमारी का शिकार हो जाता है, तब भी उसे ग्रैच्युटी का लाभ मिलेगा।

वैश्विक दबाव में सोने ने फिर खोई चमक, 150 रुपये लुढ़का

नई दिल्ली। स्थानीय बाजार में थोक जेवराती मांग  रहने के बावजूद वैश्विक दबाव में सोना स्टैंडर्ड सोमवार की भारी बढ़त खोता हुआ 150 रुपये लुढ़ककर 31,000 के आंकड़े के नीचे 30,850 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया।

सोना बिटुर भी इतनी ही गिरावट में 30,700 रुपये प्रति दस ग्राम पर रहा। सोने की गिरावट का गिन्नी पर कोई असर नहीं हुआ। आठ ग्राम वाली गिन्नी 24,700 रुपये के भाव टिकी रही।

वैश्विक तेजी के बावजूद स्थानीय औद्योगिक मांग उतरने से चाँदी हाजिर 50 रुपये फिसलकर 41,650 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। चाँदी वायदा 10 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 41,030 रुपये प्रति किलोग्राम बोली गई।

हालांकि, सिक्कों में कोई बदलाव नहीं हुआ। सिक्का लिवाली और बिकवाली गत दिवस के क्रमश: 74 हजार और 75 हजार रुपये प्रति सैकड़ा पर स्थिर रहे।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लंदन का सोना हाजिर 1.55 डॉलर टूटकर 1,326.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी 5.3 डॉलर की गिरावट में 1,330.40 डॉलर प्रति औंस बोला गया।

चांदी हाजिर हालांकि 0.01 डॉलर चमककर 17.80 डॉलर प्रति औंस बोली गयी। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के चढ़ने से सोना टूटा है। 

ई-मुद्रा ने लॉन्च किया डिजिटल पेमेंट सिस्टम

ई-मुद्रा ने मंगलवार को देशभर में आधार ई-साइन आधारित नाच (राष्ट्रीय स्वचालित क्लियरिंग हाउस) गेटवे की  घोषणा की है

नई दिल्ली । लोन वितरण प्रणाली को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक माध्यम लाने के प्रयास को एक कदम आगे बढ़ाते हुए अब पेपरलैस ऑटो डेबिट सुविधा की शुरुआत करने का समय आ चुका है। साथ ही ग्राहकों के लिए प्रक्रियाओं को पूरा तरह डिजिटल बनाने की तैयारी हो रही है।

ई-मुद्रा ने मंगलवार को देशभर में आधार ई-साइन आधारित नाच (राष्ट्रीय स्वचालित क्लियरिंग हाउस) गेटवे की  घोषणा की है। यह बड़े और छोटे उद्यमों को ग्राहकों से आवर्ती भुगतान एकत्र करने में मदद करेगा। इसकी मदद से सभी वित्तीय प्रक्रिया पेपरलैस हो जाएंगी।

इस कारण लागत में कमी देखने को मिलेगी और पेमेंट प्रोसेस में एकाउंटेबिलिटी बढ़ेगी। ई-मुद्रा के चेयरमैन वी श्रीनिवासन ने कहा, “ई-साइन आधारित राष्ट्रीय स्वचालित क्लियरिंग हाउस (नाच) एक ऐसी पहल है जिससे इकोसिस्टम (पारिस्थितिक तंत्र) में कॉस्ट सेविंग मेंमदद मिलेगी और साथ ही डिजिटल व कैशलैस के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

हम एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) और अन्य केंद्रीय व राज्य इकाई के साथ काम कर रहे हैं ताकि पेमेंट की प्रक्रिया का आसान बनाया जा सके। साथ ही इससे डिजिटल समावेशन आएगा।”

ई-मुद्रा डिजिटल सिग्नेचर प्रणाली के तहत ग्राहक अपने पेमेंट प्रोसेस को ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) के जरिए प्रमाणित कर सकता है। रेकरिंग पेमेंट के जरिए खरीद के दौरान यह ओटीपी ग्राहक के आधार नंबर से लिंक्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। ओटीपी का अन्य विकल्प बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर भी है।

घरेलू निवेशकों की लिवाली से सेंसेक्स 32 हजार के पार

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने करीब 156 अंकों की छलांग लगा कर फिर से 32 हजार अंक का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया

