Wednesday, July 8, 2026
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कोटा–उज्जैन के बीच पहली बार मेमू सेवा शुरू, यात्रियों को मिलेगी सीधी ट्रेन

सांसद दुष्यंत सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वर्चुअल माध्यम से किया शुभारंभ

कोटा। कोटा मंडल के रेल इतिहास में 15 जून 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर पहली बार कोटा से उज्जैन तक सीधी मेमू रेल सेवा का सफलतापूर्वक शुभारम्भ किया गया।

गाड़ी संख्या 61624/61623 कोटा–चौमहला मेमू सेवा का उज्जैन तक विस्तार करते हुए चौमहला एवं विक्रमगढ़ आलोट रेलवे स्टेशनों पर भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किए गए।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि प्रथम उद्घाटन समारोह प्रातः चौमहला रेलवे स्टेशन पर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सांसद दुष्यंत सिंह तथा राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं झालरापाटन विधायक वसुंधरा राजे ने नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर इस नई सेवा का शुभारम्भ किया।

कार्यक्रम में डग विधायक कालूराम, रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य धीरज गुप्ता एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में यात्रीगण उपस्थित रहे। रेलवे की ओर से वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन, मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता नवीन भूषण शर्मा सहित अन्य अधिकारी एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।

उन्होंने बताया कि द्वितीय उद्घाटन समारोह विक्रमगढ़ आलोट रेलवे स्टेशन पर आयोजित किया गया, जिसमें उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने हरी झंडी दिखाकर सेवा विस्तार का औपचारिक शुभारम्भ किया तथा इसी गाड़ी में नागदा तक यात्रियों के साथ सफर भी किया।

नई समय-सारिणी के अनुसार गाड़ी संख्या 61624 कोटा से प्रातः 5:40 बजे प्रस्थान कर रामगंज मंडी (07:05 बजे), भवानी मंडी (07:33 बजे), शामगढ़ (08:05 बजे), चौमहला (08:38 बजे), विक्रमगढ़ आलोट (09:13 बजे) एवं नागदा (10:30 बजे) होते हुए दोपहर 12:00 बजे उज्जैन पहुंचेगी।

वापसी में गाड़ी संख्या 61623 उज्जैन से दोपहर 12:30 बजे रवाना होकर नागदा (14:10 बजे), चौमहला (15:25 बजे), शामगढ़ (15:53 बजे), भवानी मंडी (16:28 बजे) एवं रामगंज मंडी (16:58 बजे) होते हुए सायं 19:05 बजे कोटा पहुंचेगी।

श्री जैन ने बताया कि इस सेवा विस्तार से कोटा मंडल के यात्रियों को धार्मिक, शैक्षणिक एवं व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर उज्जैन तक बिना गाड़ी बदले सीधी यात्रा की सुविधा उपलब्ध हो गई है। साथ ही नागदा जंक्शन के माध्यम से बीना एवं मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख गंतव्यों के लिए भी बेहतर रेल संपर्क स्थापित हुआ है।

मई में निर्यात 18% उछलकर 45 अरब डॉलर के पार, व्यापार घाटा फिर भी बढ़ा

नई दिल्ली। देश के माल (मर्चेंडाइज) निर्यात में मई महीने के दौरान 18 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और यह बढ़कर 45.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में आयात भी 20.62 फीसदी बढ़कर 73.41 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इसके चलते देश का व्यापार घाटा बढ़कर 28.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

वहीं, अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान भारत के कुल माल निर्यात में 16.09 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और यह बढ़कर 88.91 अरब डॉलर हो गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में ज्यादा है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि मई में पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात मामूली रूप से घटकर 5.30 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि मई 2025 में यह 5.38 अरब डॉलर था।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-मई के दौरान सोने (गोल्ड) के आयात में 60 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए इस वर्ष निर्यात के लिए अच्छा रहने की संभावना है।

