नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में सूखे की साया और मौसम की अनिश्चितता के बीच रबी सीजन की धीमी शुरुआत हुई है। अक्टूबर महीने में रबी फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब आधी हुई है।
सबसे ज्यादा गिरावट दलहन और तिलहन फसलों में देखने को मिली है। रबी सीजन की प्रमुख दलहन फसल चना का रकबा करीब 60 फीसदी और प्रमुख तिलहन फसल सरसों की बुवाई में 47 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए रबी फसलों की बुवाई के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, देश भर में रबी फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 46 प्रतिशत तक गिर गई है। देश में 30 अक्टूबर तक 37.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही रबी फसलों की बुवाई हो सकी है, जबकि ठीक एक साल पहले इसी समय तक 69.02 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी थी। यानी रबी फसलों की शुरुआती बुवाई में 31.47 लाख हेक्टेयर कम है।
कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार बुवाई में देरी का मुख्य कारण शुरुआत में खेतों में पर्याप्त नमी का ना होना और दिन के समय उच्च तापमान का होना है, जो बुवाई के लिए ठीक नहीं था। हालांकि अब मौसम ठंडा होने लगा है, जिससे बुवाई में तेजी आने की पूरी उम्मीद है। नवंबर महीने में रबी फसलों की बुवाई में तेजी से सुधार होने की उम्मीद की जा रही है।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक रबी सीजन की दलहन का कुल रकबा पिछले साल के 19.56 लाख हेक्टेयर से 52 प्रतिशत गिरकर 9.45 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। सीजन की प्रमुख दलहन फसल चना के रकबे में 59 फीसदी की कमी आई है, जो 14.35 लाख हेक्टेयर से घटकर महज 5.90 लाख हेक्टेयर रह गया है।
मसूर की बुवाई भी 2.14 लाख हेक्टेयर के मुकाबले आधी (1.10 लाख हेक्टेयर) रह गई है। सीजन की दूसरी दलहन फसल मटर, उर्द, मूंग और कुल्थी के रकबे में भी कमी देखने को मिली है।
देश में 30 अक्टूबर तक तिलहन फसलों की बुवाई भी निराशाजनक हुई है। चालू सीजन में तिलहन फसलों की बुवाई महज 20.97 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 38.62 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलों की बुवाई हो चुकी थी।
सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सरसों की बुवाई 38.07 लाख हेक्टेयर से 47 प्रतिशत घटकर 20.50 लाख हेक्टेयर रह गई है। रबी सीजन में सरसों का अनुमानित रकबा 82.78 लाख हेक्टेयर और कुल तिलहन फसलों का रकबा 90.76 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की बात करें तो अब तक केवल 19,000 हेक्टेयर में ही इसकी बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 3.34 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया जा चुका था। हालांकि, गेहूं की मुख्य बुवाई नवंबर के पहले हफ्ते से शुरू होती है और अलग-अलग राज्यों में अगले दो महीनों तक चलती है। इसके अलावा, सर्दियों में बोए जाने वाले धान का रकबा भी 3.29 लाख हेक्टेयर से मामूली घटकर 3.16 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
सरकार ने इस रबी सीजन के लिए कुल 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसमें सबसे अहम गेहूं का उत्पादन लक्ष्य 121 मिलियन टन रखा गया है। याद रहे कि पिछले साल गेहूं का रकबा 315.23 लाख हेक्टेयर के औसत से बढ़कर रिकॉर्ड 336 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था और देश ने 120.66 मिलियन टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन किया था।
देश के लिए गेहूं का उत्पादन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2021-22 में उत्पादन में 2 मिलियन टन से भी कम की मामूली गिरावट आने के कारण सरकार को 2022 से चार साल के लिए इसके निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी।
अन्य फसलों के लिए भी सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किए हैं। दालों के उत्पादन का लक्ष्य 17.20 मिलियन टन और पोषक/मोटे अनाजों का लक्ष्य 22.30 मिलियन टन रखा गया है। इसमें चने के लिए 12.33 मिलियन टन, सरसों के लिए 14.3 मिलियन टन, मसूर के लिए 2.1 मिलियन टन और जौ के लिए 2.42 मिलियन टन का लक्ष्य तय किया गया है।
वहीं, रबी चावल का लक्ष्य 16.72 मिलियन टन है (जो मक्के के 16.69 मिलियन टन के लक्ष्य से मामूली ज्यादा है), जबकि ज्वार का लक्ष्य 3.19 मिलियन टन निर्धारित किया गया है।