मुंबई। वृहद आर्थिक आंकड़े जारी होने से पहले घरेलू निवेशकों की लिवाली के कारण मंगलवार को बाजार में तेजी रही। सेंसेक्स 254.98 और निफ्टी 81.50 अंक चढ़कर क्रमशः 32,1372 और 10,087 पर बंद हुआ।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने करीब 156 अंकों की छलांग लगा कर फिर से 32 हजार अंक का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 155.78 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की तेजी लेकर 32,037.94 अंक पर खुला।

पिछले तीन कारोबारी दिवस में यह 300 से अधिक अंक मजबूत हो चुका है। सेंसेक्स में धातु, रियल्टी, टिकाऊ उपभोक्ता सामान, एफएमसीजी और पूंजीगत वस्तुएं समूहों में बढ़त देखी गई।

ब्रोकरों ने बताया कि जुलाई महीने का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और अगस्त महीने की महंगाई के आंकड़े आज जारी होने से पहले घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई लिवाली ने शेयर बाजार को समर्थन दिया है। इसके अलावा एशियाई बाजारों की तेजी से भी इन्हें बल मिला है ।

मॉर्गन स्टेनली इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए जुटाएगी 1 अरब डॉलर

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मॉर्गन स्टेनली का यह फंड रोड, एयरपोर्ट, बंदरगाह और पावर प्लांट में निवेश करेगा।

वह लॉजिस्टिक्स और हेल्थकेयर, टेलिकम्यूनिकेशन्ज और एजुकेशन सेक्टर के इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी रकम लगा सकता है।

मुंबई। अमेरिकी कंपनी मॉर्गन स्टेनली भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए 1 अरब डॉलर का पहला फंड बना रही है, जिसके लिए अगले महीने तक वह 40-50 करोड़ डॉलर की रकम जुटा लेगी।

उसे भारत के कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी की उम्मीद है, जिसका फायदा वॉल स्ट्रीट की दिग्गज कंपनी ने इस फंड के जरिए उठाने की योजना बनाई है। वहीं, भारत सरकार इकनॉमिक ग्रोथ तेज करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर दांव लगा रही है।

मॉर्गन स्टेनली के इस फंड के लिए पेइचिंग में हेडक्वॉर्टर रखने वाले एक इन्वेस्टमेंट बैंक से 15 करोड़ डॉलर के ऐंकर इन्वेस्टमेंट का कमिटमेंट मिल भी चुका है।

सूत्रों ने बताया कि इसमें पश्चिम एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के सॉवरेन फंड्स (वहां की सरकारों के फंड) भी निवेश कर सकते हैं। 1 अरब डॉलर का यह फंड अगले साल मार्च तक बंद हो जाएगा और इसकी लाइफ 10 साल होगी।

इसके साथ यह भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के तीन टॉप इन्वेस्टमेंट फंड्स में से एक बन जाएगा। आईडीएफसी ऑल्टरनेटिव्स ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए दो फंड्स बनाए हैं।

उसने इनके लिए 2 अरब डॉलर की रकम जुटाई है। वहीं, आईसीआईसीआई वेंचर, टाटा पावर के साथ मिलकर 1 अरब डॉलर से अधिक का फंड बनाने जा रही है।

मॉर्गन स्टेनली का यह फंड रोड, एयरपोर्ट, बंदरगाह और पावर प्लांट में निवेश करेगा। वह लॉजिस्टिक्स और हेल्थकेयर, टेलिकम्यूनिकेशन्ज और एजुकेशन सेक्टर के इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी रकम लगा सकता है।

मॉर्गन स्टेनली ने मार्च 2016 से ही इसके लिए रकम जुटानी शुरू कर दी थी। पार्थसारथी और सुंदर भारत में आईडीएफसी के प्राइवेट इक्विटी बिजनस की संस्थापक टीम का हिस्सा थे।

सुंदर के पास देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का 17 साल का एक्सपीरियंस है। आईडीएफसी के अलावा वह आईसीआईसीआई बैंक और आईसीआईसीआई सिक्यॉरिटीज के इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रुप के साथ भी काम कर चुके हैं।

पार्थसारथी ने यूबीएस इन्वेस्टमेंट की बैंकिंग यूनिट और गोल्डमैन सैक्स के सिंगापुर ऑफिस में भी काम किया है। इसके अलावा, वह लीमैन ब्रदर्स के न्यूयॉर्क, हॉन्गकॉन्ग और लंदन ऑफिस में भी काम कर चुके हैं।

पूर्व इंडिया हेड गौतम भंडारी सहित ग्लोबल पार्टनर्स के जाने के बाद मॉर्गन ने अपनी भारतीय इन्वेस्टमेंट टीम में फेरबदल शुरू किया था। इन लोगों ने अमेरिकी फर्म से अलग होकर 3 अरब डॉलर का ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड शुरू किया था।