Stock Market: सेंसेक्स 736 अंक उछल कर 76264 पर बंद, निफ्टी 23850 के पार

नई दिल्ली। Stock Market Closed: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद और कच्चे तेल में गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा। सोमवार को शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97% की तेजी के साथ 76,264.33 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 231 अंक यानी 0.98% ऊपर 23,853.90 अंक पर बंद हुआ।

कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स में 1,200 अंक से ज्यादा उछाल आई जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी50 इंडेक्स भी 350 अंक चढ़ गया। हालांकि अंतिम घंटे में इसमें कुछ सुस्ती आई। अंरुपया भी डॉलर के मुकाबले 0.4% की तेजी के साथ 94.71 पर बंद हुआ। पिछले सत्र में यह 95.11 अंक पर बंद हुआ था।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 शेयर तेजी के साथ बंद हुए। ट्रेंट में सबसे ज्यादा 5.40 फीसदी तेजी आई। इसके अलावा इंडिगो, बजाज फिनसर्व, इटरनल, अल्ट्रा सीमेंट, मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, टाइटन, इन्फोसिस और एचसीएल टेक में भी उल्लेखनीय तेजी रही। दूसरी ओर एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और सन फार्मा में गिरावट आई।

टॉप गेनर्स
Nifty50 में ट्रेंट, श्रीराम फाइनेंस और HDFC लाइफ इंश्योरेंस सबसे ज्यादा बढ़ने वाले शेयरों में शामिल रहे।ब्रॉडर मार्केट में भी मजबूती देखने को मिली। Nifty MidCap इंडेक्स 1.29 प्रतिशत और Nifty SmallCap इंडेक्स 1.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टरों में Nifty Realty सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा, जिसमें 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई।

ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा निवेशकों का भरोसा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौता हो गया है, जिससे पश्चिम एशिया में चार महीने से जारी युद्ध समाप्त होने की संभावना है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने पर सहमति जताई है। इस खबर के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना और निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।

WPI Inflation: मई में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंची

नई दिल्ली। Wholesale Inflation Rate: नई महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। मई में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई है, जो अप्रैल के 8.26 फीसदी के मुकाबले काफी ज्यादा है।

कच्चे तेल, ईंधन, बिजली, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इसकी प्रमुख वजह रही। पश्चिम एशिया संकट और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधाओं का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था में भी दिखने लगा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई के आंकड़े जारी किए। इसके साथ ही आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है।

आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और पावर कैटेगरी में महंगाई मई में बढ़कर 30.33 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में 24.89 फीसदी थी। कच्चे पेट्रोलियम (क्रूड ऑयल) में महंगाई दर मई में 61.51 फीसदी रही, जबकि अप्रैल में यह 56.31 फीसदी थी।

खाद्य वस्तुओं में महंगाई मई में बढ़कर 3.60 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में 2.43 फीसदी थी। वहीं, विनिर्मित उत्पादों (मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) में महंगाई बढ़कर 7.48 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 6.68 फीसदी थी।

थोक महंगाई में यह तेज उछाल पश्चिम एशिया संकट और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी का असर माना जा रहा है। भारत अपने अधिकांश कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से करता है। इसका असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिला।

ICRA के चीफ इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल ने वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी नई WPI सीरीज के अनुसार, मई 2026 में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.7 फीसदी के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई, जो अप्रैल 2026 में 8.3 फीसदी थी। अधिकांश श्रेणियों में व्यापक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसे आंशिक रूप से अनुकूल आधार प्रभाव का भी समर्थन मिला।

ईंधन और पावर कैटेगरी, जिसकी WPI में हिस्सेदारी अब 14.1 फीसदी है और जिसमें कच्चा पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस भी शामिल हैं, में महंगाई दर अप्रैल 2026 के 24.9 फीसदी से बढ़कर मई 2026 में 30.3 फीसदी हो गई। यह वैश्विक ऊर्जा कीमतों में जारी तेजी के प्रभाव को दर्शाता है। इसके अलावा, विनिर्मित उत्पाद कैटेगरी में भी महंगाई लगातार बढ़ी है।

