नई दिल्ली। चीन ने तीन और भारतीय चावल निर्यातकों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। चीन का कहना है कि भारत से भेजे गए चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म यानी जीएमओ मिला है।
इस नई कार्रवाई के बाद अब तक कुल 10 भारतीय चावल निर्यातकों पर प्रतिबंध लग चुका है। जिन तीन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें आंध्र प्रदेश के काकीनाडा की सरला फूड्स और पट्टाभि एग्रो फूड्स के साथ नई दिल्ली की ओम इंडिया ट्रेडिंग लिमिटेड शामिल हैं।
हालांकि, भारतीय चावल कारोबारियों का आरोप है कि चीन जानबूझकर भारतीय चावल के कारोबार में रुकावट पैदा कर रहा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ सामान्य क्वालिटी जांच का मामला नहीं लगता।
चीन बिना आयात शुल्क बढ़ाए दूसरे नियमों और पाबंदियों के जरिए भारतीय चावल के व्यापार को रोकने की कोशिश कर रहा है। ऐसी पाबंदियों को नॉन-टैरिफ बैरियर कहा जाता है। भारतीय निर्यातकों ने इसे एक तरह का व्यापार युद्ध भी बताया है। हालांकि, इन आरोपों पर चीन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
द राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष और पट्टाभि एग्रो फूड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बीवी कृष्णा राव के मुताबिक, चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) ने भारतीय चावल की कुछ खेपों को तय मानकों के मुताबिक नहीं बताया।
चीनी खरीदार ने बताया कि चीन के अधिकारियों को चावल की खेप में जीएमओ मिला है। ये सभी खेप टूटे हुए चावल की थीं। जबकि भारत में मौजूद चीनी अधिकारियों ने खुद माल भेजने से पहले इसकी जांच की थी और इसे पास किया था। भारत सरकार भी चीन को साफ बता चुकी है कि देश में कोई भी जीएम फसल नहीं उगाई जाती है।
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (छत्तीसगढ़) के अध्यक्ष मुकेश जैन के अनुसार, चीन का खेप लौटाना शक पैदा करता है। चीन से लौटाई गई चावल की खेपों को भारत वापस लाया गया। इसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इनकी जांच की। जांच में चावल में जीएमओ नहीं मिला। बाद में इन्हीं चावल की खेपों को दूसरे देशों में एक्सपोर्ट किया गया और वहां क्वालिटी जांच में कोई समस्या सामने नहीं आई।
चीन ने 70 से ज्यादा भारतीय चावल खेप लौटाई
चीन की कार्रवाई का असर भारतीय चावल के कारोबार पर तेजी से पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई के अंत तक चीन ने भारत से भेजे गए कम से कम 70 नॉन-बासमती चावल कंसाइनमेंट को जीएमओ का हवाला देकर लौटाया है। इससे पहले चीन ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सात एक्सपोर्टर्स पर भी रोक लगाई थी। अब तीन और कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद प्रभावित एक्सपोर्टर्स की संख्या 10 हो गई है।
पाकिस्तान को फायदा
इस फैसले से भारतीय व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है और व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। राव के मुताबिक, एक कंटेनर को चीन भेजने का खर्च मात्र 250 डॉलर आता है, लेकिन चीनी बंदरगाहों से लौटाई गई खेप को वापस मंगाने पर 2,500 से लेकर 4,500 डॉलर तक का भारी खर्च बैठता है। निर्यातकों का कहना है कि ऐसा लगता है चीन जानबूझकर पाकिस्तान को फायदा पहुंचाना चाहता है, क्योंकि चीन अब दूसरे देशों, खासकर पाकिस्तान से ज्यादा कीमत पर चावल खरीद रहा है।
चीन की मंशा पर सवाल
अमेरिका के कृषि विभाग के पूर्व अधिकारी फ्रेड गेल्स के अनुसार, चीन का यह कदम हैरानी भरा है। चीन उन देशों का माल भी यह कहकर लौटा रहा है जो जीएम फसलें उगाते ही नहीं हैं (जैसे- रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और जापान)। उनके अनुसार, 2026 की पहली छमाही में चीन ने ऐसे 146 खेप लौटाए हैं। इस विवाद का असली कारण चीन का अपना पुराना चावल हो सकता है। चीन अपने गोदामों में रखा पुराना चावल बेचना चाहता है और भारत का सस्ता टूटा चावल उसे सीधी टक्कर दे रहा था। गौरतलब है कि चीन ने वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान से आने वाले टूटे चावल को नहीं लौटाया है।
चीन को चावल निर्यात तेजी से बढ़ा
एपिडा के आंकड़ों के अनुसार, भारत का निर्यात इस साल काफी बढ़ा था। 2025 में भारत ने 2.07 लाख टन गैर-बासमती चावल निर्यात किया था, जबकि इस साल जनवरी से जून के बीच यह दोगुने से ज्यादा होकर 4.92 लाख टन हो गया। इस साल मई के अंत तक ही चीन ने भारत के कम से कम 70 खेप लौटा दिए थे और इससे पहले साल की शुरुआत में 7 अन्य कंपनियों पर भी रोक लगा दी थी। यानी छह महीने में ही पिछले पूरे साल के मुकाबले निर्यात काफी ज्यादा रहा। अब निर्यातकों के सामने चीन की नई जांच और रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने से कारोबार प्रभावित होने की चिंता है।

