चेक बाउंस होने के बाद कितने दिन में केस करना जरूरी, जानिए नया नियम

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नई दिल्ली। Cheque bounce new rules: चेक बाउंस होने के बाद कितने दिन में केस करना जरूरी है? चेक बाउंस में आम तौर पर 30 दिन के अंदर एक्शन लेना होता है। लेकिन ऐसे मामलों में क्या एक साल बाद भी कोर्ट में शिकायत की जा सकती है? ये सवाल उन लोगों के लिए बेहद खास हैं जिन्हें उधार, कारोबार, प्रॉपर्टी या किसी अन्य कानूनी रूप से वसूली योग्य देनदारी के बदले मिला चेक बैंक से लौट आया है।

दरअसल, चेक बाउंस की पूरी प्रक्रिया Negotiable Instruments Act परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 से निर्धारित होता है। इसकी धारा Section 138 के तहत ऐसी स्थिति में चेक देने वालों को 30 दिनों के अंदर नोटिस भेजना होता है। नोटिस मिलने के बाद चेक जारी करने वाले व्यक्ति को रकम चुकाने के लिए 15 दिन मिलते हैं। इन 15 दिनों में भुगतान नहीं होने के बाद ही Section 138 के तहत आपराधिक शिकायत या केस दर्ज की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले सुमित बंसल बनाम एमजीआई डेवलपर्स मामला के अनुसार, यदि एक ही लेन-देन में दिए गए कई चेक बाउंस होते हैं, तो हर बाउंस हुए चेक पर एक नया और अलग मुकदमा चलाया जाएगा। इसे अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं माना जाएगा।

क्या 1 साल बाद भी केस किया जा सकता है
अगर चेक की तारीख से एक साल बीत चुका है और उस दौरान चेक को उसकी वैधता में पेश नहीं किया गया, तो उस पुराने चेक के आधार पर Section 138 की आपराधिक शिकायत शुरू करना सामान्यतः संभव नहीं होगा। इसका कारण यह है कि Section 138 में चेक को निर्धारित अवधि के भीतर बैंक में पेश करने की शर्त है। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। चेचेक बाउंस की आपराधिक कार्रवाई की सीमा और मूल ऋण की वसूली सीमा एक ही चीज नहीं हैं। इसलिए केवल यह मान लेना सही नहीं होगा कि धारा 138 में समय निकल जाने से मूल देनदारी भी हर स्थिति में खत्म हो जाती है।

30 दिन का समय है महत्वपूर्ण
चेक बाउंस होने के बाद बैंक से सूचना मिलने की तारीख महत्वपूर्ण हो जाती है। चेक देने वाले 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजना होता है। इसके बाद 15 दिन का समय मिलता है। अगर वह इस अवधि में पूरी चेक राशि का भुगतान कर देता है, तो Section 138 के तहत उस पर शिकायत का आधार नहीं बनता। अगर 15 दिन की में भी पैसा नहीं दिया जाता, तो अगले चरण में शिकायत दाखिल करने की लिमिटेशन शुरू होती है। Section 142 के तहत शिकायत का आधार पैदा होने की तारीख से एक महीने के भीतर दाखिल की जानी चाहिए।

2026 में चेक की वैधता कितनी है?
बैंकों के लिए RBI ने 1 अप्रैल 2012 से चेक, ड्राफ्ट, पे आर्डर और बैंकर्स चेक की पेमेंट के लिए तीन महीने की अवधि लागू की थी। व्यावहारिक तौर पर 2026 में चेक बाउंस मामले में सबसे अहम बात है कि चेक को तीन महीने की समयावधि के भीतर बैंक में प्रस्तुत किया जाए।