उनका कहना है कि हाल ही में जारी आउटपुट प्राइस प्रेशर इंडेक्स (OPPI) के आंकड़े भी WPI के अनुरूप रहे। मई 2026 में OPPI आधारित महंगाई बढ़कर 9.4 फीसदी रही, जो अप्रैल 2026 में 8.1 फीसदी थी। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद वैश्विक ऊर्जा और अन्य कमोडिटी कीमतों में आई नरमी जून 2026 के WPI महंगाई आंकड़ों को कुछ राहत दे सकती है।

बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह ने कहा कि भारत ने महंगाई निर्धारित करने के लिए 2022-23 आधार वर्ष वाली नई सीरीज लागू की गई है। संशोधित ढांचे में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है, वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (GVO) को अपनाया गया है और देश में पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) प्रणाली की शुरुआत की गई है। यह कदम अगले पांच वर्षों में वैश्विक मानकों के अनुरूप महंगाई मापन प्रणाली की दिशा में अहम बदलाव माना जा रहा है।

उनका कहना है कि इस बदलाव के बीच मई 2026 में WPI आधारित थोक महंगाई बढ़कर 9.68 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में 8.26 फीसदी थी। इसमें सबसे बड़ा योगदान ईंधन और पावर कैटेगरी का रहा, जहां महंगाई 30.33 फीसदी तक पहुंच गई। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस में महंगाई 61.51 फीसदी तथा खनिज तेल (Mineral Oils) में 49.82 फीसदी रही। महंगाई का दबाव विनिर्माण क्षेत्र में भी व्यापक रूप से दिखाई दिया। रसायन में 13.40 फीसदी, बेसिक मेटल्स में 12.30 फीसदी और टेक्सटाइल में 10.22 फीसदी की महंगाई दर्ज की गई। वहीं खाद्य सूचकांक 4.49 फीसदी बढ़ा।

उन्होंने बताया कि यह उछाल बताता है कि भारत अब भी वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आने वाले झटकों के प्रति संवेदनशील है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में बनी अनिश्चितता का असर घरेलू महंगाई पर भी दिख रहा है। आगे चलकर महंगाई की दिशा काफी हद तक तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

बता दें, खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) भी मई में बढ़कर 16 महीने के उच्च स्तर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई थी। अप्रैल में यह 3.48 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से CPI महंगाई को आधार मानता है। स

Import: मई में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात 32 से 37 फीसदी तक बढ़ा

मुम्बई। Edible Oil Import: अप्रैल में पाम तेल का आयात घटकर पिछले चार माह के निचले स्तर पर आ गया था लेकिन मई में यह 7 प्रतिशत सुधरकर 5,49,356 टन पर पहुंच गया। इसके बावजूद इसका आयात सामान्य औसत स्तर से पीछे चल रहा है।

दरअसल पाम तेल का भाव प्रमुख निर्यातक देशों में महंगा होने से सोयातेल के आयात में भारतीय रिफाइनर्स की दिलचस्पी ज्यादा देखी जा रही है। सोयाबीन तेल और पाम तेल के बीच मूल्यान्तर काफी घट गया है। मई में सूरजमुखी तेल का आयात भी काफी बढ़ गया।

एक अग्रणी उद्योग संगठन-सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में पाम तेल का औसत मासिक आयात 6.32 लाख टन के करीब रहा था लेकिन 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन में आयात का स्तर नीचे देखा जा रहा है।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार होटल, रेस्तरां एवं अन्य व्यावसायिक उपयोग क्षेत्र द्वारा अधिक मात्रा में पाम तेल की खरीद नहीं की जा रही है कूलिंग गैस की कमी के कारण उसे अपने पाम तेल की जरूरत घटाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

एसोसिएशन के मुताबिक अप्रैल के मुकाबले मई 2026 में सोयाबीन तेल का आयात 37 प्रतिशत उछलकर 4,93,854 टन पर तथा सूरजमुखी तेल आयात 32 प्रतिशत बढ़कर 2,95,726 टन पर पहुंच गया।