पिछले साल मार्च में मॉर्गन स्टेनली ने अपने दूसरे ग्लोबल इन्फ्रा फंड के लिए 3.6 अरब डॉलर जुटाए थे, लेकिन अब वह भारत के लिए खासतौर पर 1 अरब डॉलर का फंड तैयार कर रही है।

सेसेंक्स में 100 अंकों की बढ़त, निफ्टी 10,000 के पार खुला

नई दिल्ली। लगातार दूसरे सत्र में बढ़त कायम रखते हुए शेयर बाजार मंगलवार को भी तेजी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 118.77 पॉइंट चढ़कर 32000.93 पर पहुंच गया।

जबकि 50 शेयरों के एनएसई निफ्टी भी 27.35 अंकों की तेजी दिखाते हुए 10,033.40 पर ट्रेड कर रहा था। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने आधे-आधे प्रतिशत की मजबूती हासिल की। बीएसई पर तीन चौथाई शेयर चढ़कर ट्रेड कर रहे थे।

मंगलवार के शुरुआती कारोबार में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, सन फार्मा, एचयूएल, रिलांयस इंडस्ट्रीज, लार्सन ऐंड टुब्रो, टीसीएस, ल्युपिन, विप्रो और वेदांता के शेयरों में 2 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई। इधर, भारती इन्फ्राटेल, कोल इंडिया, ओएनजीसी के शेयरों पर दबाव देखा गया।

इनके अलावा, कोचिन शिपयार्ड, जेट एयरवेज, इंटरग्लोब एविएशन, बाटा इंडिया, मिर्जा इंटरनैशनल, रेडिंगटन इंडिया, एचसीएल इन्फोसिस्टम्स, एमके, आरपीजी लाइफ, आईआईएफल होल्डिंग्स, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज और अडानी ट्रांसमिशन के शेयरों में भी तेजी देखी गई।

बहरहाल, 9:46 बजे सेंसेक्स 80.70 अंकों की बढ़त के साथ 31,962 और निफ्टी 27.50 अंकों की बढ़त के साथ 10,033 अंकों पर ट्रेड कर रहा था।

प्रधानमंत्री मोदी की नकद सम्पत्ति में 67 फीसदी की बढ़ोतरी

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प्रधानमंत्री की कुल परिसंपत्ति वित्त वर्ष 2017 में मामूली रूप से बढ़कर 2 करोड़ रुपये हो गई 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकद संपत्ति में वित्त वर्ष 2016-17 में इजाफा हुआ है और पिछले साल के मुकाबले यह 67 फीसदी की बढ़ोतरी है। सरकार द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक इस साल 31 मार्च तक प्रधानमंत्री के पास करीब 1.5 लाख रुपये नकदी थी जो पिछले साल के 89,700 रुपये से अधिक है।

प्रधानमंत्री की कुल परिसंपत्ति वित्त वर्ष 2017 में मामूली रूप से बढ़कर 2 करोड़ रुपये हो गई जो वित्त वर्ष 2016 में 1.73 करोड़ रुपये थी।  वहीं इस साल मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में वित्त मंत्री अरुण जेटली की नकदी भारी मात्रा में घटकर 12.18 लाख रुपये हो गई जो वित्त वर्ष 2016 में 65.29 लाख रुपये थी।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की नकदी भी वित्त वर्ष 2017 में कम होकर 1.10 लाख रुपये हो गई जो वित्त वर्ष 2016 में 2.84 लाख रुपये थी। अभी कई केंद्रीय मंत्रियों को वित्त वर्ष 2017 के लिए अपनी परिसंपत्ति की घोषणा करनी है।

पिछले साल 8 नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद से ही नकदी और डिजिटल लेन-देन पर काफी चर्चा शुरू हो गई है। मार्च में मोदी की नकद वित्तीय संपत्ति 1,49,700 रुपये, वहीं बचत जमा 1,33,496 रुपये जबकि सावधि जमा 90,26,148 रुपये थी।

संपत्ति के घोषणापत्र में बताया गया कि 25 जनवरी, 2012 में 20,000 रुपये वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड जमाएं थीं। इसके अलावा प्रधानमंत्री के पास मार्च 2017 तक 3,96,505 रुपये का राष्ट्रीय बचत पत्र और 1,59,281 रुपये की एलआईसी पॉलिसी भी थी।

