बिकवाली के दबाव में जीरे के भाव में नरमी, सितम्बर-अक्टूबर में तेजी का अनुमान

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नई दिल्ली। Jeera Price: किसानों ने जीरे की बिकवाली बढ़ा दी है। जिस कारण से मंडियों में जीरे की दैनिक आवक बढ़नी शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि विगत कुछ दिनों से ऊंझा मंडी में जीरे की दैनिक आवक 7/8 हजार बोरी की चल रही थी जोकि वर्तमान में बढ़कर 14/15 हजार बोरी की हो गई है।

यही स्थिति राजकोट मंडी की भी रही। राजकोट मंडी में पहले आवक 700/800 बोरी की हो रही थी वर्तमान में बढ़कर 1800/2000 बोरी की होने लगी है। अन्य मंडियों में भी पूर्व की तुलना में जीरे की आवक में वृद्धि हुई है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में निर्यात मांग का अभाव होने के अलावा लोकल व्यापार भी सीमित रह गया है जिस कारण से वायदा एवं हाजिर बाजारों में जीरे के भाव मंदे के साथ बोले जा रहे हैं। चालू सप्ताह के दौरान जीरे के भाव 3/5 रुपए प्रति किलो तक घट गए हैं।

अभी हाल फिलहाल बाजार में अधिक तेजी के आसार नहीं है। क्योंकि इस वर्ष विदेशों में अधिक पैदावार के चलते भारतीय जीरे का निर्यात प्रभावित हो रहा है। मगर सूत्रों का मानना है कि सितम्बर माह में भावों में सुधार होने की संभावना है।

क्योंकि तब तक विदेशों की अधिकांश फसल खपत में जा चुकी होगी। जिस कारण से सितम्बर माह में भारतीय जीरे का निर्यात सुधर सकता है। इसके अलावा आगामी सीजन के लिए उत्पादक केन्द्रों पर जीरा बिजाई घटने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे है। क्योंकि इस वर्ष किसानों को जीरे की तुलना में धनिया में अधिक मुनाफा हुआ है।

हालांकि चालू सीजन के दौरान भी देश में जीरा का उत्पादन कम रहा लेकिन बकाया स्टॉक अधिक रहने एवं विदेशों में अधिक पैदावार के कारण भावों में तेजी नहीं बन पाई।

उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान गुजरात में जीरा उत्पादन 32/34 लाख बोरी का रहा जबकि गत वर्ष उत्पादन 44/45 लाख बोरी का रहा था। हालांकि राजस्थान में उत्पादन बढ़ने के अनुमान लगाए गए हैं। राजस्थान में इस वर्ष उत्पादन 54/55 लाख बोरी का माना जा रहा है। जबकि गत वर्ष उत्पादन 50/52 लाख बोरी का माना गया था।

जानकारों का कहना है कि हाल-फिलहाल जीरा कीमतों में अधिक तेजी के आसार नहीं है। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर एवरेज क्वालिटी जीरे के भाव 180/210 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। इन भावों में 315 रुपए प्रति किलो का तेजी-मंदी चलती रहेगा। लेकिन सितम्बर-अक्टूबर माह में भावों में तेजी के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

क्योंकि एक ओर जहां अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीन, टर्की आदि देशों की सप्लाई प्रभावित हो जाएगी वहीं दूसरी तरफ भारतीय जीरे की बिजाई भी घटने के समाचार मिलने शुरू हो जाएगे। उल्लेखनीय है कि जीरे की बिजाई अक्टूबर माह में शुरू होती है और नई फसल की आवक जनवरी-फरवरी में आती है।

निर्यात घटा: वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान जीरा निर्यात 14 प्रतिशत घटने के पश्चात वर्ष 2026-27 के प्रथम दो माह में भी जीरा निर्यात 21 प्रतिशत घटा है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल मई- 2026 के दौरान जीरा का निर्यात 35656 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 831 करोड़ की रही। गत वर्ष अप्रैल-मई – 2025 के दौरान जीरा का निर्यात 45143 टन का किया गया था और निर्यात से प्राप्त आय 1086.31 करोड़ की रही। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 के दौरान जीरे का निर्यात 196800 टन का हुआ और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान जीरे का कुल निर्यात 229881 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 की रही।