इसके फलस्वरूप मई में खाद्य तेलों का कुल आयात भी बढ़ गया। वनस्पति तेलों का सकल आयात 4.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13.70 लाख टन पर पहुंचा।

‘सी’ के आंकड़ों के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती सात महीनों में यानी 1 नवम्बर 2025 से 31 मई 2026 के दौरान भारत में वनस्पति तेलों का कुल आयात 12 प्रतिशत बढ़कर 92 लाख टन से ऊपर पहुंच गया।

एक अग्रणी उद्योग समीक्षक के अनुसार जून 2026 में पाम तेल का आयात बढ़कर 6 लाख टन से ऊपर पहुंच जाने की उम्मीद है जबकि सोयाबीन तेल का आयात घटकर 3.50 लाख टन के आसपास सिमट सकता है।

Soya Meal Price: सोयामील की बढ़ती कीमतों से फीड निर्माता चिंतित

हैदराबाद। Soya Meal Price: कम्पाउंड लिव स्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएलएफएमए) सोयामील के अभाव एवं बढ़ते दाम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि सोयामील पशु आहार में उपयोग होने वाला एक महत्वपूर्ण प्रोटीन युक्त अवयव है।

एसोसिएशन के अनुसार सोयामील की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने, किसानों / उत्पादकों के हितों की रक्षा करने तथा सोया वैल्यू चेन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को जल्दी से जल्दी आवश्यक नीतिगत निर्णय लेना चाहिए।

हाल के सप्ताहों में सोयामील का भाव 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 6500-6600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है जिससे पशु आहार का उत्पादन खर्च काफी बढ़ गया है और उत्पादकों की आमदनी में भारी गिरावट आ गई है।

ऊंचे दाम एवं आपूर्ति में बाधा की वजह से उद्योग की प्रतिस्पर्धी क्षमता समाप्त होती जा रही है और देश के एनीमल प्रोटीन वैल्यू चेन में अनिश्चिता तथा अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया है। विदेशों से सस्ते जीएम सोयामील के आयात की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य भी उछलकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है।

री नीट यूजी 2026 के एडमिट कार्ड जारी, सीधे लिंक से ऐसे करें डाउनलोड

नई दिल्ली। NEET UG Admit Card 2026 : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से 21 जून 2026 को आयोजित की जाने वाली NEET UG री-एग्जाम (Re-NEET 2026) के एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं।

एडमिट कार्ड लाइव होते ही लाखों छात्रों ने एक साथ आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करना शुरू कर दिया, जिसके कारण सर्वर पर भारी ट्रैफिक को गया है, जिसके कारण देश भर के कई मेडिकल अभ्यर्थी की लॉगिन स्क्रीन बार-बार क्रैश हो रही है या फिर आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in ओपन होने में बहुत ज्यादा समय ले रही है।

अगर आप भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। यहां हम आपको कुछ आसान तरीके बता रहे हैं जिनके जरिए आप अपना री-नीट हॉल टिकट बहुत ही आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से डाउनलोड करने की प्रक्रिया

  • होमपेज पर दिए गए “NEET UG 2026 Admit Card” लिंक पर क्लिक करें।
  • इसके बाद अपना एप्लीकेशन नंबर (Application Number), जन्म तिथि (Date of Birth) और स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी पिन दर्ज करें।
  • सभी डिटेल्स भरने के बाद “Submit” बटन पर क्लिक करें।
  • आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा, इसकी पीडीएफ (PDF) डाउनलोड करें और सेव कर लें।
  • भविष्य के लिए एडमिट कार्ड के कम से कम दो से तीन कलर्ड प्रिंटआउट जरूर निकाल लें।

