सरसों एवं रिफाइंड तेलों के खुदरा भाव में बड़ी गिरावट के संकेत

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नई दिल्ली। सरसों तेल, सनफ्लावर ऑयल, रिफाइंड ऑयल की कीमतों में तेजी का मुद्दा पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में रहा है। हालांकि, अब खुदरा ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। पहले सरकार और अब इंडस्ट्री ने इस बात की तस्दीक की है कि सरसों तेल (Mustard Oil Price), रिफाइंड ऑयल, सनफ्लावर ऑयल के भाव में नरमी आई है। इंडस्ट्री के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में खुदरा भाव में भी नरमी का रुख देखने को मिलने लगेगा। इससे मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के प्रेसिडेंट अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि भारत Edible Oils की अपनी कुल जरूरत का करीब 65-70 फीसद दूसरे देशों से आयात करता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में की नरमी आई है। इससे घरेलू स्तर पर भी थोक बाजार में तेलों के दाम घटे हैं। चतुर्वेदी के मुताबिक सरसों तेल व अन्य खाद्य तेलों में औसतन 15 फीसद की कमी आई है। उन्होंने कहा कि अगले 8-10 दिन में खुदरा भाव में भी कमी आ जाएगी।

वहीं, मोदी नेचुरल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षय मोदी ने कहा कि पिछले खाद्य तेलों की कीमतों में औसतन 12-15 फीसद की नरमी देखने को मिली है। अगले कुछ दिनों में इसका प्रभाव खुदरा भाव पर भी देखने को मिलेगा। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्युसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुधाकर देसाई ने भी करीब इसी तरह की राय जाहिर की।

गिरावट की वजह: अक्षय मोदी ने बताया कि वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट का असर खाद्य तेलों के मूल्यों पर भी देखने को मिला। इसके अलावा फसलों में रिकवरी से भी दाम घटे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रूस में भी बड़े पैमाने पर मजबूत फसल के आसार है। इसके अलावा मलेशिया और इंडोनेशिया में पाम ऑयल के दाम घटे हैं।उन्होंने कहा कि खाद्य तेलों के दामों में एक तरह से स्थिरता आ गई है, जो आने वाले समय में जारी रहने की उम्मीद है।

पिछले सप्ताह ही सरकार ने पाम ऑयल सहित खाद्य तेलों के आयात पर लगने वाले शुल्क में 112 डॉलर प्रति टन तक की कमी की थी। विशेषज्ञों ने कहा था कि इससे घरेलू स्तर पर खाद्य तेलों के दाम में कमी आएगी।