प्रधानमंत्री के पास कोई निजी वाहन नहीं है। इस घोषणापत्र में कहा गया कि उनके पास कोई विमान और नौका नहीं है। उन्होंने कोई कर्ज भी नहीं लिया है। मोदी के पास मौजूद आभूषणों में भी इजाफा नहीं हुआ है।

मार्च तक उनके पास चार सोने की अंगूठियां हैं जिनकी कीमत करीब 1.28 लाख रुपये तक होगी। इन अंगूठियों की कीमतों में मामूली रूप से इजाफा हुआ है।

वित्त वर्ष 2016 में इन अंगूठियों की कीमत 1.27 लाख रुपये थी। संपत्ति घोषणापत्र में बताया गया है कि अहमदाबाद में अक्टूबर 2002 में अचल संपत्ति खरीदी गई थी। इस संपत्ति का मौजूदा मूल्य अनुमानत: 1 करोड़ रुपये है और उनकी कुल संपत्ति 2 करोड़ रुपये से थोड़ी अधिक कीमत की है।

वित्त वर्ष 2015 के 4,700 रुपये के मुकाबले पिछले साल प्रधानमंत्री की नकदी बढ़कर 89,700 करोड़ रुपये हो गई। उनकी कुल संपत्ति मार्च 2016 में 1.73 करोड़ रुपये आंकी गई थी जो 2015 में 1.41 करोड़ रुपये थी।

वित्त वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री की वित्तीय संपत्ति में किताबों से मिली रॉयल्टी भी जुड़ गई जो 12.35 लाख रुपये थी। हालांकि हाल के वित्तीय घोषणा में उन्होंने किताबों से मिली रॉयल्टी का जिक्र नहीं किया है।

बुलेट ट्रैन प्रोजेक्ट की आधारशिला 14 सितंबर को PM मोदी रखेंगे

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 रास्ते में यह ट्रेन 21 किमी. टनल में चलेगी, साथ ही यह ठाणे से सरक्रीक के बीच करीब सात किमी. समुद्र के भीतर से गुजरेगी

नई दिल्ली। बुलेट ट्रैन प्रोजेक्ट का काउंट डाउन बृहस्पतिवार से शुरू होने जा रहा है। 14 सितंबर को इस प्रोजेक्ट की बुनियाद रखी जाएगी। प्रोजेक्ट पर काम भी इसी दिन से शुरू हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की उपस्थिति में गुजरात के साबरमती में प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया जाएगा। रेल मंत्रालय ने इसे समय से पहले 15 अगस्त 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

ट्रैन प्रोजेक्ट का काम 2018 में शुरू होना था, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट के लिए आधारशिला समय से पहले रखी जा रही है। यह ट्रैन साबरमती से मुंबई के बीच 508 किमी. लंबी लाइन पर दौड़ेगी, जिसमें से 156 किमी. महाराष्ट्र में, 351 किमी. गुजरात में और 2 किमी. दादर-नागर हवेली में होगा। प्रोजेक्ट को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

गुजरात के साबरमती से मुंबई के बीच 12 स्टेशनों पर यह ट्रैन रुकेगी। रास्ते में ट्रैन 21 किमी. टनल में चलेगी। साथ ही यह ठाणे से सरक्रीक के बीच करीब सात किमी. समुद्र के भीतर से गुजरेगी।

जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जाइका) और भारत सरकार ने मिलकर फिजिबिलिटी स्टडी का काम पूरा कर लिया है। इस रेल खंड पर मुंबई, ठाणे, विरार, ब्यास, वापी, विलमूरा, सूरत, भरुच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत 21 स्टेशन होंगे।

अवधि पार ऋण जमा कराने पर 2 से 9% तक मिलेगी ब्याज दर में छूट

किसानों को राहत, योजना की अवधि 31 दिसम्बर,2017 तक बढ़ाई

30 जून के बाद ऎसे ऋणी जो अपने अवधिपार ऋण जमा करा चुके हैं तथा योजना के दायरे में आते हैं, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा

जयपुर। सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने सोमवार को बताया कि किसानों को बड़ी राहत देते हुए केन्द्रीय सहकारी बैंकों से जुड़े किसानों के ओवर ड्यू हुए ऋण को जमा कराने की तिथि 31 दिसम्बर, 2017 तक बढ़ा दी गई है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे किसानों के प्रति बहुत संवेदनशील है और उन्होंने किसानों की राहत के लिए कदम उठाने के लिए निर्देश दिए थे।