NEET UG 2026 Admit Card Direct Link

डिजिलॉकर (DigiLocker) के माध्यम से डाउनलोड करें-

  • यदि आधिकारिक वेबसाइट काम नहीं कर रही है, तो उम्मीदवार एक बेहतर विकल्प के रूप में डिजिलॉकर का उपयोग कर सकते हैं।
  • अपने मोबाइल नंबर या यूजरनेम की मदद से लॉगिन करें.
  • लॉगिन करने के बाद “Search Documents” वाले सेक्शन में जाएं.
  • वहां सर्च बार में “National Testing Agency” या “NEET” लिखकर सर्च करें.
  • अब ड्रॉपडाउन में से “NEET Admit Card 2026” के विकल्प को चुनें.
  • अपना नीट 2026 का एप्लीकेशन नंबर और परीक्षा का वर्ष दर्ज करें।
  • इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहा अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लें।

NEET Admit Card 2026 Digilocker Direct link

उमंग (UMANG) ऐप के जरिए डाउनलोड करें

  • उम्मीदवार उमंग ऐप के माध्यम से भी अपना हॉल टिकट आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
  • ऐप पर अपना मोबाइल नंबर और एमपिन (MPIN) दर्ज करके रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करें।
  • ऐप के अंदर NTA Services को खोजें और वहां NEET UG 2026 का चयन करें।
  • अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि सबमिट करें।
  • आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा, इसे डाउनलोड करें और फोन में सेव कर लें।

NEET UG 2026 Re-Exam Admit Card Umang app Link

भारी ट्रैफिक के कारण यदि वेबसाइट कुछ समय के लिए न खुले, तो छात्र परेशान न हों और थोड़ी-थोड़ी देर में चेक करते रहें। वेबसाइट पर ज्यादा भीड़ होने के दौरान डिजिलॉकर और उमंग ऐप एक बेहतरीन बैकअप विकल्प साबित होता है।

इन जानकारियों को जरूर चेक करें

  1. परीक्षा का नाम
  2. परीक्षा सेंटर का पता
  3. परीक्षा का समय
  4. परीक्षा की तिथि
  5. उम्मीदवार का नाम
  6. उम्मीदवार की जन्मतिथि
  7. उम्मीदवार की फोटो और सिग्नेचर
  8. परीक्षा के लिए गाइडलाइंस
  9. परीक्षा के विषय
  10. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने का समय

ओप्पो का फोटोग्राफी किंग फोन 2 जुलाई को भारत में होगा लॉन्च, जानिए फीचर्स

नई दिल्ली। ओप्पो अपनी नई Reno 16 Series को भारत में 2 जुलाई 2026 को लॉन्च कर सकती है। मशहूर टिप्स्टर अभिषेक यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर इस लॉन्च डेट की जानकारी साझा की है।

हालांकि कंपनी की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन Reno 16 सीरीज पिछले कुछ समय से कई सर्टिफिकेशन और बेंचमार्किंग वेबसाइट्स पर दिखाई दे रही है।

ऐसे में माना जा रहा है कि यह लॉन्च डेट काफी हद तक सही हो सकती है। OPPO इस सीरीज के जरिए मिड-प्रीमियम और प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

Oppo इस सीरीज के तहत Oppo Reno 16 और Oppo Reno 16 Pro को लॉन्च कर सकता है। दोनों स्मार्टफोन में AI फीचर्स, बेहतर कैमरा सिस्टम, दमदार प्रोसेसर और बड़ी बैटरी जैसे कई अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं। खास बात यह है कि कंपनी इस सीरीज के जरिए मिड-प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में पेश करेगी।

संभावित कीमत
लॉन्च से पहले OPPO Reno 16 सीरीज के कुछ मॉडल्स यूरोप की एक रिटेलर की वेबसाइट पर लिस्ट किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, OPPO Reno 16 5G की कीमत EUR 890.91 (करीब 98,200 रुपये) हो सकती है। वहीं OPPO Reno 16 FS 5G को EUR 791.90 (लगभग 87,300 रुपये) में लॉन्च किया जा सकता है। दूसरी तरफ, सीरीज के टॉप मॉडल OPPO Reno 16 Pro 5G की कीमत EUR 1,087.90 (करीब 1,19,900 रुपये) बताई जा रही है। हालांकि ये यूरोपीय बाजार की कीमतें हैं और भारत में टैक्स, मार्केट स्ट्रेटेजी और अन्य कारणों की वजह से कीमत इससे काफी अलग हो सकती है।

