कोटा। जैन धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक पर्व दसलक्षण महापर्व का बुधवार को तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विधिवत शुभारंभ हुआ। दस दिवसीय पर्व के प्रथम दिन श्रीजी का जिनाभिषेक, मंडल स्थापना एवं ध्वजारोहण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ लिया।
सांगानेर से पधारे विद्वान आदि कुमार भैया के निर्देशन में सभी मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। चार मांगलिक कलशों, अष्ट प्रतिहार्य सहित मंडल पर मुख्य कलश की स्थापना विभिन्न सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा की गई। अखंड दीपक की स्थापना अशोक जी पाटनी परिवार ने की।
धर्मसभा में आदि कुमार भैया ने कहा कि “क्षमा वीरस्य भूषणम्” अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। हर कोई क्षमा नहीं कर सकता, इसके लिए साहस और आत्मबल आवश्यक है। उन्होंने ध्वजारोहण का महत्व बताते हुए कहा कि महाभारत के युद्ध में भी श्रीकृष्ण ने धर्म ध्वजा फहराई थी और अंत में धर्म की विजय हुई।
विज्ञान नगर दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व का शुभारंभ

दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण महापर्व का शुभारंभ बुधवार को विज्ञान नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धार्मिक श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ हुआ। पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर सभी प्रतिमाओं का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा का सौभाग्य अनिल काला परिवार तथा भगवान पारसनाथ की प्रतिमा पर शांतिधारा का सौभाग्य प्रेमचंद बाहुबली परिवार को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए सीताराम जैन ने कहा कि दसलक्षण महापर्व आध्यात्मिक पर्व है। यह पवित्र संयम, त्याग और साधना का पर्व है, जो आत्मा को शांति प्रदान करने के साथ उसे परमात्मा बनाने की दिशा में प्रेरित करता है। भौतिकता की अंधी दौड़ में दौड़ रहे लोगों को यह पर्व सत्य के दर्शन कराता है। भोग-विलास में जीवन बिताकर मानसिक रूप से थके लोगों को आत्मचिंतन एवं शांति का मार्ग दिखाता है।
क्षमा को अपनाने से मिलती है सुख-शांति: रेशु दीदी

बालिता रोड स्थित मारवाड़ी श्री पदमप्रभु अग्रवाल दिगम्बर जैन मंदिर में बुधवार को पर्युषण पर्व के तहत दस लक्षण धर्म पर्व का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विधि-विधान से कलश स्थापना और जैन ध्वजारोहण किया गया। मंदिर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चला और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ सहभागिता की।
सायंकालीनप्रवचन सभा में बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी ने उत्तम क्षमा धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि क्षमा का भाव जीवन में सुख, शांति और संतोष लाता है। उन्होंने कहा कि क्रोध, अहंकार और द्वेष मनुष्य की मानसिक शांति को प्रभावित करते हैं। ऐसे में दूसरों की भूलों को क्षमा करने के साथ अपने भीतर के वैरभाव और क्रोध को भी समाप्त करना जरूरी है।
मंदिर समिति अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि दस लक्षण पर्व के दौरान मंदिर में प्रतिदिन नित्य शांति धारा, पूजन और आरती के आयोजन होंगे। रेशु दीदी के सानिध्य में संगीतमय पूजा भी कराई जा रही है।