किलक ने बताया कि इस योजना से ऎसे ऋणियों एवं किसानों को फायदा होगा, जो किन्हीं कारणों से अपने ऋणों का समय पर नहीं चुका पाए थे। ऎसे किसानों के लिए एक मुश्त समझौता योजना लागू की थी और यह योजना 30 जून तक लागू थी।

अब ऎसे किसान जो 31 दिसम्बर तक ऋण का चुकारा करेंगे उन्हें दो से 9 प्रतिशत तक ब्याज दर में फायदा मिलेगा। सहकारिता मंत्री ने बताया कि 30 जून के बाद ऎसे ऋणी जो अपने अवधिपार ऋण जमा करा चुके हैं तथा योजना के दायरे में आते हैं, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा।

उन्होंने बताया कि इस योजना में ऋण के अवधिपार होने की दिनांक से राशि चुकाने की दिनांक तक ऋण स्वीकृति पत्र में अंकित ब्याज दर या 10 प्रतिशत ब्याज दर, जो भी कम हो, साधारण ब्याज वसूल किया जाएगा।

इस योजना से प्रदेश के लगभग 1 लाख 65 हजार किसानों को फायदा होगा और 300 से 400 करोड़ रुपये की किसानों को राहत मिलेगी।

किलक ने बताया कि इस योजना में अधिक से अधिक बाकीदारों को शामिल करने तथा योजना के प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए पूर्ववर्ती योजना के नियमों में ढ़ील दी गई हैं।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत वे सभी कृषि एवं अकृषि ऋण सम्मिलित किए गए हैं, जो कि एक अप्रेल, 2013 या इससे पहले ही अवधिपार हो चुके हैं।

ऑटो डीलर्स के जरिए बीमा पॉलिसी बेच सकेंगी इन्श्योरेंस कंपनियां

बीमा क्षेत्र के चलन के अनुसार बीमा कंपनियां आम तौर पर अच्छे ग्राहकों को कम प्रीमियम और खराब ग्राहकों को ज्यादा प्रीमियम पर बीमा कवर देती हैं

नई दिल्ली । अब कार, बाइक बेचने वाले डीलर्स के जरिए इन्श्योरेंस कंपनियां बीमा पॉलिसी बेच सकेंगी। बीमा नियामक इरडा ने सभी जनरल इन्श्योरेंस कंपनियों  को ऐसा करने की अनुमति दे दी है।

डीलर्स अब सभी जनरल इन्श्योरेंस कंपनियों की पॉलिसी बेच सकेंगे। इसके साथ ही पॉलिसी का प्रीमियम भी अपने ग्राहक के अनुसार तय कर सकेंगे। 

अभी तक नहीं थी ऐसी व्यवस्था
इससे पहले ऑटो डीलर्स केवल उन्हीं कंपनियों की बीमा पॉलिसी बेच सकते थे, जिनसे उनका एग्रीमेंट होता था। कंपनियों को भी इस तरह की पॉलिसी में किसी भी तरह से प्रीमियम को कम-ज्यादा करने की अनुमति नहीं होती थी।  

बीमा क्षेत्र के चलन के अनुसार बीमा कंपनियां आम तौर पर अच्छे ग्राहकों को कम प्रीमियम और खराब ग्राहकों को ज्यादा प्रीमियम पर बीमा कवर देती हैं। इरडा ने इसमें बदलाव के लिए नई गाइडलाइन जारी करते हुए  31 अगस्त को नये नियमों को मंजूरी दे दी। 

यूनाइटेड इंडिया इन्श्योरेंस के कुल प्रीमियम का 40 प्रतिशत मोटर बीमा से आता है। उसका मानना है कि नये नियमों से डीलरों के जरिए आने वाला उसका कारोबार प्रभावित नहीं होगा।

कंपनी के निदेशक एम एन शर्मा ने कहा कि  हमारा लगभग सभी प्रमुख कार डीलरों से गठजोड़ है। हमारी मोटर पालिसी में इस चैनल का लगभग 15 फीसदी हिस्सा है।

इसके साथ ही नियामक ने वाहन डीलरों के लिए ऊंचे कमीशन को भी मंजूरी दी है। इस कमीशन का भुगतान बीमा कंपनी करती है। इरडा ने ऑटो डीलर से पॉलिसी बिक्री के अध्ययन के लिए कमेटी बनाई थी।

 इसकी पिछले साल मई में पेश रिपोर्ट की सिफारिशों और बीमा कंपनियों के अलावा दूसरे पक्षों से बातचीत करके इरडा ने नये नियमों को अंतिम रूप दिया।