OPPO Reno 16 Pro के संभावित फीचर्स
OPPO Reno 16 Pro में 6.32 इंच का LTPS AMOLED डिस्प्ले दिया जा सकता है, जो 1.5K रिजॉल्यूशन, 144Hz रिफ्रेश रेट और Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन के साथ आ सकता है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 8550 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है।

फोटोग्राफी के लिए फोन में 200MP का प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट के साथ), 50MP टेलीफोटो कैमरा (3.5x ऑप्टिकल जूम और OIS), 50MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 50MP का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। वहीं पावर बैकअप के लिए इसमें 6,700mAh की बड़ी बैटरी और 80W SuperVOOC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना है।

OPPO Reno 16 के संभावित फीचर्स
स्टैंडर्ड OPPO Reno 16 में भी 6.32 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया जा सकता है। यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर से लैस हो सकता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP टेलीफोटो कैमरा, 50MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 50MP का सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है।

इसके अलावा डिवाइस में 6000mAh बैटरी और 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना है। OPPO Reno 16 Series के सभी स्मार्टफोन्स में स्टीरियो स्पीकर्स, NFC सपोर्ट और IP69 रेटिंग मिल सकती है। IP69 रेटिंग की वजह से ये डिवाइस धूल और पानी से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगे। इसके अलावा कंपनी AI फीचर्स और बेहतर फोटोग्राफी अनुभव पर भी खास फोकस कर सकती है।

क्या पेट्रोल की जगह ले पाएगा E100 इथेनॉल ईंधन, जानिए इसके फायदे और नुकसान

नई दिल्ली। भारत को प्रदूषण मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में 100 पर्सेंट इथेनॉल यानी E100 ईंधन के नियमों को हरी झंडी दे दी है।

इस फैसले के बाद अब भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक नई क्रांति आने वाली है। देश की बड़ी-बड़ी कार कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, टोयोटा, एमजी और हुंडई अब ऐसे इंजन बनाने की तैयारी में जुट गई हैं जो पूरी तरह से इस नए और सस्ते ईंधन पर चलेंगे। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि यह E100 ईंधन क्या है, इसके क्या फायदे हैं, जानिए

क्या है यह E100 ईंधन
सीधे और आसान शब्दों में कहें तो E100 ऐसा पेट्रोल है जिसमें 100 फीसदी इथेनॉल होता है। इसमें पारंपरिक पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं होती। इथेनॉल एक रिन्यूएबल ईंधन है, जिसे गन्ने, मक्के, खराब हो चुके अनाज और खेती के कचरे से तैयार किया जाता है। अभी हम जो गाड़ियां चला रहे हैं उनमें 20 पर्सेंट इथेनॉल और 80 पर्सेंट पेट्रोल (E20) का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन E100 इस सफर का अगला कदम है। इसे पूरी तरह से शुद्ध इथेनॉल पर चलने के लिए ही डिजाइन किया गया है।

सरकार क्यों दे रही है इतना जोर
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 पर्सेंट कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इससे देश का लाखों-करोड़ों रुपया बाहर चला जाता है। E100 के आने से विदेशों पर हमारी निर्भरता बहुत कम हो जाएगी। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की वजह से अब तक कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो चुकी है। जबकि देश के किसानों को 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई है। नितिन गडकरी सालों से कह रहे हैं कि इथेनॉल से न सिर्फ ईंधन सस्ता होगा बल्कि हमारे देश के किसानों की जेब भी भरेगी।

क्या पेट्रोल की जगह ले पाएगा E100
जवाब है हां, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा। आप आज की तारीख में अपनी पुरानी पेट्रोल कार या बाइक में सीधे E100 ईंधन नहीं डाल सकते। ऐसा इसलिए क्योंकि इथेनॉल का स्वभाव पेट्रोल से अलग होता है। यह इंजन के कुछ हिस्सों जैसे फ्यूल पाइप, इंजेक्टर्स और फ्यूल पंप को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए सड़कों पर चल रही मौजूदा गाड़ियों के लिए पेट्रोल बिकता रहेगा। जबकि भविष्य में आने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए E100 का इस्तेमाल होगा।

