नई दिल्ली। UPI Payment Charge: देश में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को राहत देने के लिए एक बड़ी योजना पर काम चल रहा है। खबर है कि सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऐसा रास्ता तलाश रहे हैं जिससे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों की जेब पर न पड़े।
इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 2017 के उस नियम को मॉडल बनाया जा सकता है, जो डेबिट कार्ड से पेमेंट पर दुकानदारों को ग्राहकों से अलग से चार्ज वसूलने से रोकता है।
दिसंबर 2017 में RBI ने डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले लेनदेन पर MDR को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें बैंकों को साफ निर्देश दिए गए थे कि वे अपने साथ जुड़ने वाले मर्चेंट्स (दुकानदारों) पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि वे इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
पिछले छह सालों से UPI के जरिए होने वाला लेन-देन पूरी तरह से मुफ्त रहा है, इसलिए इसमें ग्राहकों को MDR फीस से बचाने के लिए किसी अलग नियम की जरूरत महसूस नहीं हुई थी। लेकिन अब जब बड़े मर्चेंट्स पर शुल्क लगाने की चर्चाएं चल रही हैं, तो इस बात का डर है कि व्यापारी इसे ग्राहकों से वसूलना न शुरू कर दें।
यही वजह है कि NPCI अब अपने UPI सर्कुलर में इसी तरह का क्लॉज जोड़ने पर विचार कर रहा है। हालांकि, इसे लागू कराने की असली जिम्मेदारी RBI की ही होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि अभी UPI के लिए ऐसा कोई सख्त ढांचा नहीं है जो मर्चेंट्स को फीस आगे पास करने से रोके, लेकिन डेबिट कार्ड का उदाहरण हमारे सामने है। वहीं, कई बार दुकानदार सामान पर MDR लगाने के बजाय अलग से ‘कन्वीनियंस फीस’ (सुविधा शुल्क) जोड़ देते हैं, जिससे ग्राहकों के बीच भ्रम पैदा होता है।
इस मुद्दे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) पहले ही स्थिति साफ कर चुके हैं। उनका कहना है कि अगर UPI पर MDR लागू होता भी है, तो वह सिर्फ मर्चेंट्स के लिए होगा, आम ग्राहकों के लिए नहीं। इसके अलावा छोटे दुकानदारों को इस दायरे से बाहर रखकर उनके लिए UPI सेवाएं मुफ्त ही रखी जाएंगी।
नियम लागू करना कितनी बड़ी चुनौती
कागजों पर नियम बनाना तो आसान है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। फिनटेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि बैंकों के लिए इसे लागू कराना एक बड़ी चुनौती होगी। अगर कोई दुकानदार ग्राहक से जबरन शुल्क वसूलता है, तो बैंक तभी कार्रवाई करेंगे जब ग्राहक शिकायत दर्ज कराएगा।
हालांकि बैंकों के पास ऐसे दुकानदारों को हटाने या फीस वापस कराने का अधिकार होता है, लेकिन व्यावसायिक हितों के चलते बैंक अपने मर्चेंट्स पर बहुत सख्त कार्रवाई करने से हिचकते हैं। ऐसे में देखना होगा कि नया नियम आने के बाद RBI इसे किस तरह से लागू करवाता है।