कौन सी गाड़ियां चलेंगी इस पर
इसके लिए कंपनियों को खास इंजन तैयार करने पड़ रहे हैं। मारुति सुजुकी ने अपनी सबसे पॉपुलर कार वैगनआर का फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। यह पूरी तरह E100 पर चल सकती है। इसके अलावा टोयोटा, एमजी और हुंडई भी अपनी गाड़ियों पर काम कर रही हैं। दोपहिया वाहनों की बात करें तो हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी मशहूर बाइक स्प्लेंडर और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश कर दिए हैं।

फायदे

  • विदेशों पर निर्भरता खत्म: भारत में ही ईंधन बनने से कच्चे तेल का भारी-भरकम बिल घटेगा।
  • किसानों को बड़ा मुनाफा: गन्ने और मक्के की डिमांड बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
  • कम प्रदूषण: पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल बहुत साफ जलता है, जिससे हवा शुद्ध रहेगी।

नुकसान

  1. कम माइलेज: इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले कम एनर्जी होती है, जिससे गाड़ी का माइलेज थोड़ा घट सकता है।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च: देशभर के पेट्रोल पंपों पर E100 के लिए अलग से स्टोरेज और मशीनें लगाने में वक्त लगेगा।
  3. पुरानी गाड़ियों में सपोर्ट नहीं: ग्राहकों को इस ईंधन का फायदा उठाने के लिए नई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां खरीदनी होंगी।

ईरान-अमेरिकी शांति समझौते से भारत को क्या होगा फायदा, जानिए

नई दिल्ली। US Iran Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब साढ़े तीन महीने तक दुनिया को युद्ध की विभीषिका झेलने को मजबूर करने के बाद रविवार को अपने 80वें जन्मदिन पर ईरान के साथ शांति समझौते का ऐलान किया। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच इस पीस डील से सबसे ज्यादा राहत की सांस लेने वाले देशों में भारत भी शामिल है।

अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया संकट दूर करने को लेकर जो करार किया है, उससे भारत को कम से कम सात तरह के फायदे होंगे। इनमें से कुछ का असर तो तत्काल दिखने की संभावना है और कुछ का असर लंबे समय तक रहने वाला है।

तेल और गैस संकट से छुटकारा

  • ईरान-अमेरिका के बीच पीस डील को मूर्त रूप दिए जाने से पहले इसकी घोषणा मात्र से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें घटनी शुरू हो गई हैं।
  • कच्चे तेलों की कीमतों में चार प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है और यह सोमवार (15 जून, 2026) सुबह को 84 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ चुका है।
  • भारत को इसका तात्कालिक फायदा मिलेगा और तेल का आयात का बिल घटना शुरू होगा, जिससे महंगाई में भी गिरावट देखने को मिलेगी।
  • भारत का ईरान से भी तेल और प्राकृतिक गैस का आयात फिर से शुरू हो जाएगा।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी ने इसकी सप्लाई बुरी तरह से बाधित की है।

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा

  • पश्चिम एशिया या खाड़ी देशों में 9 से 10 लाख भारतीय रहते हैं।
  • जिस तरह से अमेरिका-इजरायल और उनके सहयोगियों और ईरान और उसके सहयोगियों के बीच साढ़े तीन महीनों से लड़ाई चल रही थी, मिसाइलें दागी जा रही थीं, इससे यहां रहने वाले भारतीयों के जान-माल पर भी खतरा मंडरा रहा था।
  • दुर्भाग्य से कुछ भारतीय इसकी चपेट में आ भी चुके हैं।
  • शांति और स्थिरता कायम होने से यहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

लागत घटेगी और सप्लाई चेन मजबूत होगी

  • पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारत को मजबूरन कच्चा तेल और एलएनजी-एलपीजी की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक उपाय ढूंढ़ने पड़ गए थे।
  • भारत बड़ी मात्रा में रूस और वेनेजुएला से तेल मंगवाने लगा है।
  • हालांकि ये तेल सस्ते तो हैं, लेकिन खाड़ी देशों के मुकाबले इनकी ढुलाई की लागत बहुत ज्यादा हो रही है।
  • इसकी वजह से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक की लागत भी बढ़नी शुरू हो गई थी।
  • साढ़े तीन महीने में पूरी सप्लाई चेन बिगड़ चुकी है, जो धीरे-धीरे फिर से पटरी पर आने की संभावना है।

समुद्री व्यापार में जोखिम से राहत

  • होर्मुज जलडमरुमध्य में एक तरफ अमेरिकी नाकेबंदी और दूसरी तरफ ईरान की सख्ती ने बीते महीनों में यहां से गुजरना बहुत ही जोखिम भरा बना दिया था।
  • भारतीय क्रू वाले कई जहाज निशाना बन चुके हैं, जिसमें कई भारतीयों की जान तक चली गई है।
  • ओमान की खाड़ी में हाल ही में पलाऊ के झंडे वाले एक टैंकर पर अमेरिका ने हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई।
  • इस शांति समझौते से मर्चेंट नेवी में काम करने वाले भारतीयों की जान पर मंडरा रहा खतरा टलने की उम्मीद बढ़ी है।

खाड़ी देशों तक भारतीय चीजों का निर्यात

  • साढ़े तीन महीने से एक ओर भारत तेल और गैस संकट से जूझ रहा है, वहीं खाड़ी देशों में सामान भेजने वाले भारतीय निर्यातक भी परेशान हो चुके हैं।
  • खाड़ी के कई देश खाने-पीने की चीजें, हरी-सब्जियां और अन्य जरूरत के सामानों के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर हैं, लेकिन उनकी भी सप्लाई चेन टूट चुकी है।
  • ओमान के रास्ते भारतीय सामान भेजने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन यह काम बहुत ही चुनौतीपूर्ण और खर्चीला साबित हो रहा है।
  • खुद ईरान भी भारतीय कृषि उत्पादों, दवा, कपड़े और भारी मशीनों का बहुत बड़ा आयातक है।
  • इस शांति समझौते से भारत के निर्यातकों और खाड़ी देशों के आयातकों को भी बड़ा फायदा होने जा रहा है।

भारत का बहुत बड़ा आर्थिक और रणनीतिक निवेश

  • ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत का बहुत बड़ा आर्थिक और रणनीतिक निवेश है।
  • इसपर पहले से ही अमेरिकी पाबंदियों की वजह से मुश्किलों से काम चलता रहा है।
  • ईरान-अमेरिका के बीच लड़ाई से अन्य पाबंदियों का भी संकट मंडरा रहा था, जो अब टलने की उम्मीद है और तेजी से काम आगे बढ़ने की संभावना है।
  • इसी तरह से इंटरनेशनल नॉर्थ-साऊथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर युद्ध के चलते संकट मंडराने लगा था।
  • लेकिन, अब इसपर भी तेजी से काम आगे बढ़ने की संभावना है।
  • यह भारत से अफगानिस्तान, रूस और मध्य एशिया तक सीधा व्यापार का रास्ता सुलभ कराएगा।

जियोपॉलिटिक्स में बड़ी राहत

  • इस युद्ध ने भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव पैदा किए हैं।
  • हाल में जिस तरह से अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं,उससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा हुआ है।
  • इसके अलावा भारत को सभी खाड़ी देशों से अपने कूटनीतिक संबंधों को भी सामान्य बनाए रखने के लिए बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है और कई बार मुश्किल परीक्षा की घड़ी का भी मुकाबला किया है।
  • एक बार शांति समझौते पर मुहर लग जाने के बाद इस अप्रत्याशित संकट से भारत को छुटकारा मिल सकता है, जो बेवजह ही हमारे सामने खड़ा हो गया था।